VB-G RAM G अधिनियम प्रभावी

पाठ्यक्रम: GS2/शासन 

समाचार में

  • विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 1 जुलाई से प्रभावी हो गया है।

VB-G RAM G की पृष्ठभूमि

  • अतीत में भारत ने गरीबी उन्मूलन, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा अल्प-रोजगार प्राप्त ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अनेक ग्रामीण मजदूरी आधारित रोजगार कार्यक्रम प्रारंभ किए।
  • प्रारंभिक कार्यक्रमों में ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम (1960 का दशक) तथा ग्रामीण रोजगार हेतु क्रैश योजना (1971) प्रमुख थे।
  • इसके परिणामस्वरूप समन्वय एवं कवरेज में सुधार के उद्देश्य से 1980 एवं 1990 के दशक में अधिक सुव्यवस्थित कार्यक्रम प्रारंभ किए गए, जैसे—
    • राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम ,
    • ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम ,
    • जवाहर रोजगार योजना (1993), तथा
    • सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (1999)।
  • महाराष्ट्र रोजगार गारंटी अधिनियम, 1977 एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन सिद्ध हुआ, जिसने कार्य करने के वैधानिक अधिकार की अवधारणा को प्रस्तुत किया।
  • इन विकासक्रमों के परिणामस्वरूप महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 अस्तित्व में आया, जिसने भारत में ग्रामीण रोजगार सृजन को वैधानिक आधार प्रदान किया।
  • हाल ही में भारत ने मनरेगा, 2005 के स्थान पर विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 लागू किया है, जिसका उद्देश्य ‘विकसित भारत @2047’ के अनुरूप ग्रामीण रोजगार नीति का आधुनिकीकरण करना है।

VB-G RAM G अधिनियम, 2025

  • यह अधिनियम संसद द्वारा दिसंबर, 2025 में पारित किया गया तथा इसने लगभग दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 का स्थान लिया है।
  • यह अधिनियम एक पृथक कल्याणकारी हस्तक्षेप की अवधारणा से आगे बढ़ते हुए समेकित विकास एवं सुदृढ़ अवसंरचना को प्रोत्साहित करने वाले एक व्यापक साधन के रूप में कार्य करता है।

VB-G RAM G की प्रमुख विशेषताएँ

  • गारंटीकृत मजदूरी रोजगार दिवसों में वृद्धि: VB-G RAM G अधिनियम के अंतर्गत गारंटीकृत रोजगार दिवसों की संख्या 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
  • कृषि मौसम के दौरान रोजगार गारंटी में विराम: कृषि की बुवाई एवं कटाई के चरम मौसम के दौरान कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु योजना में 60 दिनों के विराम का प्रावधान किया गया है।
  • राज्यों द्वारा वित्तीय भार में भागीदारी: मनरेगा से भिन्न, VB-G RAM G अधिनियम ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के वित्तपोषण में राज्यों की अधिक भागीदारी का प्रावधान करता है।
    • जहाँ मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी व्यय का 100 प्रतिशत वहन केंद्र सरकार करती थी, वहीं VB-G RAM G के अंतर्गत 40 प्रतिशत वित्तीय भार राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा।
    • हालांकि, पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों तथा विधानमंडल वाले संघ राज्य क्षेत्रों के लिए 90 प्रतिशत व्यय केंद्र सरकार वहन करेगी।
    • वहीं, विधानमंडल रहित संघ राज्य क्षेत्रों के लिए संपूर्ण वित्तीय भार केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
  • शीर्ष से निम्न संसाधन आवंटन प्रणाली: यह अधिनियम राज्य श्रम बजट के आधार पर केंद्रीय आवंटन की मनरेगा प्रणाली में परिवर्तन करते हुए केंद्र सरकार द्वारा संसाधनों के प्रत्यक्ष निर्धारण एवं आवंटन की व्यवस्था लागू करता है।
  • नए नियम: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने VB-G RAM G योजना के अंतर्गत आठ प्रारूप नियम अधिसूचित किए हैं, जिनमें निम्नलिखित विषय सम्मिलित हैं—
    • शासन व्यवस्था,
    • शिकायत निवारण,
    • प्रशासनिक व्यय,
    • संक्रमणकालीन प्रावधान,
    • निधि आवंटन के मानदंड,
    • मजदूरी एवं बेरोजगारी भत्ता भुगतान,
    • केंद्रीय निगरानी परिषद, तथा
    • राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के व्यय संबंधी प्रक्रियाएँ।
  • इन नियमों का उद्देश्य योजना का सुचारु, पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
  • जॉब कार्ड के स्थान पर ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’: VB-G RAM G अधिनियम के अंतर्गत वर्तमान मनरेगा श्रमिकों के ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड तब तक वैध रहेंगे, जब तक संबंधित राज्य नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं कर देते।
    • ग्राम पंचायतों के माध्यम से अकुशल कार्य करने के इच्छुक ग्रामीण परिवारों को ये कार्ड प्रदान किए जाएंगे।
    • महिलाओं, वृद्धजनों, दिव्यांग व्यक्तियों, बंधुआ श्रमिकों, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) तथा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों जैसे संवेदनशील वर्गों के लिए विशेष रंग के कार्ड जारी किए जाएंगे।
    • सभी कार्ड तीन वर्ष तक वैध होंगे तथा सत्यापन के उपरांत उनका नवीनीकरण किया जा सकेगा।
  • समयबद्ध भुगतान एवं दंडात्मक प्रावधान: मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के अंदर किया जाना अनिवार्य होगा।
    • भुगतान में विलंब होने पर अवैतनिक मजदूरी पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से क्षतिपूर्ति देय होगी।
  • राज्यों को मानक आधारित निधि आवंटन: मानक निधि आवंटन नियम, 2026 (प्रारूप उद्देश्यपरक मानदंड) के अंतर्गत केंद्र सरकार निर्दिष्ट वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर प्रत्येक राज्य के लिए वार्षिक निधि आवंटन निर्धारित करेगी।
    • राज्यों के मध्य निधि वितरण के लिए सोलहवें वित्त आयोग के क्षैतिज संसाधन-वितरण सूत्र को आधार बनाया जाएगा।
  • अकुशल श्रमिकों के लिए नई मजदूरी दरें: VB-G RAM G अधिनियम, 2025 के अंतर्गत केंद्र सरकार को अकुशल शारीरिक श्रम के लिए मजदूरी दर निर्धारित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
    • विभिन्न क्षेत्रों के लिए पृथक मजदूरी दरें निर्धारित की जा सकती हैं, किंतु वे मनरेगा की मजदूरी दरों से कम नहीं होंगी।
    • केंद्र सरकार ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ₹300 प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की है।
    • विभिन्न राज्यों के लिए दैनिक मजदूरी ₹300 से ₹409 के मध्य अधिसूचित की गई है, जबकि सिक्किम के कुछ क्षेत्रों में यह ₹450 प्रतिदिन तक निर्धारित की गई है।
    • उत्तरी एवं पूर्वोत्तर राज्यों में मजदूरी दरों में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम, लगभग 3 प्रतिशत तक, रही है।
  • बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन के 15 दिनों के अंदर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो संबंधित व्यक्ति को पहले 30 दिनों तक अधिसूचित मजदूरी का एक-चौथाई तथा उसके पश्चात अधिसूचित मजदूरी का आधा बेरोजगारी भत्ते के रूप में प्रदान किया जाएगा।

