भारतीय विमानन क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता 

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अवसंरचना

सन्दर्भ

  • हाल ही में इंडिगो से जुड़ी अव्यवस्था ने एयरलाइनों में लगभग द्वैधाधिकार (Near-Duopoly) वाली बाज़ार संरचना के प्रणालीगत जोखिमों को उजागर कर दिया है तथा भारत के तीव्र गति से बढ़ते विमानन क्षेत्र में बाज़ार संकेन्द्रण, प्रतिस्पर्धा और संरचनात्मक सुधारों पर चर्चा को पुनर्जीवित किया है।

भारत का विमानन क्षेत्र

  • भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार है, जहाँ प्रतिवर्ष 40 करोड़ से अधिक यात्री हवाई यात्रा करते हैं।
  • केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, बढ़ती आय, शहरीकरण, पर्यटन तथा क्षेत्रीय संपर्क के कारण वर्ष 2047 तक यात्री यातायात 100 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।
भारत का विमानन क्षेत्र

इस क्षेत्र में निम्नलिखित माध्यमों से अवसंरचना का व्यापक विकास हुआ है:

  • क्षेत्रीय संपर्क के लिए उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक – UDAN) योजना;
  • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के अंतर्गत ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का विकास तथा हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण।
  • एयर इंडिया के निजीकरण तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से हवाई अड्डा परिचालन का विस्तार।
  • हालांकि, उद्योग के एकीकरण के परिणामस्वरूप बाज़ार पर इंडिगो और एयर इंडिया समूह का प्रभुत्व बढ़ गया है, जिससे दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता कल्याण को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।

इंडिगो: एक सफलता की कहानी

  • इंडिगो ने 4 अगस्त 2006 को नई दिल्ली से इम्फाल के बीच एयरबस A320 विमान के साथ अपनी सेवाओं का संचालन प्रारंभ किया।
  • इसने एयर इंडिया, जेट एयरवेज़, किंगफिशर एयरलाइंस, स्पाइसजेट, एयर डेक्कन और गोएयर जैसी कंपनियों के साथ अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाज़ार में प्रवेश किया।

इसकी वृद्धि निम्नलिखित कारणों से प्रेरित रही है:

  • कम लागत वाली विमान सेवा (Low Cost Carrier – LCC) व्यवसाय मॉडल।
  • विमानों का उच्च उपयोग तथा परिचालन दक्षता।
  • आधुनिक और ईंधन-कुशल विमान बेड़ा।
  • समय पर सेवा प्रदान करने का सशक्त रिकॉर्ड तथा लागत पर कड़ा नियंत्रण।
इंडिगो: एक सफलता की कहानी

भारत के विमानन क्षेत्र में चिंताएँ और समस्याएँ

  • बढ़ती बाज़ार हिस्सेदारी: घरेलू यात्री यातायात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा इंडिगो के नियंत्रण में है।
  • एयर इंडिया के निजीकरण और उसके बाद हुए एकीकरण के पश्चात यह क्षेत्र लगभग द्वैधाधिकार (Duopoly) में परिवर्तित हो गया है।
  • सीमित प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं के विकल्प कम हो सकते हैं तथा मूल्य निर्धारण की दक्षता प्रभावित हो सकती है।
  • उच्च परिचालन लागत: एविएशन टरबाइन ईंधन (ATF) पर भारी कर लगाए जाते हैं, जिससे एयरलाइनों की परिचालन लागत बढ़ जाती है।
  • साथ ही, प्रमुख हवाई अड्डों पर अधिक हवाई अड्डा शुल्क लाभप्रदता को प्रभावित करता है।
  • अवसंरचना एवं संपर्क संबंधी चुनौतियाँ: कुछ महानगरीय क्षेत्रों में यात्रियों की बढ़ती संख्या हवाई अड्डों की क्षमता से अधिक हो रही है।
  • क्षेत्रीय मार्गों की व्यावहारिकता (Viability) से जुड़ी समस्याओं का समाधान सरकारी सहायता से भी पूरी तरह नहीं हो पाया है।
  • बाहरी एवं भू-राजनीतिक बाधाएँ: कोविड-19 महामारी ने वैश्विक विमानन उद्योग को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
  • पाकिस्तान के वायुक्षेत्र के बंद होने से अनेक भारतीय अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की उड़ान अवधि बढ़ गई है, ईंधन की खपत अधिक हुई है तथा परिचालन व्यय में वृद्धि हुई है।
  • मानव संसाधन संबंधी चुनौतियाँ: प्रशिक्षित पायलटों और केबिन कर्मियों की कमी एक गंभीर चिंता बनकर उभरी है।
  • दिसंबर 2025 में फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के अनुपालन के कारण व्यापक उड़ान व्यवधानों ने बेहतर कार्यबल योजना की आवश्यकता को रेखांकित किया।
  • पायलटों की थकान तथा नियामकीय अनुपालन अभी भी महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौतियाँ हैं।
  • नियामकीय एवं वित्तीय चुनौतियाँ: कम लाभ मार्जिन और उच्च पूंजीगत आवश्यकताएँ नए खिलाड़ियों के प्रवेश को हतोत्साहित करती हैं।
  • नीतिगत चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष हो तथा सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।

