भारत और बांग्लादेश के बीच संयुक्त नदी आयोग
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि गंगा जल संधि की आवश्यकताओं से निपटने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच एक “संरचित तंत्र” उपस्थित है।
परिचय
- द्विपक्षीय गंगा जल संधि 12 दिसंबर को समाप्त होने वाली है।
- इस संधि पर वर्ष 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षर किए गए थे।
- नदी जल बँटवारे से संबंधित इस तीन दशक पुराने समझौते के नवीनीकरण के लिए विशेषज्ञ स्तर पर विचार-विमर्श और राजनीतिक परामर्श आवश्यक हैं।
जल संधि तंत्र
- भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 54 नदियाँ साझा हैं। इनमें गंगा, ब्रह्मपुत्र और तीस्ता तीन प्रमुख नदियाँ हैं, जो बांग्लादेश की कृषि और बाढ़ की तैयारी से संबंधित व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
- 24 नवंबर, 1972 को एक संविधि पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद संयुक्त नदी आयोग अस्तित्व में आया।
- भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग का गठन दोनों भागीदार देशों द्वारा एक अध्यक्ष और तीन सदस्यों की नियुक्ति के माध्यम से किया जाता है। इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।
- आयोग की बैठकें प्रतिवर्ष बारी-बारी से बांग्लादेश और भारत में आयोजित की जाती हैं।
- कार्य: दोनों देशों के बीच नदी से संबंधित महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर संपर्क एवं समन्वय बनाए रखना, ताकि दोनों पक्ष नदी के जल से अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें।
- आयोग से बाढ़ नियंत्रण संबंधी आवश्यकताओं, चक्रवात की चेतावनियों और सिंचाई परियोजनाओं से निपटने के लिए घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
- दोनों सरकारें आयोग को अन्य ऐसे कार्य भी सौंप सकती हैं, जिन्हें वे आवश्यक समझें।
स्रोत: TH
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
समाचार में
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में बड़ी राजनीतिक पराजय का सामना करना पड़ा है। रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा में अपना नियंत्रण खोने की ओर अग्रसर है और संभवतः सीनेट में भी उसका नियंत्रण समाप्त हो सकता है।
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव क्या हैं?
- ये चुनाव प्रत्येक चार वर्ष में राष्ट्रपति के कार्यकाल के मध्य में आयोजित किए जाते हैं।
- ये चुनाव सरकार के प्रदर्शन और उसकी नीतियों पर जनमत-संग्रह के रूप में कार्य करते हैं।
- यद्यपि राष्ट्रपति का प्रत्यक्ष चुनाव नहीं होता, फिर भी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और कई राज्यों के गवर्नर पदों के लिए चुनाव आयोजित किए जाते हैं।
- ये चुनाव विकेंद्रीकृत व्यवस्था के माध्यम से संपन्न होते हैं, जिसमें मतदान, मतपत्रों की छपाई और मतगणना की जिम्मेदारी अलग-अलग राज्यों एवं स्थानीय प्राधिकरणों की होती है।
- चुनाव परिणामों को इस बात के संकेतक के रूप में भी देखा जाता है कि अमेरिका की जनता अब तक राष्ट्रपति के प्रदर्शन से कितनी संतुष्ट है।

स्रोत: TH
सिक्किम का सोरेंग बना भारत का प्रथम अधिसूचित जैविक मत्स्य क्लस्टर
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- सिक्किम का सोरेंग जिला प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत भारत का प्रथम अधिसूचित जैविक मत्स्य क्लस्टर बन गया है।
परिचय
- इस क्लस्टर में हानिकारक रसायनों, प्रतिजैविकों और कीटनाशकों के उपयोग के बिना पर्यावरण की दृष्टि से स्वस्थ एवं सतत मत्स्य पालन को प्राथमिकता दी गई है।
- इसमें विशेष रूप से अमूर कार्प, भारतीय प्रमुख कार्प प्रजातियों (IMC) और ट्राउट मछली पालन पर बल दिया गया है।
- क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण के अंतर्गत सरकार ने देशभर में मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण से संबंधित 34 क्लस्टरों को अधिसूचित किया है। इनमें सिक्किम और मेघालय के जैविक मत्स्य क्लस्टर भी शामिल हैं।
