संक्षिप्त समाचार 05-08-2026

उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास

पाठ्यक्रम: जीएस-1/ इतिहास

सन्दर्भ

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास की प्रतिमा का अनावरण किया

परिचय

  • पंडित गोपबंधु दास (1877–1928), जिन्हें लोकप्रिय रूप से उत्कलमणि (ओडिशा का रत्न) के नाम से जाना जाता है, ओडिशा के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, शिक्षाविद्, कवि तथा पत्रकार थे।
  • वे निर्धनों की सेवा एवं सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित थे। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साखीगोपाल में सत्यबादी बाना विद्यालय की स्थापना की।
  • वर्ष 1912 की बाढ़ तथा 1918 की इन्फ्लुएंजा महामारी के दौरान किए गए उनके राहत कार्यों से उन्हें व्यापक जनसम्मान प्राप्त हुआ।
  • वर्ष 1917 में वे विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
  • वर्ष 1919 में उन्होंने ओड़िया समाचार-पत्र द समाज की स्थापना की, जो राष्ट्रवाद एवं जन-जागरूकता को बढ़ावा देने का एक महत्त्वपूर्ण मंच बना।
  • उन्होंने ओड़िया साहित्य में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी प्रमुख कृतियों में अवकाश चिंता, गो-महात्म्य, नचिकेता उपाख्यान, करकविता, धर्मपद तथा बंदीरा आत्मकथा शामिल हैं, जिनमें से अनेक रचनाएँ उन्होंने रेवेनशॉ कॉलेज में अध्ययन के दौरान लिखीं।

स्रोत: AIR

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ स्वास्थ्य

सन्दर्भ

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अध्ययन के अनुसार, भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) में हेक्सावैलेंट (छह-इन-वन) टीके को शामिल करने से बाल टीकाकरण कार्यक्रमों की दक्षता में सुधार हो सकता है।

परिचय

हेक्सावैलेंट टीका एक संयुक्त टीका है, जो शिशुओं को एक ही इंजेक्शन के माध्यम से निम्नलिखित छह रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है—

  • डिप्थीरिया
  • टेटनस
  • काली खाँसी (पर्टुसिस)
  • हेपेटाइटिस-बी
  • पोलियो
  • हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी (एचआईबी)
  • इससे अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों का कार्यभार कम होता है, शीत-श्रृंखला (कोल्ड-चेन) की आवश्यकता घटती है तथा अभिभावकों का समय बचता है।

भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP)

  • भारत ने वर्ष 1978 में विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) प्रारंभ किया, जिसे बाद में वर्ष 1985 में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) नाम दिया गया।
  • यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष लगभग 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं तथा 2.54 करोड़ नवजात शिशुओं तक पहुँचता है।
  • यूआईपी के अंतर्गत नवजात शिशुओं, बच्चों, किशोरों तथा गर्भवती महिलाओं को 12 रोगों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए टीके उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • यूआईपी के अंतर्गत दिए जाने वाले टीके:
    • बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी)
    • डिप्थीरिया, काली खाँसी एवं टेटनस (डीपीटी)
    • टेटनस एवं वयस्क डिप्थीरिया (टीडी)
    • द्विसंयोजी मौखिक पोलियो टीका (बीओपीवी)
    • खसरा-रूबेला (एमआर) टीका
    • हेपेटाइटिस-बी (हेप-बी)
    • पंचसंयोजी टीका — डिप्थीरिया + काली खाँसी + टेटनस + हेपेटाइटिस-बी + हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी (डीपीटी + हेप-बी + एचआईबी)
    • रोटावायरस टीका (आरवीवी)
    • न्यूमोकोकल संयुग्म टीका (पीसीवी)
    • जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) टीका

स्रोत: TH

आईएआरसी द्वारा तीन सामान्य दवाओं को कैंसरकारी के रूप में वर्गीकृत किया गया

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ स्वास्थ्य

सन्दर्भ

  • अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (आईएआरसी) ने सामान्यतः चिकित्सकीय परामर्श से दी जाने वाली तीन दवाओं—हाइड्रोक्लोरोथियाज़ाइड, वोरिकोनाज़ोल तथा टैक्रोलिमस—को समूह-1 (मनुष्यों में कैंसरकारी) श्रेणी में वर्गीकृत किया है।

