पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- हाल ही में आंध्र प्रदेश ने विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ‘पिल्लले संपदा’ (‘बच्चे ही संपदा हैं’) पहल का शुभारंभ किया, जो जनसंख्या नियंत्रण से हटकर निम्न प्रजनन दर और वृद्धावस्था की चुनौतियों के समाधान की दिशा में नीतिगत बदलाव का संकेत देता है।
भारत में जनसांख्यिकीय संक्रमण का विवरण
- भारत उच्च जन्म दर एवं उच्च मृत्यु दर से निम्न प्रजनन दर, निम्न मृत्यु दर तथा निम्न जनसंख्या वृद्धि दर की ओर संक्रमण कर रहा है।
- एसआरएस सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 1.9 है, जो लगभग 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से कम है।

- सकल जन्म दर, कुल प्रजनन दर से भिन्न होती है, क्योंकि इसकी गणना में संपूर्ण जनसंख्या को आधार बनाया जाता है, जबकि कुल प्रजनन दर में किसी महिला के प्रजनन काल के दौरान होने वाले जन्मों को मापा जाता है।
- हालाँकि, प्रतिस्थापन स्तर से कम प्रजनन दर का अर्थ तत्काल जनसंख्या में कमी होना नहीं है।

- उदाहरण के लिए, केरल में 1980 के दशक के उत्तरार्ध में प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे चली गई थी, किंतु इसके बाद भी राज्य की जनसंख्या में वृद्धि जारी रही।
जनसांख्यिकीय संक्रमण: दक्षिण भारत बनाम उत्तर भारत
- दक्षिण भारत ने प्रजनन संक्रमण को अपेक्षाकृत पहले पूरा कर लिया, जबकि कई उत्तरी राज्यों में अभी भी अपेक्षाकृत युवा आयु संरचना तथा उच्च प्रजनन दर विद्यमान है।
- इससे क्षेत्रीय जनसांख्यिकीय विचलन उत्पन्न हो रहा है: दक्षिण भारत वृद्धावस्था तथा संभावित श्रमबल की कमी की ओर बढ़ रहा है, जबकि उत्तर भारत में वर्तमान में युवा श्रमिकों का अपेक्षाकृत बड़ा समूह उपलब्ध है।
- हालाँकि, दक्षिण भारत में अभी भी पर्याप्त कार्यशील जनसंख्या उपलब्ध है।
- 2021 में 15–59 वर्ष आयु वर्ग आंध्र प्रदेश की जनसंख्या का 67.1%, तेलंगाना का 67.5%, कर्नाटक और तमिलनाडु का 66.4% तथा केरल का 63.1% था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 64.2% था।
- 2036 तक आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में कार्यशील आयु वर्ग की हिस्सेदारी राष्ट्रीय स्तर के आसपास या उससे अधिक रहने का अनुमान है; जबकि केरल में यह घटकर 59.5% तथा तमिलनाडु में 63.6% रह जाएगी।
दक्षिण भारत के लाभ
- यह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। किंतु केवल आयु संरचना आर्थिक विकास सुनिश्चित नहीं कर सकती।
- रोजगार, कौशल, उत्पादकता, महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी तथा प्रवासी श्रमिकों का एकीकरण यह निर्धारित करते हैं कि जनसांख्यिकीय लाभांश वास्तविक रूप में प्राप्त होगा या नहीं।
- प्रवासन एक अन्य लाभ है। दक्षिण भारत के निर्माण, विनिर्माण, आतिथ्य, परिवहन तथा देखभाल संबंधी क्षेत्रों में युवा राज्यों से आने वाले श्रमिकों पर निर्भरता बढ़ रही है, जो प्रतिस्थापन प्रवासन का एक उदाहरण है।
संबंधित मुद्दे एवं चिंताएँ
- तीव्र वृद्धावस्था: 2021 में 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की हिस्सेदारी केरल में 16.5%, तमिलनाडु में 13.7% तथा आंध्र प्रदेश में 12.3% थी।
- 2036 तक इसके क्रमशः 22.8%, 20.8% और 19% होने की संभावना है; जबकि कर्नाटक और तेलंगाना में यह क्रमशः 17.2% और 17.1% तक पहुँचने की संभावना है।
- वृद्धों और बच्चों का अनुपात 2021 में केरल में 81:100, तमिलनाडु में 69:100 तथा आंध्र प्रदेश में 60:100 से बढ़कर 2036 तक क्रमशः लगभग 129, 134 और 121 होने की संभावना है।
- तेलंगाना में यह अनुपात 106:100 तथा कर्नाटक में लगभग 100:100 तक पहुँचने का अनुमान है, जबकि भारत की जनसंख्या अपेक्षाकृत युवा बनी रहेगी और यह अनुपात लगभग 74:100 रहने का अनुमान है।
