पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ आंतरिक सुरक्षा
संदर्भ
- गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय समिति ने एक पोर्टल शुरू किया है, जिसके माध्यम से नागरिकों, सरकारी एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) आदि को भारत में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संबंध में अपने सुझाव एवं जानकारी प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके लिए विशेष रूप से वर्ष 2011 के बाद के आँकड़ों और सूचनाओं को प्राथमिकता दी गई है।
जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति (HLCDC) के बारे में
- गठन: केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया।
- समिति के विचारार्थ विषय निम्नलिखित हैं:
- अवैध प्रवासन सहित जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों का व्यापक अध्ययन करना।
- ऐसे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संभावित कारणों का अध्ययन करना, जिनमें प्रजनन दर में भिन्नता, सीमापार आवागमन (अवैध प्रवासन सहित), आर्थिक अवसर तथा अन्य सामाजिक-पर्यावरणीय कारक शामिल हैं।
- इन परिवर्तनों के अंतर्निहित कारकों की पहचान करना, जिनमें अवैध प्रवासन, असामान्य बसावट के प्रतिरूप तथा नियोजित प्रवासन शामिल हैं।
- इन प्रवृत्तियों की निरंतर निगरानी के लिए सीमा प्रबंधन, जनसंख्या स्थिरीकरण तथा पहचान प्रणालियों को सुदृढ़ करने हेतु उपयुक्त संस्थागत तंत्र की सिफारिश करना।
भारत में जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियाँ
- घटती प्रजनन दर: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर लगभग 2.0 हो गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से कम है।
- यह दर्शाता है कि भारत राष्ट्रीय स्तर पर धीरे-धीरे जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- घटती जन्म दर: नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) की रिपोर्ट 2024 के अनुसार:
- भारत की जन्म दर वर्ष 2014 में प्रति 1,000 जनसंख्या पर 21 थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 18.3 हो गई।
- यह गिरावट बदलते जनसांख्यिकीय प्रतिरूपों, बढ़ते शहरीकरण, साक्षरता में वृद्धि तथा स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार नियोजन तक बेहतर पहुँच को दर्शाती है।
सीमा-संबंधी जनसांख्यिकीय चुनौतियाँ
- भारत–बांग्लादेश सीमा: भारत की बांग्लादेश के साथ 4,096 किमी लंबी सीमा है, जो पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से होकर गुजरती है।
- असम आंदोलन (1979–1985) असम में अवैध प्रवासियों के विरुद्ध चलाया गया एक जन-आंदोलन था।
- इस आंदोलन का नेतृत्व अखिल असम छात्र संघ (AASU) तथा अखिल असम गण संग्राम परिषद (AAGSP) ने किया था।
- भारत–म्यांमार सीमा: भारत की म्यांमार के साथ 1,643 किमी लंबी सीमा है, जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है।
- वर्ष 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता के कारण चिन शरणार्थियों और रोहिंग्या प्रवासियों का मणिपुर एवं मिजोरम में आगमन बढ़ गया।
- भारत–पाकिस्तान सीमा: भारत की पाकिस्तान के साथ 3,323 किमी लंबी सीमा है।
- जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से होने वाली सीमापार घुसपैठ लंबे समय से आतंकवाद, उग्रवाद तथा आंतरिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से जुड़ी रही है।
जनसांख्यिकीय परिवर्तन से संबंधित चिंताएँ
- राष्ट्रीय सुरक्षा एवं संप्रभुता: अवैध प्रवासन से घुसपैठ, संगठित अपराध तथा सीमा अस्थिरता का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- सामाजिक सद्भाव: धर्म, जातीयता अथवा भाषा से जुड़े जनसांख्यिकीय परिवर्तन सामाजिक तनाव, पहचान-आधारित राजनीति तथा भूमि एवं रोजगार को लेकर संघर्ष बढ़ा सकते हैं।
- मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा ने भूमि, पहचान तथा जनसांख्यिकीय चिंताओं को लेकर समुदायों के बीच विद्यमान तनाव को उजागर किया।
- संसाधनों का वितरण: बड़े पैमाने पर प्रवासन से आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कल्याणकारी योजनाओं तथा रोजगार के अवसरों पर दबाव बढ़ सकता है।
- असम और त्रिपुरा के सीमावर्ती जिलों में दस्तावेज़-विहीन प्रवासन के कारण भूमि पर अतिक्रमण, रोजगार के लिए प्रतिस्पर्धा तथा सार्वजनिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंताएँ सामने आई हैं।
- मूलनिवासी एवं जनजातीय समुदायों का संरक्षण: विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र के मूलनिवासी और जनजातीय समुदायों को आशंका है कि जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के कारण उनकी सांस्कृतिक पहचान, भूमि अधिकार तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकते हैं।
चुनौतियाँ
- अद्यतन जनगणना आँकड़ों का अभाव: भारत में विगत जनगणना वर्ष 2011 में आयोजित की गई थी, जबकि आगामी जनगणना वर्ष 2027 के लिए निर्धारित है।
- अद्यतन जनगणना आँकड़ों की अनुपलब्धता जनसांख्यिकीय आकलन तथा नीतिगत निर्माण की सटीकता को प्रभावित कर सकती है।
- मानवाधिकार संबंधी चिंताएँ: भेदभाव, सामाजिक ध्रुवीकरण तथा पात्र व्यक्तियों को गलत तरीके से बाहर किए जाने की आशंकाएँ विद्यमान हैं।
- संघीय एवं प्रशासनिक चुनौतियाँ: प्रवासन से संबंधित मुद्दों पर विभिन्न राज्यों की राजनीतिक, प्रशासनिक तथा सामाजिक प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग हो सकती हैं।
- सीमा प्रबंधन संबंधी चुनौतियाँ: भारत की पड़ोसी देशों के साथ लंबी और कई स्थानों पर सुगम्य अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ हैं। प्रभावी सीमा प्रबंधन के लिए उन्नत निगरानी प्रौद्योगिकी, अवसंरचना का विकास तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
आगे की राह
- सीमा अवसंरचना को सुदृढ़ करना: अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए भारत को सीमा पर बाड़बंदी, निगरानी प्रणालियों तथा तकनीकी निगरानी तंत्र में सुधार करना चाहिए।
- समयबद्ध जनगणना आयोजित करना: सरकार को जनगणना का समय पर आयोजन सुनिश्चित करना चाहिए तथा साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्माण को सक्षम बनाने के लिए नागरिक पंजीकरण प्रणालियों को सुदृढ़ करना चाहिए।
- संवैधानिक संरक्षण सुनिश्चित करना: पहचान या निर्वासन से संबंधित किसी भी कार्रवाई में विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- समावेशी जनसंख्या नीतियाँ: जनसंख्या स्थिरीकरण संबंधी उपायों में निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए:
- महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना।
- स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार करना।
- जागरूकता कार्यक्रम संचालित करना।
- स्वैच्छिक परिवार नियोजन उपायों को प्रोत्साहित करना।
- जनसंख्या नियंत्रण के लिए बलपूर्वक उपायों से बचना चाहिए।
निष्कर्ष
- जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के विश्वसनीय आकलन के लिए भरोसेमंद आँकड़ों, पारदर्शी पद्धति तथा प्राकृतिक जनसंख्या प्रवृत्तियों और प्रवासन के बीच सावधानीपूर्वक अंतर करना आवश्यक है।
- समिति के निष्कर्षों से साक्ष्य-आधारित नियोजन तथा कानूनसम्मत प्रवासन प्रबंधन को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। साथ ही, निजता, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक समरसता की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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