परिचय

  • हाइड्रोक्लोरोथियाज़ाइड का उपयोग सामान्यतः उच्च रक्तचाप के उपचार में किया जाता है।
  • वोरिकोनाज़ोल एक कवकरोधी (एंटीफंगल) दवा है, जिसका उपयोग गंभीर आक्रामक फफूंद संक्रमणों के उपचार में किया जाता है।
  • टैक्रोलिमस एक प्रतिरक्षा-दमनकारी (इम्यूनोसप्रेसेंट) दवा है, जिसका उपयोग प्रत्यारोपित अंगों को शरीर द्वारा अस्वीकार किए जाने से रोकने के लिए किया जाता है।

आईएआरसी के समूह-1 वर्गीकरण का क्या अर्थ है?

  • समूह-1 का अर्थ है कि किसी कारक के मनुष्यों में कैंसर उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं।
  • यह जोखिम (Risk) का नहीं, बल्कि संभावित खतरे (Hazard) का वर्गीकरण है।
  • संभावित खतरे का अर्थ है कि कोई कारक कुछ परिस्थितियों में कैंसर उत्पन्न करने में सक्षम है।
  • यह यह अनुमान नहीं लगाता कि निर्धारित मात्रा में दवा लेने वाले व्यक्ति को वास्तव में कैंसर होने की कितनी संभावना है, और न ही उपचार के लाभों की तुलना संभावित जोखिमों से करता है।

अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) 

  • अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (आईएआरसी), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक विशिष्ट अंतर-सरकारी कैंसर अनुसंधान एजेंसी है।
  • स्थापना: वर्ष 1965
  • मुख्यालय: लियोन, फ्रांस
  • आईएआरसी पर्यावरणीय, व्यावसायिक तथा जीवनशैली संबंधी कारकों का मूल्यांकन कर मनुष्यों में कैंसर के रोके जा सकने वाले कारणों की पहचान करती है।

आईएआरसी का कैंसरकारी वर्गीकरण

  • समूह-1: मनुष्यों में कैंसरकारी (जैसे—तंबाकू, एस्बेस्टस, सौर विकिरण)
  • समूह-2ए: संभवतः मनुष्यों में कैंसरकारी
  • समूह-2बी: संभावित रूप से मनुष्यों में कैंसरकारी
  • समूह-3: मनुष्यों में कैंसरकारी होने के संबंध में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता

स्रोत: TH

अटल कायाकल्प एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत)

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन 

चर्चा में क्यों?

  • संसद की स्थायी समिति ने सरकार से अमृत 2.0 के अंतर्गत सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाओं में तेजी लाने को कहा है। समिति के अनुसार 594 परियोजनाओं में से केवल 104 (17.5%) पूर्ण हुई हैं, जबकि 67% परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।

अटल कायाकल्प एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 

  • इसका शुभारंभ जून 2015 में शहरों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से किया गया था।
  • यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के साथ धनराशि का साझा प्रावधान शहरी जनसंख्या तथा नगरों की संख्या के आधार पर किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य जलापूर्ति, सीवरेज, शहरी परिवहन तथा पार्क जैसी बुनियादी शहरी सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
  • यह ऐसी आधारभूत अवसंरचना के निर्माण पर केंद्रित है, जो विशेष रूप से गरीबों सहित सभी नागरिकों को बेहतर शहरी सेवाएँ उपलब्ध कराए।
अमृत

अमृत 2.0 

  • इसका शुभारंभ 1 अक्टूबर 2021 को किया गया था। यह सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को शामिल करता है तथा शहरों को जल-सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखता है।
  • इसका एक प्रमुख उद्देश्य मूल 500 अमृत शहरों में सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन का सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित करना है।

स्रोत: BS

उच्चतम न्यायालय : सभी आर्द्रभूमि आरक्षित क्षेत्रों पर 10 किलोमीटर का खनन बफर लागू

