चापेकर बंधु
पाठ्यक्रम: GS-1 / आधुनिक भारतीय इतिहास
संदर्भ
- 22 जून 1897 को चापेकर बंधुओं ने पुणे में ब्रिटिश प्लेग आयुक्त वाल्टर चार्ल्स रैंड की हत्या कर दी थी।
परिचय
- चापेकर बंधु—दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि चापेकर—भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभिक क्रांतिकारी राष्ट्रवादियों में से थे।
- वे वासुदेव बलवंत फड़के की क्रांतिकारी गतिविधियों तथा बाल गंगाधर तिलक द्वारा उनके समाचार-पत्र ‘केसरी’ के माध्यम से प्रसारित राष्ट्रवादी विचारों से प्रभावित थे।
- गुप्त संगठन का गठन: चापेकर बंधुओं ने शारीरिक एवं सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु “चापेकर क्लब” नामक एक संगठन की स्थापना की।
- इस संगठन को उन्होंने “हिंदू धर्म के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाली संस्था” भी कहा।
- प्लेग महामारी और रैंड की हत्या: वर्ष 1896–97 में फैली ब्यूबोनिक प्लेग महामारी के दौरान ब्रिटिश प्रशासन ने पूना प्लेग समिति के अध्यक्ष वाल्टर चार्ल्स रैंड के नेतृत्व में कठोर प्लेग-नियंत्रण उपाय लागू किए।
- सैनिकों द्वारा घरों की तलाशी ली जाती थी, धार्मिक रीति-रिवाजों का उल्लंघन किया जाता था तथा स्थानीय निवासियों को अपमानजनक निरीक्षणों का सामना करना पड़ता था।
- चापेकर बंधुओं ने रैंड को औपनिवेशिक दमन का प्रतीक मानते हुए उसकी हत्या की योजना बनाई।
- गिरफ्तारी एवं फाँसी: दामोदर हरि चापेकर को वर्ष 1898 में फाँसी दी गई।
- वासुदेव हरि चापेकर तथा बालकृष्ण हरि चापेकर को वर्ष 1899 में मृत्युदंड दिया गया।
स्रोत: IE
निर्भय चेतना
पाठ्यक्रम: GS-2 / शासन व्यवस्था
संदर्भ
- पंचायती राज मंत्रालय ने ‘निर्भय चेतना’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण (ToT) कार्यक्रम का आयोजन किया।
परिचय
- निर्भय चेतना पंचायती राज मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 में प्रारंभ की गई ‘निर्भय रहो’ पहल के अंतर्गत एक प्रमुख हस्तक्षेप है।
- यह पहल तीन परस्पर पूरक घटकों से मिलकर बनी है—
- निर्भय नेत्री: निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण एवं विधिक जागरूकता पर केंद्रित है।
- निर्भय चेतना : निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों को लैंगिक समानता तथा महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास करती है।
- निर्भय दृष्टि : पंचायतों में प्रौद्योगिकी-सक्षम सुरक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु ग्रामीण क्षेत्रों के रणनीतिक स्थानों पर CCTV कैमरे स्थापित करने की परिकल्पना करती है।
- प्रमुख विशेषताएँ: निर्भय चेतना के अंतर्गत राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनरों का एक समूह विकसित किया जा रहा है।
- इन प्रशिक्षकों के माध्यम से देशभर के 17.5 लाख से अधिक निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों तक पहुँच बनाई जाएगी।
- मास्टर ट्रेनर पुरुष प्रतिनिधियों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान करेंगे—
- लैंगिक समानता
- महिलाओं की सुरक्षा
- महिलाओं के अधिकार
- पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं का नेतृत्व
स्रोत: PIB
RSS एवं विधिक इकाई
पाठ्यक्रम: GS-2 / भारतीय राजव्यवस्था
समाचार में
- कर्नाटक के गृह मंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विधिक स्थिति पर प्रश्न उठाया है।
परिचय
- RSS स्वयं को एक स्वैच्छिक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन तथा “व्यक्तियों का समूह” बताता है।
- यह न तो सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत संस्था है,
- न ही भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के अंतर्गत पंजीकृत न्यास (Trust) है,
- और न ही कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत स्थापित धारा-8 कंपनी है।
विधिक इकाई क्या है?
