संक्षिप्त समाचार 12-10-2026

लोकनायक जयप्रकाश नारायण

पाठ्यक्रम: GS1/समाचारों में व्यक्तित्व

संदर्भ

  • प्रधानमंत्री ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उनका स्मरण किया।

परिचय

  • जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर, 1902 को हुआ था तथा उनका निधन 8 अक्टूबर, 1979 को हुआ।
  • वे भारतीय राजनीतिक नेता, समाजवादी विचारक और स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • उन्हें लोकप्रिय रूप से ‘लोकनायक’ कहा जाता था। इसका कारण न केवल सामाजिक एवं आर्थिक समानता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता थी, बल्कि राजनीतिक सत्ता स्वीकार करने से उनका मना भी था।

प्रारंभिक जीवन एवं स्वतंत्रता संग्राम

  • कांग्रेस समाजवादी दल: वर्ष 1934 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अंतर्गत समाजवादी विचारधारा वाले संगठन कांग्रेस समाजवादी दल के प्रमुख संस्थापकों में से एक बने।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बना लिया था। वर्ष 1942 में वे बिहार की हजारीबाग केंद्रीय जेल से भाग निकले। इसके बाद उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रतिरोध संगठित करने में सहायता की।
  • समाजवादी राजनीति: स्वतंत्रता के पश्चात वे समाजवादी राजनीति के प्रमुख स्वर बने, किंतु धीरे-धीरे चुनावी दलीय राजनीति से दूर होकर रचनात्मक सामाजिक कार्यों की ओर अग्रसर हुए।

भारतीय समाज एवं राजनीति में योगदान

  • भूदान एवं सर्वोदय आंदोलन: वर्ष 1950 के दशक से वे विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़े। इस आंदोलन का उद्देश्य भूमिहीन लोगों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए भूस्वामियों को स्वेच्छा से भूमि दान करने हेतु प्रेरित करना था।
  • संपूर्ण क्रांति आंदोलन (1974): 5 जून, 1974 को उन्होंने पटना के गांधी मैदान में आयोजित एक विशाल जनसभा में संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया।
  • उन्होंने जनभागीदारी बढ़ाने, सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करने पर बल दिया।
  • उनके आंदोलन में बिहार सरकार से त्यागपत्र देने की माँग भी की गई।
  • सहभागितापूर्ण लोकतंत्र: उन्होंने सत्ता के विकेंद्रीकरण, ग्राम स्तर की संस्थाओं को सशक्त बनाने तथा निर्णय-निर्माण में नागरिकों की व्यापक भागीदारी का समर्थन किया।
  • नैतिक राजनीति: उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा, राजनीतिक नेताओं की जवाबदेही तथा सत्ता के केंद्रीकरण को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया।
  • अहिंसक सामाजिक परिवर्तन: उन्होंने शांतिपूर्ण जन-आंदोलनों का समर्थन किया और सशस्त्र क्रांति के स्थान पर जनभागीदारी के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का प्रयास किया।

पुरस्कार एवं सम्मान

  • वर्ष 1965 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर दिया जाता है और एशिया में असाधारण सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
  • वर्ष 1998 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

स्रोत: PIB

कुलसी नदी

पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल

संदर्भ

  • असम और मेघालय में कुलसी नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीण प्रस्तावित 55 मेगावाट की जलविद्युत-सह-सिंचाई परियोजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख चिंताएँ विस्थापन, मूलनिवासी समुदायों के अधिकारों और पारिस्थितिक क्षति से संबंधित हैं।

परिचय

  • कुलसी नदी ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी है, जो मेघालय और असम से होकर प्रवाहित होती है।
  • इसका उद्गम मेघालय की पश्चिमी खासी पहाड़ियों में होता है, जहाँ इसके ऊपरी प्रवाह को खिर नदी के नाम से जाना जाता है।
  • मेघालय से होकर प्रवाहित हों के बाद यह असम में प्रवेश करती है और कामरूप जिले से होकर गुजरती है, जहाँ इसे कुलसी नदी कहा जाता है।
  • यह असम में नगरबेरा के निकट ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है।

क्या आप जानते हैं?

