केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम लागू 

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन

संदर्भ

  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026, 8 अक्टूबर, 2026 से लागू हो गया है।

अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ

  • उद्देश्य: अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति तथा सेवा की अन्य शर्तों को विनियमित करना।
  • नियम बनाने की शक्ति: यह अधिनियम केंद्र सरकार को निर्दिष्ट केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के अधिकारियों से संबंधित मामलों में नियम बनाने का अधिकार प्रदान करता है।
  • भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति: यह पाँच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में नेतृत्व के पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था को बनाए रखेगा। ये बल हैं—
    • सीमा सुरक्षा बल (BSF)
    • केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
    • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
    • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)
    • सशस्त्र सीमा बल (SSB)
  • पदों का आरक्षण: अधिनियम के अंतर्गत अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के 67% पद और महानिरीक्षक (IG) के 50% पद IPS अधिकारियों के लिए प्रतिनियुक्ति के आधार पर आरक्षित होंगे।
  • शीर्ष पदों पर नियुक्ति: विशेष महानिदेशक (Special DG) और महानिदेशक (DG) के पद केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे।
  • सरकार का तर्क: सरकार का मानना है कि केंद्र-राज्य संबंधों को बनाए रखने तथा केंद्र और राज्यों के बीच घनिष्ठ समन्वय सुनिश्चित करने के लिए IPS अधिकारियों की नियुक्ति आवश्यक है।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2015 में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समूह ‘क’ के अधिकारियों ने गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (NFFU), कैडर समीक्षा, पुनर्गठन तथा भर्ती नियमों में संशोधन की माँग को लेकर न्यायालय का रुख किया था। उनका उद्देश्य IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति समाप्त करना और वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) तक आंतरिक पदोन्नति के अवसर सुनिश्चित करना था।
  • संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत संघ, 2025 मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि—
    • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समूह ‘क’ के अधिकारियों को सभी उद्देश्यों के लिए ‘संगठित सेवा’ के रूप में माना जाएगा।
      • एक संगठित समूह ‘क’ सेवा में निर्धारित कैडर संरचना, पदानुक्रम, पदोन्नति के अवसर तथा कैडर-नियंत्रण तंत्र होता है। यह अलग-थलग समूह ‘क’ पदों से भिन्न होती है।
    • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) के पदों, अर्थात् महानिरीक्षक (IG) के स्तर तक, IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अधिकतम दो वर्षों की निर्धारित समय-सीमा के अंदर क्रमिक रूप से कम किया जाना चाहिए।
    • न्यायालय ने कैडर की समयबद्ध समीक्षा करने तथा छह महीने के अंदर सेवा नियम बनाने का निर्देश भी दिया।
  • निर्णय का उद्देश्य: इस निर्णय का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कैडर अधिकारियों के लिए करियर में निष्पक्ष प्रगति सुनिश्चित करना तथा बलों में प्रतिनियुक्त IPS अधिकारियों के लंबे समय से चले आ रहे प्रभुत्व को कम करना था।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की पूर्ववर्ती संगठनात्मक व्यवस्था

  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सशस्त्र सीमा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और असम राइफल्स शामिल हैं।
    • गृह मंत्रालय (MHA), IPS अधिकारियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों, दोनों के लिए कैडर-नियंत्रक प्राधिकरण है।
    • हालाँकि, असम राइफल्स का प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय के अधीन है, जबकि इसका परिचालन नियंत्रण रक्षा मंत्रालय (MoD) के पास है।
    • केंद्र सरकार ने कहा था कि बलों की परिचालन तत्परता बनाए रखने तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति आवश्यक है।
  • आरक्षित पद: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में उपमहानिरीक्षक (DIG) के 20% पद और महानिरीक्षक (IG) के 50% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में IPS अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित चिंताएँ

  • करियर में प्रगति का अवरुद्ध होना: वरिष्ठ पदों का बड़ा हिस्सा IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित होने के कारण केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कैडर अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर सीमित हो जाते हैं।
    • औसतन, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के एक अधिकारी को कमांडेंट के पद तक पहुँचने में 25 वर्ष लग जाते हैं, जबकि आदर्श रूप से यह पदोन्नति 13 वर्षों में हो जानी चाहिए।
  • संगठनात्मक स्वायत्तता: IPS अधिकारियों की निरंतर प्रतिनियुक्ति से बलों की संस्थागत स्वायत्तता तथा विशिष्ट बलों के रूप में उनके दीर्घकालिक व्यावसायिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • संवैधानिक समानता से संबंधित चिंताएँ: संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन में अवसर की समानता) के प्रावधान प्रासंगिक हो जाते हैं, क्योंकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कैडर अधिकारियों को उनके IPS समकक्षों की तुलना में पदोन्नति के समान अवसर नहीं मिल पाते हैं।

आगे की राह

  • अनुभव और योग्यता के बीच संतुलन: प्रतिनियुक्ति की एक संतुलित नीति अपनाई जानी चाहिए, जो IPS अधिकारियों के प्रशासनिक अनुभव का उपयोग करने के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कैडर अधिकारियों को योग्यता, अनुभव और व्यावसायिक विशेषज्ञता के आधार पर पर्याप्त नेतृत्व अवसर प्रदान करे।
  • करियर में प्रगति को सुदृढ़ करना: पारदर्शी एवं समयबद्ध पदोन्नति और नियमित कैडर समीक्षा के माध्यम से अधिकारियों के करियर में ठहराव की समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। साथ ही, बलों की परिचालन दक्षता और संगठनात्मक प्रभावशीलता भी बनाए रखी जानी चाहिए।

निष्कर्ष

  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल भारत की आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • एक पारदर्शी एवं संवैधानिक रूप से सुदृढ़ सेवा ढाँचा, जो परिचालन आवश्यकताओं और योग्यता-आधारित करियर प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करे, अधिकारियों के मनोबल, संस्थागत स्वायत्तता तथा इन बलों की समग्र प्रभावशीलता को सुदृढ़ करेगा।

Source: TH

 

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