पाठ्यक्रम: GS1/जलवायु विज्ञान
संदर्भ
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 4 जून 2026 को केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन की पुष्टि की। यह भारत में वर्षा ऋतु की आधिकारिक शुरुआत को दर्शाता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून
- आगमन और वापसी: भारत में मानसून का आगमन सामान्यतः जून के प्रारंभ में होता है और सितंबर तक रहता है।
- मानसून की शुरुआत भारतीय महासागर से आने वाली आर्द्र वायु के आगमन से होती है।
- मानसून की वापसी सामान्यतः अक्टूबर में होती है।
- अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाला उत्तर-पूर्व मानसून दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में वर्षा लाता है।
- मानसून की गतिशीलता: एल नीनो और ला नीना जैसी घटनाएँ मानसून की शक्ति और वितरण को प्रभावित कर सकती हैं।
- कृषि पर प्रभाव: मानसून की सफलता सीधे फसल उत्पादन को प्रभावित करती है और इसके परिणामस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ता है।

एल नीनो क्या है
- “एल नीनो” का अर्थ स्पेनिश भाषा में “छोटा लड़का” है। यह एक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान समय-समय पर बढ़ जाता है।
- एल नीनो के दौरान व्यापारिक हवाएँ कमजोर हो जाती हैं।
- गर्म जल अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर बढ़ता है और ठंडा जल एशिया की ओर प्रवाहित होने लगता है।

एल नीनो का मौसम पर प्रभाव
- वैश्विक तापमान वृद्धि: एल नीनो वैश्विक तापमान में वृद्धि करता है, जिससे विश्वभर में सामान्य से अधिक उष्ण परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।
- भारतीय मानसून में व्यवधान: भारत में एल नीनो सामान्यतः मानसून को कमजोर करता है, जिससे वर्षा कम होती है और सूखे की स्थिति बन सकती है।
- जंगल की आग का खतरा: एल नीनो ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में जंगल की आग की संभावना बढ़ा देता है।
- चरम मौसम घटनाएँ: एल नीनो तूफानों, हरिकेन और चक्रवातों जैसी चरम मौसम घटनाओं को तीव्र कर सकता है, विशेषकर प्रशांत एवं अटलांटिक महासागर में।
स्रोत: TH