पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन, जीएस-3/पर्यावरण, जीएस-3/आपदा प्रबंधन
सन्दर्भ
- मुंबई में हुई भारी वर्षा ने एक बार फिर शहरी बाढ़ के प्रति भारतीय शहरों की संवेदनशीलता को उजागर किया है, जिससे जलवायु-अनुकूल तरीके से वर्षा जल को अवशोषित करने हेतु शहरी अवसंरचना के पुनर्रचना की आवश्यकता रेखांकित हुई है।
शहरी बाढ़ क्या है?
- शहरी बाढ़ वह बार-बार होने वाली घटना है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट जैसी अभेद्य (Impermeable) सतहों से बहने वाला वर्षा जल बाढ़ का कारण बनता है, विशेषकर लंबे समय तक होने वाली वर्षा के दौरान।
- इस प्रकार की बाढ़ तीव्र शहरी विकास, बाढ़ प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था तथा बाढ़-प्रवण क्षेत्रों पर अतिक्रमण के कारण और अधिक गंभीर हो जाती है।
भारतीय शहर शहरी बाढ़ के प्रति संवेदनशील क्यों हैं?
- जलवैज्ञानिक प्रणालियों में व्यवधान: शहरी विस्तार ने नदियों, खाड़ियों, आर्द्रभूमियों, झीलों, लवणीय मैदानों (Salt Pans) तथा बाढ़-मैदानों जैसे प्राकृतिक जलवैज्ञानिक तंत्रों को बाधित कर दिया है, जो परंपरागत रूप से वर्षा जल का अवशोषण करते थे।
- जल पारगम्य सतहों का ह्रास: खुले स्थानों और मिट्टी का स्थान कंक्रीट की सड़कों, फुटपाथों तथा इमारतों ने ले लिया है, जिससे भूजल पुनर्भरण कम हुआ है और सतही अपवाह (Surface Runoff) बढ़ गया है।
- जल निकासी प्रणालियाँ: भारत के अनेक शहर पारंपरिक वर्षा जल निकासी प्रणालियों पर निर्भर हैं, जो जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अल्प अवधि की लेकिन अत्यधिक तीव्र वर्षा का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
- मुंबई में जल निकासी तंत्र मुख्यतः गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के आधार पर समुद्र में पानी की निकासी करता है।
- जलवायु परिवर्तन: बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ी है, जिससे बेहतर जल निकासी अवसंरचना वाले शहरों में भी शहरी बाढ़ अधिक सामान्य होती जा रही है।
शहरी बाढ़ को कम करने के उपाय
- वर्षा जल निकासी अवसंरचना का उन्नयन एवं नियमित रखरखाव।
- आर्द्रभूमियों, झीलों तथा प्राकृतिक जलमार्गों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन।
- हरित अवसंरचना को बढ़ावा देना—वर्षा उद्यान (Rain Gardens), हरित छतें (Green Roofs), जल पारगम्य फुटपाथ (Permeable Pavements)।
- बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में निर्माण रोकने हेतु प्रभावी शहरी नियोजन नीतियों का कार्यान्वयन।
- वर्षा जल संचयन तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार।
भारत द्वारा उठाए गए कदम
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी): यद्यपि इसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छता है, फिर भी यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण पर बल देता है, जो जलभराव एवं बाढ़ की रोकथाम में सहायक हैं।
- राष्ट्रीय स्मार्ट सिटी मिशन: यह वर्षा जल संचयन, हरित क्षेत्रों के विकास तथा समुचित जल निकासी व्यवस्था के माध्यम से शहरी बाढ़ प्रबंधन को बढ़ावा देता है।
- अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT): यह मिशन शहरों एवं कस्बों में जलापूर्ति, सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन तथा वर्षा जल निकासी जैसी बुनियादी अवसंरचना के विकास पर केंद्रित है।
- दिशानिर्देश एवं विनियम: सरकार ने सतत शहरी विकास के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें जल पारगम्य फुटपाथ, हरित छतें तथा जल संचयन तालाब (Retention Ponds) जैसी संरचनाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि वर्षा जल का अवशोषण बढ़ाया जा सके।
- आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए मॉडल भवन उपविधियाँ (Model Building Bye Laws–MBBL), 2016 तैयार की हैं।
- MBBL के अनुसार, 100 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले सभी भूखंडों पर निर्मित भवनों में वर्षा जल संचयन का पूर्ण प्रस्ताव अनिवार्य होगा।
- राष्ट्रीय जल नीति (2012): यह समुदाय की भागीदारी के माध्यम से नदियों, नदी गलियारों, जल निकायों तथा संबंधित अवसंरचना के वैज्ञानिक संरक्षण की वकालत करती है।
- जल शक्ति अभियान: इसका उद्देश्य कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन, पुनर्भरण एवं पुनः उपयोग संरचनाओं, व्यापक वृक्षारोपण तथा जन-जागरूकता के माध्यम से मानसूनी वर्षा जल का संचयन करना है।
- आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने वर्ष 2017 में शहरी बाढ़ पर मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SoPs) तथा वर्ष 2019 में वर्षा जल निकासी प्रणालियों पर मार्गदर्शिका प्रकाशित की, जिससे राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) तथा अन्य हितधारकों को सहायता मिल सके।
शहरी बाढ़ न्यूनीकरण से संबंधित वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ
- चीन की स्पंज सिटी नीति: वर्ष 2012 में बीजिंग में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन ने शहरी क्षेत्रों की जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए स्पंज सिटी दृष्टिकोण अपनाया।
- नीदरलैंड की ब्लू-ग्रीन अवसंरचना: यह प्राकृतिक एवं अभियांत्रिक प्रणालियों का एकीकृत नेटवर्क है, जो वर्षा जल का प्रबंधन करने के साथ-साथ शहरी लचीलापन और पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार करता है।
- सिंगापुर: अत्यधिक वर्षा और घने शहरी वातावरण के बावजूद शहरी बाढ़ प्रबंधन में विश्व के अग्रणी देशों में से एक है।
‘स्पंज सिटी’ क्या हैं?
- स्पंज सिटी शब्द उन शहरी क्षेत्रों के लिए प्रयुक्त होता है जहाँ वृक्ष, झीलें, पार्क तथा अन्य प्राकृतिक क्षेत्र प्रचुर मात्रा में हों अथवा ऐसा शहरी डिज़ाइन अपनाया गया हो जो वर्षा जल को अवशोषित कर बाढ़ को रोक सके।
- इसका उद्देश्य कम प्रभाव वाले प्रकृति-आधारित समाधानों का अधिक उपयोग कर जल के वितरण, निकासी तथा भंडारण में सुधार करना है।
- इसके अंतर्गत जल पारगम्य डामर (Permeable Asphalt), नए नहरों एवं तालाबों का निर्माण तथा आर्द्रभूमियों का पुनर्स्थापन शामिल है, जिससे न केवल जलभराव कम होता है बल्कि शहरी पर्यावरण में भी सुधार होता है।
भारतीय शहरों के समक्ष चुनौतियाँ
- आर्द्रभूमियों, झीलों तथा बाढ़-मैदानों पर लगातार अतिक्रमण।
- अव्यवस्थित शहरीकरण एवं अत्यधिक कंक्रीटीकरण।
- शहरी नियोजन में प्रकृति-आधारित समाधानों को सीमित रूप से अपनाना।
- जल एवं भूमि प्रबंधन से संबंधित संस्थागत उत्तरदायित्वों का बिखराव।
आगे की राह
- बाढ़ प्रबंधन के लिए सतत एवं जलवायु-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों को शहरी नियोजन के साथ एकीकृत करना आवश्यक है।
- अभियांत्रिकी समाधान, स्मार्ट शहरी नियोजन, वास्तविक समय (Real-time) प्रौद्योगिकी तथा सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़कर बाढ़-प्रतिरोधी शहरों का निर्माण किया जाए, जिससे भारत में शहरी बाढ़ की समस्या को प्रभावी रूप से कम किया जा सके।
स्रोत:IE
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संक्षिप्त समाचार 06-07-2026