भारत की सांस्कृतिक कूटनीति 

पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध

सन्दर्भ

  • हाल ही में फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को उपहारस्वरूप कई भारतीय सांस्कृतिक वस्तुएँ भेंट कीं, जिनमें कलमकारी महाभारत चित्रकला, पोचमपल्ली रेशमी स्टोल, लाकाडोंग हल्दी तथा ठेकुआ प्रमुख हैं।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भेंट की गई वस्तुओं के बारे में

  • कलमकारी महाभारत चित्रकला: यह आंध्र प्रदेश की हस्तनिर्मित चित्रकला है, जिसे पारंपरिक कलम-चित्रण तकनीक से बनाया गया है तथा इसमें महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाया गया है।
  • पोचमपल्ली रेशमी स्टोल: यह तेलंगाना का हस्तनिर्मित वस्त्र है, जिसे पारंपरिक इकत (Ikat) प्रतिरोध-रंगाई तकनीक से तैयार किया जाता है। यह अपनी जटिल ज्यामितीय एवं पुष्पीय आकृतियों, उत्कृष्ट शिल्पकला और आकर्षक डिजाइन के लिए प्रसिद्ध है।
  • कश्मीरी रेशमी कालीन: यह हस्तनिर्मित कालीन उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक रेशम से बनाया जाता है तथा अपने जटिल पुष्पीय, पैस्ले, बेल-बूटेदार और पदकाकार डिजाइनों के लिए जाना जाता है।
  • पीतल का ढोकरा मृग-समूह (Brass Dokra Antelope Set): यह एक हस्तनिर्मित कलाकृति है जो भारत की प्राचीन ढोकरा धातु-ढलाई परंपरा को प्रदर्शित करती है। यह परंपरा छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के जनजातीय शिल्पकारों द्वारा सदियों से संरक्षित की जा रही है।
  • मृग की आकृतियाँ सौम्यता, चपलता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक हैं तथा स्लोवाकिया के टाट्रा कैमॉइस (Tatra Chamois) से सांस्कृतिक संबंध स्थापित करती हैं।
  • हस्तनिर्मित थेवा अलंकरणयुक्त कफलिंक: यह राजस्थान के प्रतापगढ़ की पारंपरिक आभूषण कला को प्रदर्शित करता है, जिसमें रंगीन काँच पर बारीक उत्कीर्ण स्वर्ण-पत्र को संयोजित किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री ने चरक संहिता, सुश्रुत संहिता तथा ठेकुआ की प्रतियाँ भी भेंट कीं।
  • चरक संहिता भारत की समृद्ध वैज्ञानिक एवं बौद्धिक विरासत को प्रतिबिंबित करती है, जबकि ठेकुआ बिहार का एक पारंपरिक मिष्ठान्न है।
  • सुश्रुत संहिता एक प्राचीन संस्कृत चिकित्सा ग्रंथ है तथा आयुर्वेद के आधारभूत ग्रंथों में से एक है। इसे लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में वैद्य सुश्रुत द्वारा रचित माना जाता है, जिन्हें प्रायः “शल्य चिकित्सा का जनक” कहा जाता है।
  • जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने राजस्थान की नागौरी अश्वगंधा, मेघालय की लाकाडोंग हल्दी, जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में उत्पादित रामबन शहद तथा बनारसी रेशमी स्टोल भी भेंट किए।

सांस्कृतिक कूटनीति क्या है?

  • सांस्कृतिक कूटनीति से तात्पर्य राष्ट्रों और लोगों के बीच विचारों, सूचनाओं, कला, भाषा तथा संस्कृति के अन्य पहलुओं के आदान-प्रदान से है, जिसका उद्देश्य पारस्परिक समझ को बढ़ावा देना है।
  • यह एक सौम्य किंतु प्रभावशाली शक्ति के रूप में एकता और सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करती है।
  • स्वतंत्रता के पश्चात अनेक देशों ने अपनी विदेश नीति को संस्कृति-केंद्रित बनाया अथवा विकास नीतियों को सांस्कृतिक अंतर-राज्यीय सहयोग के आधार पर विकसित किया।
  • सॉफ्ट पावर का उदाहरण: यूरोप में सदियों पुराने विवादों और संघर्षों को समाप्त करने में यूरोपीय संघ (EU) का गठन सॉफ्ट पावर की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद फ्रांस और जर्मनी के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को समझने हेतु विनिमय कार्यक्रमों में भेजा गया।

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के स्तंभ

समन (शांति)

  • शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता उसके अहिंसा के दीर्घ इतिहास तथा कूटनीतिक सहभागिताओं में परिलक्षित होती है।
  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है तथा विश्वभर में 40 से अधिक मिशनों में अपने कर्मियों का योगदान दिया है।
  • देश की शांति-उन्मुख विदेश नीति तथा गुटनिरपेक्ष स्थिति ने उसे एक शांतिपूर्ण एवं स्थिर शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया है।
  • वैश्विक दक्षिण-दक्षिण सहयोग के समर्थन ने भारत को विकासशील देशों के बीच सम्मान दिलाया है, जो उसे आर्थिक विकास के आदर्श मॉडल के रूप में देखते हैं।

समृद्धि (Prosperity)

  • मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से भारत की आर्थिक सफलता ने उसे एक उभरती हुई वैश्विक आर्थिक शक्ति और विशाल बाजार के रूप में स्थापित किया है।
  • विशेष रूप से अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंध भारत के आर्थिक प्रभाव को दर्शाते हैं।

सुरक्षा (Security)

  • क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा के प्रति भारत की रणनीति संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और जापान जैसी प्रमुख शक्तियों के साथ साझेदारी पर आधारित है।
  • भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका स्थापित की है तथा अपनी ऐतिहासिक गुटनिरपेक्ष नीति के साथ-साथ क्वाड (QUAD) जैसे सुरक्षा मंचों में सक्रिय भागीदारी निभाई है।
  • आतंकवाद-निरोध और मानवीय सहायता पर भारत का विशेष बल उसे क्षेत्रीय सुरक्षा में योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करता है।

संस्कृति (Culture)

  • बॉलीवुड, शास्त्रीय कलाएँ, योग तथा भारतीय भोजन भारतीय संस्कृति के सबसे प्रमुख वैश्विक निर्यातों में शामिल हैं।
  • विश्वभर में मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इस बात का उदाहरण है कि भारत ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर तक पहुँचाया है।
  • भारतीय प्रवासी समुदाय भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रसार में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा वैश्वीकरण के इस युग में भारत की छवि को सुदृढ़ करता है।

चुनौतियाँ

  • अन्य देशों की सॉफ्ट पावर से प्रतिस्पर्धा: चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देश अपनी संस्कृति के वैश्विक प्रचार-प्रसार में भारी निवेश करते हैं।
  • सीमित संस्थागत एवं वित्तीय संसाधन: भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) जैसे संस्थानों को प्रमुख वैश्विक शक्तियों के समकक्ष संस्थानों की तुलना में बजटीय एवं मानव संसाधन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
  • सांस्कृतिक संपदाओं का अपर्याप्त उपयोग: भारत की विशाल सांस्कृतिक विरासत, भाषाएँ, साहित्य, संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमेशा प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किया जाता।
  • डिजिटल एवं भाषाई बाधाएँ: सीमित अनुवाद और डिजिटल प्रसार के कारण भारतीय सांस्कृतिक सामग्री वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम सुलभ है।

आगे की राह

  • सांस्कृतिक कूटनीति को सुदृढ़ बनाना: भारत को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अपने मूल्यों का प्रचार जारी रखना चाहिए तथा विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों का विस्तार करना चाहिए जहाँ उसकी सॉफ्ट पावर अभी उभर रही है।
  • डिजिटल कूटनीति का उपयोग: भारत को युवा वैश्विक दर्शकों तक पहुँचने के लिए डिजिटल मंचों में अधिक निवेश करना चाहिए। डिजिटल इंडिया जैसी पहलों का विस्तार अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक सहभागिता के नए अवसर प्रदान कर सकता है।
  • शैक्षिक कूटनीति: भारत को विशेष रूप से विकासशील देशों के विद्यार्थियों को आकर्षित करने हेतु छात्रवृत्तियों और शैक्षिक विनिमय कार्यक्रमों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
  • क्षेत्रीय सहभागिता: भारत को दक्षिण एशिया, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने कूटनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना चाहिए।

निष्कर्ष 

  • वैश्वीकरण के युग में भारत की सॉफ्ट पावर क्षमता उसकी सांस्कृतिक कूटनीति, आर्थिक प्रगति और रणनीतिक साझेदारियों के कारण उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
  • अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीति की जटिलताओं के बीच भारत की सॉफ्ट पावर संबंधों को सुदृढ़ करने, पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देने तथा वैश्विक स्तर पर अपने हितों को आगे बढ़ाने की एक महत्त्वपूर्ण संपदा बनी रहेगी।

स्रोत: IE

 

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