पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन–3 / संरक्षण
चर्चा में क्यों?
- शिवनाथ तथा खारून नदियों में अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल के प्रवाह, प्रदूषित जल तथा मछलियों की मृत्यु पर व्यक्त चिंताओं के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि नदी प्रदूषण रोकने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं।
नदी संरक्षण
- नदी संरक्षण से तात्पर्य नदियों तथा उनके पारितंत्रों के नियोजित संरक्षण एवं सतत प्रबंधन से है, ताकि मानव आवश्यकताओं, कृषि, उद्योग तथा जैव विविधता के लिए दीर्घकाल तक मीठे जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
- जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण, अवैध अतिक्रमण तथा जल के अत्यधिक दोहन जैसी बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए कठोर एवं प्रभावी नदी संरक्षण कानूनों की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ की प्रमुख पहलें: एक अध्ययन
- प्रधानमंत्री गति शक्ति मंच पर नदी के उद्गम स्थलों का जियो-टैगिंग एवं डिजिटल मानचित्रण।
- प्रत्येक जिले के लिए नदी पुनर्जीवन योजना तैयार करना तथा नदी प्रवाह, भूजल स्तर एवं जल गुणवत्ता की वैज्ञानिक निगरानी करना।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की (IIT Roorkee), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर (NIT Raipur) तथा छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई (CSVTU Bhilai) द्वारा सतत नदी पुनर्स्थापन योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
- नदी पुनर्जीवन प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विशेषज्ञों एवं हितधारकों को एक मंच पर लाने हेतु राज्य स्तरीय स्रोत महोत्सव एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
- राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को वैज्ञानिक आधार पर संरक्षण कार्य, गाद हटाने (Desiltation), नदी तट संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण उपाय करने तथा पुनर्स्थापन गतिविधियों के जियो-टैग किए गए साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
- उदाहरण के लिए, हसदेव नदी की पुनर्जीवन योजना में जलग्रहण क्षेत्र उपचार, गाद हटाना, वृक्षारोपण, भूजल एवं जल गुणवत्ता की निगरानी तथा उद्गम स्थल का पर्यावरण-अनुकूल विकास शामिल है।
नदी संरक्षण हेतु सरकार की अन्य प्रमुख पहलें
नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) योजना
- यह जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
- इसका उद्देश्य नदी बेसिन स्तर पर सतही जल एवं भूजल संसाधनों की समेकित योजना, अध्ययन एवं विकास को बढ़ावा देना है।
- इसका कार्यान्वयन तीन प्रमुख संस्थाओं ब्रह्मपुत्र बोर्ड, केंद्रीय जल आयोग (CWC) तथा राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (NWDA) के माध्यम से किया जाता है।
नमामि गंगे कार्यक्रम
- यह राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण नियंत्रण, संरक्षण एवं पुनर्जीवन के दोहरे उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए जून 2014 में 20,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत एक समेकित संरक्षण मिशन एवं प्रमुख (Flagship) कार्यक्रम है।
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP)
- यह एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसके अंतर्गत गंगा नदी बेसिन को छोड़कर देश की चिन्हित नदी धाराओं में प्रदूषण नियंत्रण हेतु राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को लागत-साझेदारी के आधार पर वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों/समितियों के सहयोग से राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत देश की नदियों एवं अन्य जल निकायों की जल गुणवत्ता की निगरानी करता है।
स्रोत: IE
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