पाठ्यक्रम: जीएस-2/राजव्यवस्था एवं शासन
सन्दर्भ
- पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के वित्त, बढ़ते राजनीतिक चंदे और चुनावी पारदर्शिता पर जारी बहस से राजनीतिक वित्तपोषण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आया है।
भारत में राजनीतिक दल और चुनावी वित्त
- राजनीतिक दल प्रतिनिधिक लोकतंत्र की एक अभिन्न विशेषता हैं। राजनीतिक दलों का संवैधानिक आधार मुख्यतः अनुच्छेद 19(1)(c) में पाया जाता है, जो नागरिकों को संघ बनाने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
- इन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत किया जाता है।
- मान्यता और चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया निर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 में प्रदान की गई है।
- RPA की धारा 29B राजनीतिक दलों को योगदान की अनुमति देती है। राजनीतिक दलों की आयकर संबंधी स्थिति मुख्यतः आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13A द्वारा नियंत्रित होती है, जो लेखांकन, लेखापरीक्षा और पारदर्शिता से संबंधित निर्धारित प्रतिबंधों के अधीन है।
- दानदाताओं को कानून के अधीन धारा 80GGB और 80GGC के तहत कटौती प्राप्त हो सकती है।
- इस प्रकार, राजनीतिक दल एक सार्वजनिक लोकतांत्रिक कार्य करते हैं, जबकि वे ऐसे कानूनी ढाँचे के अंतर्गत कार्य करते हैं जो कंपनियों या अन्य संस्थागत निकायों पर लागू नियामक व्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम व्यापक है।
राजनीतिक दलों को धन की आवश्यकता क्यों होती है?
राजनीतिक गतिविधियों में अनिवार्य रूप से व्यय शामिल होता है। दलों को निम्नलिखित के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है:
- चुनावी अभियानों और सार्वजनिक सभाओं के लिए;
- कार्यालयों और संगठनात्मक तंत्र के लिए;
- संचार और मतदाताओं तक पहुँच के लिए;
- अनुसंधान और नीतिगत कार्य के लिए;
- कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के प्रशिक्षण के लिए; तथा
- बढ़ते हुए डिजिटल और सोशल मीडिया अभियानों के लिए।
- इसलिए, मुद्दा यह नहीं है कि राजनीतिक दलों को धन प्राप्त करना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि वह धन कैसे जुटाया, घोषित और खर्च किया जाता है।
राजनीतिक संपदा का पैमाना
- वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान 22 राजनीतिक दलों के पास लगभग ₹18,742.31 करोड़ उपलब्ध थे।
- चुनाव की घोषणा और उसके पूरा होने के बीच उन्होंने अतिरिक्त ₹7,416.31 करोड़ जुटाए।
- चुनाव के बाद, उनके पास कथित रूप से ₹14,848.46 करोड़ शेष रहे, जबकि अभियान अवधि के दौरान चुनाव से संबंधित उनका घोषित व्यय ₹3,861.57 करोड़ था।
- इसी विश्लेषण का अनुमान है कि राजनीतिक चंदे से संबंधित कर छूट के कारण विचाराधीन दशक में लगभग ₹11,813 करोड़ का राजस्व प्राप्त नहीं हुआ।
- अध्ययन किए गए दलों में घोषित चंदे में तीव्र वृद्धि देखी गई, जो 2015-16 में ₹714 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹7,203 करोड़ हो गया।
- ये आँकड़े दर्शाते हैं कि राजनीतिक वित्तपोषण अब केवल एक सीमित चुनावी चिंता नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक जवाबदेही का एक आवश्यक पहलू बन गया है।
संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ
- पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPPs): ये ऐसे पंजीकृत राजनीतिक दल हैं जो राज्य या राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं।
- एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में RUPPs की आय में 223% की वृद्धि हुई।
- कुल 2,764 RUPPs में से केवल 739 ने अपने वित्तीय अभिलेख निर्वाचन आयोग (ECI) को प्रस्तुत किए थे।
- अगस्त 2025 में ECI ने कहा कि उसने अपनी चुनावी सफाई प्रक्रिया के तहत 2,854 RUPPs में से 334 को सूची से हटा दिया था।
- हालांकि, सूची से हटाना (delisting) और पंजीकरण रद्द करना (deregistration) दोनों अलग-अलग उपाय हैं।
- राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने का ECI का कानूनी अधिकार सीमित है और प्रवर्तन एक चिंता का विषय है।
- पारदर्शिता में कमी: राजनीतिक दलों के पास बड़ी मात्रा में धन है, लेकिन उसके प्रकटीकरण के लिए नियामक ढाँचा खंडित है।
- केवल खातों को दाखिल कर देना यह सुनिश्चित नहीं करता कि जनता राजनीतिक धन के स्रोत, गंतव्य और अंतिम लाभार्थियों को आसानी से समझ सके।
- यह मुद्दा वर्ष 2013 में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उस निर्णय के बाद प्रमुखता में आया, जिसमें प्रमुख राजनीतिक दलों पर सूचना का अधिकार (RTI) ढाँचा लागू होने से संबंधित निर्णय दिया गया था। संबंधित राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया था।
