एआई (AI) गवर्नेंस एवं ए वॉइस फ़ॉर दी ग्लोबल साउथ 

पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन; जीएस-3/कृत्रिम बुद्धिमत्ता

सन्दर्भ

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शासन के क्षेत्र में भारत के सामने निर्भरता और नेतृत्व के बीच चयन करने की चुनौती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की मेज़बानी की, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े वैश्विक विमर्श में ग्लोबल साउथ  की आवश्यकताओं और चुनौतियों को केंद्र में रखना था।
  • इस शिखर सम्मेलन के विषय भारत द्वारा इस प्रकार निर्धारित किए गए थे कि वे वैश्विक दक्षिण की वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित हों तथा वास्तविक जीवन में होने वाली हानियों (Real-world Harms) पर विशेष ध्यान दें।
  • भारत का दृष्टिकोण पूर्ववर्ती शिखर सम्मेलनों—ब्लेचली पार्क (यू.के.), 2023, सियोल, 2024 तथा पेरिस, 2025—से भिन्न था, क्योंकि उन सम्मेलनों में वर्तमान समय की हानियों, समानता और समावेशन की अपेक्षा विनाशकारी (Catastrophic) तथा अस्तित्वगत (Existential) जोखिमों को अधिक प्राथमिकता दी गई थी।
  • जैसे-जैसे यह शिखर सम्मेलन आगे बढ़ा, राजनीतिक और नीतिगत प्राथमिकता भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास हेतु पूंजी जुटाने की ओर स्थानांतरित हो गई।
  • भारत पैक्स सिलिका (Pax Silica) में शामिल हुआ, जिससे अमेरिका-प्रधान सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के साथ उसकी रणनीतिक सहभागिता का संकेत मिला।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने में भारत के समक्ष चुनौतियाँ

  • मध्यम शक्ति (Middle Power) की दुविधा: भारत विश्व राजनीति में एक प्रभावशाली मध्यम शक्ति के रूप में उभरना चाहता है, किंतु अमेरिका, जापान तथा अनेक यूरोपीय देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  प्रौद्योगिकी में उससे कहीं अधिक उन्नत हैं।
  • भारत अभी भी एक विकासशील देश है तथा साथ ही ग्लोबल साउथ के हितों का प्रतिनिधित्व भी करना चाहता है।
  • अमेरिका की विदेश नीति: अमेरिका ने विशेष रूप से वैश्विक बहुपक्षीय (Multilateral) अथवा बहु-हितधारक (Multistakeholder) एआई गवर्नेंस में अपनी सीमित रुचि व्यक्त की है।
  • इससे भारत और ग्लोबल साउथ के समक्ष यह मूलभूत प्रश्न खड़ा होता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अवसंरचना तथा आर्थिक शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण अमेरिका में हो सकता है।
  • अन्य चिंताएँ: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में पश्चिमी देशों पर भारत की निर्भरता आँकड़ा (Data) सुरक्षा, डेटा केंद्रों की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण तथा साझेदारी से होने वाले अधिकांश आर्थिक लाभ के पश्चिमी देशों को मिलने जैसे प्रश्न खड़े करती है।

भारत के लिए अवसर

  • यूएन ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डायलॉग (UN Global Dialogue on AI) दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जिसका पहला चरण जिनेवा में चल रहा है।
  • इसमें विभिन्न हितधारक इस बात पर विचार-विमर्श करेंगे कि बहुपक्षीय एवं बहु-हितधारक व्यवस्था मिलकर एआई गवर्नेंस के लिए नियमों का सामूहिक रूप से निर्धारण कैसे कर सकती है।
  • भारत इस अवसर का उपयोग वर्तमान में नेतृत्वविहीन एवं बिखरे हुए ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति एजेंडा को एकजुट करने के लिए कर सकता है।
  • भारत उन कुछ देशों में शामिल है, जिनके पास यह भूमिका निभाने के लिए आवश्यक राजनीतिक प्रभाव, तकनीकी क्षमता तथा विविध एवं विशाल बाज़ार उपलब्ध है।
  • केवल निवेश के गंतव्य या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बाज़ार के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करने के बजाय, भारत लोकहित, उपयोगकर्ता सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता तथा अंतर्राष्ट्रीय  सहयोग पर आधारित तकनीकी विकास की अपनी दृष्टि को पुनः स्थापित कर सकता है।

एआई गवर्नेंस पर वैश्विक संवाद (Global Dialogue on AI Governance) 

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस पर वैश्विक संवाद संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79/325 के अंतर्गत स्थापित एक सार्वभौमिक बहु-हितधारक मंच है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 2024 में भविष्य हेतु संधि (Pact of the Future) के अंतर्गत अपनाए गए वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट (Global Digital Compact) के बाद की गई।
  • यह संवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अंतर्राष्ट्रीय शासन को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
  • इसमें चार प्रमुख विषयगत समूहों पर चर्चा होगी, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  के सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित असमानताओं को कम करना, सुरक्षित एवं विश्वसनीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संदर्भ में मानवाधिकार शामिल हैं।
  • विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह उद्घाटन संयुक्त राष्ट्र वैश्विक एआई गवर्नेंस संवाद में भाग लेने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

आगे की राह

  • भारत को ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों (International Norms) की आवश्यकता पर पुनः बल देना चाहिए, जो ग्लोबल साउथ के देशों को स्थानीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम विकसित करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा नियामकीय क्षमता बढ़ाने में सक्षम बनाएँ।
  • भारत को प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता संरक्षण तथा यह सुनिश्चित करने से संबंधित महत्वपूर्ण वैश्विक बहसों को भी आगे बढ़ाना चाहिए कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उत्पन्न आर्थिक मूल्य राष्ट्रीय बाज़ारों के भीतर ही संचित हो।
  • भारत को ग्लोबल साउथ  के देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए प्रभावी मार्ग विकसित करने चाहिए।

स्रोत: TH

 

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