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ जैव विविधता एवं संरक्षण

सन्दर्भ

  • उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि खनन के लिए 10 किलोमीटर त्रिज्या वाला बफर क्षेत्र देश के सभी आर्द्रभूमि संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों पर लागू होगा।

परिचय

  • आसन आर्द्रभूमि संरक्षण आरक्षित क्षेत्र उत्तराखंड में आसन और यमुना नदियों के संगम पर स्थित है तथा वर्ष 2020 में इसे रामसर स्थल घोषित किया गया था।
  • यह प्रवासी जलपक्षियों का एक महत्त्वपूर्ण आवास है तथा समृद्ध जलीय जैव विविधता का संरक्षण करता है।
  • उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि इस आरक्षित क्षेत्र की 10 किलोमीटर की परिधि के भीतर कोई भी खनन गतिविधि तब तक नहीं की जाएगी, जब तक परियोजना प्रस्तावक पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) की स्थायी समिति से पूर्व अनुमति प्राप्त न कर ले।
  • न्यायालय ने कहा कि किसी आर्द्रभूमि को रामसर स्थल का दर्जा प्राप्त होने के कारण उसकी पारिस्थितिक विशेषताओं को प्रभावित करने वाली गतिविधियों की अधिक कठोर जाँच आवश्यक है।
  • न्यायालय की नवीनतम स्पष्टता के अनुसार यही सिद्धांत भारत के अन्य सभी आर्द्रभूमि संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों पर भी लागू होगा।

आर्द्रभूमि (Wetland) क्या है?

  • आर्द्रभूमि ऐसा पारिस्थितिक तंत्र है, जहाँ भूमि पर खारा, मीठा अथवा मिश्रित जल मौसमी या स्थायी रूप से विद्यमान रहता है। यह एक स्वतंत्र पारिस्थितिक तंत्र के रूप में कार्य करती है।
  • इसमें झीलें, नदियाँ, भूमिगत जलभृत, दलदल, आर्द्र घासभूमियाँ, पीटलैंड, डेल्टा, ज्वारीय समतल, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ तथा अन्य तटीय क्षेत्र शामिल होते हैं।

आर्द्रभूमियों को मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है—

  • अंतर्देशीय आर्द्रभूमियाँ
  • तटीय आर्द्रभूमियाँ
  • मानव-निर्मित आर्द्रभूमियाँ

भारत में आर्द्रभूमियाँ

  • भारत में हिमालय की उच्च पर्वतीय आर्द्रभूमियाँ, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के बाढ़ मैदान, तटीय लैगून, मैंग्रोव दलदल तथा समुद्री क्षेत्रों की प्रवाल भित्तियाँ पाई जाती हैं।
  • भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 4.6% भाग आर्द्रभूमियों से आच्छादित है।
  • भारत के 101 आर्द्रभूमि स्थल अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमियों (रामसर स्थलों) की सूची में शामिल हैं।
  • एशिया में रामसर स्थलों का सबसे बड़ा नेटवर्क तथा विश्व में स्थलों की संख्या के आधार पर तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क भारत के पास है।
  • वर्ष 2026 में भारत में तमिलनाडु में सर्वाधिक 20 रामसर स्थल हैं।

रामसर अभिसमय

  • यह विश्वभर की आर्द्रभूमियों के संरक्षण के उद्देश्य से बनाया गया एक अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय है।
  • इसे 1971 में ईरान के रामसर नगर में अपनाया गया तथा 1975 में यह प्रभावी हुआ।
  • इस अभिसमय के पक्षकार देश अपने-अपने क्षेत्रों की अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल के रूप में नामित करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।

रामसर स्थल के चयन के मानदंड

  • संकटग्रस्त, विलुप्तप्राय अथवा अति-संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण करता हो।
  • संकटग्रस्त पारिस्थितिक समुदायों का समर्थन करता हो।
  • नियमित रूप से 20,000 या उससे अधिक जलपक्षियों का आश्रय स्थल हो।
  • मछलियों के लिए भोजन, प्रजनन तथा शिशु पालन का महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हो।
  • भारत और रामसर अभिसमय:भारत वर्ष 1982 से रामसर अभिसमय का पक्षकार है।

