भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोजगार का भविष्य 

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  •  हाल के सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का तीव्र अंगीकरण भारत के स्नातक रोजगार परिदृश्य को पुनर्गठित कर रहा है, जिससे रोजगार-योग्यता और कार्यबल विकास के समक्ष नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं।

AI रोजगार बाजार को किस प्रकार परिवर्तित कर रहा है?

  • प्रवेश-स्तर के अवसरों में कमी : AI उपकरण अब उन नियमित कार्यों को करने में सक्षम होते जा रहे हैं जो पारंपरिक रूप से नए स्नातकों को सौंपे जाते थे।
    •  डेटा प्रोसेसिंग, बुनियादी कोडिंग, रिपोर्ट तैयार करना, बाजार अनुसंधान और प्रस्तुति डिज़ाइन जैसे कार्य अब स्वचालित किए जा रहे हैं।
    • रैंडस्टैड डिजिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, 30% से अधिक भारतीय संगठन AI के विस्तार के साथ स्नातक भर्ती को कम करने की योजना बना रहे हैं।
  • “हायर-एंड-ट्रेन” मॉडल में गिरावट : पहले संगठन बड़ी संख्या में स्नातकों की भर्ती कर उन्हें ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण प्रदान करते थे।
    •  अब नियोक्ता ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो AI-सक्षम कार्य वातावरण में तुरंत योगदान दे सकें।
  • स्नातकों में बढ़ती चिंता : अधिकांश स्नातक मानते हैं कि AI और स्वचालन रोजगार प्राप्त करना अधिक कठिन बना सकते हैं।
    •  व्यावसायिक प्रमाणपत्र, इंटर्नशिप और व्यावहारिक अनुभव को अब पारंपरिक डिग्रियों की तुलना में अधिक महत्व दिया जा रहा है।
  • निरंतर कौशल उन्नयन का बढ़ता महत्व : तीव्र तकनीकी परिवर्तन के कारण आजीवन सीखना एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन गया है।
    •  AI कौशल, डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और डिजिटल दक्षताओं की मांग विभिन्न क्षेत्रों में तीव्रता से बढ़ रही है।

AI विभिन्न रोजगारों को कैसे प्रभावित करता है?

  • उच्च-कुशल रोजगार अधिक प्रभावित :  शोध से संकेत मिलता है कि उच्च-कुशल व्यवसाय वर्तमान में निम्न-कुशल रोजगारों की तुलना में अधिक AI-प्रभावित हैं।
    • सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, सलाहकार, विश्लेषक, शोधकर्ता, वकील और प्रबंधक जैसे पेशेवरों के कार्यों का एक बड़ा हिस्सा अब स्वचालित हो रहा है।
    •  जनरेटिव AI कई ऐसे संज्ञानात्मक कार्य कर सकता है जिन्हें पहले स्वचालित करना कठिन माना जाता था।
  • निम्न-कुशल रोजगार अपेक्षाकृत सुरक्षित :  कई निम्न-कुशल कार्यों में शारीरिक श्रम, पारस्परिक संपर्क एवं संदर्भ-विशिष्ट निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।
    •  परिणामस्वरूप, निर्माण कार्य, देखभाल सेवाएँ, आतिथ्य सेवाएँ और कृषि श्रम जैसी रोजगार अपेक्षाकृत कम AI-प्रभावित हैं।

भारत पर प्रभाव 

  • जनसांख्यिकीय लाभांश पर दबाव :  AI के कारण प्रवेश-स्तर के रोजगारों में कमी भारत की विशाल युवा जनसंख्या के लिए रोजगार अवसरों को सीमित कर सकती है, जिससे जनसांख्यिकीय लाभांश की प्राप्ति प्रभावित हो सकती है।
  • सेवा-आधारित विकास मॉडल के लिए चुनौती : आईटी, बीपीओ, परामर्श और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्र, जो पारंपरिक रूप से बड़ी संख्या में स्नातकों को रोजगार देते थे, अब नियमित कार्यों का स्वचालन कर रहे हैं।
  • कौशल एवं आय असमानता में वृद्धि : AI और डिजिटल कौशल वाले श्रमिकों को अधिक लाभ मिलने की संभावना है, जबकि अन्य को रोजगार विस्थापन एवं स्थिर वेतन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

भारत द्वारा की गई पहलें 

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020:  यह नीति सभी स्तरों पर डिजिटल और AI साक्षरता को मूलभूत दक्षताओं के रूप में महत्व देती है।
  • स्किल इंडिया मिशन : कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के नेतृत्व में यह मिशन अपने प्रशिक्षण तंत्र में AI एवं उभरती प्रौद्योगिकियों को एकीकृत कर रहा है।
  • YUVAi (AI के साथ उन्नति और विकास के लिए युवा):  यह पहल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा राष्ट्रीय ई-शासन प्रभाग द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों को AI, तकनीकी एवं  सामाजिक कौशल से समावेशी रूप से सशक्त बनाना है।
  • इंडियाAI फ्यूचरस्किल्स:  इंडियाAIमिशन (2024) के अंतर्गत शुरू की गई यह पहल स्नातक से लेकर डॉक्टरेट स्तर तक लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से AI-कुशल मानव संसाधन तैयार करने का प्रयास करती है।

आगे की राह 

  • शिक्षा-उद्योग संबंधों का सुदृढ़ीकरण:  विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रमों को उभरती उद्योग आवश्यकताओं और तकनीकी विकास के अनुरूप बनाना चाहिए। उद्योग साझेदारियों का विस्तार कर व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  • आजीवन सीखने को प्रोत्साहन :  निरंतर पुनः-कौशल और कौशल उन्नयन हेतु एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित किया जाना चाहिए।
  • श्रम बाजार सूचना प्रणाली में सुधार : भारत को AI-आधारित रोजगार परिवर्तन को ट्रैक करने हेतु विस्तृत व्यावसायिक डेटाबेस और वास्तविक समय श्रम बाजार सूचना प्रणाली विकसित करनी चाहिए।
  • मानव-AI पूरकता को प्रोत्साहन : नीतिगत प्रयास ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित होने चाहिए जहाँ मानव रचनात्मकता, निर्णय क्षमता, सहानुभूति और समस्या-समाधान कौशल AI को पूरक बनाते हैं।

निष्कर्ष 

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के रोजगार परिदृश्य को पुनः परिभाषित कर रही है, जिससे नियमित प्रवेश-स्तर के रोजगारों की मांग घट रही है और उन्नत कौशल तथा अनुकूलन क्षमता का महत्व बढ़ रहा है।
  •  समावेशी विकास सुनिश्चित करने हेतु भारत को AI-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए अपने कार्यबल को तैयार करने के लिए शिक्षा, कौशल विकास और श्रम बाजार संस्थानों को सुदृढ़ करना होगा।

स्रोत: BW

 

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