पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- हाल ही में लाल सागर एवं पश्चिम एशिया के वाणिज्यिक समुद्री मार्गों पर हुए हमलों, जिनमें भारतीय नाविकों की मृत्यु हुई, ने भारत के समुद्री कार्यबल की संवेदनशीलता तथा उनके लिए अधिक प्रभावी सुरक्षा तंत्र विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
भारतीय समुद्री कार्यबल (भारतीय नाविक)
- भारत विश्व में समुद्री जनशक्ति उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देशों में से एक बन गया है।
- नाविक कार्यबल प्रतिवेदन, 2026 के अनुसार विश्व के कुल नाविक कार्यबल में 12 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ भारत फिलीपींस के बाद दूसरे स्थान पर है।
- जून, 2025 तक भारत में लगभग 3.2 लाख पंजीकृत नाविक थे, जो वर्ष 2014 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक हैं।
- भारतीय नाविक अत्यधिक वैश्वीकृत कार्य परिवेश में कार्य करते हैं। वे प्रायः ऐसे जहाजों पर कार्यरत होते हैं, जिनका स्वामित्व, प्रबंधन, बीमा एवं ध्वज पंजीकरण भारत के अतिरिक्त अन्य देशों से संबंधित होता है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा भारत के विदेशी प्रेषण (रेमिटेंस) में महत्त्वपूर्ण योगदान के बावजूद, आपातकालीन परिस्थितियों में वे प्रायः किसी एक देश के अधिकार-क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आते।
भारतीय नाविकों के समक्ष चुनौतियाँ
- अधिकार-क्षेत्र संबंधी जटिलता: किसी नाविक की भर्ती भारत में हो सकती है, वह किसी विदेशी कंपनी के अधीन कार्यरत हो सकता है, विदेशी ध्वज वाले जहाज पर कार्य कर सकता है तथा किसी अन्य देश के समुद्री क्षेत्र में आपदा का सामना कर सकता है।
- ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट नहीं होता कि बचाव, विधिक सहायता तथा स्वदेश वापसी की जिम्मेदारी किसकी होगी।
- बढ़ते सुरक्षा खतरे: भारतीय नाविक निम्नलिखित खतरों का सामना कर रहे हैं—
- लाल सागर एवं काला सागर में मिसाइल एवं ड्रोन हमले।
- अदन की खाड़ी तथा पश्चिमी अफ्रीका के समुद्री क्षेत्रों में समुद्री डकैती एवं बंधक बनाए जाने की घटनाएँ।
- नागरिक कर्मी होने के बावजूद भू-राजनीतिक संघर्षों का जोखिम।
- चालक दल का परित्याग: अंतरराष्ट्रीय परिवहन कर्मी महासंघ (ITF) के अनुसार वर्ष 2025 में 1,125 भारतीय नाविकों के परित्यक्त चालक दल का हिस्सा होने की सूचना मिली, जो विश्व में सर्वाधिक थी।
- वेतन भुगतान में विलंब, भोजन की कमी तथा स्वदेश वापसी में कठिनाइयाँ निरंतर बनी हुई हैं।
- कमजोर राजनयिक संरक्षण: भारत की वाणिज्य-दूतावास सहायता व्यवस्था भौगोलिक आधार पर संचालित होती है, जबकि जहाज निरंतर विभिन्न अधिकार-क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं।
- परिणामस्वरूप, अनेक बार भारतीय मिशनों को घटना घटित होने के बाद ही प्रभावित नाविकों की जानकारी मिलती है।
- सूचना संबंधी असमानता: अनेक नाविक बिना पर्याप्त जानकारी के अनुबंध पर हस्ताक्षर कर देते हैं।
- उन्हें जहाज के वास्तविक स्वामी, जहाज पर लगाए गए संभावित प्रतिबंधों, बीमा की वैधता, चालक दल के परित्याग के पूर्ववर्ती मामलों अथवा संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से होकर होने वाली यात्रा की जानकारी नहीं होती।
- ध्वज राज्य द्वारा कमजोर प्रवर्तन: कुछ ध्वज राज्य, जो खुले पंजीकरण की व्यवस्था अपनाते हैं, जहाजों का पंजीकरण तो कर देते हैं, किंतु समुद्री श्रम अभिसमय (MLC), 2006 के अंतर्गत निर्धारित दायित्वों, विशेषकर वेतन, कल्याण एवं स्वदेश वापसी संबंधी प्रावधानों का प्रभावी प्रवर्तन नहीं करते।
सरकारी पहल एवं उपाय
- नाविक प्रथम पहल: हालिया पश्चिम एशिया संकट के बाद सरकार ने नाविक प्रथम पहल की घोषणा की, जिसके अंतर्गत—
- पश्चिम एशिया में कार्यरत सभी भारतीय नाविकों को, चाहे जहाज किसी भी ध्वज का हो, संरक्षण प्रदान किया जाएगा।
- जहाजों, खतरे के स्तर तथा चालक दल के कल्याण की निगरानी हेतु केंद्रीकृत डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा।
