क्या गोबरधन (GOBARdhan) ईंधन दक्षता को प्रोत्साहन दे सकता है?

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण/ऊर्जा

संदर्भ 

  • भारत में घरेलू जैव-ऊर्जा उत्पादन को सुदृढ़ करने के लिए स्वीकृत गोबरधन योजना इस बात से जुड़े प्रश्न भी उठाती है कि भारत के प्रचुर मात्रा में उपलब्ध जैविक अपशिष्ट को घरेलू ऊर्जा के एक विश्वसनीय स्रोत में परिवर्तित करने में कौन-सी चुनौतियाँ हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत वर्तमान में अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग 50% आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।
  • हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास आपूर्ति मार्गों में उत्पन्न व्यवधानों ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन को सुदृढ़ करने के महत्त्व को रेखांकित किया है। इस मार्ग से भारत के लगभग 55–60% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात का परिवहन होता है।
  • इसीलिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गोबरधन (GOBARdhan), अर्थात् राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना को स्वीकृति दी।

गल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन (GOBARdhan)

  • गोबरधन योजना को मूल रूप से वर्ष 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) के एक अभिन्न घटक के रूप में शुरू किया गया था।
  • इसका उद्देश्य जैविक अपशिष्ट—जैसे पशुओं का अपशिष्ट, रसोई का बचा हुआ अपशिष्ट, फसल अवशेष और बाजारों से उत्पन्न अपशिष्ट—को बायोगैस तथा जैव-स्लरी में परिवर्तित करना है। इससे गाँवों में स्वच्छता सुनिश्चित करने और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में सहायता मिलती है।
  • पहले, संपीडित बायोगैस (CBG) से संबंधित पारिस्थितिकी तंत्र चार अलग-अलग मंत्रालयों के अंतर्गत संचालित होता था।
  • वर्ष 2026 में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इस पूरी योजना को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत समेकित कर दिया है।
  • कार्यान्वयन अवधि: वित्त वर्ष 2026–27 से वित्त वर्ष 2035–36 तक।
  • कुल परिव्यय: ₹23,731 करोड़।
  • एक दशक में अपेक्षित परिणाम :
    • आयात पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा में ₹40,000 करोड़ से अधिक की बचत होगी।
    • स्वच्छ, घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस के उपयोग से 10 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) जीवाश्म ईंधन की खपत का स्थान लिया जा सकेगा।
    • यह उद्योग राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में ₹75,000 करोड़ से अधिक का योगदान देगा।
    • अपशिष्ट को लैंडफिल में जाने से रोकने के कारण 40 मिलियन टन (MT) से अधिक CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी।
    • 250 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) जैविक उर्वरक का उत्पादन होगा।

गोबरधन के अंतर्गत विकास के छह प्रमुख आधार

  • CBG की सुनिश्चित खरीद: गोबरधन योजना उत्पादकों के लिए एक विश्वसनीय और पूर्वानुमेय बाजार उपलब्ध कराने हेतु CBG की खरीद सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित ढाँचा स्थापित करती है। नगर गैस वितरण (CGD) संस्थाओं द्वारा खरीद से अधिसूचित CBG दायित्व के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
    • वित्त वर्ष 2026–27 में 3%।
    • वित्त वर्ष 2027–28 में 4%।
    • वित्त वर्ष 2028–29 से आगे संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG—परिवहन) और पाइप्ड प्राकृतिक गैस (PNG—घरेलू) क्षेत्रों में 5%।
  • CBG के लिए स्थिर मूल्य निर्धारण ढाँचा : गोबरधन योजना सरकार द्वारा समर्थित ₹2,110 प्रति मीट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) का प्रशासित मूल्य निर्धारित करती है, जो ₹105 प्रति किलोग्राम CBG के बराबर है। इससे मूल्य स्थिरता और उत्पादकों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
  • पूँजीगत सहायता: पात्र नवीन CBG परियोजनाओं को स्थापित CBG क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन (TPD) अधिकतम ₹2 करोड़ तक की पूँजीगत सहायता प्रदान की जाएगी।
  • पाइपलाइन अवसंरचना का विकास: यह योजना क्लस्टर-आधारित और स्वतंत्र, दोनों प्रकार की पाइपलाइन अवसंरचना को समर्थन देती है। इसका उद्देश्य CBG संयंत्रों को मुख्य पाइपलाइनों और नगर गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ना है।
  • ऋण गारंटी सहायता : इस व्यवस्था के अंतर्गत ऐसी परियोजनाओं के लिए पात्र ऋणों पर 85% तक ऋण गारंटी कवरेज प्रदान किया जाएगा।
  • CBG पारिस्थितिकी तंत्र चुनौती निधि:  गोबरधन योजना जिला-स्तर पर कार्यान्वयन में तीव्रता लाने और संपूर्ण CBG पारिस्थितिकी तंत्र में स्थानीय मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक समर्पित CBG पारिस्थितिकी तंत्र चुनौती निधि स्थापित करती है।

