सरकार द्वारा जनांकिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने हेतु समिति का गठन 

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन

संदर्भ

  • केंद्र सरकार ने जनांकिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने हेतु एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर करेंगे।

समिति के उद्देश्य

  • जनांकिकीय परिवर्तनों का आकलन: समिति भारत में हो रहे जनांकिकीय परिवर्तनों का व्यापक आकलन करेगी, असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी तथा धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के स्तर पर परिवर्तनों का विश्लेषण करेगी।
  • कारणों की पहचान: समिति जनांकिकीय परिवर्तनों के संभावित कारणों की जाँच करेगी, जिनमें शामिल हैं:
    • अवैध सीमा-पार प्रवासन।
    • असामान्य बसावट पैटर्न।
    • योजनाबद्ध प्रवासन।
    • आर्थिक अवसरों से आकर्षित प्रवासन।
    • सामाजिक-पर्यावरणीय कारक।
  • जनसंख्या स्थिरीकरण: समिति जनसंख्या स्थिरीकरण एवं दीर्घकालिक जनांकिकीय निगरानी हेतु संस्थागत तंत्र की अनुशंसा करेगी।
  • अवैध प्रवासन प्रबंधन: समिति अवैध प्रवासियों की पहचान, निरोध प्रक्रियाएँ एवं निर्वासन तंत्र हेतु सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध व्यवस्था की अनुशंसा करेगी।
  • सीमा प्रबंधन सुदृढ़ करना: समिति बेहतर निगरानी प्रणाली, उन्नत पहचान तंत्र एवं एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाकर सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाएगी।

भारत में जनांकिकीय प्रवृत्तियाँ

  • प्रजनन दर में गिरावट: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) लगभग 2.0 तक घट गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से कम है।
    • यह इंगित करता है कि भारत राष्ट्रीय स्तर पर धीरे-धीरे जनसंख्या स्थिरीकरण की ओर बढ़ रहा है।
  • जन्म दर में गिरावट: नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत की जन्म दर 2014 में प्रति 1,000 जनसंख्या पर 21 से घटकर 2024 में 18.3 हो गई।
    • यह गिरावट बदलते जनांकिकीय पैटर्न, शहरीकरण में वृद्धि, साक्षरता में सुधार एवं स्वास्थ्य तथा परिवार नियोजन तक बेहतर पहुँच को दर्शाती है।

सीमा-संबंधी जनांकिकीय चुनौतियाँ

  • भारत–बांग्लादेश सीमा: भारत पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिज़ोरम में बांग्लादेश के साथ 4,096 किमी लंबी सीमा साझा करता है।
  • असम आंदोलन (1979-1985) अवैध प्रवासियों के विरुद्ध एक लोकप्रिय आंदोलन था, जिसका नेतृत्व ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) एवं ऑल असम गणा संग्राम परिषद (AAGSP) ने किया।
  • भारत–म्यांमार सीमा: भारत अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर एवं मिज़ोरम में म्यांमार के साथ 1,643 किमी लंबी सीमा साझा करता है।
  • 2021 में म्यांमार की सैन्य तख्तापलट के पश्चात राजनीतिक अस्थिरता के कारण चिन शरणार्थियों एवं रोहिंग्या प्रवासियों का मणिपुर एवं मिज़ोरम में आगमन बढ़ा।
  • भारत–पाकिस्तान सीमा: भारत पाकिस्तान के साथ 3,323 किमी लंबी सीमा साझा करता है।
  • जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से सीमा-पार घुसपैठ लंबे समय से आतंकवाद, उग्रवाद एवं आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी रही है।

जनांकिकीय परिवर्तन संबंधी चिंताएँ

  • राष्ट्रीय सुरक्षा एवं संप्रभुता: अवैध प्रवासन घुसपैठ, संगठित अपराध एवं सीमा अस्थिरता के जोखिम बढ़ाकर सुरक्षा चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है।
  • सामाजिक सद्भाव: धर्म, जातीयता या भाषा से जुड़े जनांकिकीय परिवर्तन सामाजिक तनाव, पहचान राजनीति एवं भूमि एवं रोजगार पर संघर्ष बढ़ा सकते हैं।
  • मणिपुर में कुकी एवं मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा भूमि, पहचान एवं जनांकिकीय चिंताओं पर आधारित तनाव को उजागर करती है।
  • संसाधन वितरण: बड़े पैमाने पर प्रवासन आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण योजनाओं एवं रोजगार अवसरों पर दबाव बढ़ा सकता है।
  • असम एवं त्रिपुरा के सीमा जिलों में अवैध प्रवासन के कारण भूमि अतिक्रमण, रोजगारों में प्रतिस्पर्धा एवं सार्वजनिक संसाधनों पर दबाव की चिंताएँ देखी गई हैं।
  • स्वदेशी एवं जनजातीय समुदायों का संरक्षण: विशेषकर उत्तर-पूर्व क्षेत्र में स्वदेशी एवं जनजातीय समुदाय सांस्कृतिक पहचान, भूमि अधिकार एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व समाप्त होने की आशंका व्यक्त करते हैं।

चुनौतियाँ

  • अद्यतन जनगणना डेटा का अभाव: भारत में अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि आगामी जनगणना 2027 में निर्धारित है। अद्यतन डेटा का अभाव जनांकिकीय आकलन एवं नीतिनिर्माण की सटीकता को प्रभावित कर सकता है।
  • मानवाधिकार संबंधी चिंताएँ: भेदभाव, सामाजिक ध्रुवीकरण एवं गलत बहिष्करण की संभावना को लेकर चिंताएँ हैं।
  • संघीय एवं प्रशासनिक चुनौतियाँ: विभिन्न राज्यों में प्रवासन-संबंधी मुद्दों पर राजनीतिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक प्रतिक्रियाएँ भिन्न हो सकती हैं।
  • सीमा प्रबंधन चुनौतियाँ: भारत पड़ोसी देशों के साथ लंबी एवं छिद्रपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ साझा करता है। प्रभावी सीमा प्रबंधन हेतु उन्नत निगरानी तकनीक, अवसंरचना विकास एवं बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय आवश्यक है।

आगे की राह

  • सीमा अवसंरचना सुदृढ़ करना: भारत को सीमा पर बाड़, निगरानी प्रणाली एवं तकनीकी निगरानी तंत्र में सुधार करना चाहिए ताकि अवैध घुसपैठ रोकी जा सके।
  • समय पर जनगणना करना: सरकार को समय पर जनगणना सुनिश्चित करनी चाहिए एवं सिविल पंजीकरण प्रणालियों को सुदृढ़ करना चाहिए ताकि साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण संभव हो।
  • संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करना: पहचान या निर्वासन से संबंधित कोई भी कार्रवाई विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करे एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करे।
  • समावेशी जनसंख्या नीतियाँ: जनसंख्या स्थिरीकरण उपायों को महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, जागरूकता कार्यक्रम एवं स्वैच्छिक परिवार नियोजन उपायों पर केंद्रित होना चाहिए। बाध्यकारी जनसंख्या नियंत्रण उपायों से बचना चाहिए।

Source: TH

 

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