पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन–1 / भूगोल, ऊर्जा संसाधन
चर्चा में क्यों?
- भारत ने लद्दाख की पुगा घाटी में अपने प्रथम और सबसे गहरे भू-तापीय कुओं का लोकार्पण किया है। यह देश के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भू-तापीय ऊर्जा
- यह पृथ्वी के आंतरिक भाग से प्राप्त ऊष्मा का उपयोग करके उत्पन्न की जाने वाली ऊष्मा एवं विद्युत ऊर्जा है।
- यह इसलिए उपलब्ध होती है क्योंकि गहराई बढ़ने के साथ पृथ्वी का तापमान क्रमशः बढ़ता जाता है। जहाँ भू-तापीय प्रवणता (Geothermal Gradient) अधिक होती है, वहाँ कम गहराई पर ही उच्च तापमान प्राप्त हो जाता है।
- उच्च तापमान के कारण ऐसे क्षेत्रों में भूजल चट्टानों से ऊष्मा अवशोषित कर गर्म हो जाता है और भाप में परिवर्तित हो जाता है। इस भाप का उपयोग टर्बाइनों को चलाने तथा विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है।
- यह स्थान-विशिष्ट (Site-Specific) नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत है, जो विशेष रूप से दूरस्थ एवं आंतरिक क्षेत्रों की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपयुक्त है।

लाभ
- पर्यावरण-अनुकूल: भू-तापीय ऊर्जा एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है तथा इसका कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) अत्यंत कम होता है।
- विश्वसनीय नवीकरणीय स्रोत: यह निरंतर उपलब्ध रहने वाला तथा विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
- उच्च दक्षता: भू-तापीय प्रणालियाँ ऊर्जा का अत्यधिक दक्षता के साथ रूपांतरण करती हैं।
- लचीला डिजाइन: भू-तापीय संयंत्रों का डिजाइन विभिन्न स्थलों की परिस्थितियों के अनुरूप किया जा सकता है।
- कम रखरखाव लागत: सामान्यतः इन प्रणालियों के रखरखाव की आवश्यकता बहुत कम होती है।
- ऊष्मा का भंडारण: पंप ऊष्मा का भंडारण कर बाद में उसका उपयोग कर सकते हैं, जिससे अधिक लचीलापन प्राप्त होता है।
भू-तापीय ऊर्जा की समस्याएँ
- हरितगृह गैसों का उत्सर्जन: निष्कर्षण प्रक्रिया के दौरान कुछ हरितगृह गैसों का उत्सर्जन होता है।
- संसाधनों का क्षय: समय के साथ भू-तापीय संसाधनों का क्षय हो सकता है।
- निष्कर्षण स्थल का ठंडा होना: लंबे समय तक उपयोग के बाद निष्कर्षण स्थल का तापमान कम हो सकता है।
- प्रौद्योगिकीय चुनौतियाँ: ऊष्मा के स्रोत के रूप में मैग्मा का उपयोग करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।
- उच्च प्रारंभिक पूंजीगत लागत: भू-तापीय संयंत्रों की स्थापना के लिए प्रारंभिक निवेश काफी अधिक होता है।
- जल प्रदूषण: कुछ संयंत्रों में बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है तथा वे जल प्रदूषण का कारण बन सकते हैं।
- ज्वालामुखीय गतिविधियों के निकटता: भू-तापीय स्रोत प्रायः ज्वालामुखीय क्षेत्रों के निकट पाए जाते हैं, जिससे संयंत्रों के संचालन पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
- भंडारों की पहचान कठिन: भू-तापीय भंडारों का पता लगाना कठिन होता है। साथ ही, बड़े शहरों में भू-तापीय प्रणालियों का कार्यान्वयन भी चुनौतीपूर्ण होता है।
भारत में संभावनाएँ
- भारत में 35°C से 89°C तापमान वाले 381 चिन्हित उष्ण जलस्रोत (Hot Springs) हैं, जिनमें पर्याप्त भू-तापीय ऊर्जा की क्षमता विद्यमान है।
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने देश की भू-तापीय ऊर्जा क्षमता का अनुमान 10.6 गीगावाट (GW) लगाया है, जो 10 भू-तापीय प्रांतों में वितरित है।
- इनमें हिमालयी भू-तापीय प्रांत, कैंबे ग्रैबेन (Cambay Graben) तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह प्रमुख हैं।

- वर्तमान में वैश्विक भू-तापीय विद्युत उत्पादन क्षमता अभी भी 17 गीगावाट (GW) से कम है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनेशिया और फिलीपींस अग्रणी हैं।
- अनुमान है कि भारत का भू-तापीय ऊर्जा बाज़ार वर्ष 2035 तक 4.2 गीगावाट तथा 2045 तक लगभग 100 गीगावाट तक पहुँच जाएगा।
- लद्दाख में ओएनजीसी ऊर्जा केंद्र (ONGC Energy Centre) ने भारत की प्रथम 1 मेगावाट (MW) प्रायोगिक भू-तापीय विद्युत परियोजना के समर्थन हेतु 1,000-1,000 मीटर गहरे दो कुओं का विकास किया है।
सरकार द्वारा उठाये गए कदम
- नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने अप्रयुक्त भू-तापीय ऊर्जा संसाधनों के अन्वेषण एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति, 2025 जारी की है।
- इस नीति का उद्देश्य भू-तापीय ऊर्जा को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा परिदृश्य के प्रमुख स्तंभों में से एक के रूप में स्थापित करना, वर्ष 2070 के शुद्ध-शून्य (Net Zero) लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना तथा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- सरकारी/गैर-लाभकारी अनुसंधान संस्थानों को 100% वित्तीय सहायता तथा उद्योगों, नवप्रवर्तक उद्यमों (स्टार्टअप) आदि को 70% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- भारत–अमेरिका सामरिक स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी कार्य मंच (Renewable Energy Technology Action Platform) की स्थापना।
सुझाव
- निजी विकासकर्ताओं द्वारा प्रारंभिक चरण की ड्रिलिंग में विफलता के जोखिम को कम करने के लिए सरकारी समर्थन प्राप्त अन्वेषण जोखिम निधि (Exploratory Risk Fund) की व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
- प्राकृतिक जलभृतों (Aquifers) से बाहर स्थित गहरी गर्म एवं शुष्क शैल प्रणालियों तक पहुँचने के लिए उन्नत भू-तापीय प्रणालियों (EGS) तथा बंद-परिपथ (Closed Loop) प्रौद्योगिकियों में निवेश की आवश्यकता है।
- गहरे हिमालयी ग्रेनाइट तथा जटिल रूपांतरित शैल संरचनाओं में ड्रिलिंग के लिए उच्च तापमान सहन करने वाले कठोर-शैल ड्रिलिंग रिग विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
- अत्यधिक जलवायु वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए विद्युत उत्पादन के अतिरिक्त तापीय अनुप्रयोगों, जैसे जिला स्तर पर ताप व्यवस्था (District Space Heating) तथा कोल्डचेन अवसंरचना, को तेज़ी से विकसित करने की आवश्यकता है।
स्रोत :IE
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