- जैविक मत्स्य क्लस्टर का उद्देश्य रसायनों, प्रतिजैविकों और कीटनाशकों से मुक्त पारिस्थितिक रूप से स्वस्थ मत्स्य पालन प्रणाली को बढ़ावा देना है।
- इससे पर्यावरणीय प्रदूषण न्यूनतम रखने और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाली क्षति रोकने में सहायता मिलती है। साथ ही, यह टिकाऊ मत्स्य उत्पादन पद्धतियों को प्रोत्साहित करता है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY)
- यह मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की प्रमुख योजना है, जिसे वर्ष 2020 में प्रारंभ किया गया था।
- उद्देश्य: विभिन्न योजनाओं एवं पहलों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र को तीव्र गति से विकसित करना।
- PMMSY एक व्यापक योजना है, जिसके दो अलग-अलग घटक हैं:
- केंद्रीय क्षेत्रक योजना (CS)।
- केंद्र प्रायोजित योजना (CSS)।
- केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) के घटक को आगे लाभार्थी-उन्मुख और गैर-लाभार्थी-उन्मुख उपघटकों/गतिविधियों में विभाजित किया गया है:
- उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि।
- आधारभूत संरचना एवं कटाई-पश्चात प्रबंधन।
- मत्स्य प्रबंधन एवं विनियामक ढाँचा।
स्रोत: TH
संरक्षित क्षेत्र परमिट नियम
पाठ्यक्रम: GS2/शासन व्यवस्था
समाचार में
- नागालैंड सरकार ने राज्य के प्रमुख हॉर्नबिल महोत्सव से पहले केंद्र सरकार से राज्य में संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) व्यवस्था को पूरी तरह वापस लेने का आग्रह किया है।
संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) व्यवस्था
- इसे भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। यह एक आधिकारिक दस्तावेज है, जिसे किसी विदेशी नागरिक के लिए भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित या प्रतिबंधित घोषित क्षेत्रों में जाने के दौरान अपने साथ रखना अनिवार्य होता है।
- इसे प्रारंभ में विदेशी नागरिक (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 के अंतर्गत लागू किया गया था।
- क्षेत्रीय विस्तार: विदेशी नागरिकों को निम्नलिखित क्षेत्रों में जाने के लिए PAP की आवश्यकता होती है:
- अरुणाचल प्रदेश।
- मणिपुर।
- मिजोरम।
- नागालैंड।
- सिक्किम।
- अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह।
- हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्र।
- वर्ष 2011 में मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड के लिए इस व्यवस्था में छूट दी गई थी।
- हालाँकि, सुरक्षा संबंधी कारणों का उदाहरण देते हुए दिसंबर 2024 में इसे पुनः लागू कर दिया गया।
स्रोत: IE
लद्दाख में केसर की खेती
पाठ्यक्रम: GS3/कृषि
संदर्भ
- लद्दाख में संचालित एक प्रायोगिक परियोजना के अंतर्गत रोपण के मात्र 30 दिनों के अंदर केसर के पौधों में प्रथम बार फूल खिलने की घटना दर्ज की गई है। यह सामान्यतः लगभग दो महीने में होने वाले पुष्पन काल से पहले की उपलब्धि है।
केसर के बारे में
- केसर(क्रोकस सैटिवस) एक मसाला है, जो केसर के फूल के सूखे लाल वर्तिकाग्रों से प्राप्त किया जाता है।
- श्रमसाध्य कटाई, सीमित उत्पादन और उच्च बाजार मूल्य के कारण इसे सामान्यतः विश्व का सबसे महँगा मसाला माना जाता है।
- इसका उपयोग मसाले, प्राकृतिक रंगकारी पदार्थ, पारंपरिक चिकित्सा और सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में किया जाता है।
उगाने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ
- केसर की खेती के लिए सामान्यतः निम्नलिखित परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं:
- जलवायु: समशीतोष्ण जलवायु, जिसमें सर्दियाँ ठंडी तथा ग्रीष्म ऋतु गर्म और शुष्क हो।
- मृदा : जल निकास वाली उपजाऊ मृदा, ताकि कंदों को सड़ने से बचाया जा सके।
- धूप एवं आर्द्रता: पुष्पन और कटाई के दौरान पर्याप्त धूप तथा अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियाँ।
