संक्षिप्त समाचार 09-10-2026

सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ 

  • नीति आयोग के एक सदस्य ने कहा कि भारत ‘सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद’ (GDKP) विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद (GDKP)

  • यह एक प्रस्तावित अवधारणा है, जिसका उद्देश्य किसी देश में उत्पन्न, संचित, साझा और उपयोग किए जाने वाले ज्ञान का आकलन करना है। यह दृष्टिकोण केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के माध्यम से आर्थिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के बजाय ज्ञान पर केंद्रित है।
  • GDP अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को मापता है, जबकि GDKP किसी देश के ज्ञान-संसाधनों तथा विकास में उनके योगदान पर ध्यान केंद्रित करेगा।
    • GDKP के अंतर्गत अनुसंधान एवं विकास (R&D), वैज्ञानिक खोजों, पेटेंट, नवाचार और शैक्षणिक उपलब्धियों पर विचार किया जा सकता है।
  • वर्तमान में, बौद्धिक संपदा उत्पादों ( IPP) पर होने वाले सभी व्ययों को सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) के अंतर्गत दर्ज किया जाता है। यह अर्थव्यवस्था के GDP आँकड़ों में पूंजी निवेश का एक संकेतक है।

ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था क्या है? 

  • ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है, जिसमें भौतिक निवेशों या प्राकृतिक संसाधनों के बजाय कौशल, सूचना, नवाचार और बौद्धिक संपदा जैसे मानव पूंजी संबंधी कारक आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं।
  • यह दो प्रकार के ज्ञान पर आधारित होती है:
    • संहिताबद्ध ज्ञान : ऐसा ज्ञान जिसे दस्तावेज़ों में दर्ज किया जा सकता है और दूसरों तक पहुँचाया जा सकता है। इसमें ‘क्या जानना है’ (Know-what) तथा ‘क्यों जानना है’ (Know-why) जैसे पहलू शामिल हैं। उदाहरण: पेटेंट, सॉफ्टवेयर और शैक्षणिक अनुसंधान।
    • अंतर्निहित ज्ञान : ऐसा ज्ञान जो अनुभव पर आधारित होता है और जिसे दूसरों तक पहुँचाना अपेक्षाकृत कठिन होता है। इसमें ‘कैसे करना है’ (Know-how) तथा ‘किसे जानना है’ (Know-who) जैसे पहलू शामिल हैं। उदाहरण: हस्तशिल्प कौशल और पारंपरिक चिकित्सा।
  • प्रमुख OECD अर्थव्यवस्थाओं में ज्ञान-आधारित गतिविधियाँ GDP में 50% से अधिक का योगदान देती हैं।
  • भारत का IT क्षेत्र, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, औषधि अनुसंधान एवं विकास तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ इस अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण घटक हैं। हालाँकि, इनका योगदान अभी भी पारंपरिक राष्ट्रीय लेखांकन प्रणालियों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित नहीं होता है।

स्रोत: (BS)

राष्ट्रीय SC-ST हब (NSSH)

पाठ्यक्रम: GS2/शासन व्यवस्था

संदर्भ 

  • राष्ट्रीय SC-ST हब (NSSH), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के बीच उद्यमशीलता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है।

