पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत का मध्यम वर्ग बढ़ती आय, विस्तारित अवसरों और सरकार द्वारा संचालित अनेक सुधारों के संयुक्त प्रभाव से एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
मध्यम वर्ग कौन है?
- मध्यम वर्ग का निर्धारण क्रय-शक्ति, शिक्षा स्तर, सामाजिक सेवाओं तक पहुँच तथा समृद्धि की धारणा जैसे विभिन्न कारकों से होता है।
- विश्व बैंक द्वारा व्यापक रूप से प्रयुक्त एक मानक के अनुसार, देशों का वार्षिक वर्गीकरण प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) के आधार पर किया जाता है, जो सभी क्षेत्रों की प्राथमिक आय के मूल्य को दर्शाता है।
- वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए अमेरिकी डॉलर में अद्यतन देश-आय वर्गीकरण इस प्रकार हैं:
- निम्न आय : ≤ $1,135
- निम्न-मध्यम आय : $1,136 – $4,495
- उच्च-मध्यम आय : $4,496 – $13,935
- उच्च आय : > $13,935
भारत में मध्यम वर्ग
- वर्ष 2010 में विश्व का अधिकांश मध्यम वर्ग OECD अर्थव्यवस्थाओं में संकेंद्रित था, किंतु यह स्थिति तीव्रता से बदल गई है।
- 2009 से 2017 के बीच वैश्विक मध्यम वर्ग की जनसंख्या 1.8 अरब से बढ़कर 3.5 अरब हो गई, जिसमें एशिया का योगदान लगभग 40% रहा।
- 2011 से 2019 के मध्य भारत की प्रति व्यक्ति GDP में 53% की वृद्धि हुई, जबकि 1995 से 2021 के दौरान देश का मध्यम वर्ग 6.3% की वार्षिक दर से विस्तारित हुआ।
- वर्तमान में मध्यम वर्ग भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 31% हिस्सा है।
- OECD के अनुमानों के अनुसार, 2030 से 2035 के बीच भारत मध्यम वर्ग की कुल संख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकता है।
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) का अनुमान है कि 2036 तक भारत का मध्यम वर्ग और समृद्ध उपभोक्ता देश के कुल उपभोक्ता व्यय का 93% हिस्सा होंगे, जबकि 2026 में यह हिस्सा 80% है।
- WEF के अनुसार लगभग 500 नए “उपभोक्ता शहर” उभरेंगे तथा शहरी उपभोग वृद्धि का 93% हिस्सा देश के पाँच सबसे बड़े महानगरों के बाहर के क्षेत्रों से आएगा।
भारत में बढ़ते मध्यम वर्ग का महत्व
- आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन: घरेलू उपभोग को प्रोत्साहन देकर विभिन्न क्षेत्रों में वस्तुओं और सेवाओं की मांग में वृद्धि करता है।
- कराधान आधार का विस्तार: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों के माध्यम से सरकारी राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- मानव पूंजी विकास: शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास में निवेश कर कार्यबल की उत्पादकता को बढ़ाता है।
- उद्यमिता एवं नवाचार को प्रोत्साहन :निवेश और बाजार मांग के माध्यम से स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा तकनीकी नवाचार को समर्थन प्रदान करता है।
- लोकतंत्र एवं सुशासन का सुदृढ़ीकरण: अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण की मांग करता है।
- शहरीकरण एवं डिजिटलीकरण को गति प्रदान करना: शहरों, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को प्रोत्साहित करता है।
- सामाजिक गतिशीलता एवं गरीबी उन्मूलन में सहायता: ऊर्ध्वगामी सामाजिक गतिशीलता के अवसर सृजित करता है तथा आकांक्षी वर्ग का विस्तार कर समय के साथ गरीबी को कम करने में सहायता करता है।
मध्यम वर्ग के समक्ष चुनौतियाँ
- वेतन वृद्धि में ठहराव एवं रोजगार असुरक्षा: संविदात्मक रोजगार, स्वचालन और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगारों के सीमित सृजन के कारण रोजगार संबंधी अनिश्चितता बढ़ रही है।
