पाठ्यक्रम: GS3/कृषि/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- भारतीय कॉफी बोर्ड ने भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि उपकरणों एवं कॉफी की कटाई संबंधी प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की, आईआईटी धारवाड़ तथा कॉफी उत्पादक संघों के साथ सहयोगात्मक पहल का प्रस्ताव दिया है।
कॉफी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मशीनीकरण
- अनुकूलित कटाई के प्रारूप: भारतीय कॉफी बोर्ड, भारतीय कॉफी बागानों की परिस्थितियों के अनुकूल कटाई की मशीनें विकसित करने के लिए आईआईटी रुड़की के साथ सहयोग कर रहा है।
- कीट एवं रोगों की पहचान: प्रिसीजन ग्रो के ईक्रॉप जैसे उपकरण कॉफी के खेतों की निगरानी में सहायता प्रदान करते हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित छवि पहचान तथा ड्रोन पर लगे कैमरे कीटों के प्रकोप और फसल संबंधी रोगों के प्रारंभिक दृश्य संकेतों की पहचान करने में सहायक हो सकते हैं। इससे समय पर आवश्यक उपाय किए जा सकते हैं।
- परिशुद्ध कृषि: ड्रोन आधारित चित्रण तथा मशीन अधिगम प्रारूपों के माध्यम से फसलों के स्वास्थ्य की निगरानी, बागानों की परिस्थितियों का मानचित्रण तथा लक्षित उपचार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है।
- सिंचाई प्रबंधन: मृदा की आर्द्रता मापने वाले संवेदकों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिंचाई कलन-विधियों के संयुक्त उपयोग से फसल की आवश्यकताओं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जल की आपूर्ति समायोजित की जा सकती है।
भारत का कॉफी क्षेत्र
- भारत कॉफी का पाँचवाँ सबसे बड़ा निर्यातक देश है।
- भारतीय कॉफी के पाँच प्रमुख निर्यात गंतव्य निम्नलिखित हैं:
- इटली — 18.09 प्रतिशत
- जर्मनी — 11.01 प्रतिशत
- बेल्जियम — 7.47 प्रतिशत
- रूसी संघ — 5.28 प्रतिशत
- संयुक्त अरब अमीरात — 5.09 प्रतिशत
कॉफी उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ
- जलवायु: कॉफी उष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह उगती है। इसके लिए हल्की सर्दियों वाली गर्म एवं आर्द्र जलवायु आवश्यक है। पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए छाया महत्त्वपूर्ण है, इसलिए कॉफी की खेती प्रायः वृक्षों के आवरण के नीचे की जाती है।
- मृदा: इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली, उपजाऊ तथा ह्यूमस एवं जैविक पदार्थों से समृद्ध मृदा आवश्यक है। मृदा का अम्लीय मान (पीएच) 6.0–6.5 के बीच होना चाहिए।
- तापमान: इसके लिए 15°C से 28°C के बीच वार्षिक तापमान आदर्श माना जाता है। पाला कॉफी के पौधों के लिए हानिकारक होता है। अत्यधिक गर्मी अथवा शुष्क परिस्थितियाँ भी उपज को कम करती हैं।
- वर्षण एवं स्थलाकृति: कॉफी समुद्र तल से 600–1,600 मीटर की ऊँचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में अच्छी तरह उगती है। ढलानदार भूभाग उचित जल निकासी सुनिश्चित करता है तथा खेतों में जलभराव को रोकता है।
कॉफी के प्रमुख उत्पादक राज्य
- कर्नाटक: भारत का सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक राज्य; देश के कुल कॉफी उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत योगदान।
- केरल
- तमिलनाडु
- अन्य उभरते उत्पादक क्षेत्र: आंध्र प्रदेश, ओडिशा तथा पूर्वोत्तर भारत के राज्य, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मेघालय।
भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त भारतीय कॉफी की किस्में
- कूर्ग अरेबिका कॉफी: कर्नाटक के कोडगु जिले में उगाई जाती है।
- वायनाड रोबस्टा कॉफी: केरल के वायनाड जिले में उत्पादित होती है।
- चिकमगलूर अरेबिका कॉफी: कर्नाटक के चिकमगलूर जिले में उत्पादित होती है।
- बाबाबुदनगिरी अरेबिका कॉफी: कर्नाटक के चिकमगलूर क्षेत्र में उगाई जाती है तथा इसमें चॉकलेट जैसा विशिष्ट स्वाद पाया जाता है।
- मानसूनी मालाबार रोबस्टा कॉफी: केरल की विशिष्ट कॉफी, जो अपने अनूठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
- अराकू कॉफी: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले तथा ओडिशा के पहाड़ी क्षेत्रों में समुद्र तल से 900–1,100 मीटर की ऊँचाई पर उगाई जाती है।
भारतीय कॉफी बोर्ड
- स्थापना: कॉफी अधिनियम, 1942 (अधिनियम संख्या VII) के अंतर्गत स्थापित।
- प्रशासनिक मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय।
- मुख्यालय: बेंगलुरु।
स्रोत: TH
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