पाठ्यक्रम: GS2/ अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- वर्ष 2028–29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अस्थायी सदस्यता प्राप्त करने के प्रयास में भारत को एक कूटनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ताजिकिस्तान ने भी वर्ष 2027 के चुनाव से पहले एशिया-प्रशांत सीट के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)
- यह संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।
- इसका प्रथम सत्र 17 जनवरी, 1946 को वेस्टमिंस्टर, लंदन में आयोजित हुआ था।
- मुख्यालय: न्यूयॉर्क शहर।
- सदस्यता: परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं।
- वीटो शक्ति वाले पाँच स्थायी सदस्य: चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।
- दस अस्थायी सदस्य।
अस्थायी सदस्यों का निर्वाचन
- प्रत्येक वर्ष महासभा कुल 10 अस्थायी सदस्यों में से पाँच का निर्वाचन दो वर्ष के कार्यकाल के लिए करती है।
- 10 अस्थायी सीटों का क्षेत्रीय आधार पर वितरण निम्नलिखित है:
- अफ्रीकी और एशियाई देशों के लिए पाँच सीटें;
- पूर्वी यूरोपीय देशों के लिए एक सीट;
- लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के लिए दो सीटें;
- पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों के लिए दो सीटें।
- परिषद में निर्वाचित होने के लिए उम्मीदवार देशों को महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के मतों का दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करना आवश्यक है।
- चुनाव गुप्त मतदान के माध्यम से आयोजित किए गए, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों ने अपना मत डाला।
- संयुक्त राष्ट्र के 50 से अधिक सदस्य देश कभी भी सुरक्षा परिषद के सदस्य नहीं रहे हैं।
- भारत सुरक्षा परिषद में आठ कार्यकालों तक सदस्य रह चुका है। इसका सबसे हालिया कार्यकाल 2021–22 में था और अब वह 2028–29 के लिए अपने नौवें कार्यकाल की माँग कर रहा है।
भारत की UNSC उम्मीदवारी का महत्त्व
- संयुक्त राष्ट्र में सुधार: भारत समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और विकासशील देशों के हितों को प्रतिबिंबित करने के लिए सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन की अपनी माँग को फिर से उठा सकता है।
- वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधित्व: भारत विकास, संप्रभु समानता, जलवायु वित्त, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में समान प्रतिनिधित्व से संबंधित चिंताओं को उठा सकता है।
UNSC में सुधारों की आवश्यकता
- गैर-प्रतिनिधिक परिषद सदस्यता: वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय, संगठन के 51 सदस्य देशों में से 11 देश परिषद के सदस्य थे, जो लगभग 22% था।
- वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश हैं, जबकि परिषद में केवल 15 सदस्य हैं—अर्थात् 8% से भी कम।
- संघर्षों का समाधान करने में असमर्थता: परिषद की वर्तमान संरचना गंभीर संघर्षों का समाधान करने तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में असमर्थ दिखाई देती है।
- विश्व व्यवस्था में परिवर्तन: वर्ष 1945 के बाद से विश्व में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। इन नई वास्तविकताओं को स्थायी सदस्यता की संरचना में प्रतिबिंबित किया जाना आवश्यक है।
- वीटो शक्ति: वर्तमान में केवल पाँच स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति है। इसके उपयोग से उन्होंने यूक्रेन और गाजा जैसे क्षेत्रों में वैश्विक चुनौतियों एवं संघर्षों से निपटने के लिए परिषद की कार्रवाई को बाधित किया है।
- परिषद के शेष 10 सदस्य देशों का निर्वाचन दो वर्ष के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यों के रूप में किया जाता है और उनके पास वीटो शक्ति नहीं होती है।
- शक्ति का असंतुलन: परिषद की संरचना उस समय के शक्ति-संतुलन को भी अनुचित महत्त्व देती है।
- विश्व की लगभग 5% जनसंख्या वाले यूरोप का किसी भी वर्ष परिषद की 33% सीटों पर नियंत्रण रहता है। इसमें रूस को शामिल नहीं किया गया है, जो स्वयं एक अन्य यूरोपीय शक्ति है।
- वैधता: पाँच स्थायी सदस्यों के पास अत्यधिक शक्ति, विशेषकर उनकी वीटो शक्ति, होने के कारण व्यवस्था में अन्याय और वैधता की कमी की धारणा उत्पन्न होती है।
UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए भारत का पक्ष
- रणनीतिक प्रभाव: सदस्यता से भारत को अधिक कूटनीतिक दृश्यता प्राप्त होगी, विशेषकर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र हो रही है और वैश्विक गठबंधनों में बदलाव आ रहा है।
