गगनयान चालक दल मॉड्यूल की तीन प्रमुख सुरक्षा परीक्षाओं को इसरो (ISRO) की स्वीकृति

पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के चालक दल मॉड्यूल से संबंधित तीन प्रमुख अर्हता परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

परीक्षणों के बारे में

  • इन परीक्षणों में चालक दल मॉड्यूल को सीधा करने की प्रणाली (CMUS), चालक दल मॉड्यूल–सेवा मॉड्यूल संयोजन-विच्छेदन प्रणाली (CSCDS) तथा शीर्ष आवरण के पृथक्करण के दौरान चालक दल मॉड्यूल की संरचनात्मक क्षमता का परीक्षण शामिल था।
  • प्रथम परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि समुद्र में अवतरण के बाद चालक दल मॉड्यूल स्वतः पुनः सीधी स्थिति में आ जाए।
    • यह प्रणाली संग्रहित शीत गैस प्रौद्योगिकी पर आधारित है तथा अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • दूसरे परीक्षण में उस संयोजक तंत्र के पृथक्करण का परीक्षण किया गया, जो चालक दल मॉड्यूल (जहाँ अंतरिक्ष यात्री रहते हैं) को सेवा मॉड्यूल (SM) से जोड़ता है, जो ऊर्जा एवं प्रणोदन उपलब्ध कराता है।
    • यह तंत्र दो इकाइयों—CSU-1 (चालक दल मॉड्यूल की ओर) तथा CSU-2 (सेवा मॉड्यूल की ओर) से मिलकर बना है।
    • चालक दल मॉड्यूल के पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान CSU-1 के विच्छेदित होने के बाद सेवा मॉड्यूल चालक दल मॉड्यूल से अलग हो जाता है। इसके पश्चात पुनः प्रवेश से ठीक पहले CSU-2 भी पृथक हो जाता है।
  • तीसरे परीक्षण में शीर्ष आवरण के पृथक्करण के समय चालक दल मॉड्यूल की संरचनात्मक अखंडता का सत्यापन किया गया।
    • शीर्ष आवरण मिशन के दौरान पैराशूट एवं उससे संबंधित प्रणालियों की सुरक्षा करता है तथा पैराशूट खुलने से पहले इसे अलग कर दिया जाता है, जिससे चालक दल मॉड्यूल का सुरक्षित अवतरण सुनिश्चित हो सके।


गगनयान मिशन

  • उद्देश्य: मानव (तीन चालक दल सदस्यों) को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में प्रक्षेपित कर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना तथा उनका सुरक्षित अवतरण कराना।
    • यह ISRO का प्रथम मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन होगा।
    • अब तक केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन ही मानव अंतरिक्ष उड़ान संचालित कर चुके हैं।
  • प्रक्षेपण यान: प्रक्षेपण यान मार्क-3 (LVM3) गगनयान मिशन का प्रक्षेपण यान है।
  • चालक दल बचाव प्रणाली (CES): HLVM3 में चालक दल बचाव प्रणाली (CES) स्थापित है।
    • यह तीव्र प्रतिक्रिया एवं उच्च दहन दर वाले ठोस मोटरों से संचालित होती है।
    • प्रक्षेपण स्थल अथवा उड़ान के आरंभिक चरण में किसी भी आपात स्थिति में यह चालक दल मॉड्यूल सहित अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित दूरी तक पहुँचाने में सक्षम है।
  • कक्षीय मॉड्यूल (OM): कक्षीय मॉड्यूल (OM) पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा करेगा।
  • इसमें चालक दल मॉड्यूल (CM) तथा सेवा मॉड्यूल (SM) एक संयोजन तंत्र द्वारा जुड़े रहते हैं।
    • इसे प्रक्षेपण, कक्षीय उड़ान तथा पुनः प्रवेश के दौरान चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभिकल्पित किया गया है।
  • चालक दल मॉड्यूल (CM): यह अंतरिक्ष यात्रियों के रहने योग्य भाग है।
    • इसमें अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसी जीवनोपयोगी परिस्थितियाँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • सेवा मॉड्यूल (SM): कक्षा में रहते हुए यह चालक दल मॉड्यूल को आवश्यक सहायता प्रदान करता है।
    • यह एक अदाबित संरचना है, जिसमें तापीय प्रणाली, प्रणोदन प्रणाली, विद्युत प्रणाली, विमानिकी प्रणाली तथा विभिन्न परिनियोजन तंत्र सम्मिलित हैं।

