शांति (SHANTI): बंगाल की खाड़ी के लिए भारत का उभरता समुद्री सुरक्षा ढाँचा

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध; GS3/सुरक्षा

संदर्भ

  • हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (2028–29) की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही विदेश मंत्रालय ने शांति (SHANTI—मानकों, विश्वास और निष्ठा के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना) को सागर एवं महासागर के बाद भारत की समुद्री दृष्टि के आगामी चरण के रूप में प्रस्तुत किया है।

बंगाल की खाड़ी सामरिक दृष्टि से क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • बंगाल की खाड़ी अपने आर्थिक, भू-राजनीतिक एवं सुरक्षा संबंधी महत्त्व के कारण भारत की समुद्री नीति का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है।
  • इस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाएँ, अवैध मत्स्यन, साइबर खतरे, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान तथा समुद्री प्रदूषण जैसी गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए केवल पारंपरिक सैन्य रणनीतियाँ पर्याप्त नहीं हैं।
  • इन चुनौतियों के समाधान हेतु भारत ने शांति नामक एक मानक-आधारित समुद्री सहयोग ढाँचे का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य सहयोगात्मक समुद्री शासन को सुदृढ़ बनाना है।

भू-रणनीतिक महत्त्व

  • बंगाल की खाड़ी दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला समुद्री सेतु है।
    • यह भारत की एक्ट ईस्ट नीति को आसियान से जोड़ती है।
    • इसके माध्यम से मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुँच प्राप्त होती है, जो विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
  • यह व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीतिक संरचना का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटक है।

आर्थिक महत्त्व

  • यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों का केंद्र है।
  • यह मत्स्य पालन, बंदरगाह विकास, समुद्री अपतटीय संसाधनों तथा समुद्री व्यापार के माध्यम से नीली अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करता है।
  • यह बिम्सटेक के अंतर्गत क्षेत्रीय संपर्क एवं आर्थिक सहयोग की प्रमुख आधारशिला है।

भारत की समुद्री दृष्टि का विकास

  • सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास), 2015 : इसमें समावेशी समुद्री विकास, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत तथा हिंद महासागर तटीय देशों की क्षमता निर्माण पर बल दिया गया।
  • महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) 2025: इस पहल ने भारत की समुद्री दृष्टि का विस्तार करते हुए परस्पर जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को स्वीकार किया।
    • इसके माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र एवं वैश्विक दक्षिण के साथ सहयोग बढ़ाने तथा व्यापक समुद्री साझेदारी विकसित करने पर बल दिया गया।
  • शांति (2026): इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (2028–29) की सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी के साथ प्रस्तुत किया गया।
  • यदि सागर ने भारत की समुद्री दृष्टि को परिभाषित किया तथा महासागर ने उसके भौगोलिक दायरे का विस्तार किया, तो शांति उसके क्रियान्वयन के लिए संचालन संबंधी सिद्धांत निर्धारित करता है।
  • शांति के प्रमुख आधार
    • मानक (Norms): अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान तथा उत्तरदायी समुद्री आचरण।
    • विश्वास (Trust): परस्पर विश्वास का निर्माण एवं सूचनाओं का आदान-प्रदान।
    • निष्ठा (Integrity): पारदर्शी, समावेशी एवं नियम-आधारित शासन व्यवस्था।

शांति की आवश्यकता क्यों है?

  • बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अनेक ऐसी चुनौतियाँ हैं, जो राष्ट्रीय सीमाओं से परे हैं—
    • प्राकृतिक आपदाएँ एवं बार-बार आने वाले चक्रवात।
    • तटीय अपरदन एवं समुद्र-स्तर में वृद्धि।
    • अवैध, अपंजीकृत एवं अनियमित मत्स्यन।
    • समुद्री प्रदूषण।
    • समुद्र के अंदर बिछी संचार केबलों की सुरक्षा।
    • बंदरगाहों से संबंधित साइबर सुरक्षा जोखिम।
    • वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान।

शांति के क्रियान्वयन में बिम्सटेक की भूमिका

  • बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेक) को शांति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सबसे उपयुक्त मंच माना गया है।
  • हाल की प्रगति: समुद्री कानून प्रवर्तन हेतु साझा मानकों पर सहमति।
    • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत में सहयोग को सुदृढ़ करना।
    • समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता बढ़ाने के लिए व्हाइट शिपिंग सूचना साझाकरण का प्रस्ताव।
    • वर्ष 2026 में प्रथम बिम्सटेक संयुक्त समुद्री सुरक्षा अभ्यास आयोजित करने का निर्णय।
  • ये सभी प्रयास सदस्य देशों की संप्रभुता को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय लचीलापन बढ़ाने में सहायक हैं।

भारत के लिए महत्त्व

  • शांति भारत की क्षमता को निम्न प्रकार से सुदृढ़ बनाता है—
    • हिंद महासागर क्षेत्र में विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करना।
    • प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रथम प्रतिक्रिया प्रदाता की भूमिका निभाना।
    • समुद्रों में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थक बनना।
    • सामरिक वर्चस्व के स्थान पर समावेशी क्षेत्रीय शासन को बढ़ावा देना।
  • यह ढाँचा भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के अनुरूप साझा सुरक्षा तथा सतत समुद्री विकास को भी प्रोत्साहित करता है।

चुनौतियाँ

  • बंगाल की खाड़ी में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा, विशेषकर चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति।
  • बिम्सटेक, हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय संगठन, आसियान-नेतृत्व वाली व्यवस्थाओं तथा अन्य क्षेत्रीय मंचों के बीच संस्थागत समन्वय की चुनौती।
  • छोटे तटीय देशों की सीमित वित्तीय एवं तकनीकी क्षमता।
  • राष्ट्रीय संप्रभुता तथा व्यापक क्षेत्रीय सहयोग के बीच संतुलन।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण मानवीय एवं पारिस्थितिकीय जोखिमों में वृद्धि।

आगे की राह 

  • बिम्सटेक के अंतर्गत नियमित समुद्री अभ्यास तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत समन्वय को संस्थागत स्वरूप दिया जाए।
  • सुरक्षित सूचना-साझाकरण व्यवस्था के माध्यम से समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता को सुदृढ़ किया जाए।
  • सतत नीली अर्थव्यवस्था, समुद्री पर्यावरण संरक्षण तथा समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।
  • जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन तथा आपदा-पूर्व तैयारी के माध्यम से तटीय क्षेत्रों की लचीलापन क्षमता बढ़ाई जाए।
  • शांति को समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय तथा हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय संगठन के मानकों के अनुरूप क्रियान्वित किया जाए।

निष्कर्ष 

  • भारत के पास बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा की अवधारणा को प्रतिस्पर्धा आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर सहयोग, लचीलेपन एवं साझा उत्तरदायित्व पर आधारित मॉडल में परिवर्तित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
  • शांति इसी परिवर्तन का एक सशक्त उदाहरण है, जो मानकों, विश्वास एवं निष्ठा को क्षेत्रीय समुद्री शासन के केंद्र में स्थापित करता है।
  • यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन बिम्सटेक तथा अन्य क्षेत्रीय संस्थागत व्यवस्थाओं के माध्यम से किया जाता है, तो यह पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है तथा भारत को उत्तरदायी समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करते हुए स्थिर, सुरक्षित एवं समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: बंगाल की खाड़ी भारत की “मानकों, विश्वास तथा निष्ठा के माध्यम से समग्र उन्नति सुनिश्चित करना (SHANTI)” पहल के क्रियान्वयन के लिए एक उपयुक्त समुद्री उप-क्षेत्र के रूप में उभरी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय समुद्री शासन तथा सहयोगात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ करने में SHANTI के महत्त्व की विवेचना कीजिए। 

स्रोत: TH

 

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