पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- वियना और बीजिंग के वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र रूप से विश्व की प्रथम दो कार्यशील नाभिकीय घड़ियों का विकास किया है।
नाभिकीय घड़ी क्या है?
- नाभिकीय घड़ियाँ समय मापने वाले अत्यंत सटीक उपकरण हैं, जो परमाणु के नाभिक के अंदर ऊर्जा अवस्थाओं के बीच होने वाले संक्रमणों की आवृत्ति का उपयोग करके समय मापती हैं।
- ये घड़ियाँ नाभिकीय विखंडन या नाभिकीय संलयन से संचालित नहीं होती हैं। यहाँ ‘नाभिकीय’ शब्द परमाणु के उस भाग को संदर्भित करता है, जिसका उपयोग समय मापने के मानक के रूप में किया जाता है।
- इनमें लेज़र का उपयोग करके प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसे उपपरमाण्विक कणों को परमाणु के नाभिक के अंदर ऊर्जा के विभिन्न स्तरों के बीच स्थानांतरित किया जाता है। इस मामले में थोरियम-229 के नाभिक का उपयोग किया गया है।
- वियना और बीजिंग, दोनों के वैज्ञानिक दलों ने कैल्शियम फ्लोराइड के क्रिस्टलों में समाहित थोरियम-229 का उपयोग किया। यह रेडियोधर्मी तत्व थोरियम का एक विशिष्ट समस्थानिक है।
- अधिकांश परमाणु नाभिकों को उत्तेजित करने के लिए अत्यधिक ऊर्जा वाले विकिरण की आवश्यकता होती है, जबकि थोरियम-229 में अपेक्षाकृत कम ऊर्जा वाला नाभिकीय संक्रमण होता है, जिसे लेज़र प्रकाश की सहायता से सक्रिय किया जा सकता है।
नाभिकीय घड़ी, परमाणु घड़ी से किस प्रकार भिन्न है?
- वर्ष 1949 में प्रथम बार विकसित की गई परमाणु घड़ियाँ अब तक निर्मित समय मापने वाले सबसे सटीक उपकरणों में शामिल हैं।
- सामान्य घड़ियाँ जहाँ यांत्रिक गति या क्वार्ट्ज क्रिस्टलों के कंपन के आधार पर समय मापती हैं, वहीं परमाणु घड़ियाँ परमाणुओं के व्यवहार पर निर्भर करती हैं।
- पारंपरिक परमाणु घड़ियाँ सीज़ियम या स्ट्रॉन्शियम जैसे तत्वों का उपयोग करती हैं। इनमें लेज़र या सूक्ष्मतरंगों की सहायता से परमाणु के बाहरी आवरण में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को दो ऊर्जा स्तरों के बीच स्थानांतरित किया जाता है।
- वास्तव में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक सेकंड की परिभाषा सीज़ियम-133 परमाणु में होने वाले एक विशिष्ट ऊर्जा संक्रमण पर आधारित है।


संभावित अनुप्रयोग
- उपग्रह आधारित नौवहन: वैश्विक स्थान निर्धारण प्रणाली (जीपीएस) जैसी प्रणालियाँ उपग्रहों से प्राप्त संकेतों के यात्रा-समय को मापकर किसी अभिग्राही की स्थिति निर्धारित करती हैं। समय मापन में अत्यंत छोटी त्रुटियाँ भी स्थिति निर्धारण में बड़ी त्रुटियाँ उत्पन्न कर सकती हैं। इसलिए अधिक सटीक घड़ियाँ नौवहन प्रणालियों को बेहतर बना सकती हैं।
- दूरसंचार: सटीक समय मापन से चलभाष नेटवर्क, प्रकाशीय तंतु अवसंरचना और संचार प्रणालियों में आँकड़ों के संचरण का समन्वय किया जा सकता है।
- वित्तीय नेटवर्क: समय का सटीक समन्वय वित्तीय लेन-देन का कालानुक्रमिक क्रम निर्धारित करने और वित्तीय नेटवर्क के विश्वसनीय संचालन में सहायता करता है।
- मूलभूत भौतिकी में अनुसंधान: नाभिकीय घड़ियाँ वैज्ञानिकों को अति-हल्के अदृश्य पदार्थ और सामान्य पदार्थ के बीच पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन करने तथा यह जाँचने में सहायता कर सकती हैं कि प्रकृति के मूलभूत स्थिरांक समय के साथ बदलते हैं या नहीं।
नाभिकीय घड़ियों के विकास में चुनौतियाँ
- सीमित कार्यक्षमता: वर्तमान नाभिकीय घड़ियों की सटीकता अभी तक विद्यमान सर्वाधिक सटीक परमाणु और प्रकाशीय घड़ियों से बेहतर नहीं हुई है।
- लेज़र प्रौद्योगिकी: आवश्यक निर्वात पराबैंगनी प्रकाश उत्पन्न करना और उसकी स्थिरता बनाए रखना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।
- पदार्थ संबंधी आवश्यकताएँ: घड़ियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए उपयुक्त प्रकाशीय गुणों वाले तथा पर्याप्त थोरियम सांद्रता से युक्त क्रिस्टलों का विकास आवश्यक है।
- प्रयोगात्मक जटिलताएँ: शोधकर्ताओं को घड़ियों की स्थिरता, परिणामों की पुनरुत्पादकता तथा व्यावहारिक परिस्थितियों में उनके विश्वसनीय संचालन में सुधार करना होगा।
- तात्कालिक अनुप्रयोगों का अभाव: नौवहन, संचार और अन्य परिचालन प्रणालियों में इनका उपयोग अभी संभावित है; यह व्यापक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।
स्रोत: IT