- ‘विधि की दृष्टि में व्यक्ति’ से आशय ऐसी किसी इकाई से है जिसे कानूनी अधिकार एवं दायित्व प्राप्त हों।
- व्यक्तियों को सामान्यतः निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जाता है—
- प्राकृतिक व्यक्ति: एक मानव व्यक्ति।
- न्यायिक/कृत्रिम व्यक्ति: ऐसी विधिक इकाई, जैसे—
- कंपनी
- न्यास
- सोसायटी
- वैधानिक निकाय
- जिसके अधिकार एवं दायित्व उसके सदस्यों से पृथक होते हैं।
- विधिक इकाई के अधिकार: कानून ऐसी इकाइयों को निम्नलिखित अधिकार प्रदान करता है—
- संपत्ति रखने का अधिकार
- अनुबंध करने का अधिकार
- न्यायालय में वाद दायर करने अथवा उनके विरुद्ध वाद दायर किए जाने का अधिकार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बारे में
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक हिंदू राष्ट्रवादी स्वयंसेवी संगठन है, जिसकी स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में नागपुर में की थी।
- इसका गठन ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान हिंदू संस्कृति एवं समाज के समक्ष मानी जाने वाली चुनौतियों के प्रत्युत्तर के रूप में किया गया था।
- यह ‘हिंदुत्व’ की अवधारणा को प्रोत्साहित करता है तथा हिंदुओं की सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय पहचान पर बल देता है।
- स्वतंत्रता-पूर्व भूमिका: संगठन ने स्वतंत्रता-पूर्व काल में हिंदू समाज के सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- इसने सामुदायिक सेवा, शिक्षा तथा हिंदू आदर्शों के प्रसार पर विशेष बल दिया।
- स्वतंत्रता के पश्चात: वर्ष 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् RSS आलोचना के केंद्र में आया, विशेषकर वर्ष 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद।
- गांधीजी की हत्या नाथूराम गोडसे द्वारा किए जाने के पश्चात संगठन पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था।
- बाद में यह प्रतिबंध हटाया गया और संगठन ने पुनः अपनी गतिविधियाँ प्रारंभ कीं।
स्रोत: TH
TReDS प्लेटफ़ॉर्म
पाठ्यक्रम: GS-3 / भारतीय अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारतीय रिज़र्व बैंक (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) निर्देश, 2026 जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सरल बनाना है।
TReDS क्या है?
- ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) एक ऑनलाइन मंच है, जो लघु व्यवसायों को अपनी इनवॉइस(Invoices) अथवा व्यापारिक प्राप्य राशियों की नीलामी बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों के समक्ष करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे उन्हें कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो सके।
- यह मंच निम्नलिखित से प्राप्त होने वाली देय राशियों के विरुद्ध वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करता है—
- कॉर्पोरेट खरीदार
- सरकारी विभाग
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs)
RBI के निर्देशों के बारे में
- RBI ने डिस्काउंटिंग सेवाएँ प्रदान करने वाली संस्थाओं के लिए न्यूनतम ₹25 करोड़ की शुद्ध संपत्ति अनिवार्य की है।
- इस शुद्ध संपत्ति का प्रमाणन एक वैधानिक लेखा परीक्षक द्वारा किया जाना आवश्यक होगा।
- वर्तमान में यह सेवा प्रदान कर रही संस्थाओं को इस मानदंड का अनुपालन करने हेतु 31 मार्च 2028 तक की समय-सीमा प्रदान की गई है।
स्रोत: TH, MoneyControl
भारत की ABS रूपरेखा से लाभार्थियों को ₹145 करोड़ का वितरण
पाठ्यक्रम: GS-3 / पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
संदर्भ
- जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत भारत की प्रवेश एवं लाभ-साझाकरण (ABS) व्यवस्था ने वर्ष 2008 से अब तक ₹266 करोड़ से अधिक राशि एकत्रित की है, जिसमें से लगभग ₹145 करोड़ लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं।
प्रवेश एवं लाभ-साझाकरण (ABS) क्या है?