परीक्षण के लिए प्रमुख मुद्दे

  • बिखरी हुई कच्चे माल की आपूर्ति: कृषि अवशेष और गोबर अनेक छोटे खेतों में बिखरे हुए होते हैं। इससे उनका एकत्रीकरण कठिन हो जाता है और खरीद लागत बढ़ जाती है।
  • मौसमी उपलब्धता और भंडारण: फसल अवशेष विशेष कटाई अवधियों के दौरान उत्पन्न होते हैं। पूरे वर्ष निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भंडारण अवसंरचना की आवश्यकता होती है।
  • उच्च परिवहन लागत: बायोमास का ऊर्जा घनत्व अपेक्षाकृत कम होता है। इसलिए इसे लंबी दूरी तक ले जाना महँगा पड़ता है, जिससे संयंत्रों की लाभप्रदता कम हो सकती है।
  • क्षेत्रीय असमानताएँ: स्थापित डेयरी सहकारी समितियों, संगठित कृषि नेटवर्क और बेहतर मशीनीकरण वाले क्षेत्रों में उन क्षेत्रों की तुलना में अधिक निवेश आकर्षित हो सकता है, जहाँ भूमि जोतें बिखरी हुई हैं और लॉजिस्टिक्स कमजोर हैं।
  • संयंत्रों की व्यवहार्यता: बायोगैस और CBG संयंत्रों के लिए कच्चे माल की विश्वसनीय आपूर्ति, उपयुक्त प्रौद्योगिकी एवं नियमित रखरखाव आवश्यक हैं।
  • वित्तीय चुनौतियाँ: उच्च प्रारंभिक निवेश, परिचालन लागत और बाजार से प्राप्त होने वाले प्रतिफल में अनिश्चितता परियोजनाओं की व्यवहार्यता को प्रभावित कर सकती है।

गोबरधन का महत्त्व 

  • ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू स्तर पर बायोगैस और CBG का उत्पादन आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर सकता है।
  • पर्यावरणीय लाभ: जैविक अपशिष्ट का उचित उपचार अनियंत्रित अपघटन और उससे उत्पन्न प्रदूषण को कम कर सकता है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था: अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र स्थानीय रोजगार सृजित कर सकते हैं और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान कर सकते हैं।
  • कृषि: अवायवीय पाचन के बाद बची सामग्री, जिसे डाइजेस्टेट कहा जाता है, का उपयोग जैविक मृदा-संशोधक के रूप में किया जा सकता है।
  • परिपत्र अर्थव्यवस्था: यह योजना अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा और संसाधनों की पुनर्प्राप्ति को एक-दूसरे से जोड़ती है।

आगे की राह 

  • जैविक अपशिष्ट के लिए स्थानीय संग्रहण और पृथक्करण प्रणालियों में सुधार किया जाए।
  • वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी तक पहुँच और रखरखाव क्षमता को सुदृढ़ किया जाए।
  • बायोगैस और CBG के लिए विश्वसनीय खरीद व्यवस्था तथा परिवहन अवसंरचना स्थापित की जाए।
  • स्थानीय निकायों, किसानों, सहकारी समितियों और निजी संचालकों के बीच समन्वय को बढ़ावा दिया जाए।
  • केवल स्थापित संयंत्रों की संख्या पर निर्भर रहने के बजाय उनके प्रदर्शन, ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरणीय परिणामों की निगरानी की जाए।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने, जैविक अपशिष्ट के प्रबंधन तथा ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने में गोबरधन (GOBARdhan) योजना की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इसके कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। 

स्रोत: BL

 

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