भारत का वस्त्र उद्योग : विकास का नया अध्याय 

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने भारत के वस्त्र क्षेत्र की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए इसे एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, नवाचार-संचालित तथा रोजगार-सघन उद्योग के रूप में विकसित होने पर बल दिया।

भारत का वस्त्र क्षेत्र

  • घरेलू व्यापार में योगदान: भारत का घरेलू परिधान एवं वस्त्र उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2.3%, औद्योगिक उत्पादन में 13% तथा कुल निर्यात में 12% का योगदान देता है।
    • वर्ष 2025-26 तक इसका आकार बढ़कर लगभग 190 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है।
  • वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी: वैश्विक वस्त्र एवं परिधान व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4% है।
  • निर्यात : भारत विश्व का छठा सबसे बड़ा वस्त्र एवं परिधान निर्यातक है।
    • भारत के कुल निर्यात में वस्त्र एवं परिधान (T&A) सहित हस्तशिल्प का योगदान वर्ष 2023-24 में 8.21% रहा।
  • कच्चे माल का उत्पादन: भारत विश्व के सबसे बड़े कपास एवं जूट उत्पादकों में से एक है।
    • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेशम उत्पादक भी है तथा विश्व के कुल हाथ से बुने हुए वस्त्रों का लगभग 95% उत्पादन भारत में होता है।
  • रोजगार सृजन : वस्त्र उद्योग देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है।
    • यह क्षेत्र लगभग 4.5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार तथा संबद्ध क्षेत्रों में 10 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
  • प्रमुख क्षेत्र : आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, झारखंड तथा गुजरात भारत के प्रमुख वस्त्र एवं परिधान विनिर्माण राज्य हैं।

वस्त्र क्षेत्र को प्रोत्साहित करने हेतु पहलें

  • पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एवं अपैरल (PM MITRA) पार्क योजना: इस योजना का उद्देश्य तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में 7 मेगा एकीकृत वस्त्र पार्कों का विकास करना है।
    • इसका लक्ष्य आधुनिक, एकीकृत तथा विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले वस्त्र अवसंरचना का निर्माण करना है।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश: जापानी निवेश भारत की “मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड” तथा “चाइना-प्लस-वन” विनिर्माण रणनीतियों के अनुरूप है।
    • यह निवेश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी को सुदृढ़ करने में सहायक है।
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: वस्त्र क्षेत्र हेतु PLI योजना को मानव-निर्मित फाइबर (MMF) परिधान, MMF वस्त्र तथा तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए स्वीकृत किया गया।
    • इसका उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र को आवश्यक आकार  एवं पैमाना  प्रदान कर उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
  • निर्यात संवर्धन परिषदें : वस्त्र एवं परिधान मूल्य श्रृंखला के विभिन्न घटकों का प्रतिनिधित्व करने वाली 11 निर्यात संवर्धन परिषदें कार्यरत हैं।
    • ये परिषदें फाइबर से लेकर तैयार उत्पादों तक तथा हस्तकरघा, हस्तशिल्प एवं कालीन जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।
  • राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन: वर्ष 2020 में प्रारंभ इस मिशन का उद्देश्य भारत में तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन, नवाचार तथा निर्यात को बढ़ावा देना है।
  • राष्ट्रीय फाइबर मिशन: इसका उद्देश्य प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित रेशों की उत्पादकता, गुणवत्ता तथा सततता में सुधार करना है।
  • हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र: राष्ट्रीय हस्तकरघा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग ₹2,000 करोड़ का निवेश किया गया है।
    • गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM), इंडिया हैंडमेड पोर्टल, GI टैगिंग, मेगा हैंडलूम क्लस्टर तथा बुनकर मुद्रा योजना जैसी पहलों ने बाजार के अवसरों का विस्तार किया है तथा कारीगरों की आय को सुदृढ़ बनाया है।

