पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) तथा द्वैध अंशदान अभिसमय (DCC) 15 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गए।
भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के बारे में
- यह भारत एवं यूनाइटेड किंगडम के मध्य संपन्न एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता है, जिसमें वस्तुओं, सेवाओं, डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, श्रम, पर्यावरण, नवाचार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा नियामकीय सहयोग को सम्मिलित किया गया है।
- यह पारंपरिक मुक्त व्यापार समझौतों से भिन्न है, क्योंकि पारंपरिक समझौते मुख्यतः सीमा शुल्क में कमी पर केंद्रित होते हैं।
- इसका उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम कर तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए बेहतर बाजार पहुँच उपलब्ध कराकर द्विपक्षीय व्यापार, निवेश एवं आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता का महत्व
- इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देना, व्यवसायों के लिए बाजार पहुँच में सुधार करना, सेवा निर्यात में वृद्धि, आपूर्ति-श्रृंखला की सुदृढ़ता को बढ़ाना, गैर-शुल्कीय बाधाओं को कम करना तथा द्वैध अंशदान अभिसमय के माध्यम से श्रम गतिशीलता को प्रोत्साहित करना है।
- इससे व्यापक सामरिक साझेदारी के अंतर्गत भारत–यूनाइटेड किंगडम के रणनीतिक संबंधों को अधिक सुदृढ़ किए जाने की अपेक्षा है।
- यह संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया तथा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के सदस्य देशों के साथ भारत के हालिया व्यापार समझौतों का पूरक है तथा व्यापक आगामी पीढ़ी के मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में भारत के बढ़ते कदम को दर्शाता है।
- यह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ उच्च गुणवत्ता वाले व्यापार समझौते संपन्न करने तथा विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के भारत के उद्देश्य के अनुरूप है।
भारत को होने वाले व्यापारिक लाभ
- वस्तुओं के लिए बेहतर बाजार पहुँच: यूनाइटेड किंगडम तत्काल प्रभाव से 96.8 प्रतिशत शुल्क पंक्तियों पर सीमा शुल्क समाप्त करेगा, जो भारत के कुल निर्यात मूल्य का 97.7 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती हैं।
- इसके अतिरिक्त 2 प्रतिशत शुल्क पंक्तियों पर कोटा-आधारित सीमा शुल्क रियायतें प्रदान की जाएँगी, जो कुल व्यापार मूल्य का 1.8 प्रतिशत हैं।
- इस प्रकार कुल मिलाकर 98.8 प्रतिशत शुल्क पंक्तियों तथा भारत के 99.5 प्रतिशत व्यापार मूल्य को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में अधिमान्य पहुँच प्राप्त होगी।
- प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र: वस्त्र एवं परिधान उद्योग।
- चमड़ा एवं चमड़े से बने उत्पाद।
- रत्न एवं आभूषण।
- अभियांत्रिकी उत्पाद।
- समुद्री उत्पाद।
- रसायन।
- कृषि उत्पाद।
- प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद।
- इससे विश्व के प्रमुख विकसित बाजारों में से एक में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होने की संभावना है।
- गैर-शुल्कीय बाधाओं में कमी: इस समझौते में स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपाय (एसपीएस) तथा व्यापार में तकनीकी बाधाएँ (टीबीटी) पर पृथक अध्याय सम्मिलित किए गए हैं।
- इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियामकीय मानक पारदर्शी, वैज्ञानिक आधार पर आधारित हों तथा व्यापार के लिए अनावश्यक बाधा न बनें।
- भारत के सेवा क्षेत्र को प्रोत्साहन: सीईटीए के अंतर्गत यूनाइटेड किंगडम ने कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाओं, परामर्श सेवाओं तथा पर्यावरणीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए बेहतर बाजार पहुँच उपलब्ध कराई है।
- भारतीय कंपनियाँ यूनाइटेड किंगडम में अपनी शाखाएँ, सहायक कंपनियाँ तथा प्रतिनिधि कार्यालय स्थापित कर वहाँ दीर्घकालिक व्यावसायिक उपस्थिति सुनिश्चित कर सकेंगी।
द्वैध अंशदान अभिसमय
- पूर्व में यूनाइटेड किंगडम में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय पेशेवरों को भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के साथ-साथ यूनाइटेड किंगडम की राष्ट्रीय बीमा (सामाजिक सुरक्षा) प्रणाली में भी अंशदान करना पड़ता था।
- जबकि अधिकांश भारतीय पेशेवर यूनाइटेड किंगडम में पाँच वर्ष से कम समय तक ही कार्यरत रहते हैं, वहीं वहाँ सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त करने के लिए सामान्यतः लगभग दस वर्ष तक अंशदान करना आवश्यक होता है।
- परिणामस्वरूप भारतीय पेशेवरों को दोहरा अंशदान करना पड़ता था, जबकि उसके अनुरूप लाभ प्राप्त नहीं हो पाते थे।
- अब भारतीय कर्मचारी एवं उनके नियोक्ताओं को अधिकतम पाँच वर्ष तक यूनाइटेड किंगडम की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में अंशदान नहीं करना होगा, बशर्ते वे भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में अपना अंशदान जारी रखें।
- अपेक्षित लाभ: यूनाइटेड किंगडम में कार्यरत लगभग 90 प्रतिशत भारतीय पेशेवरों को लाभ मिलेगा।
- लगभग 75,000 भारतीय कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
