अबथसहायेश्वरर मंदिर
पाठ्यक्रम: GS1/ कला एवं संस्कृति
समाचार में
- उपेक्षा के कई दशकों के बाद 12वीं शताब्दी के अबथसहायेश्वरर मंदिर का पुनरुद्धार किया गया।
अबथसहायेश्वरर मंदिर
- यह तमिलनाडु के तंजावुर जिले में कुंभकोणम के निकट थुक्काची में स्थित है।
- यह उत्तरकालीन चोल काल के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्मारकों में से एक है तथा कुलोत्तुंग प्रथम एवं विक्रम चोल से घनिष्ठ रूप से संबद्ध है।
- इसका निर्माण करा कोविल शैली में किया गया है, अर्थात् यह मंदिर रथ के आकार में निर्मित है।
- मंदिर में भगवान शरभेश्वरर की प्रतिमा भी स्थापित है, जिसे इस देवता के सबसे प्राचीन चित्रणों में से एक माना जाता है।
मंदिर का पुनरुद्धार
- मंदिर के पुनरुद्धार कार्य को यूनेस्को एशिया-प्रशांत विशिष्टता पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया।
- यह सम्मान मंदिर की विरासत को संरक्षित रखते हुए उसकी संरचनात्मक सुदृढ़ता सुनिश्चित करने के प्रयास के लिए प्रदान किया गया।
- इस परियोजना में पारंपरिक मंदिर निर्माण पद्धतियों (स्थापत्य वेद, आगम शास्त्र तथा चूने के गारे) के साथ ड्रोन सर्वेक्षण, डिजिटल मानचित्रण, फोटोग्रामेट्री तथा संरचनात्मक अभियांत्रिकी जैसी आधुनिक तकनीकों का समन्वय किया गया।
- ऐतिहासिक प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए प्रत्येक ग्रेनाइट शिला को क्रमांकित कर सावधानीपूर्वक अलग किया गया तथा पुनः उसी मूल स्थान पर स्थापित किया गया।
स्रोत : TH
जगन्नाथ रथ यात्रा
पाठ्यक्रम: GS1/ संस्कृति
संदर्भ
- ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा प्रारम्भ हो गई है।
रथ यात्रा के बारे में
- गुंडिचा यात्रा, घोष यात्रा तथा नवदिना यात्रा सहित अनेक नामों से प्रसिद्ध रथ यात्रा, भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक महत्त्वपूर्ण हिंदू पर्व है।
- वार्षिक रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र तथा छोटी बहन देवी सुभद्रा रथों पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं तथा गुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं, जिसे भगवान जगन्नाथ की मौसी का निवास माना जाता है।
- यात्रा पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से प्रारम्भ होकर श्री गुंडिचा मंदिर में सम्पन्न होती है।
- देवप्रतिमाएँ नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहती हैं, जिसके पश्चात बहुदा यात्रा (वापसी रथ यात्रा) के दौरान पुनः उसी रथ से जगन्नाथ मंदिर लौटती हैं।
- पुरी के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, गुजरात सहित अनेक राज्यों में भी यह रथ यात्रा समान धार्मिक उत्साह के साथ आयोजित की जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथ खींचने एवं पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं।
जगन्नाथ पुरी मंदिर
- श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर ओडिशा राज्य के सर्वाधिक भव्य एवं ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है।
- इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी ईस्वी में पूर्वी गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव द्वारा कराया गया था।
