राखीगढ़ी
पाठ्यक्रम: जीएस-1/ इतिहास एवं संस्कृति
सन्दर्भ
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी से प्राप्त लगभग 5,000 वर्ष पुराने कंकालों को वैज्ञानिक परीक्षण एवं चेहरे के पुनर्निर्माण (Facial Reconstruction) हेतु भेजा है।
राखीगढ़ी
- वर्तमान राखीगढ़ी हरियाणा में घग्गर-हाकड़ा नदी मैदान में स्थित है तथा घग्गर नदी से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।
- यह पुरातात्त्विक स्थल 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के काल का है।
- यह भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल है।
- इस स्थल का प्रथम उत्खनन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अमरेंद्र नाथ द्वारा किया गया था।
- प्रमुख खोजें
- अन्नागार (Granary):यहाँ पर परिपक्व हड़प्पा काल (2600 ईसा पूर्व से 2000 ईसा पूर्व) का एक अन्नागार प्राप्त हुआ है।
- इसमें 7 आयताकार अथवा वर्गाकार कक्ष पाए गए हैं।
- संस्कृति, वस्त्र एवं पूजा-पद्धति: राखीगढ़ी में अग्नि वेदियाँ (Fire Altars) तथा अर्धवृत्ताकार (Apsidal) संरचनाएँ प्राप्त हुई हैं।
- कब्रिस्तान एवं दफन स्थल: राखीगढ़ी में परिपक्व हड़प्पा काल का एक कब्रिस्तान खोजा गया है।
- यहाँ से आठ कब्रें प्राप्त हुई हैं।

हड़प्पा सभ्यता
- हड़प्पा सभ्यता को मिस्र और मेसोपोटामिया के साथ विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक माना जाता है।
- इसका विकास सिंधु नदी के किनारे हुआ था, इसलिए इसे सिंधु घाटी सभ्यता भी कहा जाता है।
- हड़प्पा सभ्यता को कांस्य युगीन सभ्यता (Bronze Age Civilization) के रूप में पहचाना जाता है, क्योंकि यहाँ से ताँबा-आधारित मिश्रधातुओं से निर्मित अनेक वस्तुएँ प्राप्त हुई हैं।
स्रोत: IE
प्रथम संसोधन
पाठ्यक्रम: जीएस-2/राजव्यवस्था
सन्दर्भ
- 18 जून 1951 को भारतीय संविधान का प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम प्रभाव में आया।
परिचय
- इस संशोधन ने तीन मौलिक अधिकारों—वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार तथा संपत्ति के अधिकार—के दायरे में परिवर्तन किया।
- इसके अतिरिक्त, इसने एक नई संवैधानिक व्यवस्था भी स्थापित की, जिसके माध्यम से कुछ कानूनों को इस आधार पर चुनौती से संरक्षण प्रदान किया जा सकता था कि वे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
- ये परिवर्तन स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनावों से पूर्व लागू किए गए थे।
मुख्य प्रावधान
- मौलिक अधिकारों पर युक्तिसंगत प्रतिबंध:इस संशोधन द्वारा अनुच्छेद 19(2) में संशोधन किया गया, जिससे राज्य को निम्नलिखित आधारों पर वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लगाने की शक्ति प्राप्त हुई—
- लोक व्यवस्था (Public Order)
- विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध
- अपराध के लिए उकसावा
- राज्य की सुरक्षा आदि।
- भूमि सुधार कानूनों का संरक्षण: कृषि सुधारों से संबंधित कानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती से बचाने हेतु अनुच्छेद 31A तथा अनुच्छेद 31B जोड़े गए।
- नौवीं अनुसूची का सृजन: अनुच्छेद 31B के अंतर्गत नौवीं अनुसूची की स्थापना की गई।
- नौवीं अनुसूची में सम्मिलित कानूनों को प्रारंभ में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर न्यायिक समीक्षा से संरक्षण प्राप्त था।
- बाद में नौवीं अनुसूची को प्राप्त संरक्षण के दायरे की समीक्षा उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में की।
- सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान: इस संशोधन द्वारा अनुच्छेद 15(4) जोड़ा गया, जिसने राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों तथा अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार प्रदान किया।
स्रोत: IE
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसियों ने 13 संकटग्रस्त क्षेत्रों में तीव्र भुखमरी की चेतावनी दी
पाठ्यक्रम: जीएस-3/ खाद्य सुरक्षा
सन्दर्भ
- संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि संघर्ष, जलवायु संबंधी झटकों तथा वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण आने वाले महीनों में विश्व के 13 संकटग्रस्त क्षेत्रों में तीव्र भुखमरी और अधिक गंभीर हो सकती है।
परिचय
- दी फ़ूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) तथा वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम (WFP) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 26.6 करोड़ लोग पहले से ही तीव्र खाद्य असुरक्षा के उच्च स्तर का सामना कर रहे हैं।
- सूडान,दक्षिण सूडान ,यमन और फिलिस्तीन सबसे अधिक चिंता वाले देश बने हुए हैं, जबकि अकाल के बढ़ते खतरे के कारण नाइजीरिया और सोमालिया को भी उच्च जोखिम वाली सूची में शामिल किया गया है।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022 के बाद से खाद्य सहायता के लिए उपलब्ध वित्तपोषण में लगभग 60 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मानवीय सहायता की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
- संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने यह भी चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया के संघर्ष के दुष्प्रभाव तथा पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ दी कांगो में इबोला प्रकोप आजीविका और राहत सहायता की पहुँच को और अधिक प्रभावित कर रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा क्या है?