VB-G RAM G की प्रासंगिकता

  • यह अधिनियम गारंटीकृत रोजगार को सुदृढ़ करता है, जिससे मौसमी बेरोजगारी एवं आय संबंधी असुरक्षा में कमी आती है।
  • यह राज्यों के मध्य विद्यमान मजदूरी असमानताओं को दूर करने तथा ग्रामीण श्रमिकों के लिए समान एवं न्यायसंगत मजदूरी को प्रोत्साहित करने में सहायक है।
  • यह रोजगार को जल संसाधन प्रबंधन तथा आपदा नियोजन से जोड़ते हुए पर्यावरणीय लचीलापन को सुदृढ़ करता है।
  • यह ग्रामीण विकास कार्यों में महिलाओं तथा हाशिए पर स्थित समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
  • स्थायी एवं सतत अवसंरचना के निर्माण पर दिया गया बल दीर्घकालिक ग्रामीण उत्पादकता एवं सतत ग्रामीण विकास को प्रोत्साहन देता है।
  • यह विकसित भारत @2047 की परिकल्पना सहित व्यापक विकासात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होता है।

आलोचनाएँ एवं चुनौतियाँ

  • अत्यधिक केंद्रीकरण से शीर्ष से निम्न नियोजन की प्रक्रिया कमजोर हो सकती है, जो मनरेगा की प्रभावशीलता का मूल आधार रही है।
  • ग्राम पंचायतों के वर्गीकरण तथा राज्यों के अंदर मानक-आधारित निधि वितरण के लिए प्रस्तावित केंद्रीकृत कार्यप्रणाली से अत्यधिक सूक्ष्म स्तर के नियंत्रण की आशंका उत्पन्न होती है।
  • मनरेगा के अंतर्गत जहाँ श्रम लागत का लगभग संपूर्ण भार केंद्र सरकार वहन करती थी तथा सामग्री लागत का वहन 60:40 के अनुपात में केंद्र एवं राज्यों द्वारा किया जाता था, वहीं VB-G RAM G के अंतर्गत श्रम एवं सामग्री व्यय के संयुक्त व्यय को 60:40 अनुपात के अधीन कर दिया गया है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।
  • बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण एवं डिजिटल प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता, सीमित डिजिटल पहुँच वाले ग्रामीण एवं संवेदनशील वर्गों को योजना से वंचित कर सकती है।
  • प्रस्तावित परिवर्तनों से एक सफल अधिकार-आधारित रोजगार गारंटी व्यवस्था के कमजोर पड़ने अथवा उसके स्थान पर नई व्यवस्था लागू होने संबंधी चिंताएँ व्यक्त की जा रही हैं।

निष्कर्ष एवं आगे की राह

  • VB-G RAM G अधिनियम ग्रामीण रोजगार नीति में एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो आजीविका सुरक्षा को सतत विकास से जोड़ते हुए रोजगार गारंटी के दायरे का विस्तार करता है।
  • तथापि, इसकी सफलता पर्याप्त वित्तीय सहायता, ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता, समावेशी डिजिटल प्रणाली, सुदृढ़ सामाजिक अंकेक्षण, जलवायु-अनुकूल नियोजन तथा संस्थागत क्षमता निर्माण के माध्यम से वित्तपोषण, समावेशन एवं सुशासन संबंधी चुनौतियों के प्रभावी समाधान पर निर्भर करेगी, जिससे विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके।

स्रोत  :IE

 

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