संक्षिप्त समाचार 06-07-2026

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

पाठ्यक्रम: जीएस-1/इतिहास 

सन्दर्भ

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (1901–1953)

  • प्रारम्भ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य रहे; बाद में 1930 के दशक में हिन्दू महासभा से जुड़ गए।
  • वर्ष 1934 में 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने।
  • उन्होंने फज़लुल हक़ मंत्रालय में 1941–42 के दौरान बंगाल के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया।
  • 1944: उन्होंने अंग्रेज़ी दैनिक समाचार-पत्र “नेशनलिस्ट” की स्थापना की।
  • अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के बिलासपुर अधिवेशन की अध्यक्षता की।
  • हिन्दू-मुस्लिम समस्याओं के समाधान की संभावनाओं पर चर्चा के लिए एम. ए. जिन्ना से भेंट की।
  • वे मुस्लिम लीग तथा भारत के विभाजन के प्रबल आलोचक थे।
  • स्वतंत्रता के बाद (1947–1950) वे अंतरिम सरकार के मंत्रिमंडल में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बने, किन्तु मतभेदों के कारण उन्होंने त्यागपत्र दे दिया।
  • भारतीय जनसंघ के संस्थापक: वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का वैचारिक पूर्ववर्ती माना जाता है।
  • उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता का समर्थन किया।

विरासत:

  • उन्हें एक दृढ़ राष्ट्रवादी, शिक्षाविद् तथा सांस्कृतिक एकता के समर्थक के रूप में स्मरण किया जाता है।
  • कोलकाता स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह तथा अनेक संस्थानों का नाम उनके सम्मान में रखा गया है।

स्रोत: Mint

हिंदकेसरी पेडगांव ‘बैलगाड़ा शर्यत (Bailgada Sharyat)’

पाठ्यक्रम: जीएस-1/संस्कृति

सन्दर्भ

  • हिंदकेसरी पेडगांव ‘बैलगाड़ा शर्यत’ (बैलगाड़ी दौड़) ने महाराष्ट्र की गहरी ग्रामीण खेल परंपरा को प्रदर्शित किया। इसमें 1,000 से अधिक प्रतिभागियों तथा क्षेत्रभर से हजारों दर्शकों ने भाग लिया।

परिचय

  • बैलगाड़ी दौड़ एक ऐसा आयोजन है जिसमें बैलों या बैलों की जोड़ी को लकड़ी के जुए से गाड़ी में जोड़ा जाता है और उनके साथ, चालक सहित या बिना चालक के, दौड़ आयोजित की जाती है।
  • महाराष्ट्र में इस ग्रामीण खेल को ‘बैलगाड़ा शर्यत’, ‘छकड़ी’ अथवा ‘शंकरपथ’ के नाम से जाना जाता है।
  • इसका आयोजन प्रतिवर्ष महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के खटाव तालुका स्थित पेडगांव में किया जाता है।

जल्लीकट्टू 

अर्थ:

  • ‘जल्लीकट्टू’ शब्द तमिल के ‘सल्ली कासु’ (सिक्के) तथा ‘कट्टू’ (बैलों के सींगों पर पुरस्कार स्वरूप बाँधा गया बंडल) से मिलकर बना है।
  • इसका आयोजन सामान्यतः पोंगल के अवसर पर किया जाता है।
  • यह एक पारंपरिक खेल है, जिसमें खुले मैदान में छोड़े गए उत्तेजित बैलों के कूबड़ को पकड़कर टिके रहने की प्रतियोगिता होती है।

ऐतिहासिक संबंध:

  • जल्लीकट्टू अत्यंत प्राचीन परंपरा है।
  • बैलों को वश में करने का उल्लेख मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर में मिलता है, जिसका काल 2500 ईसा पूर्व से 1800 ईसा पूर्व के बीच का माना जाता है।
  • प्राचीन काल में इस खेल को ‘येरु थझुवल’ (बैल को आलिंगन करना) कहा जाता था।

