पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत के प्रमुख फिनटेक उद्यमी कुणाल शाह को व्हाट्सऐप का वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है।
परिचय
- मेटा (Meta) द्वारा CRED में 900 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की भी घोषणा की गई है, जिससे अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा भारत के फिनटेक क्षेत्र तथा भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा उत्पन्न डेटा पर बढ़ते नियंत्रण को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
- मेटा–CRED सौदा ऐसे समय में सामने आया है जब भारत का डिजिटल भुगतान पारितंत्र अमेरिकी कंपनियों से संबद्ध प्लेटफॉर्मों के बढ़ते प्रभुत्व का सामना कर रहा है।
- वर्तमान में वॉलमार्ट के पास PhonePe में लगभग 72% हिस्सेदारी है, गूगल के स्वामित्व में Google Pay है तथा मेटा के स्वामित्व में WhatsApp Pay है।
- प्रस्तावित CRED निवेश उस क्षेत्र में विदेशी प्रौद्योगिकी दिग्गजों के नियंत्रण को सुदृढ़ करेगा, जिसका निर्माण मुख्यतः भारत की सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के आधार पर हुआ है।
- अनेक भारतीय फिनटेक स्टार्टअप दीर्घकालिक भारतीय स्वामित्व वाले डिजिटल अग्रणी संस्थानों के निर्माण की अपेक्षा विदेशी खरीदारों को भविष्य में बिक्री हेतु कंपनियाँ विकसित करने में अधिक रुचि रखते प्रतीत होते हैं।
फिनटेक क्या है?
- भारत में फिनटेक क्षेत्र का आशय वित्तीय सेवाओं को अधिक प्रभावी, नवोन्मेषी तथा सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग से है।
- इस क्षेत्र के अंतर्गत प्रौद्योगिकी-संचालित विभिन्न वित्तीय उत्पाद एवं सेवाएँ सम्मिलित हैं, जैसे—
- डिजिटल भुगतान
- ऋण
- बीमा
- संपत्ति प्रबंधन
- व्यक्तिगत वित्त
भारत में फिनटेक क्षेत्र
- भारतीय फिनटेक उद्योग का आकार वर्ष 2024 में लगभग 110 अरब अमेरिकी डॉलर आँका गया है तथा वर्ष 2029 तक इसके लगभग 420 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
- फिनटेक कंपनियों की संख्या के आधार पर भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है तथा डिजिटल भुगतान की मात्रा के मामले में वैश्विक अग्रणी है।
- वर्ष 2016 में जहाँ UPI पर केवल 10 लाख (1 मिलियन) लेन-देन हुए थे, वहीं अब यह 10 अरब (10 बिलियन) लेन-देन के ऐतिहासिक आँकड़े को पार कर चुका है।

विकास के प्रमुख कारक
- डिजिटल अवसंरचना: खुले अनुप्रयोग प्रोग्रामिंग इंटरफेस (Open API) आधारित प्लेटफॉर्मों ने फिनटेक क्षेत्र को गति प्रदान की है, जैसे—
- आधार
- UPI
- भारत बिल भुगतान प्रणाली (BBPS)
- वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN)
- तकनीकी नवाचार: कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा मशीन लर्निंग जैसी प्रौद्योगिकियों द्वारा संचालित नवीन व्यावसायिक मॉडलों के कार्यान्वयन ने क्षेत्र के विस्तार को प्रोत्साहित किया है।
- अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति: शहरी क्षेत्रों के लगभग 62% तथा ग्रामीण क्षेत्रों के 37% वयस्क इंटरनेट का उपयोग करते हैं।
- वर्ष 2024 में स्मार्टफोन की पहुँच 50% से अधिक हो गई।
- विगत सात वर्षों में इसमें लगभग 2.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

- वित्तीय समावेशन संबंधी पहलें: निम्नलिखित योजनाओं ने डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है—
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY)
- दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)
- अटल पेंशन योजना (APY)
- इन पहलों ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को डिजिटल वित्तीय सेवाओं के दायरे में लाने में सहायता की है।
प्रमुख चुनौतियाँ
- साइबर सुरक्षा जोखिम: डिजिटल प्लेटफॉर्मों के बढ़ते उपयोग के कारण—
- डेटा उल्लंघन
- साइबर हमले
- जैसी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। संवेदनशील वित्तीय डेटा की सुरक्षा हेतु सुदृढ़ सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
- डिजिटल साक्षरता का अभाव: जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग अभी भी—
- डिजिटल साक्षरता
