संक्षिप्त समाचार 13-10-2026

गरबा नृत्य

पाठ्यक्रम: GS1/संस्कृति

संदर्भ

  • नवरात्रि उत्सव के दौरान देवी अंबे माँ को समर्पित पारंपरिक गरबा नृत्य खुले स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं।

गरबा के बारे में

  • गरबा गुजरात का एक पारंपरिक लोकनृत्य है, जिसे नवरात्रि के नौ दिवसीय उत्सव के दौरान किया जाता है। यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
  • गरबा नाम की उत्पत्ति संस्कृत के उस शब्द से हुई है, जिसका अर्थ गर्भ या गर्भाशय है। यह जीवन एवं सृजन का प्रतीक है। यह नृत्य उर्वरता, नारीत्व तथा मातृशक्ति के प्रति भक्ति को अभिव्यक्त करता है।
  • यह दीपक अथवा देवी शक्ति की प्रतिमा के चारों ओर वृत्ताकार रूप में किया जाता है, जो ब्रह्मांड की स्त्री ऊर्जा का प्रतीक है।
  • लयबद्ध संगीत, गायन एवं तालियों के साथ किया जाने वाला यह नृत्य सभी आयु वर्गों, लिंगों तथा सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोगों के लिए खुला है।
  • आधुनिक गरबा पर पारंपरिक डांडिया रास का प्रभाव पड़ा है, जिसे परंपरागत रूप से पुरुषों द्वारा किया जाता था। इस प्रभाव ने गरबा को उसका ऊर्जावान एवं समकालीन स्वरूप प्रदान किया है।
  • दिसंबर 2023 में गरबा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।
  • इसके विभिन्न रूपों में माताजी गरबा, कृष्ण गरबा तथा लोक गरबा शामिल हैं।

स्रोत: IE

राष्ट्रपति द्वारा छह राज्यों के राज्यपाल नियुक्त 

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन

संदर्भ

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों के लिए राज्यपालों की नियुक्ति की है।

राज्यपाल के पद के बारे में

  • संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 से 162 तक राज्यपाल के पद से संबंधित प्रावधान किए गए हैं।
  • पात्रता:
    • भारत का नागरिक होना चाहिए।
    • 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका होना चाहिए।
    • संसद अथवा राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं होना चाहिए।
    • किसी अन्य लाभ के पद पर आसीन नहीं होना चाहिए।
  • राज्यपाल की नियुक्ति: किसी राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • कार्यकाल: राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष होता है।

राज्यपाल की प्रमुख भूमिकाएँ

  • कार्यपालिका संबंधी भूमिका: राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है। वह मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। राज्य की मंत्रिपरिषद राज्य विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी होती है।
  • विधायी भूमिका: राज्यपाल राज्य विधानमंडल के सत्र आहूत करता है तथा विधानसभा को भंग कर सकता है। वह सत्र के प्रारंभ में विधानमंडल को संबोधित भी कर सकता है। इसके अतिरिक्त, उसे राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए सुरक्षित रखने का अधिकार प्राप्त है।
  • न्यायिक भूमिका: राज्यपाल कुछ मामलों में दंड को क्षमा करने, उसके निष्पादन को स्थगित करने, दंड की अवधि में राहत देने अथवा दंड में कमी करने की शक्ति रखता है। कुछ परिस्थितियों में वह दंडादेश को लघुकृत भी कर सकता है। राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में भी राज्यपाल की भूमिका होती है।
  • विवेकाधीन शक्तियाँ: यदि मुख्यमंत्री अथवा मंत्रिपरिषद राज्य विधानमंडल में बहुमत खो देती है या कोई दल स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं करता है, तो राज्यपाल परिस्थितियों के अनुसार किसी अन्य व्यक्ति को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने संबंधी विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

स्रोत:IE

लक्षद्वीप पूर्ण साक्षरता प्राप्त करने वाला केंद्रशासित प्रदेश बना

पाठ्यक्रम: GS2/शिक्षा

संदर्भ

  • लक्षद्वीप ने उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्ण साक्षरता का दर्जा प्राप्त किया है।

उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम

  • यह केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे वर्ष 2022 से 2027 तक लागू किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के अनुरूप इस योजना का लक्ष्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन वयस्कों को शिक्षा प्रदान करना है, जिन्हें विद्यालय जाने का अवसर नहीं मिल सका।
  • इस योजना के पाँच प्रमुख घटक हैं:
    1. आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान।
    2. महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल।
    3. बुनियादी शिक्षा।
    4. व्यावसायिक कौशल।
    5. सतत शिक्षा।
  • इस योजना का उद्देश्य भारत को ‘जन-जन साक्षर’ बनाना है। यह कर्तव्यबोध की भावना पर आधारित है तथा स्वयंसेवा के माध्यम से लागू की जा रही है।