नियामकीय ढाँचे

DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय): 

  • भारत का सर्वोच्च विमानन सुरक्षा नियामक, जो नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत विमान की उड़ान-योग्यता (Airworthiness), पायलट लाइसेंसिंग, दुर्घटना जाँच तथा ICAO के साथ समन्वय के लिए उत्तरदायी है।

भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024: 

  • यह अधिनियम औपनिवेशिक विमान अधिनियम, 1934 का स्थान लेता है तथा भारत के विमानन कानून को शिकागो अभिसमय के मानकों के अनुरूप बनाते हुए विमानन विनिर्माण में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देता है और शासन व्यवस्था का आधुनिकीकरण करता है।

संशोधित FDTL मानदंड (2025):

  • पायलटों का साप्ताहिक विश्राम 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे लगातार किया गया।
  • रात्रिकालीन लैंडिंग की सीमा 6 से घटाकर 2 कर दी गई।
  • लगातार 2 से अधिक रात्रि ड्यूटी की अनुमति नहीं है।
  • सभी एयरलाइनों के लिए प्रत्येक तिमाही थकान जोखिम रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है।

सरकारी पहल

  • उड़ान (UDAN) – क्षेत्रीय संपर्क योजना: बिना सेवा वाले एवं कम सेवा वाले हवाई अड्डों तक हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए।
  • छोटे शहरों के लिए हवाई यात्रा की लागत कम करती है।
  • eGCA 2.0: लाइसेंस, अनुमोदन तथा नियामकीय अनुपालन को सरल बनाने वाला डिजिटल मंच, जो विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाता है।
  • राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति (NCAP), 2016: खुले बाज़ार में प्रवेश को बढ़ावा दिया तथा पूर्व की 5/20 नियम व्यवस्था समाप्त की, जिससे पात्र एयरलाइनों को शीघ्र विदेशी परिचालन शुरू करने की अनुमति मिली।
  • भारतमाला एवं हवाई अड्डा पीपीपी मॉडल: वर्ष 2047 तक 350–400 हवाई अड्डों के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के विकास तथा PPP आधारित परिचालन का विस्तार किया जा रहा है।
  • CORSIA अनुपालन: भारत ICAO की अंतरराष्ट्रीय विमानन के लिए कार्बन ऑफ़सेटिंग एवं कटौती योजना (CORSIA) के अनुरूप कार्य कर रहा है तथा दीर्घकालिक विमानन योजना में सतत विमानन ईंधन (SAF) को शामिल कर रहा है।

आगे की राह: भारत के विमानन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाना

  • स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करें: पारदर्शी एवं पूर्वानुमेय नियामकीय नियमों के माध्यम से वित्तीय रूप से सक्षम एयरलाइनों को बाज़ार में प्रवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • एकाधिकार या द्वैधाधिकार जैसी बाज़ार व्यवस्था के उभरने से बचा जाए।
  • लागत का बोझ कम करें: राज्यों के साथ बेहतर समन्वय द्वारा ATF पर करों का युक्तिसंगतकरण किया जाए।
  • एयरलाइनों की व्यवहार्यता बढ़ाने हेतु हवाई अड्डा उपयोग शुल्क की समीक्षा की जाए।
  • मानव पूंजी का विकास: पायलट प्रशिक्षण अकादमियों तथा विमानन कौशल विकास को प्रोत्साहन दिया जाए।
  • सुरक्षा में सुधार: कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाया जाए तथा FDTL मानकों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
  • अवसंरचना का विस्तार: अधिक मांग वाले शहरों में हवाई अड्डों की क्षमता विस्तार में तेजी लाई जाए।
  • बहु-माध्यम (Multimodal) हवाई अड्डा संपर्क को सुदृढ़ किया जाए।
  • नियामकीय निगरानी को मजबूत करें: सुरक्षा, प्रतिस्पर्धा तथा परिचालन लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए DGCA की निगरानी क्षमता को सुदृढ़ किया जाए।
  • एयरलाइनों और हवाई यातायात संचालन की दक्षता बढ़ाने हेतु डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए।

निष्कर्ष

  • इंडिगो की दो दशक की यात्रा भारत के विमानन उदारीकरण की सफलता तथा प्रभावी कम-लागत परिचालन की क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • किंतु वर्ष 2047 तक 100 करोड़ से अधिक यात्रियों वाले बाज़ार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केवल एक प्रमुख एयरलाइन पर्याप्त नहीं होगी।
  • प्रतिस्पर्धी बाज़ार, कम परिचालन लागत, मजबूत अवसंरचना, योग्य कार्यबल तथा संतुलित नियमन भारत के विमानन क्षेत्र को सुरक्षित, किफायती और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] भारत के विमानन क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धा तथा उपभोक्ता विकल्पों की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इस क्षेत्र के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों की चर्चा करते हुए इसके सुदृढ़ विकास हेतु आवश्यक उपाय सुझाइए।

स्रोत: BS

 

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