प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साइबर अपराध से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग का आह्वान 

पाठ्यक्रम: GS3/साइबर सुरक्षा

संदर्भ

  • इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं को सक्रिय रूप से रोकने के लिए एक वैश्विक तंत्र विकसित करने का आह्वान किया। यह आह्वान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की घोषणा में सीमा-पार सक्रिय धोखाधड़ी नेटवर्कों को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं के बाद किया गया।

साइबर अपराध क्या है?

  • साइबर अपराध से तात्पर्य कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके आपराधिक गतिविधियों को संपन्न करने से है।
  • इसके अंतर्गत निम्नलिखित अपराध शामिल हैं—
    • वित्तीय धोखाधड़ी, जैसे क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी और ऑनलाइन लेन-देन में धोखाधड़ी।
    • महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन रूप से स्पष्ट सामग्री से संबंधित अपराध।
    • डीपफेक सामग्री के माध्यम से किए जाने वाले अपराध आदि।
  • भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, साइबर अपराध राज्य सूची के अंतर्गत आने वाले विषयों के दायरे में आते हैं।
  • भारत में साइबर अपराध की स्थिति:
  • वर्ष 2019 से 2026 के बीच साइबर अपराध से संबंधित लगभग 98 लाख शिकायतें दर्ज की गईं।
  • इनमें से केवल 2.3 लाख प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गईं, जिसके परिणामस्वरूप शिकायतों के FIR में परिवर्तित होने की दर 2.36% रही।
  • वर्ष 2021 से 2026 के बीच साइबर अपराधों के कारण दर्ज की गई वित्तीय हानि लगभग ₹64,447 करोड़ रही।

साइबर अपराध में वृद्धि के कारण

  • तीव्र डिजिटलीकरण: इंटरनेट और डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर व्यक्तियों तथा व्यवसायों की बढ़ती निर्भरता के कारण साइबर अपराधियों को सुरक्षा संबंधी कमजोरियों का लाभ उठाने के अधिक अवसर मिल रहे हैं।
  • इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का विशाल आधार: भारत में लगभग 95 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। इंटरनेट का उपयोग करने वाली बड़ी जनसंख्या साइबर अपराधियों के लिए संभावित लक्ष्यों की संख्या बढ़ाती है, जिससे भारत साइबर हमलों के लिए एक आकर्षक क्षेत्र बन जाता है।
  • अपर्याप्त साइबर सुरक्षा अवसंरचना: अनेक संगठनों, विशेषकर छोटे व्यवसायों, के पास सुदृढ़ साइबर सुरक्षा उपायों का अभाव है। इससे वे साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन जाते हैं।
  • भुगतान प्रणालियों की संवेदनशीलता: डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लेन-देन में वृद्धि के साथ फिशिंग, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी तथा ऑनलाइन ठगी जैसे वित्तीय अपराधों का जोखिम भी बढ़ा है।
    • वर्ष 2024 में भारत में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) के माध्यम से लगभग ₹20,64,000 करोड़ मूल्य के लेन-देन किए गए, जो वैश्विक डिजिटल लेन-देन का लगभग 46% था।

साइबर अपराध के प्रभाव

  • वित्तीय हानि: साइबर अपराध के कारण धन की चोरी, धोखाधड़ी तथा प्रभावित प्रणालियों को पुनः स्थापित करने की लागत के माध्यम से व्यक्तियों और संगठनों को भारी वित्तीय हानि होता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: भू-राजनीतिक उद्देश्यों से किए जाने वाले साइबर हमले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं। ऐसे हमले सरकारी एजेंसियों, महत्त्वपूर्ण अवसंरचना या रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाकर देश की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
  • डेटा उल्लंघन: संवेदनशील डेटा तक अनधिकृत पहुँच और उसकी चोरी से व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी की गोपनीयता प्रभावित होती है। इससे प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचने के साथ-साथ संभावित कानूनी परिणाम भी उत्पन्न हो सकते हैं।
  • सेवाओं में व्यवधान: साइबर हमलों से आवश्यक सेवाओं और महत्त्वपूर्ण अवसंरचना के संचालन में बाधा उत्पन्न होती है, जिससे व्यवसाय, सरकारें और आम नागरिक प्रभावित होते हैं।
  • बौद्धिक संपदा की हानि: व्यवसायों को बौद्धिक संपदा, व्यापारिक रहस्यों और स्वामित्व संबंधी सूचनाओं की चोरी का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता एवं नवाचार प्रभावित होते हैं तथा आर्थिक हानि होती है।

