पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना
संदर्भ
- प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय बृहत् योजना (PMGS-NMP) ने पाँच वर्ष पूरे कर लिए हैं।
प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय बृहत् योजना (PMGS-NMP)
- शुभारंभ: इसे 13 अक्टूबर, 2021 को देश के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों को बहु-माध्यमीय संपर्क अवसंरचना उपलब्ध कराने तथा संपूर्ण भारत में रसद दक्षता में सुधार करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था।
- प्रधानमंत्री गतिशक्ति के अंतर्गत विभिन्न मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों की अवसंरचना संबंधी योजनाओं को समेकित किया गया है। इनमें भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, शुष्क बंदरगाह एवं स्थल बंदरगाह तथा उड़ान योजना शामिल हैं।
- यह किसी एक मंत्रालय के अधीन नहीं है, बल्कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा समन्वित की जाती है।
- उद्देश्य: परिवहन के विभिन्न माध्यमों के जरिए लोगों, वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध और कुशल संपर्क उपलब्ध कराना, जिससे अंतिम छोर तक संपर्क सुविधा में सुधार हो तथा यात्रा समय कम किया जा सके।

प्रधानमंत्री गतिशक्ति की प्रमुख विशेषताएँ
- अवसंरचना के सात प्रमुख क्षेत्र: सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, जन परिवहन तथा रसद अवसंरचना इस योजना के प्रमुख आधार हैं।
- समग्र सरकारी नियोजन: राष्ट्रीय बृहत् योजना में 58 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों तथा सभी 36 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इससे विभिन्न क्षेत्रों की अवसंरचना परियोजनाओं का समन्वित नियोजन एवं मूल्यांकन संभव होता है।
- एकीकृत डिजिटल नियोजन: राष्ट्रीय बृहत् योजना अवसंरचना संबंधी आँकड़ों एवं भू-स्थानिक सूचनाओं को एक साझा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित मंच पर एकत्रित करती है, जिससे स्थानिक नियोजन एवं निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
- व्यापक आँकड़ा उपलब्धता: प्रधानमंत्री गतिशक्ति सार्वजनिक मंच पर 230 स्वीकृत आँकड़ा-संग्रह उपलब्ध हैं। इनके माध्यम से स्थल की उपयुक्तता का विश्लेषण, संपर्क मानचित्रण, मार्ग निर्धारण तथा नियामकीय अनुपालन की जाँच की जा सकती है।
प्रधानमंत्री गतिशक्ति का संस्थागत ढाँचा
- सशक्त सचिव समूह (EGoS): इसकी अध्यक्षता मंत्रिमंडल सचिव करते हैं। यह समूह प्रधानमंत्री गतिशक्ति के क्रियान्वयन की निगरानी करता है तथा बृहत् योजना में आवश्यक परिवर्तनों की समीक्षा, विचार एवं स्वीकृति प्रदान करता है।
- नेटवर्क नियोजन समूह (NPG): इसमें अवसंरचना संबंधी मंत्रालयों एवं विभागों के नेटवर्क नियोजन प्रभागों के प्रमुख शामिल होते हैं। यह समूह अवसंरचना प्रस्तावों की जाँच करता है तथा एकीकृत नियोजन, समन्वय एवं संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग को सुनिश्चित करता है। साथ ही, परियोजना नियोजन के लिए राष्ट्रीय बृहत् योजना के अंतर्गत होने वाले विकास की निगरानी भी करता है।
- तकनीकी सहायता इकाई (TSU): इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एवं विषय-विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो मूल्यांकन प्रक्रिया में सहायता प्रदान करते हैं। यह इकाई प्रधानमंत्री गतिशक्ति के सचिवालय के रूप में रसद प्रभाग की भूमिका के निर्वहन में सहयोग करती है।
गतिशक्ति विश्वविद्यालय (GSV)
- यह परिवहन एवं रसद क्षेत्रों पर विशेष रूप से केंद्रित अपनी तरह का प्रथम विश्वविद्यालय है।
- वर्ष 2022 में स्थापित यह विश्वविद्यालय परिवहन से संबंधित विभिन्न विषयों में शिक्षा, कार्यकारी प्रशिक्षण एवं अनुसंधान को एकीकृत करता है।
- गतिशक्ति विश्वविद्यालय विशेषीकृत शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के माध्यम से प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय बृहत् योजना तथा राष्ट्रीय रसद नीति, 2022 को समर्थन प्रदान करता है।
- जुलाई 2026 तक विश्वविद्यालय ने प्रधानमंत्री गतिशक्ति के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रमों के माध्यम से 2.4 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया था।
प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
- विभागों के बीच समन्वय: विभिन्न मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों की प्राथमिकताएँ अलग-अलग हो सकती हैं, जिससे परियोजनाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन में विलंब होता है।
- आँकड़ों की गुणवत्ता एवं एकीकरण: गलत, पुराने अथवा परस्पर असंगत आँकड़े भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित नियोजन एवं निर्णय प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।
- भूमि अधिग्रहण: भूमि विवाद, पुनर्वास संबंधी आवश्यकताएँ तथा पर्यावरणीय स्वीकृतियों में विलंब के कारण एकीकृत नियोजन के बावजूद अवसंरचना परियोजनाएँ प्रभावित होती हैं।
- निजी क्षेत्र की सीमित पहुँच: संवेदनशील आँकड़ों तक पहुँच पर प्रतिबंधों के कारण निजी निवेशकों को परियोजना नियोजन एवं स्थल चयन के लिए आवश्यक जानकारी सीमित मात्रा में उपलब्ध होती है।
निष्कर्ष
- प्रधानमंत्री गतिशक्ति भारत में एकीकृत एवं आँकड़ा-आधारित अवसंरचना नियोजन की दिशा में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है। रसद दक्षता में सुधार करने तथा विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना, क्रियान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर करना और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा।
स्रोत: PIB
Previous article
अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार
Next article
बीमा सुधार: संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता