पाठ्यक्रम: GS2/ई-शासन
संदर्भ
- हाल ही में सरकार ने eSARAS (SARAS आजीविका) की भूमिका पर विशेष बल दिया है, जो महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने, ग्रामीण कारीगरों को राष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने तथा डिजिटल इंडिया मिशन के अंतर्गत समावेशी विकास को प्रोत्साहन देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
eSARAS (SARAS आजीविका) के बारे में
- यह महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs), ग्रामीण कारीगरों तथा उत्पादक समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए एक डिजिटल मार्केटप्लेस है।
- इसका विकास ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत किया गया है।
- इसका उद्देश्य SHG सदस्यों को प्रत्यक्ष बाज़ार उपलब्ध कराना, मध्यस्थों की भूमिका समाप्त करना, उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करना तथा स्वदेशी हस्तशिल्प एवं ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है।
- eSARAS पर उपलब्ध प्रत्येक उत्पाद अपनी एक अलग कहानी प्रस्तुत करता है तथा प्रत्येक खरीद सीधे उस कारीगर से जुड़ाव स्थापित करती है जिसने उसे बनाया है। इसके प्रमुख उदाहरण हैं–
- मध्य प्रदेश की चंदेरी साड़ियाँ
- राजस्थान के संगमरमर शिल्पकार
- जम्मू एवं कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों के पश्मीना उत्पादक

प्रमुख उपलब्धियाँ: पोर्टल से ई-कॉमर्स इकोसिस्टम तक
- eSARAS पोर्टल: SARAS उत्पादों के अधिक प्रभावी विपणन हेतु ई-कॉमर्स पोर्टल का शुभारंभ।
- eSARAS मोबाइल ऐप: eSARAS फुलफिलमेंट सेंटर के साथ मोबाइल ऐप का शुभारंभ, जिसका उपयोग उत्पादों की प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं शिपिंग के लिए किया जाता है।
- ONDC: SHG उत्पादों को 11 से अधिक खरीदार ऐप्स पर उपलब्ध कराया गया है। ONDC प्लेटफॉर्म पर 20 करोड़ से अधिक खरीदारों तक पहुँच के साथ 800 से अधिक हस्तनिर्मित उत्पाद सूचीबद्ध किए गए हैं।
- UMANG: eSARAS को UMANG प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया है। जून 2026 तक यह मंच 2,572 सेवाएँ तथा 796.69 करोड़ लेन-देन प्रदान कर रहा है।
- SARAS शक्ति कलेक्शन: राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 में संस्थागत एवं कॉर्पोरेट बाज़ारों के लिए प्रीमियम क्यूरेटेड उपहार संग्रह लॉन्च किया गया।
- SARAS आजीविका गैलरी: चयनित SHG उत्पादों के प्रदर्शन हेतु एक स्थायी रिटेल गैलरी की स्थापना की गई है।
eSARAS की प्रमुख विशेषताएँ
- SHGs के लिए विशेष मार्केटप्लेस: यह केवल महिला स्वयं सहायता समूहों एवं उनके उत्पादक समूहों द्वारा निर्मित वस्तुओं की बिक्री पर केंद्रित है।
- ग्रामीण महिलाओं में उद्यमिता का विकास: यह ग्रामीण महिलाओं में उद्यमिता कौशल के विकास एवं संवर्धन का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
- प्रत्यक्ष बाज़ार संपर्क: यह उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित करता है तथा बिचौलियों पर निर्भरता को कम करता है, जिससे उत्पादकों की आय में वृद्धि होती है।
- उत्पाद विविधता: इसमें हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, प्राकृतिक एवं जैविक खाद्य पदार्थ, गृह सज्जा सामग्री, वस्त्र उत्पाद तथा पारंपरिक कलाकृतियाँ उपलब्ध हैं।
- यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं शिल्प परंपरा को प्रोत्साहन देने में सहायक है।
- डिजिटल सशक्तिकरण: यह ऑनलाइन पंजीकरण, उत्पाद सूचीकरण , डिजिटल भुगतान तथा ऑर्डर प्रबंधन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
- साथ ही यह ग्रामीण महिलाओं में डिजिटल साक्षरता एवं वित्तीय समावेशन को भी प्रोत्साहित करता है।
- राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच: यह भौगोलिक सीमाओं से परे ग्रामीण उत्पादों को देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुँचने का अवसर प्रदान करता है।
- यह “वोकल फॉर लोकल” तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी सुदृढ़ करता है।
- समावेशिता
- यह विशेष रूप से वंचित समुदायों एवं दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को आजीविका के अवसर प्रदान करता है।
- यह DAY-NRLM के अंतर्गत गठित सामुदायिक संस्थाओं को भी सशक्त बनाता है।
आगे की राह
- क्षमता निर्माण: डिजिटल विपणन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा गुणवत्ता मानकों के संबंध में निरंतर प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
- लॉजिस्टिक्स अवसंरचना: ऑर्डर पूर्ति के लिए सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला एवं वितरण प्रणाली का विकास आवश्यक है।
- तकनीकी नवाचार: बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुशंसा प्रणाली, बहुभाषी इंटरफेस, डेटा विश्लेषण तथा अन्य आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाना चाहिए।
- ब्रांड निर्माण: क्षेत्रवार ब्रांड विकसित किए जाएँ तथा भौगोलिक संकेतक (GI) आधारित उत्पादों के प्रचार-प्रसार के माध्यम से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सुदृढ़ किया जाए।
- अन्य मार्केटप्लेस के साथ एकीकरण: बाज़ार तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने हेतु ONDC, GeM तथा अन्य प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए।
- वित्तीय सहायता: SHGs को सुगम ऋण, कार्यशील पूंजी तथा बीमा सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
- निर्यात संवर्धन: प्रीमियम हस्तशिल्प एवं पारंपरिक कारीगर उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात के अवसरों का विस्तार किया जाना चाहिए।
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