भारत के सांख्यिकीय डेटाबेस में आवश्यक उन्नयन

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था 

सन्दर्भ

  • भारत सरकार ने हाल ही में प्रमुख आर्थिक संकेतकों की कार्यप्रणालियों, आधार वर्षों तथा कवरेज को अद्यतन करके अपने सांख्यिकीय डेटाबेस में व्यापक सुधार किया है।

सांख्यिकीय डेटाबेस में सुधार की आवश्यकता

  • अंतर्राष्ट्रीय चिंताएँ: वर्ष 2025 में भारत सरकार को राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी की गुणवत्ता के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा ‘C’ ग्रेड प्रदान किया गया, जो दूसरा सबसे निम्न ग्रेड है।
  • वर्तमान परिदृश्य का प्रतिनिधित्व: डेटाबेस पुराने हो चुके थे और प्रत्येक वर्ष के साथ वास्तविक स्थिति का कम प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
  • पुराना आधार वर्ष समग्र मापन को कमजोर बनाता है और उन्हें वर्तमान वास्तविकता का कम प्रतिनिधि बनाता है।
  • पुराना आधार वर्ष: 2011-12 के बाद के दशक में भारत की अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। नई उद्योग शाखाएँ (जैसे- नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सेवाएँ) उभरी हैं तथा उपभोग पैटर्न और निवेश व्यवहार में परिवर्तन आया है।
  • ऐसे संरचनात्मक परिवर्तन आधार वर्ष के पुनर्निर्धारण को आवश्यक बनाते हैं, ताकि संकेतक उभरते क्षेत्रों के वास्तविक योगदान तथा प्रौद्योगिकी एवं उत्पादकता में हुए परिवर्तनों को सही ढंग से प्रतिबिंबित कर सकें।

कौन-कौन से संकेतक अद्यतन किए गए हैं?

राष्ट्रीय लेखा एवं सकल घरेलू उत्पाद (GDP) सुधार

  • जीडीपी किसी विशिष्ट अवधि के दौरान देश की घरेलू सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।
  • भारत ने जीडीपी का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है।
  • संशोधित श्रृंखला कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में द्वि-अवस्फीति (Double Deflation) पद्धति को लागू करती है, जिसमें आगत (Input) कीमतों और निर्गत (Output) कीमतों में होने वाले परिवर्तनों का पृथक रूप से आकलन किया जाता है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)

  • खुदरा स्तर पर मूल्य परिवर्तनों, जो उपभोक्ता स्तर के बाजार को दर्शाते हैं, का मापन सीपीआई (CPI) द्वारा किया जाता है।
  • सीपीआई का आधार वर्ष 2024 कर दिया गया है तथा जिन वस्तुओं को इसमें शामिल किया गया है और उनके सापेक्ष भार (Weightage) को 2023-24 के नवीनतम घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के आधार पर निर्धारित किया गया है।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI)

  • थोक स्तर पर मूल्य परिवर्तनों, जो आदर्श रूप से उत्पादकों को प्राप्त कीमतों को दर्शाते हैं, का मापन WPI द्वारा किया जाता है।
  • WPI का आधार वर्ष 2022-23 कर दिया गया है तथा इसमें शामिल वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)

  • IIP एक प्रमुख संकेतक है जो समय के साथ औद्योगिक उत्पादन में होने वाले परिवर्तनों को मापता है।
  • यह एक मासिक संकेतक है, जो निर्दिष्ट आधार वर्ष के संदर्भ में औद्योगिक उत्पादों की एक प्रतिनिधि टोकरी के उत्पादन की मात्रा में मासिक परिवर्तनों को दर्शाता है।
  • अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का आधार वर्ष 2011-12 से संशोधित कर 2022-23 कर दिया गया है।

असंगठित क्षेत्र उद्यमों पर त्रैमासिक बुलेटिन (QBUSE) की शुरुआत

  • वर्ष 2025 से असंगठित क्षेत्र उद्यमों पर त्रैमासिक बुलेटिन (QBUSE) प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत वार्षिक रिपोर्ट की प्रतीक्षा करने के बजाय प्रत्येक तिमाही में अंतरिम परिणाम उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • त्रैमासिक आँकड़ों का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र में होने वाले अल्पकालिक परिवर्तनों को अधिक प्रभावी ढंग से दर्ज करना है।