साक्षरता के बारे में

  • भारत के महापंजीयक कार्यालय के अनुसार, सात वर्ष या उससे अधिक आयु का वह व्यक्ति साक्षर माना जाता है, जो किसी भी भाषा में समझ के साथ पढ़ और लिख सकता हो।
  • विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 तथा सतत विकास लक्ष्य 4.6 के अनुरूप साक्षरता की अधिक व्यापक परिभाषा प्रस्तुत की है।
    • अब साक्षरता में समझ के साथ पढ़ने, लिखने एवं गणना करने की क्षमता के अतिरिक्त डिजिटल तथा वित्तीय साक्षरता जैसे महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल भी शामिल हैं। इस विस्तृत परिभाषा का उद्देश्य समाज में पूर्ण भागीदारी तथा आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना है।
    • किसी राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश में 95 प्रतिशत साक्षरता दर प्राप्त होने पर उसे पूर्ण साक्षर माना जाता है।

स्रोत: TH

जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शन का स्थल नहीं

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन

संदर्भ

  • दिल्ली पुलिस ने अधिसूचित किया है कि जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शन का स्थल नहीं रहेगा। इसके स्थान पर तीन वैकल्पिक स्थलों—रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान तथा सीबीडी मैदान—को नामित किया गया है।
    • यह निर्णय गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति की सिफारिश के बाद लिया गया है। नए स्थलों के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया अलग से जारी की जाएगी।

संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 19(1)(क): यह वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, जिसमें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार भी शामिल है।
  • अनुच्छेद 19(1)(ख): यह नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। हालाँकि, भारत की संप्रभुता एवं अखंडता तथा लोक व्यवस्था के हित में अनुच्छेद 19(3) के अंतर्गत इस अधिकार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

न्यायिक हस्तक्षेप

  • अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त (2020): सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि सार्वजनिक सड़कों एवं स्थानों पर अनिश्चितकाल तक नियन्त्रण नहीं किया जा सकता। विरोध प्रदर्शनों एवं रैलियों के अधिकार का अन्य नागरिकों के अधिकारों के साथ संतुलन किया जाना चाहिए।
  • मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018): सर्वोच्च न्यायालय ने विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता तथा स्थानीय निवासियों के अधिकारों और लोक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

जंतर-मंतर के बारे में

  • जंतर-मंतर खगोलीय वेधशालाओं के समूह को कहा जाता है। इनका निर्माण 18वीं शताब्दी में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने समय मापने, खगोलीय पिंडों की गति का पता लगाने तथा खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करने के लिए करवाया था।
  • प्रमुख स्थान: दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, मथुरा तथा वाराणसी।
  • दिल्ली का जंतर-मंतर: इसका निर्माण वर्ष 1724 में हुआ था। यह कनॉट प्लेस के निकट स्थित है। यहाँ सम्राट यंत्र जैसे पत्थर एवं ईंट से निर्मित खगोलीय उपकरण हैं, जिनका उपयोग समय मापने तथा खगोलीय पिंडों की गति का अवलोकन करने के लिए किया जाता है।
  • जयपुर का जंतर-मंतर: इसे वर्ष 2010 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।

स्रोत: TH

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना

पाठ्यक्रम: GS3/कृषि

संदर्भ

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन का एक वर्ष 11 अक्टूबर, 2026 को पूरा हो गया है।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना

  • यह एक समन्वित पहल है, जिसके अंतर्गत 11 मंत्रालयों की 36 उप-योजनाओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य आकांक्षी जिलों में कृषि विकास को गति प्रदान करना है।
  • इस योजना के अंतर्गत कम कृषि प्रदर्शन वाले 100 जिलों को शामिल किया गया है। इसके लिए वर्ष 2025–26 से छह वर्षों तक प्रतिवर्ष ₹24,000 करोड़ व्यय करने का प्रावधान है।
  • जिलों के चयन के प्रमुख आधार: तीन प्रमुख संकेतकों के आधार पर जिलों की पहचान की जाएगी:
    • कम कृषि उत्पादकता।
    • कम फसल सघनता।
    • कृषि ऋण वितरण का निम्न स्तर।
  • लक्षित लाभार्थी: 1.7 करोड़ किसान।
  • पारदर्शिता, सुलभता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, किसान अनुप्रयोग तथा जिला रैंकिंग प्रणाली विकसित की जाएगी।
  • क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक संरचना:
  • जिला स्तर: जिला धन-धान्य कृषि योजना समिति, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी अथवा जिला कलेक्टर करते हैं, जिला कार्ययोजना तैयार करती है तथा उसका क्रियान्वयन करती है।
  • राज्य स्तर: राज्य धन-धान्य कृषि योजना समिति, जिसकी अध्यक्षता राज्य के मुख्य सचिव करते हैं, जिला कार्ययोजनाओं की समीक्षा एवं निगरानी करती है।
  • राष्ट्रीय स्तर: इस योजना की निगरानी दो समितियों द्वारा की जाती है:
    • राष्ट्रीय कार्यकारी समिति: इसकी अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री करते हैं।
    • राष्ट्रीय निगरानी समिति: इसकी अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) के सचिव करते हैं।

स्रोत: PIB

आईएनएस मंगरोल

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ

  • भारतीय नौसेना ने तीसरे पनडुब्बी-रोधी युद्धक उथले जलयान ‘मंगरोल’ को नौसेना में शामिल किया है।