कंबाला

  • कंबाला भैंसों की वार्षिक दौड़ है, जिसका आयोजन कृषि समुदाय द्वारा नवंबर से मार्च के बीच किया जाता है।
  • यह प्रतियोगिता कीचड़युक्त जल से भरे दो समानांतर दौड़-पथों पर आयोजित होती है।
  • परंपरागत रूप से इसका संरक्षण कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़, उडुपी और भटकल तथा केरल के कासरगोड के तटीय क्षेत्रों के तुलुवा जमींदारों और परिवारों द्वारा किया जाता है। यह क्षेत्र सामूहिक रूप से तुलु नाडु कहलाता है।

स्रोत: TH, IE

MY भारत Bharat (मेरा युवा भारत)

पाठ्यक्रम: जीएस-2/सरकारी पहल

सन्दर्भ

  • युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने युवाओं की क्षमता के विकास तथा उसे राष्ट्र-निर्माण की दिशा में अग्रसर करने में MY भारत (मेरा युवा भारत) की भूमिका पर प्रकाश डाला।

MY भारत का परिचय

  • MY भारत (मेरा युवा भारत) की स्थापना अक्टूबर 2023 में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई।
  • यह एक डिजिटल मंच है, जो सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, गैर-लाभकारी संगठनों तथा उद्योग जगत को जोड़कर युवाओं की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करता है।
  • इसका उद्देश्य स्वयंसेवा, कौशल विकास, नेतृत्व क्षमता तथा नागरिक सहभागिता के अवसर उपलब्ध कराकर युवाओं को राष्ट्र-निर्माण के केंद्र में स्थापित करना है।
MY भारत Bharat
  • यह पहल राष्ट्रीय युवा नीति के अनुरूप है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य 15–29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को राष्ट्र-निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना है।
  • साथ ही, 10–19 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों में प्रारम्भिक अवस्था से ही सक्रिय सहभागिता तथा नागरिक चेतना का विकास करना भी इसका उद्देश्य है।
मेरा युवा भारत

स्रोत: PIB

गर्भावस्था के बाद खेल में वापसी हेतु आईसीसी के दिशानिर्देश

पाठ्यक्रम: जीएस-2/स्वास्थ्य

सन्दर्भ

  • अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने गर्भावस्था एवं प्रसव के बाद महिला खिलाड़ियों की क्रिकेट में सुरक्षित वापसी के लिए एक फ्रेमवर्क जारी किया है।

परिचय

  • ‘गर्भावस्था के बाद खेल में वापसी’ दिशानिर्देशों का उपयोग आईसीसी के सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड अपने-अपने स्थानीय कानूनों के अनुरूप खिलाड़ियों के कल्याण हेतु नीतियाँ बनाने के लिए कर सकते हैं।
  • इसमें केस प्रबंधक नियुक्त करने का प्रावधान है, जो खिलाड़ी के लिए मुख्य संपर्क अधिकारी होगा।
  • बोर्ड ने अनुशंसा की है कि खिलाड़ी गर्भावस्था की पहली तिमाही समाप्त होने के बाद प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलना बंद कर दें।
  • खेल में पुनः वापसी के लिए दिशानिर्देशों में ‘6 आर (6Rs) रूपरेखा’ दी गई है—
  • रेडी (Ready) 0–6 सप्ताह: तैयारी
  • रिव्यू (Review) 6–8 सप्ताह: समीक्षा
  • रीस्टोर (Restore) 8–16 सप्ताह: शारीरिक पुनर्बहाली
  • रिकंडीशन (Recondition) 12–16+ सप्ताह : पुनः शारीरिक क्षमता विकसित करना
  • रिटर्न (Return) : खेल में वापसी
  • रिफाइन (Refine): बाल देखभाल जैसी सामाजिक बाधाओं तथा खिलाड़ी के मानसिक स्वास्थ्य का समाधान करते हुए प्रदर्शन में सुधार।
  • समर्पित नीति वाले देश: ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, पाकिस्तान तथा वेस्टइंडीज।
  • भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में इस संबंध में अलग से कोई समर्पित नीति नहीं है।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC)

  • आईसीसी क्रिकेट के वैश्विक प्रशासन एवं विनियमन के लिए उत्तरदायी संस्था है।
  • यह खेल के नियमों तथा खिलाड़ियों एवं अधिकारियों के आचार संहिता का निर्धारण एवं अनुपालन सुनिश्चित करती है।
  • आईसीसी का नेतृत्व अध्यक्ष करते हैं, जिनका चुनाव आईसीसी बोर्ड द्वारा किया जाता है।
  • आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दैनिक कार्यों का संचालन करते हैं।
  • इसका संचालन पूर्ण सदस्य देशों के प्रतिनिधियों तथा कुछ सहयोगी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों वाले निदेशक मंडल द्वारा किया जाता है।

स्रोत: TH

गृह मंत्रालय ने यूएपीए के अंतर्गत 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया

पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन | जीएस-3/आंतरिक सुरक्षा 

सन्दर्भ

  • गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के अंतर्गत 23 और व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है।

परिचय

  • यह घोषणा यूएपीए की धारा 35 के अंतर्गत की गई है।
  • यह धारा केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि यदि उसे किसी व्यक्ति के आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का विश्वास हो, तो उसका नाम यूएपीए की चौथी अनुसूची में शामिल कर सकती है।
  • यह प्रावधान वर्ष 2019 के संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।

गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम (UAPA)

  • यह भारत का प्रमुख आतंकवाद-रोधी कानून है, जिसका उद्देश्य भारत की संप्रभुता एवं अखंडता के विरुद्ध गैरकानूनी तथा आतंकवादी गतिविधियों को रोकना है।
  • इसे 1967 में संसद द्वारा पारित किया गया।
  • केंद्र सरकार संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित कर सकती है।
  • कुछ मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए बिना 180 दिनों तक हिरासत में रखने का प्रावधान है।
  • अधिकांश मामलों की जाँच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा की जाती है।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)

  • स्थापना: राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, 2008 के अंतर्गत, 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद।
  • कार्य: केंद्रीय आतंकवाद-रोधी जाँच एजेंसी।
  • अधिदेश: भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संधियों आदि से संबंधित अपराधों की जाँच।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2019

  • अधिकार-क्षेत्र का विस्तार: भारत के बाहर भारतीय नागरिकों या भारतीय हितों से जुड़े अनुसूचित अपराधों की भी जाँच कर सकती है।
  • विस्तारित कार्यक्षेत्र: विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908, मानव तस्करी, साइबर आतंकवाद तथा शस्त्र अधिनियम, 1959 से संबंधित अपराध भी शामिल किए गए।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।
  • विशेष न्यायालय: कुल 52 एनआईए विशेष न्यायालय, जिनमें 3 विशेष रूप से एनआईए न्यायालय (राँची, जम्मू और मुंबई) हैं।

स्रोत: TH

बंद (Caged) फ्रंटियर एआई मॉडल

पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सन्दर्भ

  • हाल ही में यह बहस उभरी कि क्या बंद (Closed/Caged) फ्रंटियर एआई मॉडल, ओपन-वेट/ओपन-सोर्स एआई मॉडल पर अपनी बढ़त बनाए रख पाएँगे।

फ्रंटियर एआई मॉडल क्या हैं?

  • फ्रंटियर मॉडल किसी भी समय उपलब्ध सबसे उन्नत एआई मॉडल होते हैं।
  • इन्हें विशाल डेटासेट्स (Datasets) पर प्रशिक्षित किया जाता है ताकि अनेक कार्यों में अत्याधुनिक (State-of-the-Art) प्रदर्शन किया जा सके।
  • ये उन्नत तर्क क्षमता, चित्र एवं पाठ निर्माण तथा एजेंट आधारित कार्यप्रवाह (Agentic Workflows) जैसे कार्यों में उपयोग किए जाते हैं।

‘बंद (Caged)’ एआई मॉडल क्या हैं?