- तकनीकी पहुँच से वंचित है, जिससे फिनटेक समाधानों की पहुँच और प्रभावशीलता सीमित होती है।
- उपभोक्ता विश्वास: विशेषकर वृद्ध जनसंख्या तथा नई तकनीकों से अपरिचित लोगों के बीच डिजिटल वित्तीय सेवाओं के प्रति विश्वास स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है।
- नीतिगत परिवर्तन: कराधान, ब्याज दरों अथवा अन्य आर्थिक एवं वित्तीय नीतियों में परिवर्तन फिनटेक पारितंत्र को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
- नवाचार एवं विस्तार क्षमता: तीव्रता से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बनाए रखना तथा बढ़ती उपभोक्ता मांग के अनुरूप प्रणालियों का प्रभावी विस्तार करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
भारत में फिनटेक क्षेत्र हेतु सरकारी पहलें
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY): यह योजना—
- वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने,
- नए बैंक खाते खोलने,
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को सक्षम बनाने,
- तथा वित्तीय सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है।
- इंडिया स्टैक: यह एक सामाजिक पहल है जिसका उद्देश्य ऐसी सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना का निर्माण करना है जो सार्वजनिक एवं निजी दोनों प्रकार की डिजिटल पहलों, विशेषकर वित्तीय क्षेत्र, को समर्थन प्रदान करे।
- आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS): यह प्रणाली व्यक्तियों को—
- आधार संख्या
- तथा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (फिंगरप्रिंट अथवा आइरिस स्कैन) के माध्यम से माइक्रो-एटीएम पर वित्तीय लेन-देन करने की सुविधा प्रदान करती है।
- केंद्रीय KYC : यह एक केंद्रीकृत भंडार है जिसका उद्देश्य विभिन्न वित्तीय संस्थानों में बार-बार KYC कराने की आवश्यकता को कम करना है।
- एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI): यह एक विस्तार योग्य मंच है जो पूरे भारत में डिजिटल भुगतान को सुगम बनाता है।
- भारत बिल भुगतान प्रणाली (BBPS): यह प्रणाली विभिन्न उपयोगिता सेवाओं एवं क्षेत्रों के बिलों के भुगतान को सरल बनाकर उपभोक्ता सुविधा को बढ़ाती है तथा प्रीपेड रिचार्ज को छोड़कर सभी आवर्ती बिल भुगतानों को कवर करती है।
- फिनटेक हेतु स्व-नियामक संगठन (SRO): भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज़्यूमर एम्पावरमेंट (FACE) को फिनटेक क्षेत्र के लिए स्व-नियामक संगठन के रूप में मान्यता प्रदान की है।
- यह— उद्योग मानकों को सुदृढ़ करता है,
- अनुपालन सुनिश्चित करता है,
- तथा उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देता है।
- यह— उद्योग मानकों को सुदृढ़ करता है,
- राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (NDHM) एवं संबंधित पहलें: DHM तथा DISHA जैसी सरकारी पहलें डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से बीमा एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में परिवर्तन लाने का प्रयास कर रही हैं।
- नियामकीय सैंडबॉक्स: इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) तथा बाद में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) द्वारा प्रारंभ किया गया।
- यह फिनटेक कंपनियों को पूर्ण स्तर पर लागू करने से पूर्व नियंत्रित नियामकीय वातावरण में अपने नवोन्मेषी उत्पादों का परीक्षण करने की अनुमति देता है।
- आईएफएससी, गिफ्ट सिटी में फिनटेक हब: गांधीनगर (गुजरात) स्थित गिफ्ट सिटी (GIFT City) में विश्वस्तरीय फिनटेक हब विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक फिनटेक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करना है।
निष्कर्ष
- भारत का फिनटेक क्षेत्र अत्यंत गतिशील एवं तीव्र गति से विकसित होने वाला क्षेत्र है। यह वित्तीय सेवाओं की पहुँच, दक्षता तथा समावेशन को बढ़ाकर देश की वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
- सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना, नवाचारोन्मुखी नीतियों तथा वित्तीय समावेशन संबंधी पहलों के बल पर भारत वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है।
स्रोत: IE
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