पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
संदर्भ
- केंद्र सरकार ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत तीन प्रमुख प्राधिकरण नियमों को अधिसूचित किया है, जिससे देश में नई दूरसंचार विनियामक व्यवस्था पूर्ण रूप से लागू हो गई है।
परिचय
- अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित प्राधिकरण नियम:
- दूरसंचार (प्रधान दूरसंचार सेवाओं के प्रावधान हेतु प्राधिकरण) नियम, 2026
- दूरसंचार (कैप्टिव दूरसंचार सेवाओं हेतु प्राधिकरण) नियम, 2026
- दूरसंचार (विविध दूरसंचार सेवाओं के प्रावधान हेतु प्राधिकरण) नियम, 2026
पृष्ठभूमि
- दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने भारतीय तार अधिनियम, 1885 तथा भारतीय वायरलेस तार अधिनियम, 1933 का स्थान लिया है।
- यह अधिनियम भारत के दूरसंचार संबंधी कानूनों को एकीकृत करते हुए 5G, 6G, उपग्रह संचार , इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा इंटरनेट-आधारित संचार सेवाओं जैसी आधुनिक तकनीकों के अनुरूप एक समग्र विधिक ढाँचा प्रदान करता है।
- यद्यपि अधिनियम के कुछ प्रावधान वर्ष 2024 में अधिसूचित किए गए थे, किंतु प्राधिकरण नियमों की अधिसूचना के साथ इसका पूर्ण कार्यान्वयन सुनिश्चित हो गया है।
दूरसंचार अधिनियम, 2023 की प्रमुख विशेषताएँ
- दूरसंचार की प्रौद्योगिकी-तटस्थ परिभाषा: अधिनियम में दूरसंचार को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है, जिसके अनुसार तार, रेडियो, प्रकाशीय अथवा अन्य विद्युत-चुंबकीय प्रणालियों के माध्यम से संदेशों का प्रेषण, उत्सर्जन अथवा ग्रहण दूरसंचार की श्रेणी में आता है।
- मार्गाधिकार : अधिनियम सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों पर दूरसंचार अवसंरचना की स्थापना हेतु प्रक्रियाओं को सरल बनाता है।
- इससे ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार तथा आगामी पीढ़ी के दूरसंचार नेटवर्क के शीघ्र विकास को प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा है।
- स्पेक्ट्रम का आवंटन: सामान्यतः स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी के माध्यम से किया जाएगा।
- तथापि, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा, आपदा प्रबंधन तथा सार्वजनिक प्रसारण जैसे निर्दिष्ट सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए प्रशासनिक आधार पर स्पेक्ट्रम आवंटन की अनुमति दी गई है।
- डिजिटल भारत निधि : अधिनियम में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) का नाम परिवर्तित कर डिजिटल भारत निधि (DBN) कर दिया गया है।
- यह निधि ग्रामीण, दूरस्थ एवं व्यावसायिक रूप से अलाभकारी क्षेत्रों में दूरसंचार अवसंरचना के विकास हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती रहेगी।
- आपातकालीन शक्तियाँ: युद्ध, लोक आपातकाल अथवा राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में केंद्र सरकार अस्थायी रूप से दूरसंचार अवसंरचना का नियंत्रण अपने स्वामित्व में ले सकती है।
- सरकार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दूरसंचार सेवाओं को अवरोधित, निगरानी अथवा निलंबित भी कर सकती है।
दूरसंचार (प्राधिकरण) नियम, 2026
- सरकार ने नई व्यवस्था के डिजिटल कार्यान्वयन हेतु दूरसंचार विभाग (DoT) के टेलीकॉम ई-सर्विसेज़ पोर्टल को भी अधिसूचित किया है।
- साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि प्राधिकरण प्राप्त होने मात्र से स्पेक्ट्रम उपयोग का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होगा।
- प्राधिकरण-आधारित विनियामक व्यवस्था: इन नियमों के माध्यम से पूर्व की लाइसेंस-आधारित प्रणाली के स्थान पर दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत प्राधिकरण-आधारित नियामक व्यवस्था लागू की गई है।
- उपग्रह एवं डेटा संबंधी प्रावधान: जो कंपनियाँ उपग्रह आधारित दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना, संचालन, रखरखाव अथवा विस्तार करना चाहती हैं अथवा उपग्रह नेटवर्क के माध्यम से दूरसंचार सेवाएँ प्रदान करना चाहती हैं, उन्हें सरकार से पृथक स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
- अधिकृत संस्थाओं को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में दूरसंचार अवसंरचना की स्थापना अथवा विस्तार से पूर्व भी सरकारी स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
- दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को नेटवर्क डेटा, लॉग तथा संबंधित सूचनाओं का भंडारण भारत के अंदर ही करना होगा।
- ऐसे डेटा की प्रतियों को भारत से बाहर प्रेषित करना, साझा करना अथवा उपलब्ध कराना अनुमत नहीं होगा।
प्रमुख चिंताएँ
- दूरसंचार की व्यापक परिभाषा: दूरसंचार की प्रौद्योगिकी-तटस्थ एवं व्यापक परिभाषा को लेकर आशंका व्यक्त की गई है कि यदि सरकार अधिसूचना जारी करती है, तो मैसेजिंग एवं कॉलिंग एप्लिकेशन जैसे इंटरनेट-आधारित संचार प्लेटफॉर्म भी इस विनियामक व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं।
- निजता (Privacy) संबंधी चिंताएँ: अधिनियम सरकार को निर्दिष्ट परिस्थितियों में संचार को अवरोधित करने तथा दूरसंचार अवसंरचना का अस्थायी अधिग्रहण करने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे निजता के अधिकार से संबंधित प्रश्न उठते हैं।
- OTT प्लेटफॉर्म के लिए विनियामक अनिश्चितता: ओवर-द-टॉ पसंचार सेवाओं के नियामक स्वरूप को लेकर अभी भी स्पष्टता का अभाव है।
आगे की राह
- सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 का कार्यान्वयन विनियामक स्पष्टता प्रदान करे, उपयोगकर्ताओं की निजता की रक्षा सुनिश्चित करे तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखे।
- एक पारदर्शी एवं प्रौद्योगिकी-तटस्थ विनियामक ढाँचा नई प्राधिकरण-आधारित व्यवस्था में सुगम संक्रमण सुनिश्चित करते हुए सार्वभौमिक डिजिटल संपर्क तथा आगामी पीढ़ी की दूरसंचार सेवाओं में निवेश को प्रोत्साहित करना चाहिए।
स्रोत: TH
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