- चुनावी बॉण्ड: चुनावी बॉण्ड योजना (2018) की परिकल्पना राजनीतिक चंदे के लिए एक वैध बैंकिंग माध्यम उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन इसमें दाता का नाम जनता के सामने प्रकट नहीं किया जाता था।
- अन्य चुनौतियाँ: इनमें बढ़ती चुनावी लागत, वित्तीय संसाधनों तक असमान पहुँच, राजनीतिक दलों के खातों की जाँच की अनुपलब्धता, निष्क्रिय दलों को वित्तपोषण, तथा ऐसी एकल, सार्वजनिक रूप से खोज योग्य सूचना प्रणाली का अभाव शामिल हैं, जो राजनीतिक वित्त से संबंधित व्यापक आँकड़े उपलब्ध कराए।
प्रयास और उपाय
- न्यायपालिका:एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने चुनावी बॉण्ड योजना और उससे संबंधित कानून में किए गए संशोधनों को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया।
- न्यायालय ने राजनीतिक वित्त के संबंध में मतदाता के पारदर्शिता के अधिकार पर जोर दिया और यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक वित्तपोषण की व्यवस्था का चुनावी पारदर्शिता पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
- इससे पहले के न्यायिक हस्तक्षेपों ने भी सूचित मतदाताओं और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के बीच संबंध को प्रदर्शित किया है।
- निर्वाचन आयोग:निर्वाचन आयोग ने निष्क्रिय RUPPs के विरुद्ध कार्रवाई की है और कई बार चुनाव सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
- अनुच्छेद 324 उसे चुनावों के संचालन के संबंध में व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है, हालांकि ये शक्तियाँ मौजूदा कानूनों के अधीन रहती हैं।
- सरकार और कानूनी ढाँचा:प्रमुख सुरक्षा उपायों में RPA की धारा 29A, धारा 29B और 29C, निर्वाचन चिह्न आदेश तथा आयकर अधिनियम की धारा 13A शामिल हैं।
- दानदाता पक्ष से संबंधित कटौतियाँ अलग-अलग रूप से धारा 80GGB और 80GGC द्वारा नियंत्रित की जाती हैं।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग:एक केंद्रीय डिजिटल मंच राजनीतिक वित्त के प्रकटीकरण को अधिक सार्थक बना सकता है। यह दान, व्यय, लेखापरीक्षित खातों और अनुपालन स्थिति की मानकीकृत, खोज योग्य और मशीन-पठनीय रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान कर सकता है।
आगे की राह: चुनावी अखंडता को मजबूत करना
- एकसमान वित्तीय प्रकटीकरण: सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों के लिए आवश्यक किया जाए कि वे लेखापरीक्षित खातों, दानदाताओं की जानकारी और व्यय संबंधी आँकड़ों को निर्वाचन आयोग की एक सामान्य एवं खोज योग्य वेबसाइट पर अपलोड करें।
- स्वतंत्र लेखापरीक्षा: उचित कानूनी ढाँचे के साथ राजनीतिक दलों के खातों की अधिक मजबूत बाहरी लेखापरीक्षा कराई जाए, जिससे विश्वास बढ़ाया जा सके।
- पंजीकरण रद्द करने के स्पष्ट मानदंड: ऐसे दलों को लक्षित करने के लिए वस्तुनिष्ठ मानदंड निर्धारित किए जाने चाहिए जो पंजीकृत तो बने रहते हैं, लेकिन बार-बार चुनाव लड़ने में विफल रहते हैं।
- कर छूट का युक्तिकरण: कर संबंधी लाभ केवल औपचारिक पंजीकरण से नहीं, बल्कि वास्तविक लोकतांत्रिक और चुनावी गतिविधियों से जुड़े होने चाहिए।
- निर्वाचन आयोग की क्षमता को मजबूत करना: अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को चुनावों के संबंध में व्यापक संवैधानिक शक्तियाँ प्रदान करता है; इन शक्तियों को स्पष्ट वैधानिक अधिकारों और पर्याप्त जाँच-पड़ताल की क्षमता द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए।
- अधिक सार्वजनिक प्रकटीकरण: राजनीतिक वित्त इतना पारदर्शी होना चाहिए कि नागरिक यह समझ सकें कि राजनीतिक संगठनों को वित्तपोषित करने वाले कौन हैं और उन धनराशियों का उपयोग किस प्रकार किया जाता है।
निष्कर्ष
- राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए धन आवश्यक है, लेकिन धन से जुड़ी गोपनीयता इस प्रतिस्पर्धा में जनविश्वास को कमजोर कर सकती है।
- उद्देश्य राजनीतिक दलों को धन जुटाने से रोकना नहीं होना चाहिए; बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि नागरिक उचित रूप से यह जान सकें कि महत्वपूर्ण राजनीतिक धन कहाँ से आता है और उसका उपयोग कैसे किया जाता है।
- भारतीय लोकतंत्र के लिए व्यापक सिद्धांत सरल है: राजनीतिक वित्त मतदाता के सूचित विकल्प चुनने के अधिकार के अनुरूप होना चाहिए।
- चुनावी सुधार तब तक अधूरे रहेंगे, जब तक राजनीति के वित्तीय पक्ष को उतनी ही गंभीरता नहीं दी जाती जितनी स्वयं मतदान प्रक्रिया के संचालन को दी जाती है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत में राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। भारत की चुनावी व्यवस्था की अखंडता को मजबूत करने के लिए उपयुक्त सुधारों का सुझाव दीजिए। |
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