भारत की परिवर्तित औद्योगिक संरचना को प्रतिबिंबित करने वाली नई औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) शृंखला 

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 2022–23 को आधार वर्ष मानते हुए संशोधित अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) शृंखला जारी की है, जिसने पूर्ववर्ती 2011–12 शृंखला को प्रतिस्थापित किया।
    • नई शृंखला के अंतर्गत प्रथम रिपोर्ट में अप्रैल 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन में 4.9% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका नेतृत्व सुदृढ़ विनिर्माण गतिविधियों ने किया।

आधार वर्ष संशोधन की आवश्यकता

  • IIP औद्योगिक गतिविधि का एक प्रमुख अल्पकालिक संकेतक है, जिसका उपयोग सरकार, RBI और शोधकर्ता नीति निर्माण, पूर्वानुमान एवं राष्ट्रीय लेखा के लिए करते हैं।
  • विगत IIP आधार वर्ष संशोधन 2011–12 में हुआ था। इसके पश्चात औद्योगिक उत्पादन में तकनीकी परिवर्तन, उत्पाद विविधीकरण और डिजिटलीकरण हुआ है।
    • भारत की आर्थिक संरचना परिवर्तित हुई है: सकल मूल्य वर्धन (GVA) में सेवाओं का योगदान 62.5%, कृषि का 15% और उद्योग का 22% है, जो विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।
  • MoSPI की TAC–IIP समिति ने 2022–23 को आधार वर्ष के रूप में अपनाने की सिफारिश की है ताकि संरचनात्मक और तकनीकी परिवर्तनों को बेहतर रूप  से दर्शाया जा सके।
  • संयुक्त राष्ट्र ने अनुशंसा की है कि सूचकांक संख्या का आधार काल प्रत्येक पाँच वर्ष में संशोधित किया जाना चाहिए।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)

  • IIP अर्थव्यवस्था के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन को मापता है।
    • यह औद्योगिक प्रदर्शन और समग्र आर्थिक गतिविधि का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
  • जारीकर्ता: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), MoSPI
  • आवृत्ति: मासिक आधार पर

संशोधित IIP शृंखला की प्रमुख विशेषताएँ

  • विस्तारित क्षेत्रीय कवरेज: प्रथम बार IIP ने पारंपरिक खनन, विनिर्माण और विद्युत क्षेत्रों से आगे बढ़कर गैस आपूर्ति, जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों को शामिल किया है।
  • अद्यतन उत्पाद टोकरी: नई शृंखला में 1,042 उत्पादों को 463 समूहों में वर्गीकृत किया गया है, जबकि पूर्ववर्ती शृंखला में 839 उत्पाद और 407 समूह थे।
    • नए उत्पाद: CCTV कैमरे, विमान एवं अंतरिक्ष यान के पुर्ज़े, नॉन-वोवन वस्त्र, स्टेंट और टीके।
    • प्रतिस्थापित किए गए उत्पाद: मिट्टी का तेल, फ्लोरोसेंट ट्यूब और CFL।
  • संशोधित क्षेत्रीय वर्गीकरण: खनन डेटा अब ईंधन खनिज, धात्विक खनिज (दुर्लभ पृथ्वी खनिज सहित) और अधात्विक खनिज (लघु खनिज सहित) के लिए अलग-अलग संकलित किया जाता है।
    • विद्युत उत्पादन को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय स्रोतों के लिए पृथक-पृथक ट्रैक किया जाता है।
  • भारों का अद्यतन: भार GVA अनुमानों और 2022–23 की औद्योगिक वार्षिक सर्वेक्षण से लिए गए हैं।
    • विद्युत के भार राजस्व हिस्सेदारी पर आधारित हैं, जबकि खनन भार खनिजों के योगदान को दर्शाते हैं।
  • NIC 2025 का समावेश: नई शृंखला में NIC 2025 को शामिल किया गया है और गैर-प्रचालित कारखानों को प्रतिस्थापित करने का प्रावधान है।
  • लिंकिंग फैक्टर: पुराने और नए शृंखला की तुलना हेतु MoSPI ने लिंकिंग फैक्टर जारी किए हैं:
    • खनन और उत्खनन: 1.1890
    • विनिर्माण: 1.3700
    • विद्युत: 1.8495
    • सामान्य सूचकांक: 1.3834
  • सुदृढ़ डेटा संग्रह ढाँचा: चार नए डेटा स्रोत एजेंसियाँ जोड़ी गई हैं — IREL (इंडिया) लिमिटेड, राज्य आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग।

संशोधित IIP शृंखला का महत्व

  • नए क्षेत्रों और उत्पादों का समावेश औद्योगिक मापन को अधिक व्यापक बनाता है।
  • संशोधित पद्धति औद्योगिक आँकड़ों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को बढ़ाती है।
  • अद्यतन उत्पाद बास्केट तकनीकी प्रगति और उभरते उद्योगों को दर्शाती है।
  • संशोधित शृंखला भारत के औद्योगिक आँकड़ों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाती है।
  • पूँजीगत वस्तुओं का बेहतर मापन निवेश प्रवृत्तियों का आकलन सुदृढ़ करता है।

निष्कर्ष

  • नई IIP शृंखला भारत की आर्थिक संरचना और औद्योगिक परिदृश्य में हुए परिवर्तनों को दर्शाते हुए औद्योगिक वृद्धि का अधिक प्रतिनिधिक, विश्वसनीय और पद्धतिगत रूप से सुदृढ़ मापन प्रदान करती है।
  • यह उभरते क्षेत्रों, तकनीकी प्रगति और बदलते उत्पादन पैटर्न को अधिक प्रभावी रूप  से समाहित करती है, जिससे आर्थिक नीति निर्माण एवं औद्योगिक योजना के लिए साक्ष्य आधार सुदृढ़ होता है।

स्रोत: DD News

 

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