पाठ्यक्रम: GS3/ ऊर्जा और बुनियादी ढांचा
संदर्भ
- भारत नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण, विद्युत ग्रिड की स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए पंपित भंडारण जलविद्युत क्षमता का विस्तार कर रहा है।
पंपित भंडारण जलविद्युत की आवश्यकता
- सितंबर 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता 308.027 गीगावाट है।
- वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान भारत ने लगभग 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन क्षमता जोड़ी। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- हालाँकि, नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन परिवर्तनशील होता है। इस परिवर्तनशीलता के कारण उस समय विद्युत भंडारण की आवश्यकता बढ़ रही है, जब नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन माँग से अधिक होता है।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने वर्ष 2031–32 तक 73.93 गीगावाट भंडारण क्षमता की आवश्यकता का अनुमान लगाया है।
- इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- पंपित भंडारण परियोजनाओं (PSPs) से 26.69 गीगावाट क्षमता।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) से 47.24 गीगावाट क्षमता।
पंपित भंडारण जलविद्युत (PSH) क्या है?
- पंपित भंडारण परियोजनाएँ (PSPs) बड़े पैमाने की ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ हैं, जो विद्युत ऊर्जा का भंडारण करने के लिए जल और गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग करती हैं। इन्हें प्रायः “जल बैटरी” कहा जाता है।
- एक सामान्य पंपित भंडारण परियोजना में अलग-अलग ऊँचाइयों पर स्थित दो जलाशय होते हैं।
- अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध होने की अवधि में जल को निचले जलाशय से पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुँचाया जाता है।
- जब विद्युत की माँग बढ़ती है, तब संग्रहित जल को टरबाइनों से प्रवाहित किया जाता है, जिससे विद्युत उत्पादन होता है।
- पंपित भंडारण परियोजनाएँ सौर एवं पवन ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने, विद्युत की अधिकतम माँग को पूरा करने तथा विद्युत ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायता करती हैं।

पंपित भंडारण विद्युत संयंत्रों का वर्गीकरण
- पंपित भंडारण परियोजनाओं का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि उनके जलाशय प्राकृतिक जलधाराओं से किस प्रकार जुड़े हुए हैं अथवा उनके संबंध में किस स्थिति में स्थित हैं।
- इन्हें तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
- जलधारा से जुड़े संयंत्र (ऑन-स्ट्रीम)।
- जलधारा से अलग खुले चक्र वाले संयंत्र (ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप)।
- जलधारा से अलग बंद चक्र वाले संयंत्र (ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप)।

भारत में पंपित भंडारण का विस्तार
- संचालित क्षमता: अगस्त 2026 तक भारत में 10 परियोजनाओं के अंतर्गत 7.43 गीगावाट की पंपित भंडारण जलविद्युत क्षमता संचालित है। इन परियोजनाओं की स्थापित क्षमता 25 मेगावाट से अधिक है।
- भारत ने कुल 345.38 गीगावाट की संयुक्त संभावित क्षमता वाली 320 पंपित भंडारण परियोजनाओं की पहचान की है।
- इसमें 56.67 गीगावाट क्षमता वाली 62 जलधारा से जुड़ी परियोजनाएँ तथा 288.71 गीगावाट क्षमता वाली 258 जलधारा से अलग परियोजनाएँ शामिल हैं।

पंपित भंडारण परियोजनाओं की वैश्विक स्थापित क्षमता
- अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत तक वैश्विक स्तर पर स्थापित पंपित जलविद्युत भंडारण क्षमता 159.8 गीगावाट थी।

भारत द्वारा की गई पहलें
- पंपित भंडारण परियोजनाओं के विकास हेतु समर्पित दिशा-निर्देश: विद्युत मंत्रालय ने अप्रैल 2023 में भारत में पंपित भंडारण परियोजनाओं के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए दिशा-निर्देश अधिसूचित किए।
- प्रशुल्क-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया: वर्ष 2025 में अधिसूचित दिशा-निर्देशों के अंतर्गत भंडारण क्षमता और संग्रहित ऊर्जा की खरीद के लिए एक रूपरेखा प्रदान की गई है।
- पारेषण शुल्क में छूट: 30 जून 2028 तक निर्माण के लिए स्वीकृत पात्र पंपित भंडारण परियोजनाओं को वाणिज्यिक परिचालन प्रारंभ होने की तिथि से 25 वर्षों तक अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली (ISTS) शुल्क में 100% छूट मिल सकती है।
- त्वरित अनुमोदन: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर सहमति प्रदान करने की समय-सीमा 90 दिनों से घटाकर 50 दिन कर दी गई है।
- एकीकृत नियोजन: सरकार ग्रिड की लचीलेपन की क्षमता में सुधार करने और अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को समायोजित करने के लिए ऊर्जा भंडारण एवं पारेषण नियोजन को एकीकृत कर रही है।
प्रमुख चुनौतियाँ
- उच्च प्रारंभिक पूँजीगत लागत और निर्माण की लंबी अवधि।
- भौगोलिक सीमाएँ, जिनमें उपयुक्त ऊँचाई का अंतर, भूगर्भीय परिस्थितियाँ और जल की उपलब्धता शामिल हैं।
- वनों, जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों और स्थानीय समुदायों पर संभावित पर्यावरणीय प्रभाव।
- पारेषण संपर्क, आवश्यक स्वीकृतियों और परियोजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन की आवश्यकता।
निष्कर्ष
- पंपित भंडारण जलविद्युत भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह दीर्घावधि ऊर्जा भंडारण उपलब्ध कराने, विद्युत ग्रिड की लचीलेपन की क्षमता में सुधार करने तथा नवीकरणीय ऊर्जा के व्यापक एकीकरण को संभव बनाने में सहायक है।
- इसका सफल विस्तार आधारभूत संरचना के विकास, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन के बीच संतुलन स्थापित करने पर निर्भर करेगा।
स्रोत: PIB
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