- खाद्य सुरक्षा (Food Security) वह स्थिति है जब लोगों को सामान्य वृद्धि एवं विकास तथा सक्रिय एवं स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो।
- इसके विपरीत, खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity) वह स्थिति है जब उपर्युक्त परिस्थितियाँ उपलब्ध नहीं होतीं।
- तीव्र खाद्य असुरक्षा (Acute Food Insecurity) वह स्थिति है जो लोगों के जीवन या आजीविका के लिए प्रत्यक्ष खतरा उत्पन्न करती है।
- तीव्र खाद्य असुरक्षा को मापने के लिए वैश्विक स्तर पर एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (Integrated Food Security Phase Classification – IPC) का उपयोग किया जाता है।
- IPC खाद्य असुरक्षा को पाँच स्तरों में वर्गीकृत करता है, जो “कोई/न्यूनतम खाद्य असुरक्षा” (IPC चरण 1) से लेकर “विनाशकारी स्थिति” अथवा “अकाल” (IPC चरण 5) तक होते हैं।
अमोनिया गैस
पाठ्यक्रम : जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में स्थित एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण एवं निर्यात इकाई में अमोनिया गैस के रिसाव से अनेक श्रमिकों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
अमोनिया (NH₃) क्या है?
- अमोनिया (NH₃) एक रंगहीन गैस है, जिसमें तीव्र एवं तीखी गंध होती है। यह नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से बना एक सरल अकार्बनिक यौगिक है।
- यद्यपि यह कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के दौरान प्राकृतिक रूप से अल्प मात्रा में उत्पन्न होती है, फिर भी इसके व्यापक औद्योगिक एवं कृषि उपयोगों के कारण इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है।
- औद्योगिक अमोनिया का व्यावसायिक उत्पादन हैबर-बॉश प्रक्रिया (Haber–Bosch Process) द्वारा किया जाता है, जिसमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन उच्च तापमान एवं दाब पर लौह उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करती है।
- इसका प्रमुख उपयोग उर्वरक उद्योग, रासायनिक उद्योग तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में किया जाता है, क्योंकि इसमें उत्कृष्ट शीतलन क्षमता होती है।
स्रोत: TH
बायोचार
पाठ्यक्रम: जीएस-3/ कृषि/ पर्यावरण
सन्दर्भ
- बायोचार कृषि अपशिष्ट को एक मूल्यवान संसाधन में परिवर्तित करने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए एक सतत समाधान के रूप में उभर रहा है।
बायोचार क्या है ?