चालक दल मॉड्यूल का पुनः प्रवेश एवं पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया

  • कक्षीय चरण पूर्ण होने के बाद सेवा मॉड्यूल की प्रणोदन प्रणाली अपने थ्रस्टरों को सक्रिय कर कक्षीय मॉड्यूल (OM) को कक्षा से बाहर लाती है।
  • इसके बाद एक बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र द्वारा संयोजन को विच्छेदित कर सेवा मॉड्यूल चालक दल मॉड्यूल से अलग हो जाता है।
  • पृथ्वी की ओर अवतरण के दौरान चालक दल मॉड्यूल, जिसे पुनः प्रवेश के दौरान उत्पन्न अत्यधिक तापीय एवं संरचनात्मक भार सहने के लिए अभिकल्पित किया गया है, वायुगतिकीय अवमंदन के माध्यम से अपनी गति कम करता है और सुरक्षित रूप से समुद्र में अवतरित होता है।
  • इस बीच सेवा मॉड्यूल वायुमंडल में प्रवेश के दौरान पूर्णतः जलकर नष्ट हो जाता है।

पुनः प्रवेश के लिए कौन-सा विन्यास सर्वोत्तम है?

  • चालक दल मॉड्यूल की अभिकल्पना में आंतरिक आयतन को अधिकतम करना, वायुगतिकीय उत्थापन एवं प्रतिरोध का संतुलन बनाए रखना, वायुगतिकीय एवं जलगतिकीय स्थिरता सुनिश्चित करना तथा कम गति पर गतिशील स्थिरता बनाए रखना आवश्यक होता है।
  • गोलाकार विन्यास न्यूनतम संरचनात्मक भार के साथ सर्वाधिक आंतरिक आयतन प्रदान करता है।
  • किंतु पूर्ण गोलाकार संरचना वायुगतिकीय उत्थापन उत्पन्न नहीं करती, जिससे यह सीधे नीचे गिरती है और चालक दल को अत्यधिक जी-बल (G-force) का सामना करना पड़ता है।
  • गोला-शंकु विन्यास पुनः प्रवेश के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
  • इसका कुंद आधार एक पृथक आघात तरंग उत्पन्न करता है, जो घर्षण से उत्पन्न अत्यधिक ताप को अंतरिक्ष यान से दूर रखता है।
  • वहीं इसका शंक्वाकार भाग नियंत्रित एवं सुरक्षित अवतरण के लिए आवश्यक वायुगतिकीय स्थिरता एवं उत्थापन प्रदान करता है।
  • गगनयान चालक दल मॉड्यूल में भी गोला-शंकु विन्यास अपनाया गया है।

पुनः प्रवेश के दौरान गतिशील अस्थिरता क्या है?

  • गतिशील अस्थिरता वह स्थिति है जिसमें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान चालक दल मॉड्यूल में अनियंत्रित एवं तीव्र गति से बढ़ते हुए दोलन उत्पन्न होने लगते हैं।
  • यह समस्या विशेष रूप से तब गंभीर हो जाती है जब अंतरिक्ष यान ध्वनि की गति के निकट पहुँचता है, क्योंकि उस समय परिवर्तित होती आघात तरंगें एवं अशांत वायु प्रवाह अत्यधिक परिवर्तनशील वायुगतिकीय बल उत्पन्न करते हैं।
  • इन दोलनों को सुरक्षित सीमा से अधिक बढ़ने से रोकने के लिए अंतरिक्ष यान छोटे-छोटे नियंत्रण प्रणोदकों का निरंतर उपयोग कर अपनी सही अभिविन्यास बनाए रखता है।

आगे की राह

  • गगनयान चालक दल मॉड्यूल भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की एक महत्त्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करता है।
  • वायुमंडलीय पुनः प्रवेश जैसी जटिल चुनौतियों पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त कर यह मॉड्यूल भविष्य में भारत के दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम की सुदृढ़ आधारशिला सिद्ध होगा।

Source: AIR, TH

 

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