- जनसांख्यिकीय महत्त्व: विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत वैश्विक जनसंख्या के लगभग छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
- आर्थिक महाशक्ति: क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर भारत विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत की GDP (PPP) लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर होगी।
- भारत वैश्विक व्यापार प्रवाह, प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखलाओं, ऊर्जा बाजारों और विकास वित्त को प्रभावित करता है।
- सैन्य क्षमता में प्रगति: भारत के सशस्त्र बल विश्व के सबसे बड़े सैन्य बलों में शामिल हैं। भारत रक्षा पर सर्वाधिक व्यय करने वाले देशों में भी शामिल है और वर्ष 2026 में उसका रक्षा बजट रिकॉर्ड 86 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
- भारत वर्तमान में उन कुछ देशों में शामिल है जिनके पास विश्वसनीय परमाणु त्रय है।
- अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा में योगदान: वर्ष 1948 से भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में सबसे अधिक सैनिकों का योगदान देने वाले देशों में शामिल रहा है। इसके बावजूद, शांति स्थापना में योगदान देने वाले देशों में भारत के सैनिकों की मृत्यु की संख्या भी सबसे अधिक रही है।
- यह बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और प्रत्येक परिस्थिति में संयुक्त राष्ट्र के अधिदेशों का समर्थन करने की उसकी तत्परता को दर्शाता है।
- वैश्विक दक्षिण की आवाज: भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, G20 की अध्यक्षता तथा वैश्विक दक्षिण में AI इम्पैक्ट समिट जैसी पहलों के माध्यम से अपना नेतृत्व प्रदर्शित किया है।
- समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में हिंद महासागर में भारत की भूमिका नौवहन की स्वतंत्रता तथा समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) और अंतरराष्ट्रीय समुद्र विधि न्यायाधिकरण जैसी संस्थाओं के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सुधारों के समक्ष चुनौतियाँ
- जटिल संशोधन प्रक्रिया: किसी भी सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के दो-तिहाई सदस्यों की स्वीकृति तथा सभी पाँच स्थायी सदस्यों द्वारा उसका अनुसमर्थन आवश्यक है। इससे संस्थागत सुधार अत्यंत कठिन हो जाता है।
- कॉफी क्लब : सर्वसम्मति के लिए एकजुटता (UfC), जिसे कॉफी क्लब भी कहा जाता है, वर्ष 1990 के दशक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के संभावित विस्तार के विरोध में विकसित हुआ एक आंदोलन है।
- इटली के नेतृत्व में इसका उद्देश्य G4 देशों—ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान—द्वारा प्रस्तावित स्थायी सदस्यता की माँगों का विरोध करना है।
- नए सदस्यों के लिए वीटो का प्रश्न: इस बात पर कोई सहमति नहीं है कि विस्तारित स्थायी सदस्यता प्राप्त करने वाले नए देशों को भी वीटो का अधिकार दिया जाना चाहिए या नहीं।
आगे की राह
- भारत को अपनी उम्मीदवारी के संबंध में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इसके अंतर्गत सुरक्षा परिषद की सीट प्राप्त करने की अपनी महत्त्वाकांक्षा, ताजिकिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे साझेदारी संबंधों और वैश्विक दक्षिण के बीच अपनी विश्वसनीयता के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए।
- भारत को विकासशील देशों की चिंताओं को उठाते रहना चाहिए। इनमें समान प्रतिनिधित्व, विकास वित्त, जलवायु न्याय और वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार शामिल हैं।
- इसके अतिरिक्त, भारत को अधिक प्रतिनिधिक, समावेशी और प्रभावी सुरक्षा परिषद के निर्माण के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति विकसित करके UNSC की स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के अपने प्रयास जारी रखने चाहिए, ताकि परिषद समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सके।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की वर्तमान संरचना समकालीन विश्व व्यवस्था के बजाय वर्ष 1945 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करती है।” सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए तथा स्थायी सदस्यता के लिए भारत के पक्ष का परीक्षण कीजिए। |
स्रोत: TH
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