- जीवन-यापन की उच्च लागत: आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवश्यक वस्तुओं में मुद्रास्फीति से उपलब्ध आय प्रभावित होती है।
- कर भार: मध्यम वर्ग प्रत्यक्ष करों का बड़ा हिस्सा वहन करता है, जबकि उसे अपेक्षाकृत सीमित कल्याणकारी लाभ प्राप्त होते हैं।
- स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर बढ़ता व्यय: सार्वजनिक सेवाओं की सीमाओं के कारण निजी संस्थानों पर निर्भरता वित्तीय दबाव बढ़ाती है।
- सीमित सामाजिक सुरक्षा: अनेक मध्यम वर्गीय परिवारों के पास पर्याप्त पेंशन, बेरोजगारी लाभ और आय-सुरक्षा का अभाव है।
- आवास की वहनीयता संबंधी समस्याएँ: तीव्र शहरीकरण और बढ़ती रियल एस्टेट कीमतों के कारण, विशेषकर महानगरों में, घर खरीदना कठिन होता जा रहा है।
- ऋण एवं वित्तीय संवेदनशीलता: गृह, शिक्षा एवं व्यक्तिगत ऋणों पर बढ़ती निर्भरता परिवारों को आर्थिक आघातों और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
सरकारी समर्थन
- कर सुधारों से उपलब्ध आय में वृद्धि: 2023 में लागू नई कर व्यवस्था तथा आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप ₹12 लाख तक की वार्षिक आय वाले व्यक्तियों को आयकर नहीं देना पड़ता।
- GST से कर भार में कमी: वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने कई आवश्यक वस्तुओं पर कर भार कम किया है, अनुपालन को सरल बनाया है तथा वहनीयता में सुधार किया है।
- पेंशन, बीमा एवं बैंकिंग सहायता को सुदृढ़ता: भारत प्रीमियम मात्रा के आधार पर विश्व का 10वाँ सबसे बड़ा बीमा बाजार बन चुका है।
- घरेलू निवेशों में बीमा एवं पेंशन निधियों का हिस्सा FY19 के 28.6% से बढ़कर FY25 में 29.6% हो गया।
- कम ब्याज दरों से वहनीयता में सुधार: 2015 में 9.5% से 10.5% के बीच रहने वाली ब्याज दरें 2025 तक घटकर लगभग 7.35% से 8.75% के बीच आ गईं।
- व्यक्तिगत ऋणों की ब्याज दर 2014 के 14.25% से घटकर 2026 में 12.5% हो गई, जबकि शिक्षा ऋणों की दर 14.25% से घटकर 9.4% रह गई।
- मुद्रा ऋण से उद्यमिता को प्रोत्साहन : 2015 में प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) छोटे व्यवसायों के लिए बिना जमानत वित्तपोषण का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरी है।
- बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार: नल जल कनेक्शनों की संख्या 2019 में 3.23 करोड़ से बढ़कर मई 2026 तक 15.85 करोड़ हो गई है।
- अधिक घरों तक विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति: भारत में ऊर्जा की कमी FY14 के 4.2% से घटकर FY26 में मात्र 0.03% रह गई है।
- स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा रोजगार सृजन: भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र अत्यधिक विस्तार कर चुका है।
- मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2016 में मात्र 502 से बढ़कर मार्च 2026 तक 2.23 लाख से अधिक हो गई।
- इन स्टार्टअप्स ने लगभग 23.3 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं।
- मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से लगभग 48% में कम-से-कम एक महिला निदेशक या साझेदार है।
निष्कर्ष
- विगत वर्षों में कराधान, सामाजिक सुरक्षा, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना तथा डिजिटल प्रशासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों ने भारत के मध्यम वर्ग के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- बढ़ती आय और विस्तारित अवसरों के साथ यह वर्ग उपभोग, उद्यमिता और आर्थिक विकास की एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है तथा वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
स्रोत: PIB
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