प्रमुख बिंदु

  • वर्ष 2026 में अब तक दस जलयानों को नौसेना में शामिल किया जा चुका है, जबकि शीघ्र ही अन्य आठ जलयानों को शामिल किए जाने की संभावना है।
  • वर्ष 2034 तक भारतीय नौसेना के लगभग 60 प्रतिशत प्लेटफॉर्म की औसत आयु दस वर्ष से कम होने की अपेक्षा है।

आईएनएस मंगरोल के बारे में

  • नामकरण: इस जलयान का नाम गुजरात में स्थित तटीय नगर एवं लघु बंदरगाह ‘मंगरोल’ के नाम पर रखा गया है। यह क्षेत्र समुद्री मत्स्य उद्योग के एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है।
    • यह पूर्ववर्ती आईएनएस मंगरोल की विरासत को भी आगे बढ़ाता है। पूर्ववर्ती जलयान भारतीय नौसेना का एक बारूदी सुरंग-रोधी जलयान था, जो वर्ष 2004 तक सेवा में रहा।
  • स्वदेशी सामग्री: इस जलयान में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
  • प्रमुख क्षमताएँ:
    • जल के अंदर निगरानी।
    • तटीय जलक्षेत्रों में पनडुब्बी-रोधी युद्धक अभियान।
    • निम्न तीव्रता वाले समुद्री अभियान (LIMO)।
    • बारूदी सुरंगों से संबंधित युद्धक क्षमता।
  • प्रणोदन एवं उपकरण: यह जलयान जल-जेट प्रणोदन प्रणाली से संचालित होता है। इसमें अत्याधुनिक टॉरपीडो, पनडुब्बी-रोधी रॉकेट तथा उन्नत रडार एवं सोनार प्रणालियाँ लगी हैं।
    • मंगरोल को नौसेना में शामिल करना भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण यात्रा में एक अन्य महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

स्रोत: AIR

सारस क्रेन

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने सारस क्रेन की जनसंख्या का अनुमान लगाने के लिए देशव्यापी सर्वेक्षण की घोषणा की है।

सारस क्रेन के बारे में

  • वैज्ञानिक नाम: एंटीगोन एंटीगोन।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • यह विश्व का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी है।
    • इसकी ऊँचाई लगभग 1.5 मीटर होती है।
    • यह भारत में पाई जाने वाली एकमात्र स्थायी प्रजनन करने वाली सारस प्रजाति है।
  • आवास: यह आर्द्रभूमियों, दलदली क्षेत्रों तथा कृषि क्षेत्रों में निवास करता है। यह प्रायः मानव बस्तियों के निकट भी पाया जाता है।
  • वितरण: यह भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। भारत में इसकी प्रमुख आबादी उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा हरियाणा में पाई जाती है।
  • संरक्षण की स्थिति:
    • आईयूसीएन की लाल सूची: संकट-सुभेद्य ।
    • वन्यजीव एवं वनस्पति की संकटापन्न प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES): परिशिष्ट II।
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: भारतीय संस्कृति में सारस क्रेन को आजीवन समर्पण तथा वैवाहिक निष्ठा के प्रतीक के रूप में सम्मान दिया जाता है।

स्रोत: DTE

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ वर्ष 2050 तक भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या बढ़कर 34.7 करोड़ होने का अनुमान है। यह एक सुदृढ़ देखभाल व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। परिचय नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/कृषि/विज्ञान और प्रौद्योगिकी संदर्भ भारतीय कॉफी बोर्ड ने भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि उपकरणों एवं कॉफी की कटाई संबंधी प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की, आईआईटी धारवाड़ तथा कॉफी उत्पादक संघों के साथ सहयोगात्मक पहल का प्रस्ताव दिया है। कॉफी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मशीनीकरण अनुकूलित कटाई...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/भारतीय अर्थव्यवस्था संदर्भ रॉयल स्वीडिश विज्ञान अकादमी ने वर्ष 2026 के लिए अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में स्वेरिगेस रिक्सबैंक पुरस्कार प्रदान किया है। अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार एवं इसके प्राप्तकर्ता अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में स्वेरिगेस रिक्सबैंक पुरस्कार, अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना संदर्भ प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय बृहत् योजना (PMGS-NMP) ने पाँच वर्ष पूरे कर लिए हैं। प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय बृहत् योजना (PMGS-NMP) शुभारंभ: इसे 13 अक्टूबर, 2021 को देश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों को बहु-माध्यमीय संपर्क अवसंरचना उपलब्ध कराने तथा संपूर्ण भारत में रसद दक्षता में सुधार करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था।...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ हाल ही में, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने एक परामर्श-पत्र में बीमा वितरण व्यवस्था में व्यापक सुधारों का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। प्रमुख बिंदु  उद्देश्य: प्रस्तावित विनियमों का उद्देश्य ग्राहक-केंद्रित, प्रतिस्पर्धात्मक, कुशल एवं पारदर्शी बीमा वितरण व्यवस्था स्थापित करना है। साथ ही, इसका लक्ष्य बीमाधारकों, बीमा कंपनियों तथा वितरकों...
Read More
scroll to top