वर्ष 2030 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता विश्व की कुल विद्युत खपत का 3% उपभोग कर सकती है: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट 

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • संयुक्त राष्ट्र की “कृत्रिम बुद्धिमत्ता की पर्यावरणीय लागत” शीर्षक रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि वर्ष 2030 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विश्व की कुल विद्युत खपत का लगभग 3 प्रतिशत उपभोग कर सकती है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • जल एवं विद्युत खपत: दशक के अंत तक एआई से संबंधित जल खपत 1.3 अरब लोगों की वार्षिक बुनियादी घरेलू जल आवश्यकताओं के बराबर हो सकती है।
    • वर्ष 2030 तक डेटा केंद्र प्रतिवर्ष लगभग 945 टेरावाट-घंटे विद्युत का उपभोग कर सकते हैं।
    • यह मात्रा पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया की संयुक्त वार्षिक विद्युत खपत से लगभग तीन गुना अधिक होगी।
  • जल एवं भूमि पदचिह्न : डेटा केंद्रों द्वारा उपयोग की जाने वाली प्रत्येक विद्युत इकाई के साथ एक “जल पदचिह्न” भी जुड़ा होता है, जो शीतलन एवं ऊर्जा उत्पादन में प्रयुक्त जल को दर्शाता है।
    • इसके अतिरिक्त, विद्युत उत्पादन तथा आपूर्ति शृंखलाओं से संबंधित “भूमि पदचिह्न” भी उत्पन्न होता है।
    • परिणामस्वरूप, एआई अवसंरचना का प्रभाव केवल ऊर्जा खपत तक सीमित न होकर प्राकृतिक संसाधनों एवं भूमि उपयोग पर भी पड़ता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट : रिपोर्ट बढ़ती हुई इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट की चुनौती के प्रति चेतावनी देती है।
    • अनुमान है कि वर्ष 2030 तक एआई अवसंरचना प्रतिवर्ष 25 लाख टन तक इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट उत्पन्न कर सकती है।
    • इस अपशिष्ट का बड़ा भार निम्न-आय वाले देशों पर पड़ने की संभावना है, जहाँ सुरक्षित निस्तारण की क्षमता सीमित है।
    • एआई हार्डवेयर के लिए आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन से भी पर्यावरणीय क्षरण तथा खनन क्षेत्रों में सामाजिक असमानताओं को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • वैश्विक असमानताएँ: एआई-विशेषीकृत संगणन क्षमता का 90 प्रतिशत से अधिक भाग केवल दो देशों—संयुक्त राज्य अमेरिका तथा चीन—में केंद्रित है।
    • इसके विपरीत, 150 से अधिक देशों में उल्लेखनीय घरेलू एआई अवसंरचना का अभाव है।
    • यह असंतुलन न केवल आर्थिक अवसरों को सीमित करता है, बल्कि पर्यावरणीय न्याय से जुड़े प्रश्न भी उत्पन्न करता है।
    • अनेक देशों को एआई विकास की पर्यावरणीय लागत वहन करनी पड़ती है, जबकि उन्हें उससे प्राप्त आर्थिक लाभों में समुचित भागीदारी नहीं मिलती।

आगे की राह

  • रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि प्रौद्योगिकी का विकास पृथ्वी की पर्यावरणीय सीमाओं के अंदर सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।
  • अध्ययन में “उत्तरदायी एआई पारिस्थितिकी तंत्र” के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जो निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है—
    • पारदर्शिता 
    • अभिकल्पना द्वारा दक्षता 
    • समानता 
    • जीवनचक्र उत्तरदायित्व
    • वैश्विक सहयोग 
    • सतत उपयोग 
  • सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे एआई अवसंरचना को ऊर्जा, जल तथा भूमि उपयोग नियोजन में समाहित करें।
  • कंपनियों को ऐसे एआई तंत्र विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जो संसाधनों की खपत को न्यूनतम रखें।
  • उपयोगकर्ताओं की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है; उन्हें जहाँ संभव हो, कम पर्यावरणीय प्रभाव वाले अनुप्रयोगों का चयन करना चाहिए।
  • अंततः, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य केवल तकनीकी नवाचार पर नहीं, बल्कि वर्तमान में किए जाने वाले शासन एवं नीतिगत निर्णयों पर भी निर्भर करेगा।

स्रोत: UN

 

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