साइबर सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: इस अधिनियम की धारा 43, 66, 70 और 74 हैकिंग तथा साइबर अपराधों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों से जुड़ी हैं।
  • भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In): यह संस्था नवीनतम साइबर खतरों एवं सुरक्षा कमजोरियों तथा उनसे निपटने के उपायों के संबंध में नियमित रूप से चेतावनियाँ और परामर्श जारी करती है, ताकि कंप्यूटरों और नेटवर्कों की सुरक्षा की जा सके।
  • राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC): इसकी स्थापना वर्तमान और संभावित साइबर सुरक्षा खतरों के बारे में आवश्यक परिस्थितिजन्य जागरूकता उत्पन्न करने तथा समय पर सूचना साझा करने के लिए की गई है। इससे विभिन्न संस्थाएँ सक्रिय, निवारक और सुरक्षात्मक कदम उठा सकती हैं।
  • साइबर स्वच्छता केंद्र (बॉटनेट सफाई एवं मैलवेयर विश्लेषण केंद्र): इसे दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए निःशुल्क उपकरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
  • चक्षु सुविधा: यह संचार साथी पोर्टल पर शुरू की गई एक सुविधा है, जिसके माध्यम से नागरिक कॉल, SMS या व्हाट्सऐप पर प्राप्त संदिग्ध धोखाधड़ीपूर्ण संचार की सक्रिय रूप से रिपोर्ट कर सकते हैं।
  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C): इसकी स्थापना वर्ष 2018 में गृह मंत्रालय के साइबर एवं सूचना सुरक्षा प्रभाग के अंतर्गत केंद्रीय क्षेत्रक योजना के अंतर्गत की गई थी।
    • यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) को साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संस्थागत ढाँचा तथा पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराता है।
  • ई-जीरो FIR पहल: इसे गृह मंत्रालय द्वारा साइबर वित्तीय अपराधों के मामलों में शीघ्र FIR दर्ज करने और जाँच की प्रक्रिया को सक्षम बनाने के लिए शुरू किया गया है।
    • इस प्रणाली के अंतर्गत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज साइबर वित्तीय अपराधों की शिकायतों को स्वचालित रूप से FIR में परिवर्तित किया जाता है। प्रारंभिक चरण में यह सुविधा ₹10 लाख से अधिक की राशि वाले मामलों पर केंद्रित थी।

अंतरराष्ट्रीय उपाय

  • बुडापेस्ट अभिसमय: यह साइबर अपराधों से निपटने के लिए बनाया गया पहला अंतरराष्ट्रीय अभिसमय है। भारत इस अभिसमय का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।
  • इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स एंड नंबर्स (ICANN): यह अमेरिका स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो इंटरनेट से संबंधित विभिन्न डेटाबेस के समन्वय और रखरखाव का कार्य करता है।
  • इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (IGF): यह संयुक्त राष्ट्र का एक मंच है, जहाँ इंटरनेट शासन से संबंधित मुद्दों पर विभिन्न हितधारकों के बीच नीतिगत संवाद किया जाता है।

आगे की राह

  • भारत वर्तमान में डिजिटल परिवर्तन और साइबर खतरों के बीच एक महत्त्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। डिजिटल प्रगति का प्रमुख आधार होने के साथ-साथ, भारत साइबर धोखाधड़ी करने वालों के लिए एक आकर्षक लक्ष्य भी बन गया है।
  • डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सरकार की बहुस्तरीय साइबर प्रतिक्रिया व्यवस्था धोखाधड़ी की रोकथाम में सहायता कर रही है तथा हजारों ठगी संबंधी गतिविधियों और नेटवर्कों को बाधित कर रही है।
  • उन्नत डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों, बिग डेटा विश्लेषण तथा स्वदेशी उपकरणों ने भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा क्षमता और साइबर खतरों के प्रति लचीलापन बढ़ाया है।
  • भविष्य में साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए निम्नलिखित उपायों पर ध्यान देना आवश्यक है—
    • सीमा-पार साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वास्तविक समय में सूचना साझा करने की व्यवस्था को सुदृढ़ करना।
    • कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तकनीकी क्षमता, डिजिटल फॉरेंसिक और साइबर अपराधों की जाँच संबंधी दक्षता बढ़ाना।
    • नागरिकों के बीच डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करना।
    • वित्तीय संस्थानों, डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाताओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच समन्वय बढ़ाना।
    • साइबर अपराधों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, प्रभावी जाँच तथा पीड़ितों को समयबद्ध सहायता सुनिश्चित करना।
  • निष्कर्षतः, साइबर अपराधों की बदलती प्रकृति को देखते हुए केवल राष्ट्रीय स्तर के उपाय पर्याप्त नहीं हैं। प्रभावी कानून प्रवर्तन, तकनीकी नवाचार, जन-जागरूकता और वैश्विक सहयोग के समन्वय से ही सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल परिवेश सुनिश्चित किया जा सकता है।

Source: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/ सामाजिक न्याय संदर्भ अगस्त 2026 में उत्तराखंड में आयोजित शुद्धिकरण समारोह ने संवैधानिक एवं कानूनी संरक्षण के बावजूद अस्पृश्यता की प्रथा के बने रहने को लेकर एक बार फिर परिचर्चा को तीव्र कर दिया है। अस्पृश्यता क्या है? अस्पृश्यता जाति-आधारित बहिष्कार का एक ऐतिहासिक रूप से स्थापित स्वरूप है, जो शुद्धता और अशुद्धता...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन संदर्भ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026, 8 अक्टूबर, 2026 से लागू हो गया है। अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ उद्देश्य: अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति तथा सेवा की अन्य शर्तों को विनियमित करना। नियम बनाने की शक्ति: यह अधिनियम केंद्र सरकार को निर्दिष्ट केंद्रीय सशस्त्र पुलिस...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में पंजीकरण, रिफंड और मुकदमेबाजी की प्रक्रियाओं को सरल बनाने सहित प्रक्रिया एवं प्रवर्तन से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण सुधार प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त, अभियोजन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा गया। जीएसटी परिषद के बारे में जीएसटी परिषद एक...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण संदर्भ भारत का लक्ष्य वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था बनना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत सरकार को निर्माण क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने की आवश्यकता है। परिचय भारत की योजना वर्ष 2047 तक एक आर्थिक रूप से विकसित देश बनने तथा वर्ष 2070 तक...
Read More

सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ  नीति आयोग के एक सदस्य ने कहा कि भारत ‘सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद’ (GDKP) विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद (GDKP) यह एक प्रस्तावित अवधारणा है, जिसका उद्देश्य किसी देश में उत्पन्न, संचित, साझा और उपयोग किए जाने वाले ज्ञान का...
Read More
scroll to top