मत्स्य पालन सब्सिडी पर विश्व व्यापार संगठन(WTO) का समझौता

पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन–3 / अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • हाल ही में भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते के लिए अपनी स्वीकृति-पत्र (Instrument of Acceptance) जमा कर दिया, जिससे वह इस समझौते से जुड़ने वाला 123वाँ सदस्य बन गया।

विश्व व्यापार संगठन का मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता

परिचय

  • इसे जून 2022 में जिनेवा में आयोजित विश्व व्यापार संगठन के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC12) में सर्वसम्मति से अपनाया गया था।
  • यह 15 सितंबर 2025 को विश्व व्यापार संगठन के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद प्रभावी हुआ।
  • यह पर्यावरणीय सततता के उद्देश्य वाला विश्व व्यापार संगठन का पहला बहुपक्षीय समझौता है।

उद्देश्य

  • अवैध, अप्रतिवेदित एवं अनियमित (IUU) मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने वाली सब्सिडियों को समाप्त करना।
  • क्षीण हो चुके मत्स्य भंडारों के अत्यधिक दोहन को बढ़ावा देने वाली सब्सिडियों को हतोत्साहित करना।
  • समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग एवं दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करना।
  • नियम-आधारित वैश्विक मत्स्य शासन व्यवस्था की स्थापना करना।

समझौते का दायरा

  • यह समझौता समुद्री प्राकृतिक मत्स्य पालन तथा समुद्र में संचालित मत्स्य संबंधी गतिविधियों को शामिल करता है।
  • इसमें मत्स्य पालन कृषि (Aquaculture) तथा अंतर्देशीय मत्स्य पालन को शामिल नहीं किया गया है।

विश्व व्यापार संगठन के अन्य सब्सिडी संबंधी समझौते

  • सब्सिडी एवं प्रतिकारी उपायों पर समझौता (SCM Agreement): यह वस्तुओं के व्यापार को प्रभावित करने वाली सब्सिडियों से संबंधित है। यह निर्यात सब्सिडी तथा आयात प्रतिस्थापन सब्सिडी को प्रतिबंधित करता है और हानि पहुँचाने वाली सब्सिडियों के विरुद्ध कार्रवाई की अनुमति देता है।
  • कृषि पर समझौता (Agreement on Agriculture – AoA): इसमें घरेलू सहायता, निर्यात सब्सिडी तथा बाज़ार पहुँच शामिल हैं। घरेलू सहायता को व्यापार विकृति के आधार पर एम्बर बॉक्स, ब्लू बॉक्स तथा ग्रीन बॉक्स में वर्गीकृत किया गया है।
  • सेवाओं के व्यापार पर सामान्य समझौता (GATS): इसके अंतर्गत सेवाओं पर दी जाने वाली सब्सिडियों के संबंध में अभी कोई व्यापक नियम नहीं हैं। विश्व व्यापार संगठन के सदस्य इस विषय पर नियम विकसित करने हेतु वार्ता जारी रखे हुए हैं।

अंतर

  • SCM समझौता: औद्योगिक एवं विनिर्मित उत्पादों पर दी जाने वाली सब्सिडियों से संबंधित है।
  • कृषि पर समझौता (AoA): किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी एवं निर्यात सहायता को शामिल करता है।
  • GATS: सेवाओं पर दी जाने वाली सब्सिडियाँ अभी विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अंतर्गत शामिल नहीं हैं।

भारत द्वारा समझौते को स्वीकार करना क्यों महत्त्वपूर्ण है?

लघु एवं पारंपरिक मछुआरों की सुरक्षा

  • भारत का मत्स्य क्षेत्र मुख्यतः पारंपरिक एवं लघु मछुआरों पर आधारित है, जबकि अनेक विकसित देशों के पास बड़े पैमाने पर संचालित दूरस्थ समुद्री औद्योगिक मत्स्य बेड़े हैं।
  • यह समझौता अधिक न्यायसंगत वैश्विक मत्स्य व्यवस्था स्थापित करता है।
  • यह औद्योगिक स्तर के मत्स्य दोहन को बढ़ावा देने वाली हानिकारक सब्सिडियों की समीक्षा करता है तथा समुद्री संसाधनों पर निर्भर आजीविकाओं की सुरक्षा का समर्थन करता है।

सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा

  • भारत की स्वीकृति उसकी ब्लू इकोनॉमी तथा सतत विकास लक्ष्य–14 (जल के नीचे जीवन) के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
  • यह समझौता उत्तरदायी मत्स्य पालन, समुद्री जैव विविधता के संरक्षण तथा मत्स्य भंडारों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करता है।

समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा

  • वैश्विक समुद्री खाद्य बाज़ारों में सतत स्रोतों, अनुरेखणीयता (Traceability) तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन की माँग लगातार बढ़ रही है।
  • इस समझौते में भारत की भागीदारी उसे उत्तरदायी समुद्री खाद्य निर्यातक के रूप में अधिक विश्वसनीय बनाएगी, प्रीमियम अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच बढ़ाएगी तथा आयातक देशों का विश्वास सुदृढ़ करेगी।
  • इस समझौते का भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना कम है, क्योंकि भारत का अधिकांश समुद्री खाद्य निर्यात मत्स्य पालन कृषि (Aquaculture) पर आधारित है।

भारत में वर्तमान मत्स्य प्रबंधन व्यवस्था

  • विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन नियम, 2025: यह भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पालन को विनियमित करता है तथा सतत दोहन को बढ़ावा देता है।
  • उच्च समुद्रों में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन हेतु दिशा-निर्देश (2025): यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले पोतों के संचालन को विनियमित करता है तथा उत्तरदायी मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करता है।
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): इसका उद्देश्य क्षमता निर्माण, अवसंरचना विकास, सतत मत्स्य पालन, मत्स्य मूल्य श्रृंखला का विकास तथा मछुआरों के कल्याण को बढ़ावा देना है।
  • ये सभी उपाय समुद्री संरक्षण सुनिश्चित करते हैं तथा पारंपरिक एवं लघु मछुआरों के लिए पर्याप्त नीतिगत अवसर बनाए रखते हैं।

भारत के लिए लाभ

आर्थिक

  • अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक बेहतर पहुँच।
  • निर्यात की प्रतिष्ठा में वृद्धि।
  • झींगा (प्रॉन) निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना।

पर्यावरणीय

  • समुद्री पारितंत्रों पर दबाव में कमी।
  • मत्स्य भंडारों का संरक्षण।
  • समुद्री शासन व्यवस्था में सुधार।

सामाजिक

  • आजीविका की सुरक्षा।
  • तटीय समुदायों को समर्थन।
  • संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग।

सामरिक

  • नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना।
  • सतत महासागर शासन में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को प्रदर्शित करना।

आगे की चुनौतियाँ

  • अवैध, अप्रतिवेदित एवं अनियमित (IUU) मत्स्य पालन की प्रभावी निगरानी।
  • भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ करना।
  • संरक्षण एवं आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखना।
  • समझौते के कार्यान्वयन के दौरान लघु मछुआरों को पर्याप्त सहायता सुनिश्चित करना।
  • विश्व व्यापार संगठन के ढाँचे के अंतर्गत मत्स्य पालन सब्सिडी से संबंधित शेष लंबित वार्ताओं का समाधान करना।

स्रोत: PIB

 

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