सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल शासन बोर्ड नियम तथा राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण नियम, 2026 अधिसूचित 

पाठ्यक्रम: GS2/शासन

संदर्भ

  • केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल बोर्ड) नियम, 2026 तथा राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • उद्देश्य: खेल प्रशासन को अधिक पारदर्शी, पेशेवर एवं डिजिटल रूप से संगठित बनाना।
  • राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल बोर्ड) नियम, 2026:
    • बोर्ड की संरचना, अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल, वेतन, भत्ते एवं सेवा की अन्य शर्तों का प्रावधान।
    • राष्ट्रीय खेल बोर्ड: इसमें एक अध्यक्ष और दो सदस्य होंगे, जिन्हें केंद्रीय सरकार खोज-एवं-चयन समिति द्वारा अनुशंसित नामों के पैनल से नियुक्त करेगी।
    • यह बोर्ड राष्ट्रीय खेल संस्थाओं को मान्यता प्रदान करने तथा शासन, वित्तीय एवं नैतिक मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने वाली केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा।
  • राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण) नियम, 2026:
    • न्यायाधिकरण के अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल, नियुक्ति एवं पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया, वेतन-भत्ते, सेवा शर्तें एवं न्यायाधिकरण की शक्तियों का प्रावधान।
    • समर्पित पोर्टल: विवादों, नोटिस, प्रत्युत्तर, दस्तावेज़ एवं स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने हेतु एक समर्पित पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा।
    • राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण: यह देश में खेल-संबंधी विवादों के लिए एक समर्पित न्यायिक निकाय के रूप में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य दीवानी न्यायालयों पर निर्भरता कम करना तथा स्वतंत्र, त्वरित, प्रभावी एवं किफ़ायती विवाद निपटान सुनिश्चित करना है।
    • न्यायाधिकरण के सदस्यों का कार्यकाल पाँच वर्ष निश्चित होगा।

राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025

  • यह अधिनियम राष्ट्रीय खेल संस्थाओं की मान्यता एवं उनके संचालन को विनियमित करने का प्रावधान करता है।
  • राष्ट्रीय खेल शासी संस्थाएँ: अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति, तथा प्रत्येक नामित खेल के लिए राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय खेल महासंघ स्थापित किए जाएंगे।
    • इन संस्थाओं को अपने संचालन हेतु समितियाँ गठित करनी होंगी, आचार संहिता लागू करनी होगी, तथा शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना होगा।
  • प्रशासनिक संरचना: प्रत्येक राष्ट्रीय खेल संस्था में एक सामान्य निकाय एवं अधिकतम 15 सदस्यों वाली कार्यकारी समिति होगी, जिसमें कम से कम दो उत्कृष्ट खिलाड़ी एवं चार महिलाएँ होंगी।
    • प्रत्येक संस्था में अध्यक्ष, महासचिव एवं कोषाध्यक्ष होंगे।
      • नियुक्ति हेतु व्यक्ति को या तो उत्कृष्ट खिलाड़ी होना चाहिए अथवा कार्यकारी समिति का सदस्य दो पूर्ण कार्यकाल तक रह चुका होना चाहिए।
      • कोई भी व्यक्ति इन पदों पर निरंतर तीन कार्यकाल से अधिक नहीं रह सकता।
  • राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB): यह राष्ट्रीय खेल संस्थाओं को मान्यता प्रदान करेगा एवं उनकी संबद्ध इकाइयों का पंजीकरण करेगा। केवल मान्यता प्राप्त संस्थाएँ ही केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के योग्य होंगी।
  • राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (NST): इसमें एक अध्यक्ष होगा जो सर्वोच्च न्यायालय  के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय  के मुख्य न्यायाधीश होंगे, तथा दो सदस्य होंगे जिन्हें खेल, लोक प्रशासन एवं विधि का अनुभव होगा।
    • नियुक्तियाँ खोज-एवं-चयन समिति की अनुशंसा पर होंगी।
    • न्यायाधिकरण को दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त होंगी।
    • इसके निर्णयों के विरुद्ध अपील सर्वोच्च न्यायालय  में होगी, सिवाय उन मामलों के जहाँ अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार अपील कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट, स्विट्ज़रलैंड में करनी आवश्यक हो।
  • चुनावों की निगरानी: केंद्र सरकार राष्ट्रीय खेल संस्थाओं के चुनावों की देखरेख हेतु राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारियों का पैनल स्थापित करेगी। प्रत्येक राष्ट्रीय खेल संस्था को अपनी संबद्ध इकाइयों के चुनावों की देखरेख हेतु निर्वाचन पैनल गठित करना होगा।
  • केंद्र सरकार की शक्तियाँ: केंद्र सरकार किसी राष्ट्रीय संस्था या उसकी संबद्ध इकाइयों को अधिनियम के किसी या सभी प्रावधानों से सार्वजनिक हित में उस खेल के संवर्धन हेतु छूट प्रदान कर सकती है।

महत्व

  • खेल शासन हेतु वैधानिक ढाँचा प्रदान करना: अधिनियम खेल संस्थाओं के विनियमन हेतु कानूनी रूप से लागू ढाँचा स्थापित करता है, जिससे पूर्ववर्ती कार्यकारी दिशा-निर्देशों एवं खेल संहिताओं पर आधारित व्यवस्था को प्रतिस्थापित करता है।
  • पारदर्शिता एवं जवाबदेही को प्रोत्साहन: पारदर्शी चुनाव, वित्तीय लेखा-परीक्षण, नैतिक मानक एवं जवाबदेही तंत्र लागू कर भ्रष्टाचार एवं कुप्रबंधन को कम करता है।
  • पेशेवर एवं लोकतांत्रिक प्रशासन को प्रोत्साहन: कार्यकाल सीमा, विश्राम अवधि एवं पेशेवरों की भागीदारी जैसी व्यवस्थाएँ शक्ति के केंद्रीकरण को कम करती हैं तथा संस्थागत दक्षता को बढ़ाती हैं।
  • खिलाड़ी प्रतिनिधित्व एवं कल्याण को सुदृढ़ करना: अधिनियम निर्णय लेने वाली संस्थाओं में खिलाड़ियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करता है तथा शिकायत निवारण एवं कल्याण तंत्र को सुदृढ़ बनाता है।
  • विवाद समाधान एवं नियामक निगरानी में सुधार करना: विशेष संस्थाएँ एवं नियामक तंत्र चयन, शासन एवं अनुशासन संबंधी विवादों के त्वरित निपटान में सहायक होते हैं।
  • भारत की वैश्विक खेल महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देना: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल शासन स्थापित कर यह अधिनियम भारत के खेल प्रदर्शन, वैश्विक विश्वसनीयता एवं प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की तैयारी को सुदृढ़ करता है।

Source: PIB

 

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