निजी क्षेत्र की भागीदारी और इसरो की मूलभूत क्षमताओं के मध्य संतुलन 

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • हाल ही में, इसरो के कर्मचारी संगठनों ने प्रक्षेपण यान के विनिर्माण और अंतरिक्ष बंदरगाह के संचालन को हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर चिंताएँ व्यक्त की हैं।

भारत में उभरता निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र

  • भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में 8.4 अरब डॉलर की है, जो वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लगभग 2–3% है। वर्ष 2030 तक इसके 40–45 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 के कारण भारत में अंतरिक्ष से संबंधित गतिविधियों में निजी क्षेत्र के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस जैसी कंपनियाँ अंतरिक्ष के एक नए युग की अग्रणी कंपनियों के रूप में उभरी हैं।
  • स्काईरूट एयरोस्पेस भारत का प्रथम स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बना। इसके विक्रम-1 ने निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में पेलोड को सफलतापूर्वक स्थापित करने वाला भारत का प्रथम निजी रूप से विकसित कक्षीय श्रेणी का रॉकेट बनने की उपलब्धि हासिल की।
  • पिक्सेल स्पेस हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रहों का निर्माण कर रही है, जो भारत, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में वाणिज्यिक ग्राहकों तथा सरकारी एजेंसियों को पृथ्वी अवलोकन संबंधी आँकड़े उपलब्ध कराते हैं।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रमुख सुधार

  • IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र, 2020) की स्थापना: यह निजी कंपनियों के लिए एकल-खिड़की नियामक एवं सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करता है तथा अंतरिक्ष गतिविधियों में उनकी भागीदारी को अधिकृत और प्रोत्साहित करता है।
  • न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (2019) के माध्यम से निगमितकरण: इसे इसरो की वाणिज्यिक शाखा के रूप में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण करना, उद्योग के माध्यम से उपग्रहों/प्रक्षेपण यानों का विनिर्माण कराना तथा वाणिज्यिक उपग्रह सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
  • IN-SPACe द्वारा निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाएँ: सीड फंड योजना, मूल्य निर्धारण सहायता नीति, मेंटरशिप सहायता, गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) के लिए डिजाइन लैब, अंतरिक्ष क्षेत्र में कौशल विकास, इसरो की सुविधाओं के उपयोग हेतु सहायता तथा गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसी योजनाएँ लागू की गई हैं।
    • IN-SPACe के अंतर्गत 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल (VC) फंड अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को गति देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।
    • IN-SPACe ने 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड (TAF) भी शुरू किया है।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उदारीकृत FDI नीति: संशोधित नीति के अंतर्गत उपग्रह विनिर्माण और संचालन में 74% तक स्वचालित FDI, प्रक्षेपण यानों एवं अंतरिक्ष बंदरगाहों में 49% तक स्वचालित FDI तथा उपग्रह घटकों तथा उप-प्रणालियों के विनिर्माण में 100% तक स्वचालित FDI की अनुमति है।
  • स्पेसटेक इनोवेशन नेटवर्क(SpIN): SpIN अंतरिक्ष उद्योग में स्टार्ट-अप और लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए अपनी तरह का एक विशिष्ट सार्वजनिक-निजी सहयोग मंच है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए भारत धीरे-धीरे अपनी प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणालियों का वाणिज्यीकरण और निजी क्षेत्र को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कर रहा है।
    • लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) को तीन विकासात्मक उड़ानों के बाद वर्ष 2024 में परिचालन के लिए तैयार किया गया। इसे लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से 6 लोगों द्वारा लगभग 3 दिनों में असेंबल किया जा सकता है, जबकि ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान(PSLV) को लगभग 70 दिन, 60 कर्मचारियों और 100 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है।
    • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड(HAL) ने वर्ष 2025 में 511 करोड़ रुपये का SSLV प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अनुबंध प्राप्त किया है। कंपनी अगस्त 2027 के बाद स्वतंत्र रूप से इनका वाणिज्यीकरण करने से पहले, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए न्यूनतम दो SSLV का उत्पादन करेगी।
    • ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान(PSLV) का वर्ष 2022 में HAL और लार्सन एंड टुब्रो(L&T) के एक कंसोर्टियम के माध्यम से वाणिज्यीकरण किया गया था तथा इसरो ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए एक औरएक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) जारी किया है।
    • इसरो का सबसे बड़ा प्रक्षेपण यान लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM3) भी निजी विनिर्माण के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2024 में सफल बोली आकर्षित करने का प्रथम प्रयास विफल रहने के बाद, वर्ष 2026 में एक नया EoI जारी किया गया है।
    • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र(IN-SPACe) ने तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में प्रस्तावित लघु उपग्रह प्रक्षेपण परिसर(SLC) के संचालन में वाणिज्यिक भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया है। इसके लिए इसरो तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और परिचालन सहयोग प्रदान करेगा।

अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण का महत्व

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य प्रक्षेपण की आवृत्ति बढ़ाना, लागत कम करना, निवेश आकर्षित करना तथा वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की उपस्थिति का विस्तार करना है।
  • निजीकरण अंतरिक्ष उद्योग में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है, जिससे दक्षता और नवाचार दोनों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
  • निजी क्षेत्र कृषि, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन, नौवहन और संचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में अंतरिक्ष अनुप्रयोगों एवं सेवाओं के वाणिज्यीकरण को सुगम बनाता है।
  • निजी कंपनियों को निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होती है, जिससे वे नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्षम होती हैं।
  • इससे रोजगार सृजन, आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने और क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिलती है।

चिंताएँ

  • मूलभूत विशेषज्ञता का संरक्षण: वाणिज्यीकरण के कारण इसरो की आंतरिक विशेषज्ञता तथा आरंभ से अंत तक की तकनीकी क्षमताओं के कमजोर होने की आशंका उत्पन्न हो सकती है।
  • सार्वजनिक निवेश: सार्वजनिक धन से विकसित प्रौद्योगिकियों और बुनियादी ढाँचे के संबंध में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के दौरान पारदर्शी मूल्यांकन, जवाबदेही एवं राष्ट्र को पर्याप्त प्रतिफल सुनिश्चित करने से संबंधित चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • रणनीतिक मिशन: गगनयान, चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तथा भविष्य के मंगल और शुक्र मिशनों जैसे जटिल कार्यक्रमों के लिए सुदृढ़ आंतरिक क्षमताओं को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

आगे की राह

  • भारत को एक पूरक सार्वजनिक–निजी मॉडल की आवश्यकता है, जिसमें निजी उद्योग विनिर्माण और वाणिज्यिक सेवाओं का विस्तार करे, जबकि इसरो उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D), रणनीतिक प्रौद्योगिकियों, प्रणाली एकीकरण तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशनों में अपनी विशेषज्ञता बनाए रखे।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ पारदर्शी मूल्यांकन, प्रदर्शन मानक, संस्थागत सुरक्षा उपाय तथा सार्वजनिक क्षेत्र के भीतर महत्वपूर्ण ज्ञान और विशेषज्ञता को संरक्षित रखने के लिए प्रभावी तंत्र भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

स्रोत: IE

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप संदर्भ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के लिए स्टेम सेल थेरेपी केवल विधिवत स्वीकृत नैदानिक परीक्षणों के माध्यम से ही प्रदान की जाए तथा इसे नियमित या मानक चिकित्सकीय उपचार के रूप में प्रचारित...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध संदर्भ अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने लिंडसे ओ. ग्राहम द्वारा प्रस्तुत रूस और ईरान पर प्रतिबंध संबंधी अधिनियम, 2026 पारित किया है। इसके अंतर्गत अमेरिका को रूसी तेल के पाँच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक शुल्क लगाने की अनुमति मिल सकती है। विधेयक के बारे में विधेयक में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी/अर्थव्यवस्था संदर्भ प्रधानमंत्री ने सेमीकॉन इंडिया 2026 प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसमें जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन का प्रतिनिधित्व करने वाले छह देशीय मंडप शामिल हैं। विषय: “सिलिकॉन से प्रणालियों तक: पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण” अर्धचालक और चिप निर्माण अर्धचालक ऐसा पदार्थ है जिसकी विद्युत चालकता को नियंत्रित किया...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण; जलवायु परिवर्तन संदर्भ हिम और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद नेपाल में हाल में आई बाढ़ ने तीव्रता से उष्ण हो रहे हिमालयी हिमनदों, हिमनदीय झीलों के अचानक फटने तथा भारत की जल और आर्थिक सुरक्षा पर उनके प्रभाव को लेकर चिंताएँ फिर से बढ़ा दी हैं। हिमनदों के पिघलने के बारे में...
Read More

त्रि-भाषा नीति पर सर्वोच्च न्यायालय पाठ्यक्रम: GS2/शासन समाचार में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि कक्षा 6 के लिए त्रि-भाषा नीति को अनिवार्य रूप से लागू करने की तिथि 1 जनवरी, 2027 तक स्थगित की जाए, बजाय इसके कि इसे वर्तमान शैक्षणिक सत्र में लागू किया जाए, जबकि शैक्षणिक वर्ष समाप्त...
Read More
scroll to top