- 900 से अधिक नियोक्ताओं को लाभ प्राप्त होगा।
- वेतन का लगभग 23 प्रतिशत, जो अन्यथा यूनाइटेड किंगडम की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में अंशदान के रूप में देना पड़ता, उसकी बचत होगी।
- द्वैध अंशदान अभिसमय विदेशी रोजगार की लागत को उल्लेखनीय रूप से कम करेगा तथा भारतीय सेवा प्रदाताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।
यूनाइटेड किंगडम के लाभ
- भारतीय बाजार तक बेहतर पहुँच: भारत तत्काल प्रभाव से कुल व्यापार मूल्य के 30.3 प्रतिशत पर सीमा शुल्क समाप्त करेगा।
- अतिरिक्त 47 प्रतिशत व्यापार पर सीमा शुल्क को चरणबद्ध रूप से समाप्त किया जाएगा।
- 12.1 प्रतिशत व्यापार पर कोटा-आधारित सीमा शुल्क रियायतें प्रदान की जाएँगी।
- कुल मिलाकर 89.5 प्रतिशत शुल्क पंक्तियों तथा 89.4 प्रतिशत व्यापार मूल्य को अधिमान्य व्यवहार प्राप्त होगा।
- उपभोक्ताओं को लाभ: भारत में स्कॉच व्हिस्की, उच्च श्रेणी की ब्रिटिश कारें, अभियांत्रिकी उत्पाद तथा औद्योगिक मशीनरी अपेक्षाकृत सस्ती होने की संभावना है।
- सेवा क्षेत्र का उदारीकरण: भारत ने यूनाइटेड किंगडम की कंपनियों के लिए लेखांकन, लेखा-परीक्षण, वित्तीय सेवाएँ, दूरसंचार तथा पर्यावरणीय सेवाओं सहित कुछ चयनित सेवा क्षेत्रों को खोल दिया है।
- समझौते में निर्धारित प्रतिबद्धताओं के अधीन पात्र ब्रिटिश कंपनियाँ भारत में व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित किए बिना भी सेवाएँ प्रदान कर सकेंगी।
- भारत ने विधि एवं लेखांकन जैसे क्षेत्रों में यूनाइटेड किंगडम की कुछ व्यावसायिक योग्यताओं को लागू नियामकीय प्रक्रियाओं के माध्यम से मान्यता प्रदान करने में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की है।
समझौते से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ
- घरेलू उद्योग की चिंताएँ: यूनाइटेड किंगडम से आयात बढ़ने के कारण मोटर वाहन तथा मादक पेय पदार्थों जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
- प्रभावी क्रियान्वयन: सीमा शुल्क रियायतों, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं तथा नियामकीय प्रतिबद्धताओं का सुचारु एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
- गैर-शुल्कीय बाधाएँ: समझौते के बाद भी मानकों, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपायों तथा व्यापार में तकनीकी बाधाओं से संबंधित भिन्नताएँ बाजार पहुँच को प्रभावित कर सकती हैं।
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की तैयारी: एमएसएमई को यूनाइटेड किंगडम के गुणवत्ता मानकों का अनुपालन करने तथा मुक्त व्यापार समझौते के लाभों का प्रभावी उपयोग करने के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी।
- सेवाओं एवं कौशलों की मान्यता: व्यावसायिक योग्यताओं की समयबद्ध मान्यता तथा कुशल पेशेवरों की सुगम गतिशीलता सुनिश्चित करना अभी भी महत्त्वपूर्ण बना हुआ है।
- व्यापार घाटे का जोखिम: समझौते का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि आयात में वृद्धि के साथ-साथ निर्यात में भी समुचित वृद्धि हो।
- जागरूकता एवं उपयोग: विशेष रूप से निर्यातकों तथा सामान्य रूप से व्यवसायों को सीईटीए के प्रावधानों के संबंध में अधिक जागरूक बनाया जाना आवश्यक है, ताकि वे उपलब्ध अधिमान्य लाभों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
सुदृढ़ीकरण के उपाय
- निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्साहन: यूनाइटेड किंगडम के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पाद गुणवत्ता, नवाचार तथा मानकों के अनुपालन में सुधार कर बाजार पहुँच को अधिकतम किया जाए।
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को समर्थन: एमएसएमई को वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी उन्नयन तथा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सशक्त बनाया जाए, ताकि वे भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते से उपलब्ध अवसरों का प्रभावी लाभ उठा सकें।
- व्यापार सुगमता में सुधार: सरलीकृत सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, डिजिटल व्यापार को बढ़ावा तथा मुक्त व्यापार समझौते के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से व्यापारिक लेन-देन की लागत में कमी लाई जाए।
- निर्यात का विविधीकरण: औषधि उद्योग, अभियांत्रिकी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र उद्योग तथा सेवा क्षेत्र में मूल्य संवर्धित निर्यात को प्रोत्साहित किया जाए।
- कौशल विकास: पेशेवरों को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान किया जाए तथा व्यावसायिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता को प्रोत्साहित किया जाए।
- संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी: घरेलू उद्योगों पर समझौते के प्रभाव का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर समझौते के प्रावधानों के अनुरूप संरक्षणात्मक उपाय लागू किए जाएँ।
- निवेश एवं नवाचार को प्रोत्साहन: दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने के लिए द्विपक्षीय निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा संयुक्त अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित किया जाए।
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