  • कुलसी नदी संकटग्रस्त गंगा नदी डॉल्फिन (प्लैटानिस्टा गैंगेटिका) का प्राकृतिक आवास है। वर्ष 2009 में इसे भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था।

स्रोत: TH

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एचपीवी टीके ‘सर्वावैक’ को पूर्व-अर्हता प्रदान 

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य

संदर्भ

  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित चतुर्संयोजी मानव पैपिलोमावायरस (HPV) टीके ‘सर्वावैक’ को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से पूर्व-अर्हता प्राप्त हुई है।

परिचय

  • सर्वावैक भारत में स्वदेशी रूप से विकसित प्रथम लैंगिक-तटस्थ चतुर्संयोजी एचपीवी टीका है। यह एचपीवी के प्रकार 6, 11, 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
  • भारत में इसे 9 से 26 वर्ष की आयु के लड़कों और लड़कियों के लिए उपयोग की अनुमति प्राप्त है।
  • पूर्व-अर्हता मिलने से संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियाँ इस टीके की खरीद कर सकेंगी। साथ ही, एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम संचालित करने वाले देशों को इसकी आपूर्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
  • यह उपलब्धि भारत के साथ-साथ गर्भाशय-ग्रीवा के कैंसर की रोकथाम के वैश्विक प्रयासों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।

गर्भाशय-ग्रीवा का कैंसर

  • परिभाषा: गर्भाशय-ग्रीवा का कैंसर वह कैंसर है, जो गर्भाशय-ग्रीवा की कोशिकाओं में विकसित होता है।
    • गर्भाशय-ग्रीवा, गर्भाशय का निचला और संकरा भाग है, जो गर्भाशय को योनि से जोड़ता है।
  • प्रसार: गर्भाशय-ग्रीवा के कैंसर के लगभग सभी मामले (99%) उच्च जोखिम वाले मानव पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण से संबंधित हैं। यह एक अत्यंत सामान्य विषाणु है, जो मुख्यतः यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है।
    • एचपीवी के अधिकांश संक्रमण स्वतः समाप्त हो जाते हैं और उनमें कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। हालाँकि, संक्रमण लंबे समय तक बने रहने पर महिलाओं में गर्भाशय-ग्रीवा का कैंसर हो सकता है।
  • प्रचलन: महिलाओं में गर्भाशय-ग्रीवा का कैंसर विश्व स्तर पर चौथा सबसे सामान्य कैंसर है।
    • भारत में महिलाओं में यह स्तन कैंसर के बाद दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है।
  •  रोकथाम: प्रभावी प्राथमिक रोकथाम के अंतर्गत एचपीवी टीकाकरण शामिल है।
    • द्वितीयक रोकथाम में नियमित जाँच के माध्यम से कैंसर-पूर्व घावों की पहचान और उनका उपचार शामिल है।
    • इन उपायों से गर्भाशय-ग्रीवा के कैंसर के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।
  • वैश्विक भार: वर्ष 2020 में विश्व स्तर पर गर्भाशय-ग्रीवा के कैंसर के लगभग 6.04 लाख नए मामले सामने आए तथा इसके कारण लगभ  3.42 लाख मौतें हुईं।
  • भारत में टीकाकरण: भारत में राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम 28 फरवरी, 2026 को प्रारंभ किया गया। इसका लक्ष्य लगभग 1.2 करोड़ 14 वर्षीय लड़कियों का टीकाकरण करना है।
    • इस वर्ष अब तक 80 लाख से अधिक निःशुल्क खुराकें दी जा चुकी हैं।
    • भारत में स्वदेशी चतुर्संयोजी टीका सर्वावैक उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, निजी बाजार के माध्यम से गार्डासिल-9 और सर्वारिक्स जैसे अन्य एचपीवी टीके भी उपलब्ध हैं।

स्रोत: TH

महाराजा अग्रसेन

पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास

संदर्भ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराजा अग्रसेन की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

परिचय

  • महाराजा अग्रसेन को प्राचीन भारत के ऐसे राजा के रूप में जाना जाता है, जिनका संबंध वर्तमान हरियाणा में स्थित अग्रोहा से था।
    • उनकी जयंती को महाराजा अग्रसेन जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह हिंदू चंद्र पंचांग के अनुसार मनाई जाती है और सामान्यतः सितंबर या अक्टूबर में पड़ती है।
  • वंश परंपरा: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, वे सूर्यवंश से संबंधित थे और अग्रोहा राज्य से उनका संबंध था।
    • उन्हें परंपरागत रूप से अग्रोहा का संस्थापक माना जाता है। आगे चलकर अग्रोहा अग्रवाल समुदाय से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ।
  • धार्मिक परंपरा: उनका संबंध देवी लक्ष्मी की उपासना से माना जाता है। उन्हें नैतिक व्यापार और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए स्मरण किया जाता है।
  • ऐतिहासिक साक्ष्य: उनके जीवन, शासनकाल और कालक्रम से संबंधित विवरण मुख्यतः सामुदायिक परंपराओं एवं लोककथाओं पर आधारित हैं। उनके वास्तविक ऐतिहासिक काल तथा जीवन-वृत्त के विवरणों की समकालीन ऐतिहासिक साक्ष्यों से निश्चित पुष्टि नहीं होती है।
    • हरियाणा स्थित अग्रोहा धाम महाराजा अग्रसेन और देवी महालक्ष्मी से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है।

