भारत की प्रथम हाइड्रोजन-संचालित रेलगाड़ी 

पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा में उत्तरी रेलवे के दिल्ली मंडल के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर संचालित भारत की प्रथम हाइड्रोजन-चालित रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

भारत की प्रथम हाइड्रोजन-चालित रेलगाड़ी

  • रेलगाड़ी की प्रमुख विशेषताएँ: इस रेलगाड़ी का विकास चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ – ICF) द्वारा किया गया है।
    • यह 10 डिब्बों वाली हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित रेलगाड़ी है, जो 1200 किलोवाट (kW) क्षमता वाले हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रणोदन तंत्र से संचालित होती है।
    • इस रेलगाड़ी में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार तथा आठ ट्रेलर कोच शामिल हैं।
    • इसे अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटा की परिचालन गति के लिए स्वीकृत किया गया है, जबकि इसकी अभिकल्पित गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है।

रेलगाड़ी के प्रमुख अवयव

  • प्रोटॉन विनिमय झिल्ली ईंधन सेल, जो विद्युत का उत्पादन करते हैं।
  • लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियाँ, जो अतिरिक्त विद्युत का भंडारण करती हैं तथा त्वरण के समय अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध कराती हैं।
  • संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण हेतु उच्च-दाब हाइड्रोजन भंडारण सिलेंडर।
  • विद्युत कर्षण मोटर, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक गति में परिवर्तित करती हैं।
  • सुरक्षा उपाय : उत्पादन, भंडारण तथा वितरण केंद्रों पर हाइड्रोजन रिसाव संसूचक स्थापित किए गए हैं।
  • निरंतर निगरानी के लिए ज्वाला संसूचक भी लगाए गए हैं।
  • हाइड्रोजन रेलगाड़ी की कार्यप्रणाली: हाइड्रोजन-चालित रेलगाड़ी एक ईंधन-सेल विद्युत रेलगाड़ी है, जो डीज़ल ईंधन अथवा ऊपरी विद्युत संचरण लाइनों से प्राप्त विद्युत के स्थान पर हाइड्रोजन गैस की सहायता से रेलगाड़ी के अंदर ही विद्युत का उत्पादन करती है।
    • हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से हाइड्रोजन से विद्युत उत्पन्न करती है।
    • इसका प्रमुख ऊर्जा स्रोत प्रोटॉन विनिमय झिल्ली ईंधन सेल (PEMFC) है।
    • ईंधन सेल, प्रोटॉन-चालक परफ्लोरोसल्फोनिक अम्ल (PFSA) बहुलक झिल्ली के आर-पार हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की अभिक्रिया द्वारा विद्युत उत्पन्न करता है।
    • इस प्रक्रिया के उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प और ऊष्मा उत्पन्न होती है।
    • उत्पादित विद्युत, कर्षण मोटरों को संचालित करती है, जो रेलगाड़ी को गति प्रदान करती हैं।

महत्त्व

  • सतत गतिशीलता: यह परियोजना डीज़ल कर्षण के स्थान पर शून्य निकास उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकी को अपनाकर भारत के परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
    • यह गैर-विद्युतीकृत रेलमार्गों के लिए स्वच्छ विकल्प प्रदान करती है।
  • भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ: यह वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।
  • भारत का प्रौद्योगिकीय नेतृत्व: विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली हाइड्रोजन रेलसमूहों में से एक के सफल परिचालन के साथ भारत हाइड्रोजन-आधारित रेल परिवहन के विकास में अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।

चुनौतियाँ

  • हाइड्रोजन अवसंरचना: भारत में हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन तथा पुनर्भरण की पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है, जिससे इसका बड़े पैमाने पर उपयोग सीमित होता है।
  • उच्च पूंजीगत निवेश: हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्रों, पुनर्भरण केंद्रों, ईंधन-सेल प्रणालियों तथा विशेष रेल रेक की स्थापना के लिए बड़े पूंजीगत निवेश की आवश्यकता होती है।
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, जिसके कारण विशेष भंडारण सुविधाओं तथा कठोर परिचालन सुरक्षा प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।

हाइड्रोजन क्या है?

  • हाइड्रोजन एक रासायनिक तत्व है, जिसका रासायनिक प्रतीक एच (H) तथा परमाणु क्रमांक 1 है।
  • यह सभी तत्वों में सबसे हल्का तथा ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला रासायनिक पदार्थ है, जो सामान्य पदार्थ का लगभग 75 प्रतिशत भाग बनाता है।
  • यह एक अविषाक्त, रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन तथा अत्यधिक ज्वलनशील गैस है।

स्रोत: TH, PIB

 

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