मनरेगा से VB-G RAM G तक: ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में संक्रमण 

पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/रोज़गार

संदर्भ

  • मनरेगा से VB-G RAM G तक संक्रमण ग्रामीण रोजगार सृजन में तीव्रता से गिरावट के साथ हुआ है, जिससे क्रियान्वयन, मजदूरी सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।

मनरेगा और VB-G RAM G के बारे में

  • मनरेगा (MGNREGA), जिसे 2005 में अधिनियमित किया गया था, एक अधिकार-आधारित, मांग-आधारित रोजगार गारंटी कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को मैनुअल कार्य करने की इच्छा होने पर अधिकतम 100 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की गारंटी प्रदान की जाती है।
    • यह आजीविका सुरक्षा, महिलाओं की भागीदारी, पंचायती राज संस्थाओं तथा टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण को बढ़ावा देता है।
  • VB-G RAM G ग्रामीण रोजगार और आजीविका के लिए केंद्र सरकार की नई रूपरेखा है।
    • इसका घोषित उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को सुदृढ़ करना तथा रोजगार सृजन को बुनियादी ढाँचे, आजीविका संवर्धन और व्यापक विकसित भारत विकास दृष्टिकोण के साथ एकीकृत करना है।

संक्रमण में प्रमुख परिवर्तन

  • इस संक्रमण में ग्रामीण रोजगार की संरचना और वित्तपोषण में महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं:
    • अधिक रोजगार गारंटी: नई रूपरेखा मनरेगा व्यवस्था के अंतर्गत उपलब्ध रोजगार अवधि से आगे गारंटीकृत रोजगार अवधि का विस्तार करने का प्रयास करती है।
    • राज्यों की अधिक भागीदारी: मुख्यतः केंद्र द्वारा वित्तपोषित मनरेगा के मजदूरी-रोजगार ढाँचे के विपरीत, VB-G RAM G में केंद्र और राज्यों के बीच अधिक लागत-साझेदारी की व्यवस्था की गई है।
    • योजना और अभिसरण: रोजगार संबंधी कार्यों को ग्रामीण बुनियादी ढाँचे, कृषि, जल प्रबंधन और आजीविका परिसंपत्तियों के साथ एकीकृत करने पर अधिक जोर दिया गया है।
    • प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी: पारदर्शिता और सत्यापन के लिए डिजिटल उपस्थिति, चेहरे की पहचान तथा अन्य प्रौद्योगिकी-आधारित तंत्रों पर बल दिया जा रहा है।
    • संशोधित मजदूरी व्यवस्था: नई प्रणाली के अंतर्गत मजदूरी दरों को अलग से अधिसूचित किया गया है।
  • नियमों और संबंधित अधिसूचनाओं के निर्माण के बाद 1 जुलाई 2026 से इस संक्रमण को औपचारिक रूप से क्रियान्वित किया गया।

संक्रमण का महत्व

  • यह सुधार ग्रामीण रोजगार नीति में कई प्रकार से संभावित सुधार ला सकता है:
    • अभिसरण: रोजगार पर किया गया व्यय उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण कर सकता है और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ कर सकता है।
    • आजीविका का विविधीकरण: मजदूरी रोजगार को कृषि, जल संरक्षण और संबद्ध गतिविधियों से जोड़ने से दीर्घकालिक आय के अवसरों में सुधार हो सकता है।
    • राजकोषीय पूर्वानुमेयता: निर्धारित वित्तपोषण व्यवस्था बजटीय योजना को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।
    • डिजिटल पारदर्शिता: प्रौद्योगिकी फर्जी लाभार्थियों, दोहरी उपस्थिति और धन के रिसाव को कम कर सकती है।
    • विकसित भारत का उद्देश्य: ग्रामीण रोजगार को समावेशी विकास, गरीबी उन्मूलन और सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के व्यापक लक्ष्यों के साथ जोड़ा जा सकता है।
  • अनुसंधान से यह भी स्पष्ट होता है कि रोजगार गारंटी योजनाएँ सामाजिक सुरक्षा, आय में स्थिरता, ग्रामीण मजदूरी निर्धारण और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी के महत्वपूर्ण साधन हैं।