- जगन्नाथ पुरी मंदिर को ‘यमनिक तीर्थ’ कहा जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की उपस्थिति के कारण पुरी में मृत्यु के देवता यम का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
- यह भारत के चार धामों—पुरी, द्वारका, बद्रीनाथ एवं रामेश्वरम्—में से एक है।
- इस मंदिर को ‘श्वेत पैगोडा ‘ भी कहा जाता है तथा यह चार धाम तीर्थयात्रा का अभिन्न अंग है।
मंदिर की स्थापत्य विशेषताएँ
- संपूर्ण मंदिर परिसर दो संकेन्द्रित परकोटों से घिरा हुआ है, जिन्हें कूर्म भेड़ा (आंतरिक प्राचीर) तथा मेघनाद पचीरा (बाह्य प्राचीर) कहा जाता है।
- मंदिर में चार प्रवेश द्वार हैं—
- पूर्व दिशा: सिंहद्वार (मुख्य प्रवेश द्वार), जिसके दोनों ओर सिंहों की प्रतिमाएँ हैं।
- दक्षिण दिशा: अश्वद्वार।
- पश्चिम दिशा: व्याघ्रद्वार।
- उत्तर दिशा: हस्तिद्वार।
- प्रत्येक द्वार पर उसके नामानुसार संबंधित पशु की आकृति उत्कीर्ण है।
- मंदिर का मुख्य प्रवेश पूर्व दिशा स्थित सिंहद्वार से होता है, जबकि अन्य तीन प्रवेश द्वार क्रमशः शेष तीन दिशाओं में स्थित हैं।
- मंदिर के शिखर पर स्थित नीलचक्र आठ धातुओं (अष्टधातु) से निर्मित है।
- अरुण स्तंभ, जो सिंहद्वार के सामने स्थित 33 फीट ऊँचा एकाश्म स्तंभ है, मूलतः कोणार्क सूर्य मंदिर में स्थापित था।
स्रोत : AIR
रविदासिया समुदाय
पाठ्यक्रम: GS1/ भारतीय समाज; GS2/ शासन व्यवस्था
संदर्भ
- रविदासिया समुदाय ने जनगणना में ‘रविदासिया धर्म’ को एक पृथक धार्मिक श्रेणी के रूप में मान्यता देने की अपनी माँग पुनः दोहराई है। समुदाय का तर्क है कि समय के साथ इसकी एक स्वतंत्र धार्मिक पहचान विकसित हो चुकी है।
रविदासिया कौन हैं?
- गुरु रविदास 15वीं–16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के संत, रहस्यवादी कवि तथा समाज सुधारक थे।
- उन्होंने समानता, सामाजिक न्याय तथा जातिगत भेदभाव से परे भक्ति का संदेश दिया।
- उन्होंने ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा प्रस्तुत की, जो दुःख, भय एवं भेदभाव से मुक्त समानतामूलक समाज तथा आध्यात्मिक नगर की परिकल्पना है।
- रविदासिया, गुरु रविदास के अनुयायी हैं तथा इनकी अधिकांश जनसंख्या दलित समुदाय से संबंधित है।
- रविदासिया समुदाय की सर्वाधिक जनसंख्या पंजाब के दोआबा क्षेत्र में पाई जाती है, विशेष रूप से जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला तथा शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जिलों में।
डेरा सचखंड बल्लां
- जालंधर के निकट स्थित डेरा सचखंड बल्लां रविदासिया समुदाय का सबसे प्रभावशाली धार्मिक संस्थान है।
- इसकी स्थापना 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में बाबा संत पीपल दास द्वारा की गई थी।
- यह डेरा ऐतिहासिक रूप से सिख धर्म से संबद्ध था, किन्तु 2009 में वियना में इसके धार्मिक नेताओं पर हुए हमले के बाद वर्ष 2010 में इसने औपचारिक रूप से रविदासिया धर्म की घोषणा की।
- वर्तमान में यह रविदासिया समुदाय का आध्यात्मिक एवं संगठनात्मक केंद्र है।
स्रोत : IE
तिब्बती पठार
पाठ्यक्रम: GS1/ भूगोल
संदर्भ
- ग्लासगो विश्वविद्यालय के भू-वैज्ञानिकों ने तिब्बती पठार के निर्माण से संबंधित नए साक्ष्यों का प्रकटीकरण किया है।
तिब्बती पठार के बारे में