- बायोचार कोयले जैसी एक सामग्री है, जिसे कृषि एवं वानिकी अपशिष्टों से प्राप्त जैवभार (Biomass) को पायरोलिसिस (Pyrolysis) नामक नियंत्रित प्रक्रिया में जलाकर तैयार किया जाता है।
- सामान्य कार्बनिक पदार्थों के विपरीत, बायोचार का अपघटन बहुत धीमी गति से होता है और यह सैकड़ों वर्षों तक मृदा में बना रह सकता है।
- यह अत्यधिक छिद्रयुक्त (Porous) होता है, जिससे यह जल, पोषक तत्वों तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों को संग्रहित कर सकता है।
बायोचार के लाभ
कृषि उत्पादकता
- अध्ययनों से संकेत मिलता है कि बायोचार विशेष रूप से पोषक तत्वों की कमी वाली मिट्टियों में फसल उत्पादकता को 10–30 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।
कार्बन क्रेडिट
- बायोचार कार्बन क्रेडिट उत्पन्न कर सकता है क्योंकि यह वायुमंडल से कार्बन को हटाकर मृदा में संग्रहीत करता है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानकों के अनुसार, एक टन प्रमाणित बायोचार लगभग 2–2.8 टन कार्बन डाइऑक्साइड-समतुल्य (CO₂-eq) क्रेडिट उत्पन्न कर सकता है।
जल धारण क्षमता
- बायोचार स्पंज की तरह कार्य करता है और अपनी छिद्रयुक्त संरचना में जल को संग्रहीत करता है।
- अनुसंधानों से पता चलता है कि यह मिट्टी की जल धारण क्षमता को 10–25 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।
स्रोत: TH
सरकार पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्रों को अधिसूचित करने की तैयारी में
पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण
सन्दर्भ
- पश्चिमी घाट के कुछ क्षेत्रों को शीघ्र ही पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Areas – ESA) के रूप में अधिसूचित कर कम-से-कम तीन राज्यों में अधिक सशक्त कानूनी संरक्षण प्रदान किया जा सकता है।
- अधिसूचना जारी होने के बाद इन क्षेत्रों में खनन, प्रदूषणकारी उद्योगों तथा बड़े निर्माण परियोजनाओं पर अधिक कठोर प्रतिबंध लागू होंगे।
पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESA) क्या हैं??
- ESA ऐसे नामित क्षेत्र हैं जिन्हें उनकी समृद्ध जैव विविधता, नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र अथवा महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिकीय कार्यों के कारण विशेष पर्यावरणीय संरक्षण के लिए चिह्नित किया जाता है।
- इन्हें पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किया जाता है।
- वर्ष 2022 में Supreme Court of India ने निर्देश दिया था कि प्रत्येक संरक्षित वन, राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्यजीव अभयारण्य की निर्धारित सीमा से कम-से-कम एक किलोमीटर का अनिवार्य पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone) होना चाहिए।
प्रतिबंध:
- कुछ गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है।
- कुछ गतिविधियों को कड़े नियमन के अधीन रखा जाता है।
- जबकि कुछ गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि विकास पर्यावरणीय क्षति की कीमत पर न हो।
- ESA का दर्जा मिलने का अर्थ यह भी है कि क्षेत्र में प्रस्तावित किसी भी विकास परियोजना की अधिक कठोर पर्यावरणीय जाँच की जाएगी।
पश्चिमी घाट
- पश्चिमी घाट, जिसे सह्याद्रि पर्वतमाला भी कहा जाता है, भारत के पश्चिमी तट के समानांतर विस्तृत पर्वत श्रृंखला है।
- अवस्थिति: पश्चिमी घाट उत्तर में गुजरात से दक्षिण में तमिलनाडु तक लगभग 1,600 किलोमीटर तक फैला हुआ है।
- यह छह राज्यों—गुजरात, महाराष्ट्र,गोवा,कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु में विस्तृत है।

- जैवविविधता: पश्चिमी घाट को विश्व के जैविक विविधता के 8 सबसे महत्त्वपूर्ण “हॉटस्पॉट्स” में से एक माना जाता है।
- भारत के कुल क्षेत्रफल के केवल लगभग 6% से कम क्षेत्र में फैले होने के बावजूद, पश्चिमी घाट में भारत में पाई जाने वाली कुल पादप, मत्स्य, उभयचर-सरीसृप (Herpeto-fauna), पक्षी तथा स्तनधारी प्रजातियों में से 30% से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- यहाँ अनेक स्थानिक (Endemic) प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जैसे नीलगिरी ताहर तथा लायन टेल्ड मकॉक ।
- भारत के लगभग 50% उभयचर तथा 67% मत्स्य प्रजातियाँ इस क्षेत्र के लिए स्थानिक हैं।
- खतरे: यह क्षेत्र वनों की कटाई, खनन, कृषि विस्तार तथा अवसंरचना विकास जैसी गतिविधियों से उत्पन्न खतरों का सामना कर रहा है।
- संरक्षण: वर्ष 2012 में पश्चिमी घाट को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।
- पश्चिमी घाट की प्रमुख चोटियाँ: अनाईमुडी (Anamudi) पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी है, जो केरल में स्थित है।
- डोड्डाबेट्टा (Doddabetta) तमिलनाडु का सर्वोच्च बिंदु है।
स्रोत: IE
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संक्षिप्त समाचार 22-06-2026