संबंधित मुद्दे और चिंताएँ

  • तत्काल चिंता संक्रमण की अवधि के दौरान रोजगार सृजन में आई भारी गिरावट है।
    • अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच मनरेगा और VB-G RAM G ने मिलकर केवल लगभग 70 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार सृजित किया, जबकि विगत दो वर्षों की इसी अवधि में यह संख्या 119–128 करोड़ व्यक्ति-दिवस थी।
    • हाल के औसत की तुलना में इसमें लगभग 43% की गिरावट आई है।
  • जुलाई 2026 में विशेष रूप से तीव्र गिरावट देखी गई। यदि अंतिम रोजगार आँकड़ा लगभग 9 करोड़ व्यक्ति-दिवस रहता है, तब भी यह जुलाई 2025 की तुलना में 40% से अधिक कम होगा।
  • गरीब राज्यों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। 19 प्रमुख राज्यों में से 10 राज्यों में रोजगार सृजन में कथित तौर पर 60–85% की गिरावट आई।
    • मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड में अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान कुछ अवधियों में रोजगार सृजन लगभग ठप हो गया।
  • केंद्रीय बजट (2026-27) में VB-G RAM G के लिए ₹95,692 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
    • राज्य सरकारों के योगदान सहित कुल संसाधन लगभग ₹1.5 लाख करोड़ तक पहुँचने की उम्मीद थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में मनरेगा पर हुए व्यय से काफी अधिक है।
  • अन्य प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं:
    • क्रियान्वयन में व्यवधान: नियमों को लेकर भ्रम और कार्यों के आरंभ में देरी ने गर्मियों के महत्वपूर्ण कृषि-मंद मौसम के दौरान रोजगार को प्रभावित किया।
    • केंद्र-राज्य वित्तपोषण: राज्यों के अधिक योगदान से गरीब राज्यों की रोजगार सृजन की क्षमता सीमित हो सकती है।
    • डिजिटल बहिष्करण: चेहरे की पहचान और प्रौद्योगिकी-निर्भर उपस्थिति व्यवस्था कनेक्टिविटी, प्रमाणीकरण अथवा तकनीकी विफलताओं के कारण श्रमिकों को बाहर कर सकती है।
    • मजदूरी भुगतान में देरी: प्रशासनिक और तकनीकी बाधाएँ समय पर मजदूरी रोजगार के केंद्रीय उद्देश्य को कमजोर कर सकती हैं।
    • अंतर-राज्यीय असमानताएँ: कई बड़े और गरीब राज्यों में रोजगार में गिरावट विशेष रूप से गंभीर रही है।
    • मांग में कमी का आभास: यदि रोजगार तक पहुँच कठिन होने के कारण श्रमिक रोजगार की मांग करना बंद कर देते हैं, तो दर्ज रोजगार में कमी को गलत तरीके से रोजगार की कम मांग के रूप में देखा जा सकता है।

ग्रामीण रोजगार से संबंधित प्रयास

  • ग्रामीण रोजगार को एक व्यापक नीतिगत पारिस्थितिकी तंत्र के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें शामिल हैं:
    • DAY-NRLM: महिलाओं के स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका;
    • PM-KISAN: पात्र किसान परिवारों के लिए आय सहायता;
    • PMAY-G: ग्रामीण आवास और उससे संबंधित रोजगार;
    • PMGSY: ग्रामीण सड़क संपर्क;
    • Skill India/PMKVY: रोजगार क्षमता और कौशल विकास;
    • DDU-GKY: ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराना;
    • जलागम एवं सिंचाई कार्यक्रम: जलवायु-सुदृढ़ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण।

आगे की राह: भारत में ग्रामीण रोजगार को सुदृढ़ करना

  • उद्देश्य केवल एक योजना को दूसरी योजना से बदलना नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिकार-आधारित रोजगार गारंटी को बनाए रखते हुए क्रियान्वयन में सुधार करना होना चाहिए।
  • सरकार को कृषि के मंद मौसम के दौरान रोजगार की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए तथा ग्राम पंचायत स्तर पर योजना निर्माण को सुदृढ़ करना चाहिए।
  • केंद्र-राज्य वित्तपोषण की ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे गरीब राज्यों को रोजगार उपलब्ध कराने से हतोत्साहित न होना पड़े।
  • प्रौद्योगिकी सहायक साधन बनी रहनी चाहिए, बाधा नहीं। इसके लिए वैकल्पिक प्रमाणीकरण और ऑफलाइन व्यवस्थाएँ उपलब्ध होनी चाहिए।
  • मजदूरी का भुगतान समयबद्ध और पारदर्शी होना चाहिए तथा इसके साथ प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • सामाजिक अंकेक्षण, ग्राम सभा की निगरानी, मस्टर रोल का सार्वजनिक प्रकटीकरण और स्वतंत्र मूल्यांकन जवाबदेही के केंद्रीय आधार बने रहने चाहिए।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्]: मनरेगा से VB-G RAM G की ओर संक्रमण की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रोजगार गारंटी की अधिकार-आधारित प्रकृति को बनाए रखते हुए राजकोषीय स्थिरता और क्रियान्वयन की दक्षता में सुधार किया जाए। चर्चा कीजिए। 

स्रोत: TH

 

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