- तिब्बती पठार (QTP) (जिसे छिंगहाई–तिब्बत पठार अथवा हिमालयी पठार भी कहा जाता है) विश्व का सबसे ऊँचा एवं सबसे बड़ा पठार है।
- इसे “रूफ ऑफ द वर्ल्ड ” तथा “थर्ड पोल ” भी कहा जाता है।
- लगभग 25 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला यह पठार मध्य, दक्षिण एवं पूर्वी एशिया में विस्तृत है तथा इसकी औसत ऊँचाई समुद्र तल से 4,500 मीटर से अधिक है।
- इसके चारों ओर अनेक ऊँची पर्वत श्रृंखलाएँ स्थित हैं, जिनमें पश्चिम में हिंदूकुश, दक्षिण में हिमालय, उत्तर में कुनलुन पर्वतमाला तथा उत्तर-पूर्व में चिलियन पर्वतमाला प्रमुख हैं।
- यह सिंधु, ब्रह्मपुत्र, यांग्त्ज़ी, ह्वांगहो (पीली नदी), मेकॉंग तथा सालवीन सहित एशिया की दस प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल है, जिन पर अरबों लोगों की आजीविका निर्भर करती है।
- यह ग्रीष्म ऋतु में ऊँचे ऊष्मा स्रोत के रूप में कार्य करते हुए एशियाई मानसून तथा वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण को अत्यधिक प्रभावित करता है।
स्रोत : DTE
मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS)
पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
समाचार में
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹62,500 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) को स्वीकृति प्रदान की है।
पृष्ठभूमि
- मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS), बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI-LSEM) की सफलता पर आधारित है।
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI-LSEM) ने भारत को मोबाइल फोन विनिर्माण एवं निर्यात के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।
- (PLI-LSEM) का कार्यकाल 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो गया।
मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS)
- इसका उद्देश्य मोबाइल फोन विनिर्माण का विस्तार करना तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
- यह पाँच वर्षीय योजना है, जो वित्तीय वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक लागू रहेगी।
- प्रमुख विशेषताएँ: भारत में निर्मित मोबाइल फोन की पात्र बिक्री पर 2.25% से 5% तक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
- प्रमुख कलपुर्जों एवं उप-असेंबली के घरेलू स्रोतों से अधिक खरीद करने पर निर्माताओं को 1.5% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
- जो कंपनियाँ उत्पाद अभिकल्पन, अनुसंधान एवं विकास तथा भारतीय ब्रांडों के निर्माण में निवेश करेंगी, उन्हें पात्र बिक्री पर 3% अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।

- उद्देश्य: घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ाना।
- आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करना।
- निर्यात को प्रोत्साहित करना।
- भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त बनाना।
- अपेक्षित परिणाम: योजना की अवधि में लगभग ₹39 लाख करोड़ मूल्य के मोबाइल फोन उत्पादन का लक्ष्य।
- मोबाइल फोन निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि।
- लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन।
क्या आप जानते हैं?
- इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के युवा पुरुषों एवं महिलाओं के लिए एक प्रमुख रोजगार प्रदाता के रूप में उभरा है। कुछ विनिर्माण इकाइयों में एक ही स्थान पर 5,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
- मोबाइल फोन विनिर्माण इस वृद्धि का प्रमुख प्रेरक रहा है तथा भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का आधार बन गया है।
- उत्पादन की मात्रा के आधार पर भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है तथा देश में उपयोग होने वाले 99.2% मोबाइल फोन भारत में ही निर्मित होते हैं।
- वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया, जिसने डीज़ल ईंधन एवं कटे हुए हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात उत्पादों को पीछे छोड़ दिया।
- वर्तमान में मोबाइल फोन भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन एवं निर्यात का प्रमुख हिस्सा हैं तथा वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
स्रोत : DD
कोडेक्स एलीमेंटेरियस आयोग (CAC)
पाठ्यक्रम: GS3/ खाद्य सुरक्षा
संदर्भ
- कोडेक्स एलीमेंटेरियस आयोग (CAC) ने भारत की अध्यक्षता एवं सह-अध्यक्षता में विकसित सात कोडेक्स मानकों एवं दिशा-निर्देशों को अपनाया है।
- आयोग ने काजू गिरी के लिए एक कोडेक्स मानक विकसित करने संबंधी भारत के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की है।
कोडेक्स एलीमेंटेरियस आयोग (CAC)
- कोडेक्स एलीमेंटेरियस अथवा “खाद्य संहिता” ऐसे मानकों, दिशा-निर्देशों एवं आचार संहिताओं का संग्रह है, जिन्हें कोडेक्स एलीमेंटेरियस आयोग (CAC) द्वारा अपनाया जाता है।
- कोडेक्स मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि खाद्य पदार्थ सुरक्षित हों तथा उनका निष्पक्ष व्यापार किया जा सके।
- यह एक अंतर-सरकारी खाद्य मानक निर्धारण निकाय है, जिसकी स्थापना वर्ष 1963 में की गई थी।
- “कोडेक्स एलीमेंटेरियस” लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ “खाद्य संहिता” होता है।
- इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संयुक्त रूप से संयुक्त खाद्य मानक कार्यक्रम के अंतर्गत की गई थी।
- उद्देश्य: उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना।
- खाद्य व्यापार में निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना।
- सदस्य: वर्तमान में इसके 189 सदस्य हैं, जिनमें 188 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश तथा यूरोपीय संघ शामिल हैं।
- आयोग का नियमित अधिवेशन प्रत्येक वर्ष आयोजित होता है, जो क्रमशः जिनेवा एवं रोम में आयोजित किया जाता है।
- भारत वर्ष 1964 में इसका सदस्य बना।
स्रोत: PIB
म्यूरिकैटासिन
पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- शोधकर्ताओं ने अन्य वसीय अम्लों का रूपांतरण कर प्रयोगशाला में म्यूरिकैटासिन का सरल एवं अधिक दक्षतापूर्ण संश्लेषण करने में सफलता प्राप्त की है।
परिचय
- वसीय अम्लों का रूपांतरण: सीधे शृंखलाबद्ध कार्बन यौगिक, जैसे वसीय अम्ल , प्रकृति में सर्वाधिक उपलब्ध रासायनिक पदार्थों में से हैं।
- इसके विपरीत, जैविक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अनेक कार्बनिक यौगिकों, जिनमें कई औषधियाँ भी सम्मिलित हैं, की आणविक संरचना वलयाकार होती है।
- वैज्ञानिक सामान्यतः सरलता से उपलब्ध वसीय अम्लों को अनेक चरणों वाली प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे उपयोगी अणुओं में परिवर्तित करते हैं, जिनका विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक उपयोग होता है।
- म्यूरिकैटासिन : शोधकर्ताओं ने अपनी नई विधि का उपयोग कर 10 से अधिक जैविक एवं औद्योगिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अणुओं का संश्लेषण किया, जिनमें म्यूरिकैटासिन भी शामिल है।
- म्यूरिकैटासिन प्राकृतिक रूप से लक्ष्मण फल में पाया जाता है तथा इसमें कैंसर-रोधी गुण होने की संभावना मानी जाती है।
- प्राकृतिक स्रोतों से म्यूरिकैटासिन का निष्कर्षण अत्यंत कठिन एवं अल्प दक्षता वाला माना जाता है।
- लगभग 15 किलोग्राम पौध सामग्री से केवल 15 मिलीग्राम म्यूरिकैटासिन प्राप्त होता है और वह भी अन्य पदार्थों के साथ मिश्रित अवस्था में होता है।
- शोधकर्ताओं ने अन्य वसीय अम्लों का रूपांतरण कर प्रयोगशाला में म्यूरिकैटासिन का सरल एवं अधिक दक्षतापूर्ण संश्लेषण किया।
- इसके पश्चात उन्होंने इस यौगिक में ऐसा संशोधन किया कि इसमें प्राकृतिक पौधों से प्राप्त म्यूरिकैटासिन के समान कैंसर-रोधी गुण प्रदर्शित हुए।
स्रोत : IE
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