सन्दर्भ
- हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर-पूर्व को भारत की “अष्टलक्ष्मी” बताया और कहा कि केंद्र सरकार ने क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए “एक्ट ईस्ट” (Act East) नीति से आगे बढ़कर “एक्ट फास्ट” (Act Fast) दृष्टिकोण अपनाया है।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER)
- उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में आठ राज्य शामिल हैं, अर्थात् अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा।
- यह क्षेत्र सांस्कृतिक एवं जातीय दृष्टि से अत्यंत विविधतापूर्ण है, जहाँ 200 से अधिक जातीय समूह निवास करते हैं, जिनकी अपनी विशिष्ट भाषाएँ, बोलियाँ और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचानें हैं।
- यह क्षेत्र देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 7.97% तथा कुल जनसंख्या का 3.78% भाग है।
- इसकी अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ कुल 5,484 किलोमीटर लंबी हैं, जिनमें बांग्लादेश (1,880 किमी), म्यांमार (1,643 किमी), चीन (1,346 किमी), भूटान (516 किमी) तथा नेपाल (99 किमी) के साथ लगी सीमाएँ शामिल हैं।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का महत्त्व
भू-रणनीतिक महत्त्व
- अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ:उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (NER) की सीमाएँ पाँच देशों—चीन, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल—से लगती हैं, जो इसे सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती हैं।
- आसियान (ASEAN) का प्रवेश-द्वार:यह भारत की एक्ट ईस्ट नीति की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए सेतु का कार्य करता है।
- वर्तमान भारत–आसियान व्यापार लगभग 125 अरब डॉलर का है, जिसके 200 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
- सामरिक सैन्य महत्त्व:चीन के निकट होने के कारण यह क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व रखता है।
आर्थिक एवं व्यापारिक क्षमता
- सीमा-पार व्यापार:कालादान बहु-माध्यम पारगमन परियोजना तथा भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाएँ दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापार को बढ़ावा देती हैं।
- अप्रयुक्त बाजार एवं प्राकृतिक संसाधन:विशाल प्राकृतिक संसाधन और अपेक्षाकृत अप्रयुक्त बाजार इसे ऊर्जा, कृषि, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में प्रारंभिक निवेशकों के लिए आदर्श बनाते हैं।
स्वास्थ्य, कल्याण एवं पर्यटन
- यह क्षेत्र स्वच्छ वायु, जैविक खाद्य पदार्थ, शांत प्राकृतिक परिदृश्य तथा समृद्ध जनजातीय संस्कृतियों के लिए प्रसिद्ध है।
- यह वेलनेस पर्यटन, पारिस्थितिकी पर्यटन (इको-टूरिज्म) तथा साहसिक पर्यटन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
- नृत्य, संगीत और त्योहारों सहित इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता सांस्कृतिक कूटनीति तथा सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देती है।
क्षेत्र के समक्ष चुनौतियाँ
कमजोर संपर्क व्यवस्था:
- दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों तथा अविकसित सड़क, रेल और वायु नेटवर्क के कारण संपर्क व्यवस्था चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
सीमित डिजिटल अवसंरचना:
- यद्यपि स्थिति में सुधार हो रहा है, फिर भी इंटरनेट और दूरसंचार संपर्क देश के अन्य भागों की तुलना में अपेक्षाकृत कमजोर है।
उग्रवाद एवं आंतरिक सुरक्षा संबंधी समस्याएँ:
- कुछ क्षेत्रों में उग्रवादी समूहों तथा अलगाववादी आंदोलनों की उपस्थिति बनी हुई है।
- म्यांमार और बांग्लादेश के साथ छिद्रपूर्ण सीमाओं के कारण सीमा-पार घुसपैठ तथा हथियारों की तस्करी की समस्या भी मौजूद है।
- यद्यपि सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, फिर भी समय-समय पर होने वाली अशांति शांति और विकास को प्रभावित करती है।
भौगोलिक एवं पर्यावरणीय बाधाएँ:
- पर्वतीय एवं वनाच्छादित भू-भाग के कारण अवसंरचना और उद्योगों का विकास कठिन तथा महँगा हो जाता है।
जातीय तनाव एवं प्रवासन संबंधी मुद्दे:
- विभिन्न समुदायों के बीच तनाव तथा स्वायत्तता या पृथक राज्यों की माँग क्षेत्र में अनिश्चितता उत्पन्न करती है।
- पड़ोसी देशों से होने वाले अवैध प्रवासन ने कुछ क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय संरचना को प्रभावित किया है, जिससे सामाजिक अशांति उत्पन्न हुई है।
सरकारी पहल:
- नीतिगत समर्थन:

- सम्बद्धता (connectivity) :
- बोगीबील पुल (2018): यह ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित एक संयुक्त सड़क एवं रेल पुल है।
- ढोला–सादिया पुल (2017): यह उत्तरी असम और पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के बीच पहली स्थायी सड़क संपर्क सुविधा प्रदान करता है। यह ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदी लोहित नदी पर निर्मित है।
- नोनेय पुल: मणिपुर में स्थित नोनेय पुल, 111 किलोमीटर लंबी जिरीबाम–इंफाल रेल परियोजना का हिस्सा है। यह अलिंग नदी पर निर्मित है और विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे पियर (स्तंभ) पुल है।
- सेला सुरंग (Sela Tunnel): यह सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र में वर्षभर संपर्क सुविधा सुनिश्चित करती है।
* भौगोलिक संकेतक (GI) टैग
- मार्च 2026 तक उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में 89 भौगोलिक संकेतक (GI) पंजीकृत उत्पाद थे।
- यह क्षेत्र अनेक GI-टैग प्राप्त फलों एवं मसालों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें क्वीन पाइनएप्पल, लाकाडोंग हल्दी, किंग चिली (राजा मिर्च) तथा बड़ी इलायची प्रमुख हैं।
अंतर्देशीय जलमार्ग
- उत्तर-पूर्व में राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 1 से बढ़कर 20 हो गई है।
- ब्रह्मपुत्र और बराक नदी परिवहन प्रणालियों का विकास किया गया है।
ऊर्जा एवं हरित विकास
- दिबांग बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना (2,880 मेगावाट) तथा सुबनसिरी निम्न जलविद्युत परियोजना (2,000 मेगावाट) क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाएँ हैं।
- उत्तर-पूर्व गैस ग्रिड के माध्यम से सभी आठ राज्यों को जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
स्रोत: PIB
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