- प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए एक समन्वय अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
- उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के संबंध में परामर्श: सरकार ने जहाज मालिकों, प्रबंधकों तथा भर्ती एजेंसियों को अगले आदेश तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के मार्ग से भारतीय नाविकों को न भेजने का परामर्श दिया है।
- भर्ती एजेंसियों पर विनियमन: नौवहन महानिदेशालय (DG Shipping) ने लाइसेंस प्राप्त भर्ती एजेंसियों को ऐसे 366 जहाजों पर भारतीय नाविकों की नियुक्ति से प्रतिबंधित किया है, जिनसे चालक दल के परित्याग के मामले जुड़े हैं, जब तक कि निर्धारित अनुपालन शर्तों का पालन न हो।
- संस्थागत व्यवस्था: नौवहन महानिदेशालय (DG Shipping) भर्ती एजेंसियों का विनियमन करता है तथा भारतीय नाविकों का प्रमाणीकरण भी करता है।
- भारत समुद्री श्रम अभिसमय (MLC), 2006 का हस्ताक्षरकर्ता है, जिसमें रोजगार, कल्याण एवं स्वदेश वापसी के न्यूनतम मानक निर्धारित किए गए हैं।
आगे की राह
- स्थायी समुद्री वाणिज्य-दूतावास प्रोटोकॉल विकसित करना: संकट संकेत प्राप्त होने से लेकर राहत एवं स्वदेश वापसी तक की प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) विकसित की जाए, जिससे भारतीय मिशनों, ध्वज राज्यों, बीमा कंपनियों तथा जहाज मालिकों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित हो।
- समुद्री कूटनीति को सुदृढ़ करना: प्रमुख समुद्री केंद्रों में स्थित भारतीय मिशनों में ऐसे समुद्री अधिकारी नियुक्त किए जाएँ, जिन्हें स्थानीय बंदरगाह प्राधिकरणों, अस्पतालों, बीमा संस्थाओं तथा विधिक व्यवस्था का पर्याप्त ज्ञान हो।
- भर्ती से पूर्व जहाजों की जानकारी में पारदर्शिता: भर्ती एजेंसियों द्वारा जहाज के वास्तविक स्वामित्व, बीमा की स्थिति, प्रतिबंधों का विवरण, चालक दल के परित्याग के पूर्ववर्ती मामलों तथा संभावित उच्च जोखिम वाले समुद्री मार्गों का अनिवार्य प्रकटीकरण किया जाए।
- खतरनाक समुद्री यात्राओं से मना करने के अधिकार की रक्षा: नाविकों को आधिकारिक रूप से घोषित संघर्ष क्षेत्रों में नियुक्ति से मना करने का विधिक अधिकार प्राप्त होना चाहिए, जिससे उनके रोजगार अथवा संविदात्मक अधिकार प्रभावित न हों।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना: भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) तथा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के माध्यम से फिलीपींस एवं इंडोनेशिया जैसे प्रमुख समुद्री श्रमिक उपलब्ध कराने वाले देशों के साथ मिलकर संघर्ष क्षेत्रों में तैनाती, हिरासत, चालक दल के परित्याग एवं स्वदेश वापसी के लिए समान मानक विकसित करने चाहिए।
- वास्तविक समय में नाविक कल्याण की निगरानी: प्रस्तावित केंद्रीकृत डैशबोर्ड को सभी उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में संस्थागत रूप दिया जाए तथा चालक दल के कल्याण और उनके परिवारों से नियमित संवाद की व्यवस्था विकसित की जाए।
निष्कर्ष
- भारत की समुद्री आकांक्षाएँ केवल बंदरगाहों, समुद्री व्यापार गलियारों एवं नौसैनिक शक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन भारतीय नाविकों के कल्याण से भी जुड़ी हैं, जो वैश्विक समुद्री व्यापार की आधारशिला हैं।
- भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ विधिक संरक्षण, सक्रिय कूटनीति, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था तथा समन्वित अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
- जहाज किसी भी देश का ध्वज धारण करता हो, भारत के प्रत्येक नागरिक के प्रति उसकी जिम्मेदारी समान रहनी चाहिए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]: भारतीय नाविकों के समक्ष विद्यमान प्रमुख चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। उनकी सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए उपायों की चर्चा करते हुए आवश्यक सुधारों का सुझाव दीजिए। |
स्रोत : TH
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