2022-23 को चुनने का औचित्य

  • वर्ष 2022-23 को नए आधार वर्ष के रूप में इसलिए चुना गया क्योंकि यह 2019-2021 की व्यवधानपूर्ण अवधि के बाद का सबसे हालिया “सामान्य” वर्ष है।
  • वर्ष 2019-20 और 2020-21 कोविड-19 महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित रहे, जिसके कारण उपभोग पैटर्न और औद्योगिक उत्पादन में अस्थायी परिवर्तन देखने को मिले।

सांख्यिकीय सुधारों का महत्त्व

  • साक्ष्य-आधारित शासन को सुदृढ़ बनाना: अधिक विश्वसनीय आँकड़े सरकारों को बेहतर नीतियाँ बनाने तथा उनके परिणामों की अधिक प्रभावी निगरानी करने में सक्षम बनाते हैं।
  • मौद्रिक नीति में सुधार: मुद्रास्फीति के सटीक अनुमान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को ब्याज दरों का अधिक प्रभावी निर्धारण करने में सहायता प्रदान करते हैं। साथ ही, मुद्रास्फीति का बेहतर मापन व्यापक आर्थिक स्थिरता को समर्थन देता है।
  • आर्थिक वृद्धि के मापन में सुधार: अद्यतन GDP, सकल मूल्य वर्धन (GVA) तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आँकड़े देश के आर्थिक प्रदर्शन का अधिक यथार्थवादी चित्र प्रस्तुत करेंगे।
  • अंतर्राष्ट्रीय विश्वसनीयता: वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने से अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय आकलनों में भारत की स्थिति बेहतर होगी। साथ ही, विश्वसनीय आर्थिक आँकड़े निवेशकों के विश्वास तथा नीतिगत विश्वसनीयता को बढ़ाएँगे।

निष्कर्ष

  • हाल के सांख्यिकीय सुधार भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को अधिक प्रासंगिक, उत्तरदायी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक निर्णायक परिवर्तन का प्रतीक हैं।
  • आँकड़ों की गुणवत्ता में निरंतर सुधार तथा उनके नियमित अद्यतन को सुनिश्चित करने के प्रयास साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण और आर्थिक शासन को सुदृढ़ बनाने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण होंगे।

स्रोत: TH, TH, PIB

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध सन्दर्भ हाल ही में फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को उपहारस्वरूप कई भारतीय सांस्कृतिक वस्तुएँ भेंट कीं, जिनमें कलमकारी महाभारत चित्रकला, पोचमपल्ली रेशमी स्टोल, लाकाडोंग हल्दी तथा ठेकुआ प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भेंट की गई वस्तुओं के बारे में कलमकारी महाभारत चित्रकला: यह...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  सन्दर्भ पिछले बारह वर्षों में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम राष्ट्रीय आत्मविश्वास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक महत्वाकांक्षा का प्रतीक बनकर उभरा है। एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति का उदय वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य लगभग 8 अरब डॉलर है तथा वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी 2–3% है। अगले...
Read More

सन्दर्भ हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर-पूर्व को भारत की “अष्टलक्ष्मी” बताया और कहा कि केंद्र सरकार ने क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए “एक्ट ईस्ट” (Act East) नीति से आगे बढ़कर “एक्ट फास्ट” (Act Fast) दृष्टिकोण अपनाया है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER) उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में आठ राज्य शामिल हैं, अर्थात् अरुणाचल प्रदेश,...
Read More

राखीगढ़ी पाठ्यक्रम: जीएस-1/ इतिहास एवं संस्कृति  सन्दर्भ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी से प्राप्त लगभग 5,000 वर्ष पुराने कंकालों को वैज्ञानिक परीक्षण एवं चेहरे के पुनर्निर्माण (Facial Reconstruction) हेतु भेजा है। राखीगढ़ी वर्तमान राखीगढ़ी हरियाणा में घग्गर-हाकड़ा नदी मैदान में स्थित है तथा घग्गर नदी से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर...
Read More
scroll to top