स्रोत: TH

अरहर की उन्नत किस्में

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने भारत की पहली पूर्णतः व्याख्यायित टेलोमियर-से-टेलोमियर (T2T) संदर्भ जीनोम का विकास अरहर (काजेनस काजन एल. मिल्स्प.) की ‘आशा’ किस्म के लिए किया है।

परिचय

  • यह भारत के पहले अरहर प्रारूप जीनोम (2011) तथा उसके उन्नत संस्करण (2017) पर आधारित है।
  • इससे अधिक उपज देने वाली, जलवायु-सहिष्णु तथा पोषण से समृद्ध अरहर की नई किस्मों के विकास में सहायता मिलेगी, जिससे भारत की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुदृढ़ होगी।

क्या आप जानते हैं?

  • टेलोमियर गुणसूत्रों के सिरों पर स्थित पुनरावृत्त डीएनए अनुक्रम होते हैं, जो गुणसूत्रों की स्थिरता एवं अखंडता बनाए रखते हैं।
  • प्रत्येक कोशिका विभाजन के साथ इनकी लंबाई कम होती जाती है और जब यह एक महत्वपूर्ण सीमा तक पहुँच जाती है, तब कोशिकाएँ विभाजित होना बंद कर देती हैं।
  • इनका डीएनए अत्यधिक पुनरावृत्त होने के कारण पारंपरिक अनुक्रमण विधियों से इसका अध्ययन कठिन होता है।
  • टेलोमियर-से-टेलोमियर (T2T) जीनोम ऐसा पूर्ण जीनोम अनुक्रम है, जिसमें टेलोमियर से टेलोमियर तक बिना किसी रिक्त स्थान के अत्यधिक सटीक अनुक्रम उपलब्ध होता है।
  • T2T-CHM13 मानव जीनोम ने जीनोम के उन क्षेत्रों का भी सफलतापूर्वक अनुक्रमण किया, जो पहले अनुपलब्ध थे, जैसे पुनरावृत्त डीएनए तथा सेंट्रोमेरिक क्षेत्र।
  • इससे आनुवंशिक विविधता, उत्परिवर्तन, गुणसूत्रों के कार्य, वृद्धावस्था तथा रोगों की बेहतर समझ विकसित होगी और परिशुद्ध चिकित्सा (प्रिसीजन मेडिसिन) एवं जीनोमिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

अरहर (Pigeonpea) 

  • यह एक प्रमुख दलहनी फसल है, जिसकी खेती उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से की जाती है।
  • इसकी खेती मुख्यतः वर्षा आधारित परिस्थितियों में होती है।
  • यह अनियमित वर्षा, पौधों के कमजोर प्रारंभिक विकास तथा अंकुरण के समय नमी की कमी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
  • प्रमुख वैश्विक उत्पादक: म्यांमार, मलावी, केन्या, युगांडा, हैती, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य तथा नेपाल आदि।
  • भारत के प्रमुख उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक तथा झारखंड।

महत्त्व:

  • इसे सामान्यतः अरहर या तूर के नाम से जाना जाता है और यह भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण दलहनी फसलों में से एक है।
  • यह अपने उच्च प्रोटीन की मात्रा के लिए प्रसिद्ध है तथा लंबे समय से भारतीय उपमहाद्वीप में करोड़ों लोगों के भोजन का प्रमुख स्रोत रही है।

दलहनों में ‘आत्मनिर्भरता’ मिशन 

  • भारत सरकार ने दलहनों में ‘आत्मनिर्भरता’ मिशन (2025–26 से 2030–31) प्रारंभ किया है, जिसका उद्देश्य दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
  • इसका लक्ष्य उन्नत बीजों, खेती के क्षेत्र के विस्तार, प्रौद्योगिकी अपनाने, सुनिश्चित खरीद तथा कटाई के बाद की अवसंरचना को सुदृढ़ बनाकर आयात पर निर्भरता कम करना एवं किसानों की आय बढ़ाना है।
  • इस मिशन का उद्देश्य अनुसंधान, बीज प्रणाली तथा विस्तार सेवाओं की व्यापक रणनीति के माध्यम से 2030–31 तक दलहन उत्पादन को लगभग 3.5 करोड़ टन तक बढ़ाना है।

