पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन–3 / रक्षा / आंतरिक सुरक्षा
सन्दर्भ
- सशस्त्र बल चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवाओं में बनाए रखे जाने वाले अग्निवीरों (Retention) के प्रतिशत को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
परिचय
- अग्निपथ योजना के अंतर्गत भर्ती किए गए अग्निवीरों ने वर्ष 2023 के प्रारंभ में अपना प्रशिक्षण शुरू किया था। अग्निवीरों का पहला बैच वर्ष 2026 में अपना चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करेगा।
- वर्तमान नीति के अनुसार, प्रारंभ में सभी अग्निवीरों को सेवा से मुक्त किया जाएगा। इसके बाद स्वेच्छा से आवेदन करने वाले अग्निवीरों में से योग्यता (Merit) के आधार पर अधिकतम 25% को नियमित सैनिकों के रूप में पुनः भर्ती किया जाएगा।
अग्निपथ योजना के बारे में
- भारत सरकार ने वर्ष 2022 में अग्निपथ योजना प्रारंभ की, जिसके अंतर्गत थल सेना, नौसेना और वायु सेना में अधिकारी पद से नीचे (Below Officer Rank) के पदों पर पुरुष एवं महिला अभ्यर्थियों की चार वर्ष के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती की जाती है।
- पात्रता: 17.5 से 21 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थी इस योजना के लिए आवेदन करने के पात्र हैं।
- प्रशिक्षण: अग्निवीरों को आवश्यकतानुसार अनुकूलित आधारभूत सैन्य प्रशिक्षण, विशिष्ट व्यावसायिक (Trade) प्रशिक्षण तथा कौशल उन्नयन (Up-skilling) पाठ्यक्रम प्रदान किए जाते हैं।
- स्थायी भर्ती: कार्यकाल पूरा होने के बाद संगठनात्मक आवश्यकताओं तथा सशस्त्र बलों की नीतियों के अनुसार अग्निवीरों को स्थायी संवर्ग (Permanent Cadre) में भर्ती हेतु आवेदन करने का अवसर दिया जाता है।
- इनमें से अधिकतम 25% अग्निवीरों का चयन नियमित संवर्ग में किया जाता है।
योजना के अंतर्गत लाभ
- अग्निवीरों को मासिक वेतन पैकेज के साथ लागू जोखिम एवं कठिनाई भत्ते दिए जाते हैं। उनके वेतन का 30% अग्निवीर कोष (Agniveer Corpus Fund) में जमा किया जाता है, जिसमें सरकार समान राशि का योगदान करती है।
- चार वर्ष पूरे होने पर उन्हें संचित ब्याज सहित लगभग ₹11.71 लाख की कर-मुक्त सेवानिधि (SevaNidhi) प्रदान की जाती है।
- भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों को ₹48 लाख का अंशदान-रहित (Non-contributory) जीवन बीमा उपलब्ध कराया जाता है।
- अग्निवीर ग्रेच्युटी तथा पेंशन संबंधी लाभों के पात्र नहीं होते।
सशस्त्र बल अग्निवीरों की अधिक प्रतिधारण क्यों चाहते हैं?
- विशिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता: नई प्रौद्योगिकियों, आधुनिक सैन्य मंचों तथा उन्नत उपकरणों की खरीद के कारण विस्तारित विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता बढ़ गई है।
- अधिक संख्या में अग्निवीरों को बनाए रखने से सैनिकों को इन उन्नत प्रणालियों के संचालन में पर्याप्त अनुभव एवं दक्षता प्राप्त होगी।
- अनुभवी सैन्य बल का निर्माण: अधिक अग्निवीरों को बनाए रखने से तीनों सेनाओं में युवा मानवबल बनाए रखने के साथ-साथ पर्याप्त अनुभवयुक्त सैनिक भी उपलब्ध रहेंगे।
- इकाई एकजुटता (Unit Cohesion) को सुदृढ़ करना: सैनिकों का लंबा कार्यकाल, विशेषकर सेवा के प्रारंभिक वर्षों में, कठिन परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण तैनातियों के दौरान साथ काम करने से सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल एवं आपसी विश्वास विकसित करता है।
- संचालनात्मक तैयारी (Operational Preparedness): यद्यपि अग्निवीरों ने विभिन्न अभियानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, फिर भी अनेक अवसरों पर विभिन्न क्षेत्रीय तैनातियों तथा प्रशिक्षण अभ्यासों से प्राप्त अनुभव ने संचालन संबंधी परिस्थितियों में अधिक तीव्र एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सहायता की है।
आगे की राह
- अग्निपथ योजना को सेना को अधिक युवा, ऊर्जावान, अनुशासित तथा भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु एक महत्त्वपूर्ण मानव संसाधन सुधार के रूप में देखा जाना चाहिए।
- चार वर्ष से आगे भी सेवा जारी रखने के इच्छुक अग्निवीरों के लिए सुनियोजित करियर मार्ग, विशिष्ट प्रशिक्षण तथा नेतृत्व विकास के अवसर विकसित किए जाने चाहिए।
- साथ ही, थल सेना, नौसेना तथा वायु सेना की अलग-अलग मानवबल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सेवा-विशिष्ट प्रतिधारण नीति (Service-specific Retention Policy) अपनाने की आवश्यकता है।
स्रोत: IE
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