राष्ट्रीय SC-ST हब 

  • इसे वर्ष 2016 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा प्रारंभ किया गया था।
  • यह योजना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले उद्यमों के समक्ष आने वाली बाधाओं को दूर करने तथा सार्वजनिक खरीद में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने में सहायता करती है।
  • इसका कार्यान्वयन राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के माध्यम से किया जाता है।
  • NSSH के अंतर्गत उद्यम विकास संबंधी पहलों में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, व्यवसाय विकास, नेटवर्किंग और ज्ञान-संबंधी सहायता शामिल हैं।
  • इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और असम पाँच अग्रणी राज्यों के रूप में उभरे हैं।
  • वित्तीय सहायता : नए और वर्तमान SC/ST-स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) को संस्थागत ऋण के माध्यम से वित्तपोषित संयंत्रों, मशीनरी और उपकरणों में निवेश के लिए 25% पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जा सकती है। यह सब्सिडी अधिकतम ₹25 लाख तक सीमित है।
  • एकल बिंदु पंजीकरण योजना (SPRS): SPRS, NSIC के साथ पंजीकरण के माध्यम से सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को सरकारी खरीद के अवसरों तक पहुँचने में सहायता करती है। पंजीकृत MSEs को निःशुल्क निविदा दस्तावेज़ उपलब्ध कराए जाते हैं तथा बयाना राशि जमा (EMD) करने से छूट दी जाती है।
  • विपणन सहायता : विशेष विपणन सहायता योजना (SMAS), SC/ST उद्यमों को प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों, कार्यशालाओं और जागरूकता अभियानों के माध्यम से अपने उत्पादों की दृश्यता तथा प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता करती है।
  • व्यवसाय करने की लागत में कमी : बैंक ऋण प्रसंस्करण प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत उद्यमों को ऋण प्रसंस्करण शुल्क का 80% या ₹1 लाख, जो भी कम हो, प्रतिपूर्ति के रूप में प्राप्त हो सकता है।
  • बाज़ार तक पहुँच: वित्तीय सहायता और बाज़ार तक पहुँच उपलब्ध कराने के अतिरिक्त, राष्ट्रीय SC-ST हब अपने व्यवसाय त्वरक कार्यक्रम (BAP) के माध्यम से व्यवस्थित मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।

स्रोत: PIB

ब्रह्मोस

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ 

  • रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के जहाज़ों के लिए ब्रह्मोस अग्नि नियंत्रण प्रणाली और प्रक्षेपकों की खरीद हेतु ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ ₹660 करोड़ से अधिक मूल्य का एक अनुबंध किया है।

परिचय

  • विभिन्न अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर स्थापित ब्रह्मोस प्रणाली, समुद्री हमले संबंधी अभियानों के लिए भारतीय नौसेना की प्रमुख सतह-से-सतह मिसाइल प्रणाली है।

ब्रह्मोस मिसाइल

  • संयुक्त उपक्रम : भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के बीच संयुक्त उपक्रम।
  • नाम की उत्पत्ति : इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मॉस्कवा नदी के नामों से लिया गया है।
  • प्रथम परीक्षण : 12 जून, 2001 को किया गया।
  • सेना में शामिल किए जाने का समय : नौसेना — 2005, थल सेना — 2007 और भारतीय वायु सेना — 2017।
  • प्रकार : यह एक ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) प्रकार की सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है। इसे सभी मौसमों में भूमि, समुद्र या वायु से प्रक्षेपित किया जा सकता है तथा इसे अवरोधित करना अत्यंत कठिन बताया जाता है।
  • युद्ध में उपयोग : रिपोर्टों के अनुसार, इसका प्रथम बार उपयोग ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया।
  • गति: 
  • वर्तमान गति: मैक 2.8 (सुपरसोनिक)।
  • भविष्य की गति: मैक 5 से अधिक (हाइपरसोनिक संस्करण का विकास जारी है)।
  • मारक दूरी :
  • प्रारंभिक मारक दूरी: 290 किमी (मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था — MTCR की सीमा के अंतर्गत)।
  • विस्तारित मारक दूरी: 400 किमी; 600 किमी से अधिक मारक दूरी वाले संस्करण का विकास जारी है।
  • चरण : ब्रह्मोस एक दो-चरणीय मिसाइल है, जिसमें ठोस प्रणोदक बूस्टर इंजन का उपयोग किया जाता है।
    • इसका प्रथम चरण मिसाइल को सुपरसोनिक गति तक पहुँचाता है, जिसके बाद यह अलग हो जाता है।
    • इसके बाद, तरल ईंधन से संचालित रैमजेट इंजन अर्थात् दूसरा चरण, उड़ान के क्रूज़ चरण में मिसाइल को ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना गति तक पहुँचाता है।