- ABS वह व्यवस्था है जिसके अंतर्गत जैविक संसाधनों तथा उनसे संबंधित पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से उत्पन्न लाभों को उन समुदायों के साथ निष्पक्ष एवं न्यायसंगत रूप से साझा किया जाता है, जिन्होंने इन संसाधनों का संरक्षण किया है।
- यह जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) के अंतर्गत एक प्रमुख सिद्धांत है।
- भारत ABS व्यवस्था को जैव विविधता अधिनियम, 2002 तथा इसके हालिया संशोधन जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से लागू करता है।
महत्व
- भारत की ABS रूपरेखा—
- नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों को आगे बढ़ा रही है।
- राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्य योजना (NBSAP) 2024–2030 को समर्थन प्रदान कर रही है।
- कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा में योगदान दे रही है, विशेषकर लक्ष्य 13, जो लाभों के निष्पक्ष एवं न्यायसंगत साझाकरण पर केंद्रित है।
जैव विविधता अधिनियम, 2002
- यह अधिनियम जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (CBD), 1992 के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु अधिनियमित किया गया था।
- यह जैविक संसाधनों तक पहुँच तथा उनके उपयोग से प्राप्त लाभों के साझाकरण के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- यह नागोया प्रोटोकॉल ऑन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग के अनुरूप है।
नागोया प्रोटोकॉल
- “आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच तथा उनके उपयोग से उत्पन्न लाभों के निष्पक्ष एवं न्यायसंगत साझाकरण पर नागोया प्रोटोकॉल” जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) का एक पूरक समझौता है।
- यह आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न लाभों के निष्पक्ष एवं न्यायसंगत साझाकरण हेतु एक पारदर्शी कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- यह CBD के तीन प्रमुख उद्देश्यों में से एक—लाभों के न्यायसंगत साझाकरण—के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है।
- इसे वर्ष 2010 में नागोया (जापान) में अपनाया गया।
- यह वर्ष 2014 में प्रभावी हुआ।
स्रोत: PIB
अंतरतारकीय धूमकेतु 3I/ATLAS
पाठ्यक्रम: GS-3 / अंतरिक्ष विज्ञान
संदर्भ
- 3I/ATLAS की खोज, जो अब तक ज्ञात केवल तीसरी अंतरतारकीय वस्तु है, ने वैज्ञानिकों को एक प्राचीन ग्रह-तंत्रीय प्रणाली से संबंधित पदार्थों का अध्ययन करने का दुर्लभ अवसर प्रदान किया है।
3I/ATLAS क्या है?
- 3I/ATLAS हमारे सौरमंडल से होकर गुजरने वाली अब तक की तीसरी ज्ञात अंतरतारकीय वस्तु है।
- अंतरतारकीय शब्द का प्रयोग उन वस्तुओं अथवा घटनाओं के लिए किया जाता है जो किसी आकाशगंगा में तारों के बीच के अंतरिक्ष में स्थित, गतिमान अथवा घटित होती हैं।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- यह लगभग 2.6 किलोमीटर व्यास वाला एक धूमकेतु है।
- इसके नाम में “3I” का अर्थ है—पहचानी गई तीसरी अंतरतारकीय वस्तु।
- इसका निर्माण तब हुआ था जब ब्रह्मांड अपनी वर्तमान आयु का केवल लगभग 13 प्रतिशत था।
- इसमें सौरमंडल के धूमकेतुओं की तुलना में लगभग 30 गुना अधिक ड्यूटेरियम (भारी हाइड्रोजन) पाया गया है।
- इसके कार्बन समस्थानिक अनुपात सौरमंडल की वस्तुओं से उल्लेखनीय रूप से भिन्न हैं।
- इससे पूर्व अवलोकित की गई दो अन्य अंतरतारकीय वस्तुएँ 1I/ʻOumuamua (जिसका पता वर्ष 2017 में लगाया गया था) तथा 2I/Borisov (जिसकी खोज वर्ष 2019 में हुई थी) नामक धूमकेतु थीं।
- 3I/ATLAS वर्तमान में शनि ग्रह (Saturn) की कक्षा की ओर अग्रसर है।
- इसके वर्ष 2029 में बौने ग्रह प्लूटो (Pluto) की कक्षा से आगे निकल जाने की संभावना है।
- अनुमान है कि यह लगभग वर्ष 2035 तक सौरमंडल की बाहरी सीमा को पार कर अंतरतारकीय अंतरिक्ष में प्रवेश कर जाएगा।
- महत्व: वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका निर्माण लगभग 10 से 12 अरब वर्ष पूर्व हुआ था, जिससे यह संभवतः सौरमंडल में अब तक अवलोकित सबसे प्राचीन वस्तु हो सकती है।
- यह सौरमंडल के निर्माण से भी पूर्व अस्तित्व में आ चुकी थी; सौरमंडल की आयु लगभग 4.5 अरब वर्ष मानी जाती है।
- संभावना है कि इसकी उत्पत्ति किसी अन्य ग्रह-तंत्रीय प्रणाली में हुई हो तथा बाद में यह वहाँ से निष्कासित होकर अंतरतारकीय अंतरिक्ष में पहुँच गई हो।
स्रोत: TH
रस लाफ़ान गैस सुविधा
पाठ्यक्रम: GS-3 / आपदा प्रबंधन