स्रोत: PIB

अफ्रीकी स्वाइन ज्वर के लिए आईसीएआर ने स्वदेशी टीका विकसित किया

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ स्वास्थ्य

सन्दर्भ

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने सूअरों के लिए भारत का पहला स्वदेशी एमए-104 कोशिका-रेखा आधारित जीवित क्षीणीकृत अफ्रीकी स्वाइन ज्वर (एएसएफ) टीका विकसित किया है।

परिचय

  • यह टीका आठ सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों के लिए अनुशंसित है।
  • इसे 1 मिलीलीटर अंतःपेशीय इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है, जिसके 14 दिन बाद एक बूस्टर खुराक दी जाती है।
  • यह स्वदेशी टीका सूअरों की मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने, आर्थिक हानि को कम करने तथा देशभर के सूअर पालकों की आजीविका में सुधार करने की अपेक्षा रखता है।

अफ्रीकी स्वाइन ज्वर (ASF)

  • अफ्रीकी स्वाइन ज्वर (एएसएफ) एक अत्यधिक संक्रामक सीमापार पशु रोग है, जो अफ्रीकी स्वाइन ज्वर विषाणु (एएसएफवी) के कारण होता है और घरेलू सूअरों तथा जंगली सूअरों को प्रभावित करता है।
  • यह रोग मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता।
  • इस रोग का पहला पता 1909 में केन्या में चला था। वर्तमान में यह अफ्रीका, यूरोप तथा एशिया के अनेक देशों में फैल चुका है।
  • भारत में वर्ष 2020 में पहली बार इसकी पुष्टि होने के बाद यह कई राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में फैल गया, जिससे सूअरों की बड़े पैमाने पर मृत्यु, सूअर पालन में व्यवधान, पशुओं की आवाजाही एवं व्यापार पर प्रतिबंध तथा विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
  • यह रोग संक्रमित सूअरों, संक्रमित सूअर उत्पादों, जंगली सूअरों तथा कोमल किलनियों (सॉफ्ट टिक्स) के सीधे संपर्क से फैलता है।
  • इस रोग की प्रमुख विशेषताएँ तेज़ बुखार, रक्तस्राव तथा लगभग 100% तक पहुँचने वाली मृत्यु दर हैं, जिसके कारण इसे सूअरों को प्रभावित करने वाले सबसे विनाशकारी पशु रोगों में से एक माना जाता है।

स्रोत: PIB

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन व्यवस्था एवं राजनीति, जीएस-3/ अर्थव्यवस्था सन्दर्भ व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने तथा भारत को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कराधान तथा अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया है। यह विधेयक भुगतान एवं...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन व्यवस्था एवं राजनीति सन्दर्भ उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए (अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 एवं 86) के अंतर्गत घरेलू क्रूरता का अपराध उन महिलाओं पर भी लागू होगा जो ऐसे लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, जो “विवाह के स्वरूप वाले संबंध” हैं।...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन चर्चा में क्यों? उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को चुनौती देने वाली केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के सेवारत अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अधिनियम की पृष्ठभूमि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक/अधिनियम वर्ष 2025 के उच्चतम न्यायालय...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संदर्भ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021–22 में भारत का अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.83% हो गया, जो 2009–10 के बाद पहली बार 0.8% के स्तर से अधिक है। सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) क्या है?...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सन्दर्भ पिछले तीन दशकों की वार्षिक रिपोर्टों के आँकड़ों पर आधारित विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में स्वीकृत पदों की तुलना में वर्तमान में उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या 72% है, जो हाल के वर्षों में सबसे कम स्तर है। परिचय हाल के घटनाक्रमों में...
Read More
scroll to top