- अगस्त 2026 में उत्तराखंड में आयोजित शुद्धिकरण समारोह ने संवैधानिक एवं कानूनी संरक्षण के बावजूद अस्पृश्यता की प्रथा के बने रहने को लेकर एक बार फिर परिचर्चा को तीव्र कर दिया है।
- अस्पृश्यता जाति-आधारित बहिष्कार का एक ऐतिहासिक रूप से स्थापित स्वरूप है, जो शुद्धता और अशुद्धता की पारंपरिक अवधारणाओं पर आधारित है।
- इसके अंतर्गत व्यक्तियों को उनकी जातिगत पहचान के कारण सामाजिक स्थलों, संसाधनों और अवसरों तक समान पहुँच से वंचित किया जाता है। Read More
संवैधानिक एवं कानूनी संरक्षणों के बावजूद अस्पृश्यता की निरंतर विद्यमानता
संदर्भ
अस्पृश्यता क्या है?