  • ऐसे फ्रंटियर एआई मॉडल जिनके मॉडल वेट (Weights), प्रशिक्षण डेटा तथा संरचना (Architecture) सार्वजनिक नहीं किए जाते।
  • उदाहरण: ओपन एआई (OpenAI) के जीपीटी (GPT) मॉडल, एंथ्रोपिक (Anthropic) का Claude तथा गूगल का जेमिनी (Gemini)।
  • इनका नियंत्रण विकसित करने वाली कंपनी के पास रहता है तथा इनका उपयोग केवल एपीआई (API) या सशुल्क सेवाओं के माध्यम से किया जा सकता है।
  • इससे कंपनियाँ सुरक्षा नियंत्रण, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा तथा मॉडल के उपयोग की निगरानी बनाए रखती हैं।
  • इसके विपरीत, ओपन-वेट एआई मॉडल अपने प्रशिक्षित मॉडल वेट सार्वजनिक कर देते हैं, जिससे कोई भी उन्हें डाउनलोड, संशोधित और बेहतर बना सकता है।

स्रोत: TH

भारत को एशियाई शेरों के लिए दूसरे प्राकृतिक आवास की आवश्यकता

पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण

सन्दर्भ

  • संरक्षण विशेषज्ञों ने पुनः इस आवश्यकता पर बल दिया है कि गिर क्षेत्र के बाहर एशियाई शेरों की दूसरी स्वतंत्र प्राकृतिक आबादी स्थापित की जाए, जिससे उनके विलुप्त होने का जोखिम कम हो।

एशियाई शेरों के लिए दूसरे आवास की आवश्यकता क्यों?

जनसंख्या में वृद्धि:

  • 16वीं शेर जनसंख्या गणना के अनुसार, भारत में शेरों की संख्या 2020 के 674 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है, अर्थात 32% की वृद्धि।
  • वर्तमान में इनकी पूरी आबादी केवल गुजरात में केंद्रित है।

संभावित खतरा:

  • भारतीय वन्यजीव संस्थान की अनेक रिपोर्टों के अनुसार, यदि पूरी आबादी केवल एक ही क्षेत्र में सीमित रहे, तो वह महामारी, वनाग्नि या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है।
  • ऐसी स्थिति में पूरी प्रजाति के समाप्त होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
  • 2018 में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (Canine Distemper Virus) के प्रकोप में कई शेरों की मृत्यु हुई तथा अनेक संक्रमित हुए, जिसने इस जोखिम को स्पष्ट रूप से उजागर किया।

एशियाई शेर (Panthera leo persica)

  • यह भारत में पाई जाने वाली बड़ी बिल्ली (Big Cat) की पाँच प्रजातियों में से एक है।

भौतिक विशेषताएँ

  • एशियाई शेर, अफ्रीकी शेरों की तुलना में कुछ छोटे होते हैं।
  • नर शेरों की अयाल (Mane) अपेक्षाकृत कम विकसित होती है, जिससे उनके कान दिखाई देते हैं।
  • इनके पेट के नीचे त्वचा की स्पष्ट लंबवत तह होती है, जो इन्हें अफ्रीकी शेरों से अलग पहचान देती है।

वितरण

  • भारत में इनका वितरण मुख्यतः गुजरात के गिर वन और उसके आसपास तक सीमित है।

प्रमुख आवास:

  • गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य
  • पनिया वन्यजीव अभयारण्य
  • मितियाला वन्यजीव अभयारण्य
  • बरदा वन्यजीव अभयारण्य

संरक्षण स्थिति

  • आईयूसीएन रेड लिस्ट: संकटग्रस्त (Endangered)
  • साइट्स (CITES): परिशिष्ट-I
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I

स्रोत: TH

 

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