Source: AIR

SAREX-2026

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ 

  • – भारतीय तटरक्षक बल ने ओडिशा के पारादीप के तट पर 12वाँ राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास (SAREX-2026) आयोजित किया।

परिचय 

  • इस अभ्यास में 30 देशों के 32 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भाग लिया, जो समुद्री खोज एवं बचाव (SAR) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पारस्परिक कार्य-संचालन क्षमता को दर्शाता है।
  • इस अभ्यास में एक व्यापक बचाव अभियान (MRO) का अनुकरण किया गया, जिसमें एक साथ विमानन और समुद्री संकट की परिस्थितियाँ उत्पन्न की गईं।
  • SAREX-2026 का उद्देश्य त्वरित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और समन्वित खोज एवं बचाव ढाँचे को सुदृढ़ करना था। यह भारत के सागर (SAGAR) दृष्टिकोण और महासागर (MAHASAGAR) की भावना के अनुरूप है।

स्रोत:PIB

नोबेल साहित्य पुरस्कार 2026

पाठ्यक्रम: विविध 

संदर्भ 

  • वर्ष 2026 का नोबेल साहित्य पुरस्कार कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को प्रदान किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार “शास्त्रीय परंपरा के साथ चंचल संवाद के माध्यम से समकालीन साहित्य के लिए नए रूपों का सृजन करने वाली उनकी साहसिक और नवोन्मेषी साहित्यिक कृतियों” के लिए दिया गया है।

परिचय 

  • वर्ष 1950 में कनाडा के टोरंटो में जन्मीं ऐन कार्सन एक कवयित्री, निबंधकार, अनुवादक और शास्त्रीय साहित्य की विदुषी हैं। उनकी रचनाएँ प्रायः प्राचीन यूनानी साहित्य को समकालीन अनुभवों के साथ जोड़ती हैं।
  • उनकी उल्लेखनीय रचनाओं में द ग्लास एसे (1995), ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड: ए नॉवेल इन वर्स (1998) और फ्लोट (2016) शामिल हैं। ये कृतियाँ साहित्यिक रूपों और विधाओं के प्रति उनके प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

नोबेल पुरस्कार 

  • नोबेल साहित्य पुरस्कार, अल्फ्रेड नोबेल की वर्ष 1895 की वसीयत के माध्यम से स्थापित पाँच नोबेल पुरस्कारों में से एक है।
  • वर्ष 1901 से यह पुरस्कार प्रतिवर्ष किसी भी देश के ऐसे लेखक को प्रदान किया जाता है, जिसने आदर्शवादी दिशा में साहित्य के क्षेत्र में सर्वोत्कृष्ट कृति की रचना की हो।
  • सामान्यतः यह पुरस्कार किसी लेखक की एकल रचना के बजाय उसकी समग्र साहित्यिक उपलब्धियों के आधार पर दिया जाता है।

क्या आप जानते हैं?

  • रवींद्रनाथ टैगोर अब तक साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले एकमात्र भारतीय हैं।
  • उन्हें वर्ष 1913 में गीतांजलि के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। यह काव्य-संग्रह अपनी संक्षिप्त गीतात्मक अभिव्यक्ति और दार्शनिक स्पष्टता के माध्यम से बंगाली कविता को वैश्विक पाठकों तक पहुँचाने में सफल रहा।
  • वे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई व्यक्ति भी थे।

स्रोत:TH

नोबेल शांति पुरस्कार 2026

पाठ्यक्रम: विविध

संदर्भ

  • वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार नवनेथम ‘नवी’ पिल्लै को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए प्रदान किया गया है।

परिचय 

  • नवी पिल्लै का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में रंगभेद व्यवस्था के दौरान भारतीय तमिल मूल के एक परिवार में हुआ था। वे वकील बनीं और उन्होंने गहरे संरचनात्मक भेदभाव, पृथक्करण तथा बहिष्करण का सामना करते हुए विधिक क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई।
  • उन्होंने अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के जाँच आयोग की अध्यक्षता की। इस आयोग ने वर्ष 2025 में निष्कर्ष निकाला कि इज़राइल ने गाज़ा में नरसंहार किया था।