- वृद्धजनों की संवेदनशीलता: इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023 के अनुसार, 40% से अधिक वृद्धजन सबसे निम्न संपत्ति वर्ग में आते हैं, 18.7% के पास आय का कोई स्रोत नहीं है तथा 80 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या में 2022 से 2050 के बीच लगभग 279% की वृद्धि हो सकती है।
- लगभग एक-चौथाई वृद्ध व्यक्तियों में कार्यात्मक अक्षमता है, जिसके कारण परिवारों के जीवन-यापन संबंधी व्यय में 30–50% तक वृद्धि हो सकती है।
- बच्चे पैदा करने हेतु प्रोत्साहन की सीमाएँ: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष से संबद्ध अनुसंधान से पता चलता है कि एकमुश्त प्रोत्साहन सामान्यतः प्रजनन दर में सीमित और अल्पकालिक वृद्धि करते हैं तथा प्रायः पूर्ण परिवार के आकार को प्रभावित करने के बजाय बच्चे के जन्म के समय को प्रभावित करते हैं।
- बाल देखभाल, माता-पिता के लिए अवकाश, लचीली कार्य व्यवस्था तथा वित्तीय सहायता अधिक व्यापक नीति-उपाय हैं।
- प्रजनन संबंधी विकल्प: आंध्र प्रदेश ने नवंबर 2024 में स्थानीय निकाय चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों की अयोग्यता संबंधी प्रावधान को समाप्त कर दिया, जिसके बाद जनवरी 2026 में तेलंगाना ने भी ऐसा ही किया।
- नीति का उद्देश्य संख्यात्मक लक्ष्य निर्धारित करने के बजाय लोगों को अपनी इच्छित परिवार के आकार को प्राप्त करने में सक्षम बनाना होना चाहिए।
- आँकड़ों की कमी: वर्तमान जनसांख्यिकीय अनुमान मुख्यतः 2011 की जनगणना तथा महामारी-पूर्व मान्यताओं पर आधारित हैं।
- अतः आयु संरचना, प्रवासन तथा श्रम बाजार की योजना के लिए अद्यतन आँकड़े उपलब्ध कराने हेतु नई जनगणना आवश्यक है।
आगे की राह: विभेदित नीतिगत रूपरेखा
- केरल एवं तमिलनाडु: वृद्धावस्था स्वास्थ्य देखभाल, दीर्घकालिक एवं गृह-आधारित देखभाल, सामाजिक पेंशन तथा वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल आधारभूत संरचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- केरल का 2026–27 का वृद्धजन बजट तथा मई 2026 में वरिष्ठ नागरिक कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश इसी दिशा का संकेत देते हैं।
- आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना: जन्म प्रोत्साहनों पर मुख्यतः निर्भर रहने के बजाय रोजगार, कौशल विकास, महिलाओं के रोजगार तथा प्रवासियों के एकीकरण के माध्यम से वर्तमान जनसांख्यिकीय लाभांश को अधिकतम किया जाना चाहिए।
- कर्नाटक: श्रमबल की उत्पादकता को बढ़ाने के साथ-साथ वृद्धावस्था पर बढ़ती निर्भरता के लिए समय रहते तैयारी की जानी चाहिए।
- सभी दक्षिणी राज्य: बाल देखभाल, माता-पिता के लिए अवकाश, प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल, बांझपन संबंधी सेवाओं तथा प्रवासियों के लिए हस्तांतरणीय कल्याण सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।
- स्वस्थ वृद्ध व्यक्तियों को अधिक समय तक कार्य करने में सक्षम बनाकर तथा उनकी संचित बचत को उत्पादक रूप से नियोजित करने के माध्यम से ‘द्वितीय जनसांख्यिकीय लाभांश’ को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
- ‘पिल्लले संपदा’ एक वास्तविक जनसांख्यिकीय चुनौती को रेखांकित करती है, किंतु तात्कालिक समस्या बच्चों की कमी नहीं है, बल्कि कम संख्या में युवाओं, अधिक वृद्ध नागरिकों तथा परिवर्तित होते श्रमबल के लिए तैयारी करना है।
- एक सतत जनसंख्या नीति को तीन प्रमुख परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए—वांछित प्रजनन दर, उत्पादक रोजगार तथा गरिमापूर्ण वृद्धावस्था।
- अतः दक्षिण भारत भारत के जनसांख्यिकीय संक्रमण के पश्चात के भविष्य के प्रबंधन के लिए एक प्रयोगशाला के रूप में विकसित हो सकता है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] दक्षिण भारत में उभरती जनसांख्यिकीय चुनौतियों की चर्चा कीजिए तथा जनसांख्यिकीय लाभांश का दोहन करने के साथ-साथ जनसंख्या की वृद्धावस्था के लिए तैयारी हेतु विभेदित नीतिगत रूपरेखा सुझाइए। |
स्रोत: Frontline