स्रोत: AIR

ओरंगुटान

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • बोर्नियो के वनों में लगी वनाग्नि के बाद इंडोनेशियाई अधिकारियों ने आठ ओरंगुटानों को सफलतापूर्वक सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।

ओरंगुटान के बारे में

  • विशेषताएँ: ओरंगुटान वृक्षों पर रहने वाले सबसे बड़े स्तनधारी जीव हैं। ये अपना अधिकांश समय पेड़ों पर बिताते हैं।
    • ये मनुष्यों के निकटतम जीवित संबंधियों में शामिल हैं। इनके और मनुष्यों के जीन में लगभग 96.4% समानता बताई जाती है। ये अत्यधिक बुद्धिमान जीव हैं।
    • ओरंगुटान की तीन प्रजातियाँ हैं—बोर्नियाई, सुमात्राई और तपानुली। इनके रूप-रंग और व्यवहार में कुछ अंतर पाया जाता है।
  • आहार संबंधी आदतें: ओरंगुटान मुख्यतः फल खाते हैं, जैसे आम, लीची और अंजीर।
    • इसके अतिरिक्त, ये कोमल पत्तियाँ, फूल, कीट तथा छोटे स्तनधारियों का भी भोजन करते हैं।
  • आवास एवं वितरण: ये समुद्र तल से लगभग 1,500 मीटर की ऊँचाई तक पाए जा सकते हैं।
    • अधिकांश ओरंगुटान निचले भू-भागों में रहते हैं तथा नदी घाटियों और बाढ़ के मैदानों के वनों को प्राथमिकता देते हैं।
    • ये विशाल कपि प्राकृतिक अवस्था में केवल बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों पर पाए जाते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की स्थिति: ओरंगुटान की तीनों प्रजातियाँ अति संकटग्रस्त श्रेणी में हैं।

स्रोत: THE PRINT

पेनिसिलिन-जी के आयात पर भारत की प्रतिपाटन जाँच

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • घरेलू निर्माता लाइफियस फार्मा द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बाद कि पेनिसिलिन-जी और उसके लवणों का आयात घरेलू उद्योग के विकास में गंभीर बाधा उत्पन्न कर रहा है, भारत ने चीन से इनके आयात के संबंध में प्रतिपाटन जाँच शुरू की है।

पेनिसिलिन-जी के बारे में

  • पेनिसिलिन-जी एक बीटा-लैक्टम प्रतिजैविक है, जिसका उपयोग जीवाणु संक्रमणों के उपचार में किया जाता है।
  • यह औषधियों के निर्माण में एक प्रमुख प्रारंभिक कच्चे पदार्थ तथा सक्रिय औषधीय घटक के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • इसका उपयोग निमोनिया, मस्तिष्कावरण शोथ, डिप्थीरिया तथा दाँतों से संबंधित कुछ संक्रमणों के उपचार में किया जाता है।

प्रतिपाटन शुल्क क्या है?

  • प्रतिपाटन शुल्क आयात पर लगाया जाने वाला एक अतिरिक्त सीमा शुल्क है। इसे तब लगाया जाता है, जब किसी उत्पाद का निर्यात उसके सामान्य मूल्य से कम कीमत पर किया जाता है और इस कारण घरेलू उद्योग को गंभीर क्षति पहुँचती है या ऐसी क्षति की आशंका होती है।
  • इस शुल्क का उद्देश्य अनुचित मूल्य प्रतिस्पर्धा का समाधान करना है, न कि आयात को पूरी तरह रोकना।
  • भारत में व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत, प्रतिपाटन की जाँच करता है और शुल्क लगाने की सिफारिश करता है।
  • इसके बाद वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा यह निर्णय लिया जाता है कि प्रतिपाटन शुल्क लगाया जाए या नहीं।

स्रोत: TH

 

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