संदर्भ
- कतर के रस लाफ़ान स्थित बरज़ान गैस सुविधा में हुए विस्फोट में 12 भारतीय श्रमिकों की मृत्यु हो गई।
ऐसे दुर्घटनाओं पर लागू भारतीय कानून एवं नियम
- कारखाना अधिनियम, 1948 : यह अधिनियम अधिकांश औद्योगिक दुर्घटनाओं पर लागू होता है, क्योंकि यह—
- आग एवं विस्फोटों की रोकथाम हेतु संचालकों के दायित्व निर्धारित करता है।
- आवश्यक सुरक्षा उपायों एवं सूचना प्रकटीकरण को अनिवार्य बनाता है।
- खतरनाक प्रक्रियाओं से संबंधित इकाइयों के लिए आपातकालीन योजनाएँ तैयार करने का प्रावधान करता है।
- खतरनाक रसायनों का विनिर्माण, भंडारण एवं आयात नियम, 1989: यह नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं।
- इनका उद्देश्य वाष्प बादल विस्फोटों तथा अन्य रासायनिक दुर्घटनाओं की रोकथाम करना है।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विनियम, 2010: ये विनियम तब लागू हो सकते हैं जब ज्वलनशील गैसों अथवा गैस मिश्रणों के संपर्क में कोई प्रज्वलन स्रोत या विद्युत उपकरण आ जाए।
- इनका उद्देश्य विद्युत संबंधी जोखिमों को कम करना तथा दुर्घटनाओं की रोकथाम करना है।
- बॉयलर अधिनियम, 1923 तथा विभिन्न राज्य स्तरीय बॉयलर नियम निम्नलिखित विषयों को विनियमित करते हैं— बॉयलरों एवं दाब प्रणालियों का निरीक्षण एवं प्रमाणीकरण
- सुरक्षित संचालन की शर्तें
- संचालकों की योग्यता
- समय-समय पर निरीक्षण एवं सुरक्षा मूल्यांकन
सुरक्षा उपकरण प्रणाली के निर्धारण हेतु HAZOP एवं LOPA
- HAZOP (जोखिम और संचालन क्षमता अध्ययन): HAZOP अर्थात जोखिम एवं परिचालन अध्ययन एक व्यवस्थित पद्धति है, जिसका उपयोग किसी औद्योगिक सुविधा के अभिकल्पना उद्देश्य से संभावित विचलनों की पहचान करने के लिए किया जाता है।
- प्रमुख विशेषताएँ: यह सामान्यतः स्थिर-अवस्था परिचालन पर केंद्रित होता है।
- उदाहरण के लिए, यह मूल्यांकन किया जाता है कि यदि किसी पाइप में प्रवाह न हो तो उसका व्यवहार कैसा होगा।
- संक्रमणकालीन परिचालनों के लिए अभियंता प्रक्रियात्मक HAZOP का उपयोग करते हैं।
- इसमें स्टार्टअप मैनुअल के प्रत्येक चरण का विस्तार से विश्लेषण किया जाता है।
- LOPA (सुरक्षा की परत का विश्लेषण): LOPA अर्थात सुरक्षा परत विश्लेषण (Layer of Protection Analysis) एक अर्द्ध-मात्रात्मक (Semi-Quantitative) तकनीक है, जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु पर्याप्त स्वतंत्र सुरक्षा परतें उपलब्ध हैं या नहीं।
- संभावित सुरक्षा परतें: परिचालक
- चेतावनी संकेत/अलार्म
- दाब-नियंत्रण अथवा राहत वाल्व
- विस्फोट-रोधी दीवार
- अन्य स्वतंत्र सुरक्षा तंत्र
- इन सभी परतों का उद्देश्य संभावित दुर्घटनाओं की संभावना एवं प्रभाव को न्यूनतम करना होता है।
स्रोत: TH
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP)
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) 2026 के लिए नामांकन आमंत्रित किए हैं।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) के बारे में
- प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) प्रतिवर्ष वीर बाल दिवस (26 दिसंबर) के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।
- वर्तमान स्वरूप में इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2019 में की गई थी।
- यह पुरस्कार 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को निम्नलिखित छह श्रेणियों में उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है—
- वीरता
- कला एवं संस्कृति
- पर्यावरण
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- सामाजिक सेवा
- खेल
- पात्रता: पुरस्कार हेतु पात्र होने के लिए नामांकित बालक/बालिका को निम्नलिखित शर्तें पूर्ण करनी होंगी— वह भारत का नागरिक हो तथा भारत में निवास करता हो।
- उसे पूर्व में यह पुरस्कार प्राप्त न हुआ हो।
- उसकी मान्य उपलब्धि नामांकन की अंतिम तिथि से पूर्व के दो वर्षों के अंदर अर्जित की गई हो।
- अन्य प्रावधान: सामान्यतः यह पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान नहीं किया जाता, तथापि असाधारण परिस्थितियों में विशेष मामलों पर विचार किया जा सकता है।
- यह पुरस्कार भारत में बच्चों को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- PMRBP के प्रत्येक पुरस्कार विजेता को निम्नलिखित प्रदान किए जाते हैं—
- एक पदक
- एक प्रमाण-पत्र
- एक प्रशस्ति-पुस्तिका ।
स्रोत: DD News
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