नोबेल शांति पुरस्कार

  • यह पुरस्कार नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा प्रदान किया जाता है, जिसके सदस्यों की नियुक्ति नॉर्वे की संसद करती है।
  • प्रथम नोबेल शांति पुरस्कार वर्ष 1901 में संयुक्त रूप से फ्रांस के फ्रेडरिक पासी और स्विट्ज़रलैंड के हेनरी ड्यूनां को प्रदान किया गया था। हेनरी ड्यूनां अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC) के सह-संस्थापक थे।
  • यह पुरस्कार व्यक्तियों और संगठनों, दोनों को दिया जा सकता है। हालाँकि, किसी व्यक्ति को मरणोपरांत यह पुरस्कार प्रदान नहीं किया जा सकता।

क्या आप जानते हैं? 

  • महात्मा गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पाँच बार नामांकित किया गया था, लेकिन उन्हें कभी यह पुरस्कार नहीं मिला। उनके आदर्श संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना से निकटता रखते थे।

स्रोत:DDNews

एंजियोप्लास्टी

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य

संदर्भ 

  •  केरलम के मुख्यमंत्री ने अनावश्यक एंजियोप्लास्टी के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।

एंजियोप्लास्टी क्या है?

  • एंजियोप्लास्टी एक चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसका उपयोग हृदय की संकुचित या अवरुद्ध धमनी को एक छोटे गुब्बारे की सहायता से खोलने के लिए किया जाता है। इसके बाद प्रायः स्टेंट (Stent) लगाया जाता है, जो एक जालीदार नलिकाकार संरचना होती है। यह धमनी को पर्याप्त रूप से खुला रखती है, ताकि ऑक्सीजनयुक्त रक्त का प्रवाह बना रहे।
  • आधुनिक स्टेंट पर औषधियों की परत चढ़ी होती है, जो रक्त के थक्के बनने की संभावना को कम करने में सहायता करती हैं। इन्हें सामान्यतः लंबे समय तक शरीर में रहने के लिए बनाया जाता है।

Source: IE

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/ सामाजिक न्याय संदर्भ अगस्त 2026 में उत्तराखंड में आयोजित शुद्धिकरण समारोह ने संवैधानिक एवं कानूनी संरक्षण के बावजूद अस्पृश्यता की प्रथा के बने रहने को लेकर एक बार फिर परिचर्चा को तीव्र कर दिया है। अस्पृश्यता क्या है? अस्पृश्यता जाति-आधारित बहिष्कार का एक ऐतिहासिक रूप से स्थापित स्वरूप है, जो शुद्धता और अशुद्धता...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन संदर्भ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026, 8 अक्टूबर, 2026 से लागू हो गया है। अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ उद्देश्य: अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति तथा सेवा की अन्य शर्तों को विनियमित करना। नियम बनाने की शक्ति: यह अधिनियम केंद्र सरकार को निर्दिष्ट केंद्रीय सशस्त्र पुलिस...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में पंजीकरण, रिफंड और मुकदमेबाजी की प्रक्रियाओं को सरल बनाने सहित प्रक्रिया एवं प्रवर्तन से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण सुधार प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त, अभियोजन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा गया। जीएसटी परिषद के बारे में जीएसटी परिषद एक...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण संदर्भ भारत का लक्ष्य वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था बनना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत सरकार को निर्माण क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने की आवश्यकता है। परिचय भारत की योजना वर्ष 2047 तक एक आर्थिक रूप से विकसित देश बनने तथा वर्ष 2070 तक...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/साइबर सुरक्षा संदर्भ इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं को सक्रिय रूप से रोकने के लिए एक वैश्विक तंत्र विकसित करने का आह्वान किया। यह आह्वान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की घोषणा में सीमा-पार सक्रिय धोखाधड़ी नेटवर्कों को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं के बाद किया गया। साइबर...
Read More
scroll to top