भारत के वस्त्र क्षेत्र की चुनौतियाँ

  • खंडित औद्योगिक संरचना: यह क्षेत्र अत्यधिक खंडित है, जिसमें लघु एवं अनौपचारिक उद्यमों का प्रभुत्व है।
    • ये इकाइयाँ विस्तार, प्रौद्योगिकी अपनाने तथा औपचारिक वित्त तक पहुँच में अनेक बाधाओं का सामना करती हैं।
  • श्रम उत्पादकता एवं कौशल अंतराल: प्राचीन उत्पादन प्रणालियों, सीमित औपचारिक प्रशिक्षण तथा उद्योग-शिक्षा जगत के कमजोर संबंधों के कारण श्रम उत्पादकता कम बनी हुई है।
    • कौशल विकास की कमी भी एक प्रमुख चुनौती है।
  • उच्च लॉजिस्टिक एवं लेन-देन लागत: भारत में उच्च परिवहन एवं लेन-देन लागत के साथ-साथ सीमा शुल्क निकासी में विलंब भी देखने को मिलता है।
    • इससे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है।
  • सस्ती ऋण सुविधा की सीमित उपलब्धता: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा हस्तकरघा इकाइयों के लिए किफायती ऋण तक पहुँच अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

आगे की राह 

  • ब्रांडिंग एवं विपणन का सुदृढ़ीकरण: जिलों को अनुबंध-आधारित विनिर्माण से आगे बढ़ाकर स्वयं के ब्रांड तथा भौगोलिक संकेतक (GI) आधारित उत्पादों की दिशा में ले जाने के लिए सशक्त ब्रांडिंग, डिजाइन एवं विपणन सहायता आवश्यक है।
  • नियमित प्रभाव मूल्यांकन: निर्यात प्रदर्शन, रोजगार सृजन तथा औपचारिकीकरण के संकेतकों के आधार पर नियमित प्रभाव मूल्यांकन एवं आवश्यक सुधार की व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं डेटा प्रणाली का उपयोग: जिला स्तर पर उत्पादन, कौशल विकास के परिणामों, निर्यात प्रदर्शन तथा बाजार संपर्कों की वास्तविक समय निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं डेटा प्रणालियों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।

Source: PIB

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS1/समाज/GS2/शासन संदर्भ सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व गर्भाधान एवं प्रसवपूर्व नैदानिक तकनीक (PCPNDT) अधिनियम के सख्त एवं प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। परिचय न्यायालय ने पुरुष संतान के प्रति समाज में विद्यमान निरंतर प्राथमिकता तथा गंभीरता से जुड़े पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण के कारण लिंग-चयन संबंधी प्रथाओं के जारी रहने पर चिंता व्यक्त की। हाल...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था संदर्भ गृहिणियों को “राष्ट्र निर्माता” के रूप में मान्यता देने तथा अवैतनिक घरेलू देखभाल कार्य का न्यूनतम मूल्य ₹30,000 प्रति माह निर्धारित करने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के 2026 के निर्णय ने भारत की केयर इकोनॉमी/देखभाल अर्थव्यवस्था की ओर पुनः व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। केयर इकोनॉमी/देखभाल अर्थव्यवस्था केयर इकोनॉमी/देखभाल अर्थव्यवस्था से आशय...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य संदर्भ दशकों तक भारतीय नीति-निर्माताओं ने जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित किया। हालाँकि, हाल के वर्षों में भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.9 रह गई है। नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के अनुसार TFR भारत की कुल प्रजनन दर (TFR), अर्थात् किसी महिला द्वारा अपने प्रजनन काल (15–49 वर्ष) के...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संदर्भ भारत में अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर कम व्यय किसी एक कारण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह प्रणालीगत, ऐतिहासिक, वित्तीय तथा सांस्कृतिक कारकों की परस्पर क्रिया का संयुक्त प्रभाव है। R&D पर कम व्यय के कारण विशाल घरेलू बाज़ार और सीमित प्रतिस्पर्धात्मक दबाव:: भारत का विशाल घरेलू बाज़ार कंपनियों...
Read More

सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम, 1958 (AFSPA) पाठ्यक्रम: GS-2 / राजव्यवस्था एवं शासन संदर्भ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि वर्ष 2027 तक पूर्वोत्तर भारत के लगभग पूरे क्षेत्र से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम (AFSPA) को वापस लिए जाने की संभावना है, केवल एक या दो राज्यों को छोड़कर। AFSPA क्या...
Read More
scroll to top