- प्रवर्धन: इसकी खेती पारंपरिक बीजों के बजाय भूमिगत कंदों (बल्ब जैसी भंडारण संरचनाओं) के माध्यम से की जाती है।

भारत में केसर की खेती
- प्रमुख उत्पादक क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर भारत का प्रमुख केसर उत्पादक क्षेत्र है। इसके प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
- पंपोर (पुलवामा जिला), जिसे कश्मीर की केसर घाटी के नाम से जाना जाता है।
- बडगाम, श्रीनगर और किश्तवाड़ जिले।
- वैश्विक स्थिति: ईरान विश्व का सबसे बड़ा केसर उत्पादक देश है, जबकि भारत अपेक्षाकृत कम मात्रा में केसर का उत्पादन करता है।
- भौगोलिक संकेतक (GI) टैग: कश्मीरी केसर को वर्ष 2020 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया था।
स्रोत: DTE
प्रथम अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026
पाठ्यक्रम: GS3/कृषि
संदर्भ
- प्रथम अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026 का आयोजन हैदराबाद में किया गया।
परिचय
- भारत का लक्ष्य अआगामी दशक में मक्का उत्पादन को लगभग 5.5 करोड़ टन से बढ़ाकर 7.5 करोड़ टन करना है।
- इस लक्ष्य को बेहतर फसल उत्पादकता, नवीन प्रजनन प्रौद्योगिकियों, सुदृढ़ बीज प्रणालियों और किसान-केंद्रित अनुसंधान के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
- विषय: परिवर्तित विश्व में खाद्य, पशु आहार, चारा, ईंधन और सततता के लिए मक्का क्रांति (M4FS)।
मक्का के बारे में
- मक्का, जिसे सामान्यतः कॉर्न कहा जाता है, घास कुल (Poaceae) से संबंधित एक अनाज फसल है।
- उत्पत्ति: मध्य अमेरिका, विशेष रूप से मेक्सिको।
- सबसे बड़ा उत्पादक: संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा मक्का उत्पादक है। इसका उत्पादन 430.9 मिलियन मीट्रिक टन है।
- भारत की स्थिति: व्यक्तिगत देशों में भारत पाँचवें स्थान पर है, जहाँ मक्का का उत्पादन लगभग 5.509 करोड़ टन है।
मक्का की खेती के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ
- मृदा: मक्का अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ बलुई दोमट से लेकर गादयुक्त दोमट मृदा में अच्छी तरह उगता है। जलोढ़ मृदा इसकी खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त होती है।
- मक्का की खेती के लिए आदर्श मृदा pH मान 5.5 से 7.5 के बीच होता है।
- जल निकास: खेतों में जलभराव मक्का की फसल के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए उचित जल निकास आवश्यक है।
- तापमान: मक्का गर्म जलवायु की फसल है, जिसके लिए 21°C से 32°C के बीच का तापमान अनुकूल होता है।
- वर्षा: इसके लिए 50–100 सेमी की समान रूप से वितरित वर्षा आवश्यक होती है।
- ऋतु: भारत में मक्का की खेती सामान्यतः खरीफ ऋतु (जून-सितंबर) के दौरान की जाती है। हालाँकि, क्षेत्र और विशिष्ट किस्म के आधार पर इसकी बुवाई अन्य ऋतुओं में भी की जा सकती है।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और तेलंगाना।
स्रोत: PIB
अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ 2026
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ 2026 का उद्घाटन समारोह विशाखापत्तनम स्थित समुद्री युद्ध केंद्र (MWC) में आयोजित किया गया।
परिचय
- वर्ष 2019 में प्रारंभ किया गया टाइगर ट्रायम्फ भारत और अमेरिका के बीच आयोजित एक द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सैन्य अभ्यास है।
- वर्ष 2026 का यह संस्करण एक संगोष्ठी-आधारित अभ्यास (TTX) के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों के दौरान दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच संयुक्त योजना, समन्वय और पारस्परिक कार्य-संचालन क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
- प्रथम बार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) का एक दल भी इस अभ्यास में भाग ले रहा है।
स्रोत: PIB
Previous article
पंपित भंडारण जलविद्युत (पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर)
Next article
संक्षिप्त समाचार 04-11-2026